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त्वचा की एलर्जी का इलाज

अवलोकन

कई बाहरी तत्व हमारे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित करने वाले होते हैं l इन तत्वों को प्रतिरक्षा प्रणाली हमारे शरीर के लिए नुकसानदायक समझती है और शरीर की रक्षा करने के लिए उनके प्रति प्रतिक्रिया करने लगती है l ये बाहरी तत्व एलर्जन्स के नाम से जाने जाते हैं l ये एलर्जन्स शरीर की संवेदनशीलता को बढ़ाने लगते हैं l मुख्यतः आँख, नाक, गला तथा त्वचा इन एलर्जन्स से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं l हमारी त्वचा जब इन प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित करने वाले एलर्जन्स के सम्पर्क में आती है तो प्रतिक्रिया के परिणामस्वरूप प्रतिरक्षा प्रणाली इन पदार्थों के प्रति संवेदनशील होने लग जाती है तथा त्वचा में कई असामान्य से बदलाव आने लगते हैं जिसे त्वचा की एलर्जी कहा जाता है l 

त्वचा की एलर्जी होने पर व्यक्ति के शरीर की त्वचा पर लाल दाने होने लगते हैं, खुजली, जलन तथा सूजन आ जाती है और व्यक्ति असहज होने लग जाता है l यह एलर्जन्स कोई भी पदार्थ जैसे सौंदर्य प्रसाधन, रसायन, धूल मिट्टी, प्रदूषण, साबुन, तेल, दवाइयाँ, खाद्य पदार्थ और सूर्य की किरणें आदि हो सकते हैं जिनके संपर्क में आने से व्यक्ति को त्वचा संबंधी एलर्जी होने लगती है l अधिकतर लोग त्वचा की एलर्जी से पीड़ित रहते हैं l लोगों की अति संवेदनशील त्वचा एलर्जी से बार बार ग्रसित होती हैं जिससे उन्हें कई त्वचा संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है l

अनुसंधान

जैन के गोमूत्र चिकित्सा क्लिनिक का उद्देश्य प्राचीन आयुर्वेदिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक के साथ एकीकृत करके एक सुखी और स्वस्थ जीवन बनाना है। हमारी चिकित्सा का अर्थ है आयुर्वेद सहित गोमूत्र व्यक्ति के तीन दोषों पर काम करता है- वात, पित्त और कफ। ये त्रि-ऊर्जा हमारे स्वास्थ्य को बनाए रखती हैं, इन दोषों में कोई भी असंतुलन, मानव स्वास्थ्य और बीमारी के लिए जिम्मेदार है। हमें यह कहते हुए खुशी हो रही है कि हमारे उपचार के तहत हमने इतने सारे सकारात्मक परिणाम देखे हैं। हमारे इलाज के बाद हजारों लोगों को कई बीमारियों से छुटकारा मिला।

हमारे मरीज न केवल अपनी बीमारी को खत्म करते हैं बल्कि हमेशा के लिए एक रोग मुक्त स्वस्थ जीवन जीते हैं। यही कारण है कि लोग हमारी चिकित्सा की ओर ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। आयुर्वेदिक उपचारों में हमारे वर्षों के शोध ने हमें अपनी कार्यप्रणाली को आगे बढ़ाने में मदद की है। हम पूरी दुनिया में एक स्वस्थ और खुशहाल समाज का निर्माण करने के लिए अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य रखते हैं।

गोमूत्र चिकित्सा द्वारा प्रभावी उपचार

गोमूत्र चिकित्सा के दृष्टिकोण के अनुरूप कुछ जड़ी-बूटियां शारीरिक दोषों (वात, पित्त और कफ) को फिर से जीवंत करने का काम करती हैं जो कि अधिकांश त्वचा की एलर्जी का कारण बन सकती हैं यदि वे असंतुष्ट हों। उनसे निपटने के लिए कुछ आयुर्वेदिक दवाओं में कई लाभकारी तत्व शामिल हैं। यह शरीर के चयापचय में सुधार करता है।

डर्मोसोल + लिक्विड ओरल

डेर्मोकर + कैप्सूल

पुरोडर्म+ मलहम

प्रमुख जड़ी-बूटियाँ जो उपचार को अधिक प्रभावी बनाती हैं

नीम

यह एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों के कारण लालिमा, सूजन और खुजली को कम कर सकता है। नीम एक प्राकृतिक एंटीहिस्टामाइन भी है, यही कारण है कि इसका उपयोग सभी प्रकार की त्वचा की एलर्जी के उपचार में किया जाता है।

