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एक्जिमा का इलाज

अवलोकन

एक्जिमा एक बैक्टीरियल संक्रमण के रूप में त्वचा पर होने वाला एक विकार है l ये प्रतिरक्षा प्रणाली से संबंधित एक रोग जिसे त्वचा की एलर्जी के वर्ग में रखा जाता है l जब किसी व्यक्ति की त्वचा पर लाल चकत्ते हो जाते हैं, त्वचा शुष्क व खुरदरी रहती है तथा त्वचा पर खुजली व जलन होने लगती है तो ऐसी स्थिति को एक्जिमा कहते हैं l एक्जिमा में व्यक्ति द्वारा प्रभावित त्वचा पर खुजली करने से पानी जैसा तरल बाहर आता है l यह बीमारी किसी को भी हो सकती है परंतु बच्चों में ज्यादातर देखने को मिलती है l प्रायः व्यक्ति को एक्जिमा लंबे समय तक परेशान कर सकता है जिसके कारण कभी कभी यह रोग त्वचा के लिए घातक भी हो जाता है l यह रोग उन लोगों को ज्यादा प्रभावित करता है जिन्हें अस्थमा या किसी तरह के खाद्य पदार्थ से एलर्जी हो l शरीर की स्वस्थ त्वचा नमी बनाए रखती है तथा बैक्टीरिया व एलर्जन्स से शरीर की रक्षा करती है l एक्जिमा की बीमारी की वजह से व्यक्ति की त्वचा मृत होकर नमी खोने लगती है तथा संक्रमण से बचाव करने में अक्षम रहती हैं l

अनुसंधान

जैन के गोमूत्र चिकित्सा क्लिनिक का उद्देश्य प्राचीन आयुर्वेदिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक के साथ एकीकृत करके एक सुखी और स्वस्थ जीवन बनाना है। हमारी चिकित्सा का अर्थ है आयुर्वेद सहित गोमूत्र व्यक्ति के तीन दोषों पर काम करता है- वात, पित्त और कफ। ये त्रि-ऊर्जा हमारे स्वास्थ्य को बनाए रखती हैं, इन दोषों में कोई भी असंतुलन, मानव स्वास्थ्य और बीमारी के लिए जिम्मेदार है। हमें यह कहते हुए खुशी हो रही है कि हमारे उपचार के तहत हमने इतने सारे सकारात्मक परिणाम देखे हैं। हमारे इलाज के बाद हजारों लोगों को कई बीमारियों से छुटकारा मिला।

हमारे मरीज न केवल अपनी बीमारी को खत्म करते हैं बल्कि हमेशा के लिए एक रोग मुक्त स्वस्थ जीवन जीते हैं। यही कारण है कि लोग हमारी चिकित्सा की ओर ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। आयुर्वेदिक उपचारों में हमारे वर्षों के शोध ने हमें अपनी कार्यप्रणाली को आगे बढ़ाने में मदद की है। हम पूरी दुनिया में एक स्वस्थ और खुशहाल समाज का निर्माण करने के लिए अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य रखते हैं।

गोमूत्र चिकित्सा द्वारा प्रभावी उपचार

गोमूत्र चिकित्सीय दृष्टिकोण के अनुसार कुछ जड़ी-बूटियां शारीरिक दोषों (वात, पित्त और कफ) को फिर से जीवंत करने का काम करती हैं जो कि ज्यादातर एक्जिमा का कारण होती हैं अगर वे असम्बद्ध हैं। कुछ आयुर्वेदिक दवाओं में इससे निपटने के लिए बहुत से सहायक तत्व शामिल होते हैं। यह काया के चयापचय में सुधार करता है।

डर्मोसोल + लिक्विड ओरल

डेर्मोकर + कैप्सूल

पुरोडर्म+ मलहम

प्रमुख जड़ी-बूटियाँ जो उपचार को अधिक प्रभावी बनाती हैं

नीम

नीम में तीन एंटी इन्फ्लेमेटरी यौगिक, निंबिडिन, निंबिन और क्वेरसेटिन शामिल हैं, जो त्वचा को शांत कर सकते हैं और एक्जिमा के कारण लालिमा और सूजन को कम कर सकते हैं।

