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कार्डियोवासक्युलर (हृदय) रोग का इलाज

अवलोकन

हृदय से संबंधित होने वाले रोगों को हृदय रोग अथवा हृदय की बीमारी के अंतर्गत शामिल किया जाते है l व्यक्ति को होने वाली यह सबसे आम बीमारियों में से एक मानी जाती है l हमारा हृदय हमारे शरीर का एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण अंग है जिसके प्रभावित होने पर व्यक्ति का जीवन जीना असंभव हो जाता है l हृदय हमारे शरीर में ऑक्सीजन तथा पोषक तत्वों से समृद्ध रक्त को शरीर के दूसरे अंगों तक परिवहन करता है l हृदय से रक्त को पूरे शरीर में पहुंचाना तथा हृदय तक वापस लाने का मुख्य कार्य रक्त वाहिकाओं द्वारा किया जाता है l जब किन्ही कारणों से इन रक्त वाहिकाओं का मार्ग अवरुद्ध हो जाता है तो इनके द्वारा रक्त को लाने ले जाने का कार्य बाधित होने लगता   है l इसका असर सीधे हृदय पर होता है और हृदय के सुचारू रूप से काम करने में बाधा आने लगती है l इस वजह से हृदय के लिए रक्त की कमी हो जाती है तथा हृदय को नुकसान होने लगता है जिसके फलस्वरूप हृदय से जुड़ी कई बीमारियां व्यक्ति को होने लगती है l

अनुसंधान

जैन के गोमूत्र चिकित्सा क्लिनिक का उद्देश्य प्राचीन आयुर्वेदिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक के साथ एकीकृत करके एक सुखी और स्वस्थ जीवन बनाना है। हमारी चिकित्सा का अर्थ है आयुर्वेद सहित गोमूत्र व्यक्ति के तीन दोषों पर काम करता है- वात, पित्त और कफ। ये त्रि-ऊर्जा हमारे स्वास्थ्य को बनाए रखती हैं, इन दोषों में कोई भी असंतुलन, मानव स्वास्थ्य और बीमारी के लिए जिम्मेदार है। हमें यह कहते हुए खुशी हो रही है कि हमारे उपचार के तहत हमने इतने सारे सकारात्मक परिणाम देखे हैं। हमारे इलाज के बाद हजारों लोगों को कई बीमारियों से छुटकारा मिला।

हमारे मरीज न केवल अपनी बीमारी को खत्म करते हैं बल्कि हमेशा के लिए एक रोग मुक्त स्वस्थ जीवन जीते हैं। यही कारण है कि लोग हमारी चिकित्सा की ओर ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। आयुर्वेदिक उपचारों में हमारे वर्षों के शोध ने हमें अपनी कार्यप्रणाली को आगे बढ़ाने में मदद की है। हम पूरी दुनिया में एक स्वस्थ और खुशहाल समाज का निर्माण करने के लिए अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य रखते हैं।

गोमूत्र चिकित्सा द्वारा प्रभावी उपचार

गोमूत्र चिकित्सीय विधि के अनुसार कुछ जड़ी-बूटियाँ शरीर के दोषों (वात, पित्त और कफ) को फिर से जीवंत करने का काम करती हैं जो कि हृदय रोग का कारण बनती हैं यदि वे असम्बद्ध हैं। कुछ आयुर्वेदिक दवाओं में उनके उपचार के लिए कई लाभकारी तत्व होते हैं। यह शरीर के चयापचय में सुधार करता है।