बावची

यह एक्जिमा और अन्य त्वचा एलर्जी के लिए अपने जीवाणुरोधी, एंटीवायरल और एंटीफंगल प्रभावों के साथ इलाज के लिए एक शक्तिशाली जड़ी बूटी है। अपने रक्तशोधक (ब्लड प्यूरीफायर) प्रभावों के कारण, बावची त्वचा की विभिन्न समस्याओं का इलाज करने में मदद करती है जैसे कि खुजली, लाल पपड़ी, खुजली का फटना, एक्जिमा, दाद, खुरदरा और फीका पड़ा हुआ डर्मेटोसिस, फफूंद के कारण त्वचा की जलन।

खदिर

यह एक प्राकृतिक रक्त शोधक माना जाता है, जो सभी प्रकार के चर्म त्वचा विकारों के साथ, मुंहासे और फुंसियों को दूर करता है। खादिरि अरिष्टम, खादिर का एक महत्वपूर्ण सूत्रीकरण है जो त्वचा की समस्याओं का प्रभावी ढंग से उपचार करता है।

करंज

करंज की ताजा छाल से बना काढ़ा त्वचा की एलर्जी का इलाज करने में उपयोगी है। करंज बीज एक्जिमा के विभिन्न लक्षणों से राहत देता है।

चक्रमर्दा

यह जड़ी बूटी पोषक तत्वों और विषाक्त पदार्थों को खत्म करने वाली है। इसका त्वचा की एलर्जी में उपयोग किया जाता है। पौधे की पत्तियों का उपयोग पुरानी त्वचा की जलन और अन्य त्वचा रोगों की रोकथाम के लिए किया जाता है। चक्रमर्दा एक पौधा है जो अन्य त्वचा विकारों और सोरायसिस के उपचार के लिए उपयोगी है। इसके ग्लाइकोसाइड-समृद्ध पत्ते, जिसमें एलो-एमोडिन भी होते हैं, त्वचा रोगों के लिए उपयोगी हो सकते हैं।

चन्दन

इसमें एंटीसेप्टिक गुण होते हैं जो पिंपल, मुंहासे और घावों को विकसित होने से रोकते हैं। धूल और गंदगी के संपर्क में आने से त्वचा पर बैक्टीरिया का विकास हो सकता है जो आगे चलकर त्वचा की एलर्जी का कारण बन सकता है। एंटीऑक्सीडेंट में उच्च, चंदन मुक्त कणों से प्रेरित नुकसान से लड़ने में मदद करता है और इस तरह त्वचा के मुद्दों को हल करता है।

शुद्ध गंधक

इस जड़ी बूटी में सभी जीवाणु रोधी गुण होते हैं जो विभिन्न त्वचा विकारों जैसे कि सोरायसिस, खुजली, एक्जिमा, खरोंच आदि के उपचार के लिए उपयोगी होते हैं। गंधक रसायन में शक्तिशाली एंटी-बैक्टीरियल, एंटीमाइक्रोबियल और एंटी-वायरल गुण होते हैं और यह एक बहुमुखी आयुर्वेदिक तथा एक व्यापक स्पेक्ट्रम दवा है जिसका उपयोग विभिन्न प्रकार की त्वचा रोगों के उपचार के लिए किया जाता है।

तुलसी

यह आवश्यक एंटी इंफ्लेमेटरी और जीवाणुरोधी गुणों के साथ उपयोग किया जाता है जो आपकी त्वचा की सतह को नुकसान पहुंचाए बिना त्वचा की एलर्जी का प्रभावी ढंग से इलाज कर सकता है। तुलसी अपने रोगाणुरोधी और एलर्जी विरोधी गुणों के कारण त्वचा की एलर्जी से राहत दिलाने में फायदेमंद है।

कैशोर गुग्गुल

यह एक रक्त शोधक है जिसमें एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी प्रभाव होते हैं। यह भी मुँहासे, एक्जिमा और किसी भी तरीके के दाने के उपचार में सहायता करता है। किशोर गुग्गुल के उपयोग करने से पित्त बढ़ने की संभावना कम होती है। अक्सर यह सूजन, त्वचा की जलन और दर्द को कम करने में प्रभावी होता है।

