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त्वचा रोग का इलाज

अवलोकन

व्यक्ति की त्वचा उनके शरीर का सबसे बड़ा अंग होती है जो उनके शरीर को सुरक्षित रखती है l त्वचा हमारे शरीर को शरीर में विटामिन डी को संग्रहित करने से लेकर शरीर के तापमान को समान बनाये रखती है, निर्जलीकरण को रोकती है तथा शरीर की बैक्टीरिया व संक्रमण से रक्षा करने जैसे कई महत्वपूर्ण कार्य करती है l जब किसी भी तरह के होने वाले रोग, विकार अथवा संक्रमण से त्वचा प्रभावित होती है तो उसे चर्म रोग कहा जाता है l चर्म रोग से व्यक्ति की त्वचा की संरचना में कई तरह के बदलाव आते है l यह मामूली चर्म रोग से लेकर गंभीर बीमारी के रूप में उत्पन्न हो सकते हैं जो किसी व्यक्ति के जीवन के लिए खतरनाक भी साबित हो सकते है l

यदि किसी व्यक्ति को चर्म रोग होता है तो यह उनकी त्वचा पर कुछ समय से लेकर एक लंबी अवधि तक के लिए हो सकता है l कई चर्म रोग व्यक्ति को दर्द व चुभन देते है पर कुछ रोग दर्द रहित भी हो सकते हैं l व्यक्ति को होने वाले चर्म रोगों के कारणों की एक विस्तृत श्रृंखला होती है l चर्म रोग त्वचा की आंतरिक व बाह्य दोनों परतों को प्रभावित करते हैं l त्वचा की असमानताएं, चयापचय घातक ग्रंथियों संबंधी बीमारियों का संकेत हो सकती है साथ ही चर्म रोगों में होने वाली लगातार वृद्धि से शरीर के दूसरे अंग भी बुरी तरह से प्रभावित होने लगते हैं l

अनुसंधान

जैन के गोमूत्र चिकित्सा क्लिनिक का उद्देश्य प्राचीन आयुर्वेदिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक के साथ एकीकृत करके एक सुखी और स्वस्थ जीवन बनाना है। हमारी चिकित्सा का अर्थ है आयुर्वेद सहित गोमूत्र व्यक्ति के तीन दोषों पर काम करता है- वात, पित्त और कफ। ये त्रि-ऊर्जा हमारे स्वास्थ्य को बनाए रखती हैं, इन दोषों में कोई भी असंतुलन, मानव स्वास्थ्य और बीमारी के लिए जिम्मेदार है। हमें यह कहते हुए खुशी हो रही है कि हमारे उपचार के तहत हमने इतने सारे सकारात्मक परिणाम देखे हैं। हमारे इलाज के बाद हजारों लोगों को कई बीमारियों से छुटकारा मिला।

हमारे मरीज न केवल अपनी बीमारी को खत्म करते हैं बल्कि हमेशा के लिए एक रोग मुक्त स्वस्थ जीवन जीते हैं। यही कारण है कि लोग हमारी चिकित्सा की ओर ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। आयुर्वेदिक उपचारों में हमारे वर्षों के शोध ने हमें अपनी कार्यप्रणाली को आगे बढ़ाने में मदद की है। हम पूरी दुनिया में एक स्वस्थ और खुशहाल समाज का निर्माण करने के लिए अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य रखते हैं।

गोमूत्र चिकित्सा द्वारा प्रभावी उपचार

कुछ जड़ी-बूटियां शरीर के दोषों (वात, पित्त और कफ) को फिर से जीवंत करने का कार्य करती हैं, जो कि गाय के मूत्र चिकित्सीय दृष्टिकोण के अनुसार, यदि वे अनुपातहीन हैं, तो उसे ठीक किया जा सकता है। उनके इलाज के लिए कुछ आयुर्वेदिक दवाओं में कई सहायक तत्व हैं। यह शरीर के चयापचय को बढ़ाता है।