जीवन की गुणवत्ता

गोमूत्र उपचार अच्छा स्वास्थ्य लाता है और दोषों को संतुलित रखता है। आज हमारे उपचार के परिणामस्वरूप लोग अपने स्वास्थ्य में लगातार सुधार कर रहे हैं। यह उनके दैनिक जीवन की गुणवत्ता में सुधार करता है। गोमूत्र के साथ-साथ आयुर्वेदिक दवाएं विभिन्न दुष्प्रभावों को कम करने के लिए एक पूरक चिकित्सा के रूप में काम कर सकती हैं जिन रोगियों को भारी खुराक, मानसिक दबाव, विकिरण और कीमोथेरपी के माध्यम से उपचार दिया जाता हैं। हम लोगों को मार्गदर्शन करते हैं कि यदि कोई रोग हो तो उस असाध्य बीमारी के साथ एक खुशहाल और तनाव मुक्त जीवन कैसे जियें। हजारों लोग हमारी थेरेपी लेने के बाद एक संतुलित जीवन जीते हैं और यह हमारे लिए एक बड़ी उपलब्धि है कि हम उन्हें एक ऐसा जीवन दें जिनके वे सपने देखते हैं।

जटिलता निवारण

आयुर्वेद में गोमूत्र का एक विशेष स्थान है जिसे हृदय रोगों जैसे भयानक रोगों के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। हमारी वर्षों की कड़ी मेहनत से पता चलता है कि हमारे आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों के उपयोग से हृदय रोगों की कई जटिलताएँ लगभग गायब हो जाती हैं। हमारे रोगी अपने शरीर में दर्द, हार्मोनल और रासायनिक परिवर्तनों में नियंत्रण और संतुलन के साथ एक बड़ी राहत महसूस करते हैं, यह हृदय रोगों की गति को धीमा कर देता हैं और हृदय की विफलता, एन्यूरिज्म, दिल का दौरा, स्ट्रोक, परिधीय धमनी रोग जैसी अन्य जटिलताओं को भी कम करता है, रोगी की प्रतिरक्षा प्रणाली में सुधार लाता है, हृदय और तंत्रिका तंत्र से संबंधित समस्याओं को भी नियंत्रित करता है।

जीवन प्रत्याशा

अगर हम जीवन प्रत्याशा के बारे में बात कर रहे हैं तो गोमूत्र चिकित्सा अपने आप में बहुत बड़ी आशा है। कोई भी बीमारी या तो छोटी या गंभीर अवस्था में होती है, जो मानव शरीर पर नकारात्मक प्रभाव डालती है और कई वर्षों तक मौजूद रहती है, कभी-कभी जीवन भर के लिए। एक बार बीमारी की पहचान हो जाने के बाद, जीवन प्रत्याशा कम होने लगती है, लेकिन गोमूत्र चिकित्सा से नहीं। हमारी प्राचीन चिकित्सा न केवल रोग से छुटकारा दिलाती है, बल्कि उस व्यक्ति के जीवन-काल को भी बढ़ाती है, जो उसके शरीर में कोई विष नहीं छोड़ता है और यही हमारा अंतिम उद्देश्य है।

दवा निर्भरता को कम करना

"सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद् दुःख भाग्भवेत्", इसका अर्थ है कि सभी को खुश रहने दें, सभी को रोग मुक्त होने दें, सभी को सत्य देखने दें, कोई भी दुःख का अनुभव नहीं करे । इस कहावत का पालन करते हुए, हम चाहते हैं कि हमारा समाज ऐसा ही हो। हमारी चिकित्सा विश्वसनीय उपचार देकर, जीवन प्रत्याशा में सुधार और प्रभावित लोगों की दवा निर्भरता को कम करके इस कहावत को पूरा करती है। इस आधुनिक दुनिया में अन्य उपलब्ध चिकित्सा विकल्पों की तुलना में हमारी चिकित्सा में अधिक फायदे और नुकसान शून्य हैं।

पुनरावृत्ति की संभावना को कम करना

व्यापक चिकित्सा पद्धति के विपरीत, हम रोग और कारकों के मूल कारण पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो केवल रोग के प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय रोग पुनरावृत्ति की संभावना में सुधार कर सकती हैं। इस पद्धति का उपयोग करके, हम पुनरावृत्ति दरों को सफलतापूर्वक कम कर रहे हैं और लोगों के जीवन को एक नई दिशा दे रहे हैं ताकि वे भावनात्मक और शारीरिक रूप से बेहतर तरीके से अपना जीवन जी सकें।