बावची

यह एंटीबैक्टीरियल, एंटीवायरल और एंटीफंगल गुणों के साथ एक्जिमा के इलाज के लिए एक शक्तिशाली जड़ी बूटी है। बावची त्वचा की विभिन्न समस्याओं का इलाज करने में मदद करता है जैसे कि एक्जिमा जैसी त्वचा के लिए इसके रक्ताशोदक (रक्त शोधक) गुण ।

खदिर

इसे एक प्राकृतिक रक्त शोधक कहा जाता है और यह सभी प्रकार की गंभीर त्वचा स्थितियों के लिए मुंहासे और दाने को साफ करने में मदद करता है। खदिर का एक महत्वपूर्ण सूत्रण खादी अरिशम है जो प्रभावी रूप से त्वचा की समस्याओं का इलाज करता है।

करंज

करंज मुख्य रूप से त्वचा पर फोड़े और एक्जिमा के लिए इसके रोगाणुरोधी रोपन (हीलिंग) और एंटीसेप्टिक गुणों के कारण उपयोगी माना जाता है।

चक्रमर्दा

चक्रमर्दा एक जड़ी बूटी है जो एक्जिमा और अन्य त्वचा रोगों के इलाज के लिए उपयोगी है। इसके ग्लाइकोसाइड-समृद्ध पत्ते, जिसमें एलो-एमोडिन भी शामिल है जो त्वचा रोगों के लिए सहायक हो सकता है। चक्रमर्दा एक पोषक और टोक्सिन रिमूवर भी है।

चन्दन

चंदन पाउडर एक्जिमा के लिए एक सामयिक उपाय है। एंटीमाइक्रोबियल फ़ंक्शन के साथ-साथ, यह एंटी इन्फ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट प्रभाव के लिए जाना जाता है जो प्रभावी रूप से एक्जिमा का इलाज करता है।

शुद्ध गंधक

यह जड़ी बूटी रसायन जीवाणुरोधी, एंटीवायरल और रोगाणुरोधी उपयोग के लिए एक बेहतरीन आयुर्वेदिक दवा है। इसमें अमीनो एसिड होता है जो एंटीबॉडी, कोशिकाओं, प्रोटीन और ऊतकों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह रक्त की शुद्धि और एक्जिमा जैसी त्वचा की समस्याओं की रोकथाम में सहायक है।

तुलसी

एक्जिमा पर तुलसी का उपयोग बहुत प्रभावी है। इसके बीजों के त्वचा लाभ एक्जिमा के उपचार में मदद कर सकते हैं। यह शरीर में गर्मी को कम करने में सहायता करता है। यह कोलेजन को स्रावित करने में मदद करता है, जो प्राकृतिक टूट- फूट से कमजोर होने पर, ताजा त्वचा और इसकी कोशिकाओं को आकार देने के लिए प्रयोग किया जाता है।

कैशोर गुग्गुल

किशोर गुग्गुल एक रक्त शोधक है जिसमें एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी प्रभाव होते हैं। यह किसी भी तरीके के एक्जिमा के उपचार में भी सहायक है। किशोर गुग्गल के उपयोग से दूसरों की तुलना में पित्त बढ़ने की संभावना कम रहती है। अक्सर यह सूजन, त्वचा की जलन और दर्द को कम करने में प्रभावी होता है।

अनंतमूल

इसका उपयोग बाह्य और आंतरिक रूप से त्वचा के सभी प्रकार के मुद्दों जैसे एक्जिमा और संक्रामक त्वचा रोगों के लिए किया जा सकता है। अनंतमूल अपनी रोगाणुरोधी गतिविधि के कारण बैक्टीरिया के संक्रमण से छुटकारा पाने में मदद करता है। अनंतमूल क्वाथ (काढ़े) के साथ-साथ इसके पाउडर में रक्त शुद्ध करने वाली संपत्ति होती है और इसका उपयोग विभिन्न त्वचा स्थितियों के इलाज के लिए किया जा सकता है।

मीठा इन्द्रजौ

इस जड़ी बूटी को एक कृमिनाशक एनोडेन के रूप में प्रयोग किया जाता है जो विशेष रूप से त्वचा की स्थिति जैसे एक्जिमा (परजीवी कृमियों को मारने के लिए) के लिए प्रभावी है। इसमें त्वचा की सतह से जलन और यहां तक कि त्वचा की टोन को हटाने के लिए एक कसैले पदार्थ का उपयोग किया जाता है, जो एक तरल-आधारित (आमतौर पर पानी) सूत्र है।