जीवन की गुणवत्ता

गोमूत्र के उपचार से उपयुक्त स्वास्थ्य मिलता है और एक क्रम में शरीर के दोषों में संतुलन बनाए रखता है। इन दिनों हमारे उपचार के परिणामस्वरूप लोग अपने स्वास्थ्य को लगातार सुधार रहे हैं। यह उनके रोजमर्रा के जीवन-गुणवत्ता में सुधार करता है। गोमूत्र के साथ-साथ आयुर्वेदिक दवा का उपचार विभिन्न उपचारों के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए पूरक थेरेपी के रूप में कार्य कर सकते हैं जो भारी खुराक, बौद्धिक तनाव, विकिरण और कीमोथेरेपी के उपयोग से आते हैं। हम लोगों का मार्गदर्शन करते हैं, एक सुखी और तनाव मुक्त जीवन जीने का एक तरीका सिखाते है, यदि उन्हें कोई असाध्य बीमारी है तो। हमारे उपाय करने के बाद हजारों मनुष्य एक संतुलित जीवन जीते हैं और यह हमारे लिए एक बड़ी उपलब्धि है कि हम उन्हें एक जीवन शैली दें जो वे अपने सपने में देखते हैं।

जटिलता निवारण

गोमूत्र, जिसे अक्सर त्वचा रोगों के लिए अच्छा माना जाता है, का आयुर्वेद में विशेष स्थान है। वर्षो से किये गये हमारे काम से साबित होता है कि हमारी आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों के साथ त्वचा रोगों के कुछ लक्षण लगभग गायब हो जाते हैं। हमारे रोगियों को दर्द, शरीर में हार्मोनल और रासायनिक परिवर्तनों में नियंत्रण और संतुलन के साथ बड़ी राहत महसूस होती है, एलोपैथिक दवाओं के दुष्प्रभाव को धीमा करता है, रोगी की प्रतिरक्षा प्रणाली में सुधार करता है जो अन्य त्वचा रोग जटिलताओं के लिए अनुकूल है।

जीवन प्रत्याशा

अगर हम जीवन प्रत्याशा के बारे में चिंतित हैं, तो गोमूत्र उपचार अपने आप में बहुत बड़ा वादा है। कोई भी विकार, चाहे वह मामूली हो या गंभीर, किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और जीवन में कई वर्षों तक रहता है। जीवन प्रत्याशा संक्षिप्त है जब तक कि स्थिति की पहचान नहीं की जाती है, लेकिन गोमूत्र उपचार के साथ नहीं। न केवल हमारी प्राचीन चिकित्सा बीमारी को कम करती है, बल्कि यह व्यक्ति की दीर्घायु को उसके शरीर में कोई भी दूषित तत्व नहीं छोड़ती है और यह हमारा अंतिम उद्देश्य है।

दवा निर्भरता को कम करना

"सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद् दुःख भाग्भवेत्", इसका अर्थ है सभी को हर्षित होने दें, सभी को बीमारी से मुक्त होने दें, सभी को वास्तविकता देखने दें, कोई भी संघर्ष ना करे। इस आदर्श वाक्य के पालन के माध्यम से हमें अपने समाज को इसी तरह बनाना है। हमारा उपचार विश्वसनीय उपाय देने, जीवन प्रत्याशा में सुधार और प्रभावित लोगों की दवा निर्भरता कम करने के माध्यम से इसे पूरा करता है। इस समकालीन समाज में, हमारे उपाय में किसी भी मौजूदा औषधीय समाधानों की तुलना में अधिक लाभ और कमियां बहुत कम हैं।
 

पुनरावृत्ति की संभावना को कम करना

व्यापक चिकित्सा अभ्यास के विपरीत, हम रोग और तत्वों के मूल उद्देश्य पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो इस पद्धति का उपयोग करके केवल बीमारी के प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय बीमारी की पुनरावृत्ति की संभावनाओं में सुधार कर सकते हैं, हम कुशलता से पुनरावृत्ति दर को कम रहे हैं और मानव जीवन के लिए एक नया रास्ता दे रहे हैं, जो कि उन्हें भावनात्मक और शारीरिक रूप से उनके जीवन को बेहतर तरीके से जीने का एक तरीका बताते है।