हृदय रोग के कारण 

हृदय रोग की विकसित करने के लिए कई जोखिम कारक मुख्य कारण बन सकते हैं - 

  • धूम्रपान

जो व्यक्ति अत्यधिक धूम्रपान करते है उनकी धमनियां संकीर्ण होने लगती है l बीड़ी, सिगरेट तथा तंबाकू आदि में उपस्थित हानिकारक रसायन निकोटीन होता है जो शरीर में पहुंच रक्त धमनियों की दीवारों को लगातार क्षतिग्रस्त करते रहता है l ऐसे व्यक्तियों को दिल का दौरा पड़ने की संभावना कई अधिक होती है l

  • उम्र 

व्यक्ति की उम्र जितनी अधिक होती है उतने ही अधिक हृदय रोगों का उनके शरीर में विकास होता है l बढ़ती उम्र में व्यक्ति के हृदय की मांसपेशियां कमजोर होती जाती है तथा धमनियों के संकुचित होने का खतरा भी बढ़ जाता है l 

  • पारिवारिक इतिहास 

पारिवारिक इतिहास हृदय रोगों के प्राथमिक जोखिमों में से एक है l जीन्स में होने वाले कुछ बदलाव से उच्च रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल जैसी बीमारियां परिवार के एक सदस्य से दूसरे सदस्य में स्थानांतरित होती रहती है l यह स्थितियां हृदय रोग को प्रभावित करती हैं l ज्यादातर हृदय रोग का पारिवारिक इतिहास रक्त धमनियों की बीमारी के खतरे को बढ़ाते है l

  • लिंग 

महिलाओं की तुलना में पुरुषों को हृदय रोग का ख़तरा प्रायः अधिक होता है l 

  • मोटापा 

मोटापा हृदय रोग संबंधी बीमारियों के लिए बढ़ते जोखिम के साथ जुड़ा हुआ है l शरीर में वसा की अत्यधिक वृद्धि रक्त धमनियों के क्षतिग्रस्त तथा अवरुद्ध होने का कारण बनती है जिससे व्यक्ति को हृदय से जुड़ी कई बड़ी समस्याएँ होती है l

  • उच्च रक्तचाप 

व्यक्ति जिनके शरीर में रक्तचाप का स्तर सामान्य से कई अधिक रहता है उनकी धमनियों की दीवारों पर अधिक दबाव बना रहता है जिसके कारण धमनियों में संकुचन होने लगता है तथा व्यक्ति को लगातार रहने वाला उच्च रक्तचाप शरीर को बहुत क्षति पहुंचाता है तथा व्यक्ति को हृदय संबंधी कई गंभीर समस्याएं हो सकती है l

  • मधुमेह 

मधुमेह से पीड़ित व्यक्ति को कम उम्र में ही हृदय रोग होने लगते हैं l मधुमेह के कारण व्यक्ति के रक्त में शर्करा का स्तर जब बढ़ने लगता है तो यह रक्त धमनियों तथा इन्हें नियंत्रित करने वाली नसों को नुकसान पहुंचाने लगता है l एक लंबे समय से मधुमेह की होने वाली समस्या हृदय रोग की संभावनाओं को अधिक विकसित करते है l

  • हाई कोलेस्ट्रॉल 

रक्त में कोलेस्ट्रॉल का अत्यधिक स्तर एथोस्क्लेरोसिस के खतरे को बढ़ाता है जो हृदय रोग का एक रूप होता है l इसमें शरीर की रक्त धमनियां संकुचित होने लगती है तथा हृदय की मांसपेशियों में रक्त का प्रवाह धीमा अथवा अवरुद्ध होने लगता है l अतः यह स्थितियां हृदय रोग के जोखिम को बढ़ाने का काम करती है l