अनंतमूल

अनंतमूल का उपयोग त्वचा की समस्याओं जैसे दाद, खाज, सोरायसिस, एक्जिमा और बैक्टीरिया से संबंधित त्वचा रोग, दोनों बाहरी और आंतरिक रूप से किया जा सकता है। अपनी रोगाणुरोधी गतिविधि के कारण, अनंतमूल जड़ बैक्टीरिया के संक्रमण से छुटकारा पाने में मदद करता है। अनंतमूल क्वाथ (काढ़ा) और इसके पाउडर में ऐसे गुण होते हैं जो रक्त को शुद्ध करते हैं और इसका उपयोग त्वचा की विभिन्न समस्याओं के इलाज के लिए किया जा सकता है।

मीठा इन्द्रजौ

एक एंटीहेल्मेंटिक एनोडीने के रूप में, जो विशेष रूप से त्वचा की स्थिति (परजीवी कीड़े को मारने के लिए) जैसे कि मुंहासे, सोरायसिस और एक्जिमा के लिए प्रभावी है, मीठा इंद्रजौ का उपयोग किया जाता है। इसमें त्वचा की टोन को चिकना करने के लिए, त्वचा की सतह की जलन को दूर करने के लिए एक कसैले का उपयोग किया जाता है। यह एक तरल-आधारित समाधान (आमतौर पर पानी) है और व्यापक रूप से किसी न किसी और मुँहासे-प्रवण त्वचा पर उपयोग किया जाता है।

कपूर

त्वचा संबंधी एलर्जी जैसे एक्जिमा, पित्ती, जिल्द की सूजन, खरोंच और दर्द के लिए, कपूर एक महान उपचार हो सकता है। इसके एंटी इन्फ्लेमेटरी और शांत प्रभाव के कारण, संक्रमित हिस्से पर कपूर जलने और खुजली संवेदनाओं को कम करता है । इसमें एंटी बैक्टीरियल और एंटीफंगल प्रभाव होते हैं, जिससे यह त्वचा के संक्रमण में प्रभावी होता है।

नारियल तेल

नारियल के तेल में फैटी एसिड होते हैं जो हाइड्रेट और पित्ती, एक्जिमा, सोरायसिस और कई अन्य त्वचा रोगों से बचाने में मदद करते हैं। इनमें से कई में विटामिन एफ (लिनोलिक एसिड) शामिल है, जो त्वचा की नमी और लौरिक एसिड को बनाए रखने में मदद करता है और जिसमे जीवाणु रोधी प्रभाव होता है।

अजवाइन के फूल

अजवाइन के फूल में थाइमोल नामक एक घटक होता है, जो इसे त्वचा के संक्रमण के उपचार के लिए एक शक्तिशाली कवकनाशी और जननाशक बनाता है। यह दाद, खुजली और घाव के संक्रमण के लिए फायदेमंद है।

गोमय रस

यह उत्कृष्ट कीटाणुनाशक शक्ति, एंटीबायोटिक्स और रोगाणुरोधी गतिविधि के साथ कई त्वचा एलर्जी का इलाज करने में सक्षम है। फंगल और बैक्टीरियल त्वचा संक्रमण के इलाज के लिए यह एक बहुत प्रभावी उपाय है।

गोजला

हम अपने गोमूत्र चिकित्सा में गोजला का उपयोग करते हैं, मूल रूप से इसका मतलब है कि हमारी दवा में मुख्य घटक गोमूत्र अर्क है। यह अर्क गाय की देसी नस्लों के मूत्र से बना है। गोजला के अपने फायदे हैं क्योंकि यह किसी भी प्रकार के संदूषण की संभावना से परे है। इसकी गुणवत्ता उच्च है एवं प्रचुर मात्रा में है। जब गोजला आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों के साथ मिलाया जाता है तो यह किसी भी बीमारी के इलाज के लिए अधिक प्रभावी हो जाता है और विशेष बीमारियों में अनुकूल परिणाम देता है। इस अर्क का अत्यधिक परीक्षण किया गया है और इसलिए यह अधिक विश्वसनीय और लाभदायक भी है।

जीवन की गुणवत्ता

गोमूत्र का उपचार अच्छा स्वास्थ्य देता है और संतुलन बनाए रखता है। आज, हमारे उपचार के कारण, लोग अपने स्वास्थ्य में लगातार सुधार कर रहे हैं। यह उनके दैनिक जीवन की गुणवत्ता में सुधार करता है। भारी खुराक, मानसिक तनाव, विकिरण और कीमोथेरेपी के उपयोग से होने वाले विभिन्न दुष्प्रभावों को कम करने के लिए आयुर्वेदिक चिकित्सा और गोमूत्र को पूरक चिकित्सा के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। हम लोगों को असाध्य रोगों से खुश, तनाव मुक्त जीवन जीना सिखाते हैं। हमारे उपचार को प्राप्त करने के बाद हजारों लोग एक संतुलित जीवन जी रहे हैं। यह हमारे लिए एक बड़ी उपलब्धि है कि हम उन्हें उनके सपनों की जिंदगी दे सकते है।