कपूर

त्वचा की स्थिति जैसे एक्जिमा और इससे संबंधित लक्षण जैसे खुजली और सूजन के लिए कपूर एक मारक हो सकता है। कपूर का एंटीसेप्टिक और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण एक्जिमा के फैलने से बचाता है और त्वचा की सूजन को कोमलता से दूर करता है।

नारियल तेल

नारियल तेल एक्जिमा के लिए एक सुरक्षित और प्रभावी प्राकृतिक उपचार है। इसमें एंटी माइक्रोबियल गुण होते हैं, जो त्वचा पर बैक्टीरिया को मारने में इसे प्रभावी बनाते हैं। यह अत्यधिक मॉइस्चराइजिंग भी है और सूजन और बेचैनी को कम कर सकता है।

अजवाइन के फूल

अजवाइन के बीज और फूल पोषण, पोषक तत्वों, एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन में उच्च हैं। अजवाइन बीज में एक घटक जिसे थायमॉल कहा जाता है, एक शक्तिशाली कवकनाशी और कीटाणुनाशक के रूप में कार्य करता है जो एक्जिमा के उपचार में सहायक हो सकता है।

गोमय रस

गोमूत्र, जिसमें रोगाणुरोधी और एंटीऑक्सीडेंट प्रभाव होते हैं, का उपयोग एक्जिमा से निपटने के लिए किया जाता है। मूत्र घटकों के मुक्त कणों वाले व्यवहार एंटीऑक्सीडेंट कार्रवाई के कारण होता है और ये घटक त्वचा की समस्याओं जैसे एक्जिमा को रोक सकते हैं।

गोजला

हम अपने गोमूत्र चिकित्सा में गोजला का उपयोग करते हैं, मूल रूप से इसका मतलब है कि हमारी दवा में मुख्य घटक गोमूत्र अर्क है। यह अर्क गाय की देसी नस्लों के मूत्र से बना है। गोजला के अपने फायदे हैं क्योंकि यह किसी भी प्रकार के संदूषण की संभावना से परे है। इसकी गुणवत्ता उच्च है एवं प्रचुर मात्रा में है। जब गोजला आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों के साथ मिलाया जाता है तो यह किसी भी बीमारी के इलाज के लिए अधिक प्रभावी हो जाता है और विशेष बीमारियों में अनुकूल परिणाम देता है। इस अर्क का अत्यधिक परीक्षण किया गया है और इसलिए यह अधिक विश्वसनीय और लाभदायक भी है।

जीवन की गुणवत्ता

गोमूत्र के उपचार से स्वास्थ्य अच्छा रहता है और शरीर के दोष संतुलित होते है। आज, व्यक्ति हमारी देखभाल के परिणामस्वरूप अपने स्वास्थ्य में तेजी से सुधार कर रहे हैं। यह उनके रोजमर्रा के जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाता है। गोमूत्र के साथ-साथ आयुर्वेदिक दवाएं भारी खुराक, मानसिक तनाव, विकिरण और कीमोथेरेपी के उपयोग से विभिन्न दुष्प्रभावों को कम करने के लिए एक पूरक चिकित्सा के रूप में काम कर सकती हैं। हम लोगों को बीमारी के साथ, यदि कोई हो तो, शांतिपूर्ण और तनाव मुक्त जीवन जीने के लिए निर्देशित करते हैं। हमारे उपचार को लेने के बाद से, हजारों लोग एक स्वस्थ जीवन जीते हैं और यह हमारे लिए एक बड़ी सफलता है कि हम उन्हें एक ऐसा जीवन दें जो वे सपने में देखते हैं।

जटिलता निवारण

आयुर्वेद में गोमूत्र का एक अद्वितीय महत्व है जो एक्जिमा के लिए उपयोगी बताया गया है। हमारे वर्षों के कठिन परिश्रम से पता चलता है कि एक्जिमा की कई जटिलताएं हमारी हर्बल दवाओं के उपयोग से गायब हो जाती हैं। पीड़ित हमें बताते हैं कि वे शरीर में दर्द, हार्मोनल और रासायनिक परिवर्तनों में नियंत्रण और संतुलन देखते हैं, चकत्ते और सफेद पैच, छाले और संक्रमण त्वचा के अन्य क्षेत्र में या आसपास फैलने की गति को धीमा होता हुआ देखते हैं, रोगी की प्रतिरक्षा प्रणाली में सुधार होता है जो अन्य एक्जिमा जटिलताओं के लिए अनुकूल रूप से काम करता है।