  • मानसिक तनाव 

एक व्यक्ति का दिमाग तथा विचार उसके हृदय से जुड़े होते हैं l जब व्यक्ति किसी बात से अधिक तनाव लेने लगता है तो व्यक्ति की सहानुभूति तंत्रिका तंत्र जो व्यक्ति की चेतना के स्तर को नियंत्रित करती है, तनाव के प्रति प्रतिक्रिया देने लगती है तथा इस प्रतिक्रिया से धमनियों पर विपरीत प्रभाव होता है, धमनियां क्षतिग्रस्त होती है और हृदय रोग की संभावनाएं बढ़ती है l

 

हृदय रोग के निवारण 

व्यक्ति निम्नलिखित उपायों के द्वारा हृदय रोग के जोखिमों को कम कर सकते हैं -

  • स्वस्थ और संतुलित आहार हृदय को स्वस्थ बनाते है l अतः व्यक्ति को नियमित रूप से पौष्टिक तत्वों से युक्त भोजन तथा फल आदि का सेवन करना चाहिए l
  • धूम्रपान के अत्यधिक सेवन जैसी आदतों को व्यक्ति को पूरी तरह से छोड़ना चाहिए l
  • नित्य सैर, व्यायाम, योग तथा कसरत आदि गतिविधियां व्यक्ति के हृदय को स्वस्थ बनाने में मदद करती है l
  • व्यक्ति को अपने बढ़ते वजन को सामान्य रखना चाहिए तथा अधिक वजन को कम करने के प्रयास करने चाहिए l
  • व्यक्ति को अधिक मानसिक तनाव लेने से बचना चाहिए l
  • बढ़ती उम्र में व्यक्ति को अपनी सेहत, खानपान आदि का खास ख्याल रखना चाहिए l
  • व्यक्ति को मधुमेह, हाइ कोलेस्ट्राल, उच्च रक्तचाप जैसी स्वास्थ्य स्थितियों को नियंत्रित बनाए रखना चाहिए l

हृदय रोग के लक्षण 

हृदय रोग से पीड़ित व्यक्ति को निम्नलिखित सामान्य लक्षण महसूस होते हैं - 

  • छाती में दर्द, दबाव, भारीपन, जकड़न आदि होना
  • धड़कनों की गति कम तथा अधिक होना
  • सांस फूलना व सांस लेने में तकलीफ होना
  • हाथ, पैरों का सुन्न हो जाना तथा ठंडे पड़ना
  • जी मचलना तथा चक्कर आदि आना
  • पेट के ऊपरी भाग, बांह, गर्दन तथा पीठ में दर्द होना
  • शारीरिक थकावट व कमजोरी होना
  • खांसी आना तथा सामान्य से अधिक पसीना आना
  • सीने में जलन होना

 

हृदय रोग के प्रकार

हृदय रोग कई प्रकार के होते हैं - हृदय रोग के अंतर्गत कई रोग शामिल किए जाते है जैसे कि -

  • रक्त वाहिका रोग
  • हृदय की धड़कनों की असामान्यता
  • दिल का दौरा
  • जन्मजात हृदयरोग
  • हृदय की मांसपेशियों की बीमारी
  • दिल की धड़कन रुकना
  • एनजाइना
  • महाधमनी रोग
  • हृदय में छेद 
  • हृदय वाल्व रोग 
  • हृदय की विफलता 
  • एथोस्क्लेरोसिस
  • कार्डियोमायोपैथी
  • रूमेटिक हृदय रोग

हृदय रोग की जटिलताएँ 

हृदय रोग से ग्रसित व्यक्ति को कई गंभीर जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है - 

  • दिल की विफलता
  • धमनीविस्फार
  • दिल का दौरा
  • स्ट्रोक
  • परिधीय धमनी रोग

विभिन्न प्रकार के कार्डियोवासक्युलर (हृदय) रोग

मान्यताएं

क्या कह रहे हैं मरीज

"विभिन्न अध्ययन किए गए हैं जहां जैन गाय मूत्र चिकित्सा ने रोगियों में महत्वपूर्ण सुधार दिखाया है।"