जटिलता निवारण

आयुर्वेद में गोमूत्र का एक विशेष स्थान है जो त्वचा की एलर्जी जैसी बीमारियों के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। हमारी कड़ी मेहनत के वर्षों से पता चलता है कि हमारी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों के उपयोग से त्वचा की एलर्जी की लगभग कई जटिलताएँ गायब हो जाती हैं। हमारे रोगी अपने शरीर में दाने और सूजन, हार्मोनल और रासायनिक परिवर्तनों को नियंत्रित करने में एक बड़ी राहत महसूस करते हैं, रोगी की प्रतिरक्षा प्रणाली में सुधार होता हैं जो अन्य त्वचा एलर्जी जटिलताओं, मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र से संबंधित समस्याओं को नियंत्रित करने के लिए अनुकूल रूप से काम करती है।

पुनरावृत्ति की संभावना को कम करना

व्यापक वैज्ञानिक अभ्यास के अलावा, हमारा केंद्र बिंदु रोग और उसके तत्वों के मूल उद्देश्य पर है जो केवल बीमारी के प्रशासन पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय विकार पुनरावृत्ति की संभावनाओं को बढ़ा सकता है। इस पद्धति के उपयोग से, हम पुनरावृत्ति दर को सफलतापूर्वक कम कर रहे हैं और लोगों की जीवन शैली को एक नया रास्ता दे रहे हैं ताकि वे अपने जीवन को भावनात्मक और शारीरिक रूप से उच्चतर तरीके से जी सकें।

त्वचा की एलर्जी के कारण 

त्वचा पर एलर्जी होने के कई कारण और जिम्मेदार कारक हो सकते हैं -

  • मौसमी बदलाव 

मौसम में होने वाले बदलाव भी हमारे शरीर की त्वचा को संवेदनशील बनाते है जिससे कई तरह की त्वचा संबंधी एलर्जी व्यक्ति को होने लगती है l तापमान में बदलाव, गेहूं की कटाई का समय, संक्रमण को आकर्षित करता बारिश का मौसम, अत्यधिक धूप और धूल भरी आँधी आदि त्वचा की एलर्जी का कारण बनते हैं l 

  • प्रदूषण

हवा में उपस्थित धूल मिट्टी के कण, वाहनों,  फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआं तथा रसायन आदि त्वचा पर अपना दुष्प्रभाव डालते हैं, संक्रमण को बढ़ाते हैं तथा त्वचा की एलर्जी का कारण बनते हैं l 

  • दवाइयाँ 

कई बार हम ऐसी दर्द निवारक दवाइयों का सेवन कर लेते हैं जो सीधे अपना असर हमारे शरीर की त्वचा पर डालती हैं l ऐसी दवाइयों में पाए जाने वाले सक्रिय घटकों के प्रति प्रतिरक्षा प्रणाली की प्रतिक्रिया शुरू होने लग जाती है l कई बार व्यक्ति द्वारा त्वचा पर लगी खरोंच , मुहांसे, खुजली आदि के निवारण के लिए दवा युक्त क्रीम, लोशन लगाए जाते हैं जिससे भी उन्हें एलर्जी होने लगती है l

  • खाद्य पदार्थ

कुछ खाद्य पदार्थ भी त्वचा पर एलर्जी उत्पन्न करने के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं l हमारे शरीर का रोग प्रतिरोधक तंत्र इन खाद्य पदार्थों के पोषक तत्वों को बाहरी तत्व समझ कर उनके प्रति प्रतिक्रिया करने लगता है और ये खाद्य पदार्थ त्वचा की एलर्जी का कारण बन जाते हैं l ज्यादातर यह खाद्य पदार्थ मूँगफली, बादाम, अखरोट, अनाज, नारियल, मछली, दूध व दूध से बने पदार्थ और बीज वाली सब्जियां व सोयाबीन होती है जिनमे से किसी का भी सेवन करने से व्यक्ति के शरीर में उसके प्रति प्रतिक्रिया होने लगती है l

  • घरेलु समान 

घर की साफ सफाई में काम आने वाले रसायन, रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले औजार, गैस, रंग-रोगन, रंजक और कीटनाशक आदि त्वचा पर एलर्जी का कारण बनते हैं l 