त्वचा रोग के कारण 

व्यक्ति को चर्म रोग निम्नलिखित कारणों से हो सकते हैं - 

  • कमज़ोर प्रतिरक्षा प्रणाली 

यदि व्यक्ति की त्वचा पर खुरचन, जलन, चोट आदि लग जाती है तो उनकी स्वस्थ प्रतिरक्षा कोशिकाएं प्रभावित त्वचा पर नयी त्वचा को पुनर्जीवित करने हेतु पोषक तत्वों से समृद्ध रक्त को भेजकर घाव को भरने का कार्य करती है l यह प्रक्रिया व्यक्ति की मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली पर निर्भर करती है l परंतु यदि किसी व्यक्ति की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है तो वह त्वचा की मदद कर पाने में अक्षम होती है जिससे उन्हें चर्म रोग होते हैं l

  • एलर्जी 

कई बाहरी तत्व एलर्जन्स के रूप में हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित करते हैं l जब हमारी त्वचा इन प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित करने वाले एलर्जन्स के सम्पर्क में आती है तो प्रतिक्रिया के परिणामस्वरूप प्रतिरक्षा प्रणाली इन पदार्थों के प्रति संवेदनशील होने लग जाती है तथा त्वचा में कई असामान्य से बदलाव आने लगते हैं जिससे त्वचा पर जलन, खुजली, दाने, सूजन, पित्ती आदि एलर्जी होने लगती है जो कि चर्म रोग से संबंधित है l

  • संक्रमण 

संक्रमण, जो व्यक्ति की त्वचा को प्रभावित करते हैं चर्म रोग का कारण बनते हैं l यह संक्रमण विभिन्न प्रकार के कीटाणुओं के कारण होते हैं बैक्टीरिया, सेल्युलाइटिस, इम्पेटिगो तथा स्टैफ नामक कीटाणु त्वचा पर होने वाले रोगों के लिए जिम्मेदार होते हैं l

  • आनुवांशिकता

किसी व्यक्ति को होने वाले चर्म रोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से उनके परिवार की आनुवंशिकता पर निर्भर करते है l त्वचा के सभी घटकों का गठन प्रायः अनुवांशिक नियंत्रण में होता है l सोरायसिस व एक्जिमा ऐसे रोग वंशानुगत रोग का उदाहरण है जो परिवार के अन्य सदस्यों में भी इन विकारों को सक्रिय करने में भागीदार होते है l 

  • कुछ रोग 

कुछ रोग व्यक्ति की त्वचा को प्रभावित करते हैं जिससे उन्हें चर्म रोग जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है l थायराइड, ऑटोइम्यून डिजीज, गुर्दे रोग आदि से ग्रसित व्यक्ति को चर्म रोग के होने का खतरा भी बना रहता है l

  • वायरस 

कुछ वायरस त्वचा पर संक्रमण का कारण बनते हैं जिससे व्यक्ति चर्म रोग से पीड़ित रहता है l पॉक्स वायरस, ह्यूमन पैपिलोमा वायरस तथा हर्पीस वायरस आदि कुछ वायरस त्वचा को संक्रमित करते है तथा चर्म रोग का कारण बनते हैं l

  • रसायनों का सम्पर्क 

वे व्यक्ति जो लगातार अम्ल तथा क्षार जैसे रासायनिक पदार्थों के संपर्क में रहते हैं उनकी त्वचा पर इन पदार्थों का बहुत ही बुरा प्रभाव पड़ता है l ऐसी स्थिति में व्यक्ति को कई चर्म रोग से पीड़ित होना पड़ सकता है l 

  • भौतिक कारण 

गर्मी, ठंड, धूप, रेडिएशन, एक्स-रे किरणें, कृत्रिम पराबैंगनी किरणें आदि सभी भौतिक कारण चर्म रोग के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं l उच्च तापमान, आर्द्रता, अधिक पसीना फंगल संक्रमण का कारण बनते है l कम तापमान व अत्यधिक सर्दी की वजह से इरिथेमा, अल्सरेशन जैसी गंभीर ठंड की चोट लग सकती है जो व्यक्ति की त्वचा पर असर डालती है l