जीवन प्रत्याशा

अगर हम जीवन प्रत्याशा के बारे में बात कर रहे हैं, तो गोमूत्र उपाय अपने आप में बहुत बड़ी आशा है। कोई भी विकार चाहे छोटे हो या गंभीर चरण में, मानव शरीर पर बुरे प्रभाव के साथ आते है और जीवनभर के लिए मौजूद रहते है। एक बार जब विकार को पहचान लिया जाता है, तो जीवन प्रत्याशा छोटी होने लगती है, लेकिन गोमूत्र चिकित्सा के साथ नहीं। हमारा ऐतिहासिक उपाय ना केवल पूरी तरह से विकार का इलाज करता है बल्कि उसके शरीर में किसी भी विषाक्त पदार्थों को छोड़ने के बिना उस व्यक्ति के जीवन-काल में वृद्धि करता है और यही हमारा अंतिम उद्देश्य है।

दवा निर्भरता को कम करना

"सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद् दुःख भाग्भवेत्", जिसका अर्थ है सबको सुखी बनाना, बीमारी से छुटकारा दिलाना, सबको सत्य देखने देना, किसी को भी पीड़ा का अनुभव न होने देना। इस वाक्य के बाद, हम चाहते हैं कि हमारा समाज ऐसा ही हो। हमारी चिकित्सा विश्वसनीय उपचार प्रदान करके, जीवन प्रत्याशा में सुधार और प्रभावित आबादी में दवा की निर्भरता को कम करके इस लक्ष्य को प्राप्त करती है। आज की दुनिया में, हमारी चिकित्सा में अन्य उपलब्ध चिकित्सा विकल्पों की तुलना में अधिक फायदे और शून्य नुकसान हैं।

पुनरावृत्ति की संभावना को कम करना

चिकित्सा पद्धतियों की एक विस्तृत श्रृंखला की तुलना में, हम रोग के मूल कारण और उन कारकों पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो बीमारी के पुनरावृत्ति की संभावना को बढ़ा सकते हैं, न कि केवल रोग के प्रबंधन पर। इस पद्धति का उपयोग करके, हमने पुनरावृत्ति दर को सफलतापूर्वक कम कर दिया है और लोगों के जीवन के लिए एक नई दिशा बताई है ताकि लोग भावनात्मक और शारीरिक रूप से बेहतर जीवन जी सकें।

एक्जिमा के कारण 

वह कारण जो एक्जिमा रोग की स्थिति के लिए ज़िम्मेदार माने जा सकते हैं, निम्नलिखित हैं :

  • अनुवांशिक 

एक्जिमा एक अनुवांशिक बीमारी के रूप में परिवार के एक सदस्य से दूसरे सदस्य में त्वचा की संवेदनशीलता के आधार स्वरूप फैलने वाला रोग है जो जो कि जीन में हुई भिन्नता के कारण त्वचा की क्षमता को प्रभावित करते हैं l प्रायः परिवार की कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता के कारण भी यह रोग व्यक्ति की त्वचा को प्रभावित कर सकता है l

  • खाद्य पदार्थ 

कई खाद्य पदार्थों में कुछ तत्व ऐसे होते हैं जिनका सेवन करने से व्यक्ति को त्वचा संबंधी एलर्जी होने लगती है जो एक्जिमा की बीमारी का कारण बन सकती है l ये खाद्य पदार्थ दूध व दूध से बने पदार्थ, सूखे मेवे, सोया तथा अंडा आदि एक्जिमा को प्रभावित करने वाले एलर्जन्स हो सकते हैं l

  • उत्तेजित पदार्थ

ऐसे पदार्थ व वस्तु जो व्यक्ति की त्वचा के लिए एलर्जन्स होते हैं एक्जिमा रोग को उत्तेजित करने का काम करते हैं l ये पदार्थ ऊन, सिंथेटिक कपड़े, चेहरे पर उपयोग किए जाने वाले क्लींजर, सर्फ, साबुन, शैंपू तथा कीटाणुशोधक आदि एलर्जन्स हो सकते हैं जिसके संपर्क में आने से व्यक्ति को त्वचा संबंधी एलर्जी होती है जिससे एक्जिमा प्रभावित हो सकता है l