  • सौंदर्य प्रसाधन

सौंदर्य प्रसाधन जैसे कि क्रीम, लोशन, पाउडर, साबुन, परफ्यूम, बालो के कलर, तेल, मेहंदी आदि के इस्तेमाल करने से इसमें मौजूद विषैले रसायन त्वचा पर एलर्जी के मुख्य कारण बन सकते हैं l

  • विषाक्त रसायन 

किसी फैक्ट्री या व्यावसायिक काम में प्रयोग में आने वाले रसायन, रबर निर्माण फैक्ट्री में पाए जाना वाला लेटेक्स, निकेल जैसे मिश्र धातु जो आभूषण बनाने में उपयोग किए जाते हैं इन सब के सम्पर्क में आने से त्वचा की एलर्जी होने का खतरा बना रहता है l

  • पालतू पशु 

कई पालतू पशु के महीन बाल, रूसी, लार, और मूत्र भी एलर्जन्स होते हैं जो व्यक्ति की त्वचा एलर्जी को बढ़ा सकते हैं जिनके संपर्क में आते ही त्वचा संवेदनशील होकर प्रतिक्रिया करने लग जाती है l

  • परागकण

फूलों, घास के परागण और कुछ पौधे में पाए जाने वाले कैमोमाइल और अर्निका भी व्यक्ति की त्वचा की एलर्जी का कारण बन सकते हैं l पेड़ पौधों के यह तत्व तथा परागण के सम्पर्क में व्यक्ति के शरीर की त्वचा आती हैं तो उनके प्रति शरीर की संवेदनशीलता बढ़ने लगती हैं और एलर्जी का कारण बनती है l

  • कीड़े 

मधुमक्खी, चींटी और ततैया जैसे कुछ कीड़ों के डंक मारने से व्यक्ति को गंभीर एलर्जी प्रतिक्रिया हो सकती हैं जिससे पूरी त्वचा में जलन, खुजली, सूजन तथा दाने उभर सकते हैं l
 

त्वचा की एलर्जी के निवारण

त्वचा पर होने वाली एलर्जी से बचने के लिए कई प्रयास किए जा सकते हैं - 

  • मौसम में होने वाले बदलाव के मुताबिक अपनी त्वचा की सुरक्षा करना l सूर्य की किरणों, धूल मिट्टी से बचने के लिए त्वचा को ढक कर रखना तथा बार बार पानी से अपनी त्वचा को साफ करते रहना l
  • ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करने से बचना चाहिए जिससे व्यक्ति को त्वचा संबंधी एलर्जी होती है l 
  • प्रदूषण व केमिकलयुक्त इलाकों मेें जाने से बचना, रसायन फैक्ट्री में काम करते समय नाक तथा मुँह और त्वचा को अच्छे से ढंकना l
  • बिना चिकित्सीय सलाह के किसी भी दवा का उपयोग न करना तथा ड्रग्स एलर्जी के बारे में जानकारी रखना तथा भविष्य में उनका उपयोग करने से बचना l
  • ऐसे कीड़ों से अपना बचाव करना, उनसे उचित दूरी बनाए रखना जिनके काटने से व्यक्ति को एलर्जी होती है l
  • ऐसे सौंदर्य प्रसाधन जिनमे रसायन होता है उनका उपयोग ना किया जाना तथा त्वचा पर प्रसाधनों द्वारा एक बार एलर्जी होने के बाद दोबारा उनका प्रयोग ना किया जाना l
  • पालतू पशुओं के सम्पर्क में कम से कम आना, उन्हें घर के निवास स्थान से दूर रखना तथा उन्हें छूने के बाद त्वचा को ना छूना व अपने हाथों को अच्छे से साफ करना l

त्वचा की एलर्जी के लक्षण 

  • व्यक्ति को पूरी त्वचा पर छोटे छोटे दानें अथवा फुंसी हो जाती है l
  • व्यक्ति की त्वचा पर लाल चकत्ते पड़ने लग जाते हैं l  
  • व्यक्ति के पूरे शरीर में खुजली होने लगती है l  
  • व्यक्ति की त्वचा शुष्क व खुरदरी हो जाती है तथा पपड़ी जमने लगती है l  
  • व्यक्ति के चेहरे, हाथ, पीठ तथा गले की त्वचा पर सूजन आ जाती है l 
  • व्यक्ति की त्वचा में जलन शुरू हो जाती है l  