त्वचा रोग से निवारण 

व्यक्ति को त्वचा रोग से बचने के लिए निम्नलिखित उपाय करने चाहिए - 

  • व्यक्ति को अपने शरीर में पानी की मात्रा को बढ़ाना चाहिए l
  • समृद्ध, पौष्टिकता से भरपूर संतुलित आहार का सेवन व्यक्ति को करना चाहिए l
  • व्यक्ति को रसायनों के संपर्क में आने से बचना चाहिए तथा त्वचा को अच्छे से ढक कर रखना चाहिए l
  • यदि व्यक्ति को त्वचा संबंधी एलर्जी है तो उसे एलर्जन्स के संपर्क में आने से बचना चाहिए l
  • व्यक्ति को अधिक तनाव नहीं लेना चाहिए l
  • संक्रामक त्वचा समस्याओं का व्यक्ति को समय पर वैक्सीन आदि करवाना चाहिए l
  • व्यक्ति को अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने हेतु उचित प्रयास करने चाहिए l
  • व्यक्ति को अपनी त्वचा की स्वच्छता का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए l
  • बदलती जलवायु में व्यक्ति को अपनी त्वचा की उचित देखभाल करनी चाहिए तथा त्वचा को शुष्क होने से बचाना चाहिए l

त्वचा रोग के लक्षण 

यदि व्यक्ति किसी प्रकार के चर्म रोग से पीड़ित हैं तो त्वचा पर कई असामान्य लक्षण उभर कर आते हैं l ये लक्षण है -

  • त्वचा पर दाने अथवा फुंसी होना 
  • शुष्क त्वचा या त्वचा का फटना 
  • त्वचा पर खुजली तथा चुभन होना 
  • त्वचा पर तरल से भरे और सूखे छाले होना 
  • पपड़ीदार और खुरदरी त्वचा की समस्या 
  • त्वचा पर उभरे हुए धक्के जो प्रायः लाल और सफेद रंग के हो सकते हैं l 
  • लाल चकत्ते पड़ जाना 
  • प्रभावित त्वचा पर सूजन तथा दर्द होना 
  • त्वचा का रंग बिगड़ जाना 
  • त्वचा पर जख्म और घाव होना 


त्वचा रोग के प्रकार 

किसी व्यक्ति को निम्नलिखित चर्म रोग का शिकार होना पड़ सकता है - 

  • एक्जिमा
  • सोरायसिस
  • मुहांसे
  • पित्ती 
  • त्वचाशोथ 
  • त्वचा की एलर्जी 
  • रोसैशिया 
  • मेलेनोमा
  • चिकन पॉक्स
  • त्वचा का कैंसर 
  • स्केबीज
  • इकथियोसिस 
  • विटिलिगो
  • हीव्स
  • सेबोरेहिक डर्मेटाइटिस
  • मुँह के छाले
  • केराटोसिस पिलारिस 
  • ल्यूपस

त्वचा रोग की जटिलताएं 

चर्म रोग से ग्रसित व्यक्ति को निम्नलिखित जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है -

  • व्यक्ति के आत्मविश्वास में कमी आना l
  • अवसाद और तनाव होना
  • नींद की कमी
  • असहजता, चिड़चिड़ापन और बेचैनी
  • असहनीय खुजली, दर्द और चुभन
  • दवाइयों का शरीर पर दुष्प्रभाव
  • अस्थमा, गठिया रोग, आँखों से संबंधित रोग आदि का खतरा
  • स्थिति का दीर्घकालीन होना
  • असामयिक परेशानी और तकलीफ होना

मान्यताएं

क्या कह रहे हैं मरीज

"विभिन्न अध्ययन किए गए हैं जहां जैन गाय मूत्र चिकित्सा ने रोगियों में महत्वपूर्ण सुधार दिखाया है।"