  • पर्यावरणीय घटक 

ग्रीष्म ऋतु जिसमें अत्यधिक गर्मी की वजह से व्यक्ति को बहुत पसीना आता है तथा सर्दी का मौसम जिसमें तापमान में गिरावट त्वचा को शुष्क बनाती है l वातावरण में इस तरह के बदलाव के साथ साथ वायु प्रदूषण, धूल मिट्टी, सूर्य की तेज किरणें आदि व्यक्ति की त्वचा को प्रभावित करते हैं जिससे एक्जिमा होने का भय रहता है l

  • सूक्ष्म जीव

स्टेफिलोकोकस ऑरियस, वायरस, बैक्टीरिया तथा कुछ फंगस जैसे सूक्ष्म जीवो से त्वचा पर होने संक्रमण एक्जिमा की बीमारी के जोखिम कारक बन सकते हैं l
 

एक्जिमा से बचाव

दैनिक आदतों में कुछ अच्छी आदतों को शामिल कर हम एक्जिमा को सामान्य से गंभीर रूप लेने से रोकने का प्रयास कर सकते हैं l इसके लिए हमे निम्नलिखित महत्वपूर्ण उपाय करने चाहिए - 

  • हमें अपनी त्वचा की अच्छे से देखभाल करनी चाहिए खासकर उन स्थितियों में जब हमारी त्वचा अति संवेदनशील हो l
  • त्वचा की नमी बरकरार रखने के लिए हमें उचित लोशन, तेल आदि लगाना चाहिए जिससे त्वचा शुष्क होने से बची रहे l
  • नहाते समय पानी में थोड़ी मात्रा में ब्लीच मिलाना जिससे त्वचा पर लगे बैक्टीरिया को नष्ट किया जा सकता है l
  • नियमित व्यायाम, उचित संतुलित आहार व पर्याप्त मात्रा में पानी पीना आदि से त्वचा को स्वस्थ बनाया जा सकता है l
  • जिन खाद्य पदार्थों से व्यक्ति को एलर्जी है उन पदार्थों का उन्हें कभी सेवन नहीं करना चाहिए l
  • व्यक्ति को त्वचा तथा एक्जिमा को उत्तेजित करने वाले पदार्थों का उपयोग करने से बचना चाहिए l
  • मौसमी परिवर्तन के फलस्वरुप त्वचा का खास ध्यान रखना l
  • धूप में ज्यादा जाने से बचना तथा खुली त्वचा को धूल मिट्टी, प्रदूषण, रसायन तथा सूर्य की किरणों के संपर्क में आने से बचाए रखने हेतु अच्छे से ढक कर रखना चाहिए l
  • व्यक्ति को त्वचा पर हुए असामान्य से बदलाव, खुजली तथा जलन आदि पर बिना चिकित्सीय सलाह के ना तो कोई दवा, क्रीम अथवा लोशन लगाना चाहिए ना ही एलर्जी की सामान्य दवा का सेवन करना चाहिए l

एक्जिमा के लक्षण 

एक्जिमा के लक्षण कुछ इस प्रकार के होते है - 

  • व्यक्ति की एक्जिमा से प्रभावित त्वचा पर लाल चकत्ते पड़ने लग जाते हैं। 
  • व्यक्ति को त्वचा पर तेज़ खुजली होने लगती है l
  • व्यक्ति की त्वचा की सारी नमी चली जाती है तथा त्वचा शुष्क हो जाती है l  
  • पीड़ित व्यक्ति को त्वचा पर जलन, सूजन तथा चुभन होने लगती है। 
  • शुष्क त्वचा पर सफेद परत व पपड़ियाँ बनने लग जाती है।
  • एक्जिमा प्रभावित त्वचा को कुरेदने से पानी जैसा तरल पदार्थ बाहर निकलता है l  

 

एक्जिमा के प्रकार

एक्जिमा के प्रकारों में शामिल हैं

  • सेबोरेहिक डर्मेटाइटिस

एक्जिमा का यह प्रकार शरीर के उन अंगों की त्वचा को प्रभावित करती है जो तैलीय होती है l सेबोरेहिक डर्मेटाइटिस की स्थिति में त्वचा पर एक सफेद मोटी परत सी बनने लगती है l यह रोग हमारे सिर की स्कैल्प को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है जिसके कारण स्कैल्प पर सफेद परत बनने लगती है जिसे हम रूसी अथवा खोरे कहते हैं l इसके अलावा यह रोग चेहरे, नाक को दोनों किनारों, कान को प्रभावित करता है जहां लाल पैचेज तथा पपड़ी बनने लगती है l