त्वचा की एलर्जी के प्रकार 

त्वचा की एलर्जी निम्न प्रकार की होती है :

  • एक्जिमा

एक्जिमा वातावरण में आए बदलाव तथा एलर्जन्स के सम्पर्क में आने से होने वाली एक एलर्जी है जो त्वचा में सामान्य अनियमितता लाती है तथा त्वचा को संक्रमित करती है l एक्जिमा को एटॉपिक डर्मेटाइटिस के नाम से भी जाना जाता है l यह एलर्जी छोटे बच्चों को ज्यादा प्रभावित करती है l इसके कारण त्वचा के शुष्क हो जाने से त्वचा पर जलन, घाव और सूजन होने लगती है l एक्जिमा के कारण व्यक्ति को फूड एलर्जी, अस्थमा, एलर्जी राइनाइटिस, प्रतिरक्षा प्रणाली से संबंधित अन्य बीमारियां होने का भी खतरा रहता है l 

  • पित्ती

यह एलर्जी वो होती है जिसमें पूरे शरीर पर चकत्ते उभरने लगते हैं इसे हाइव्स के नाम से भी जाना जाता है l इसके कारण त्वचा पर सुर्ख लाल रंग के उभरे हुए दाने हो जाते हैं जिनमे निरंतर खुजली होने लगती है तथा व्यक्ति को अपनी त्वचा पर असामान्य सी चुभन होने लगती है तथा त्वचा पर सूजन आने लगती है l

  • कॉन्टेक्ट डर्मेटाइटिस 

रसायनयुक्त पदार्थ तथा किसी भी नई चीज के सम्पर्क में आने से होने वाली एलर्जी को कॉन्टेक्ट डर्मेटाइटिस कहा जाता है जो व्यक्ति की त्वचा पर दो प्रकार से प्रभाव डालती है :

  1.  इरिटेंट कॉन्टेक्ट डर्मेटाइटिस: जो त्वचा के सिर्फ उसी हिस्से को प्रभावित करती है जो एलर्जन के संपर्क में आती है 
  1. एलर्जिक कॉन्टेक्ट डर्मेटाइटिस : जिसमें शरीर की पूरी त्वचा इन एलर्जन्स से प्रभावित होती है l
  • सेबोरहाइक डर्मेटाइटिस

यह एक दीर्घकालिक त्वचा विकार है। सेबोरहाइक डर्मेटाइटिस, जिसे सेबोरहोहिया के नाम से भी जाना जाता है l सेबोरीक एक आम त्वचा की स्थिति है जो मुख्य रूप से  खोपड़ी को प्रभावित करती है जिसके परिणामस्वरूप बालों में रूसी तथा खुजली होती है व पपड़ीदार घाव होने लगते हैं l

  • एंजियोएडिमा

एक तरह की एलर्जिक रिएक्शन होने की वजह से जब त्वचा की ऊपरी सतह के ठीक नीचे सूजन आने लगती है तो ये एलर्जी एंजियोएडिमा के नाम से जानी जाती है l इनमे होने वाली सूजन पित्ती में होने वाली सूजन के समान ही होती है l

त्वचा की एलर्जी की जटिलताएँ 

व्यक्ति को त्वचा की एलर्जी होने पर निम्न जटिलताओं का सामना करना पड़ता है - 

  • त्वचा पर होने वाली एलर्जी दीर्घकालिक होने पर खासकर व्यक्ति के चेहरे पर दाने, सूजन आदि होने की वजह से व्यक्ति के आत्मविश्वास में कमी आने लगती  है l 
  • व्यक्ति असहज महसूस करने लगता है तथा उसका चिड़चिड़ापन बढ़ने लगता है l
  • एलर्जी की वजह से व्यक्ति ठीक से सो नहीं पाता है, नींद की कमी रहती है तथा व्यक्ति बैचेन रहने लगता है l
  • त्वचा पर असामान्य सी चुभन, खुजली व जलन व्यक्ति को पूरे दिन परेशान करती है l  
  • व्यक्ति की त्वचा के संक्रमित होने का डर रहता है l
  • व्यक्ति को अपनी त्वचा की एलर्जी की सही जानकारी ना होने पर यूँ ही ली जाने वाली दवाइयों से स्थिति ओर भी गंभीर होने का जोखिम रहता है l

मान्यताएं

क्या कह रहे हैं मरीज

"विभिन्न अध्ययन किए गए हैं जहां जैन गाय मूत्र चिकित्सा ने रोगियों में महत्वपूर्ण सुधार दिखाया है।"