  • स्टैसिस डर्मेटाइटिस

स्टैसिस डर्मेटाइटिस त्वचा की वह स्थिति होती जो निचले पैरों को प्रभावित करती है जिससे पैर की त्वचा पर सूजन, खुजली और अल्सर आदि के लक्षण देखने को मिलते हैं l स्टैसिस डर्मेटाइटिस में वैरिकाज़ नसों में परिसंचरण मुद्दों के कारण तरल पदार्थ का त्वचा से बाहर स्त्राव होने लगता है l जिससे प्रभावित त्वचा लाल हो जाती है तथा पीड़ित को वहां दर्द होने लगता है l

  • एटोपिक डर्मेटाइटिस

एक्जिमा का यह प्रकार सबसे आम होता है जो ज्यादातर छोटे बच्चों को प्रभावित करता है l इस प्रकार के रोग में त्वचा पर लाल चकत्ते हो जाते हैं l ये चकत्ते अधिकतर कोहनी तथा घुटनों की त्वचा पर होते हैं जिन पर बहुत अधिक खुजली होती है l

  • कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस

जब त्वचा किसी एलर्जन के संपर्क में आती हैं तो उससे होने वाली प्रतिक्रिया कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस जैसे रोग से संबंधित होती है जिससे त्वचा लाल होने लगती है तथा त्वचा पर खुजली, सूजन, दर्द व जलन आदि होने लगती है l कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस दो प्रकार से त्वचा पर प्रतिक्रिया करते हैं - 

  • एलर्जी कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस : किसी धातु जैसे निकेल व लेटेक्स आदि के सम्पर्क में आने से त्वचा पर होने वाली एलर्जी इस वर्ग में आती है l
  • उत्तेजक कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस : इस प्रकार के रोग में कुछ रसायनों के संपर्क में आने से त्वचा में उनके प्रति उत्तेजना होने लगती है तथा त्वचा में परिवर्तन होने लगते हैं l
  • न्युमुलर एक्जिमा

न्युमुलर एक्जिमा में त्वचा पर गोल धब्बे बनने लगते हैं जिनका आकार एक सिक्के की भाँति होता है l इन धब्बों पर व्यक्ति को असहनीय खुजली होने लगती है l यह रोग अधिकतर कलाई, कमर, पीठ तथा हाथ की पीछे की ओर के हिस्से को प्रभावित करता है l

  • डिहाइड्रोटिक एक्जिमा

एक्जिमा के इस प्रकार से सबसे ज्यादा हाथ और पैर की त्वचा प्रभावित होती है l इस रोग में व्यक्ति की हथेलियों तथा पैरों के तलवों पर फफोले पड़ जाते हैं जिनमे तरल पदार्थ भरा हुआ होता है l इन फफोलो पर खुजली होती है तथा इनके फूटने पर जलन व दर्द होता है तथा संक्रमण का खतरा रहता है l

एक्जिमा की जटिलताएँ 

एक्जिमा रोग से पीड़ित व्यक्ति को कई तरह की जटिलताओं का सामना करना पड़ता है- 

  • त्वचा पर खुजली करने, नाखून लगने से त्वचा की परत छिल जाती है तथा फफोले आदि में से तरल बाहर आने से व्यक्ति की त्वचा पर संक्रमण फैल सकता है l
  • पूरी त्वचा पर पड़े लाल चकत्ते व सफेद पर्त आदि के कारण व्यक्ति अपना आत्मविश्वास खोने लगता है तथा वह घर से बाहर निकलने में कतराता है l
  • एक्जिमा से त्वचा से होने वाली खुजली, जलन, चुभन व दर्द आदि के कारण व्यक्ति ठीक ढंग से सो नहीं पाता है l
  • व्यक्ति असहजता महसूस करता है तथा वह दिन भर बैचैनी का अनुभव करता  है l
  • एक्जिमा की गंभीर स्थिति में कभी कभी अस्थमा तथा हाय फीवर जैसी समस्याएं उत्पन्न होने लगती है l

मान्यताएं

क्या कह रहे हैं मरीज

"विभिन्न अध्ययन किए गए हैं जहां जैन गाय मूत्र चिकित्सा ने रोगियों में महत्वपूर्ण सुधार दिखाया है।"