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श्वसन पथ सम्बन्धित रोग का इलाज

अवलोकन

व्यक्ति के फेफड़े तथा श्वसन प्रणाली उनके शरीर की एक जटिल प्रणाली का वे महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं जो ऑक्सीजन को शरीर के अंदर तक पहुँचाने तथा कार्बन डाइऑक्साइड को बाहर निकालने के लिए कई हजार बार विस्तारित और संकुचित होते है l इस प्रक्रिया में फेफड़े तथा श्वसन प्रणाली के कई छोटे तथा बड़े हिस्से मिलकर सहयोग करते हैं तथा अपना अपना कार्य सुचारू रूप से करते हैं l इन अंगों के किसी भी भाग के प्रभावित होने पर इनके द्वारा किया जाने वाला कार्य बाधित होने लगता है तथा फेफड़े तथा श्वसन प्रणाली की सम्पूर्ण प्रक्रिया डगमगा जाती है l यह असंतुलन इनसे संबंधित शरीर के हर अंग को प्रभावित करने वाला होता है l जिससे इंसान के शरीर में कई तरह की समस्याएं और बदलाव आते हैं जो उनके जीवन को जीने के लिए कठिन परिस्थितियां पैदा करते हैं l

रेसपिरेटरी और पल्मोनरी डिजीज फेफड़ों तथा श्वसन प्रणाली के रोगों का वह समूह है जो व्यक्ति के फेफड़ों को क्षतिग्रस्त करते है, श्वसन प्रणाली में सूजन पैदा करते है, ऊतकों तथा उनके कार्यों को प्रभावित करते है और वायु प्रवाह के मार्ग को अवरुद्ध करते हैं l रेसपिरेटरी और पल्मोनरी डिजीज का सबसे बुरा असर व्यक्ति की श्वसन प्रक्रिया पर होता है जिससे पीड़ित होने पर व्यक्ति को सांस संबंधी कई समस्याएं शुरू होने लगती है जो इन रोगों की गंभीरता के आधार पर बदतर होती चली जाती है l श्वसन संबंधी विकार को फेफड़े का रोग के नाम से भी जाना जाता है l 

आज के दौर में व्यक्तियों में फेफड़ों की बीमारी बहुत ही आम हो चुकी है l यह श्वसन संबंधी बीमारियां संक्रमण के कारण उत्पन्न हो सकती है जो आम स्थितियों से लेकर कई गंभीर स्थितियों को पैदा करते हैं l फेफड़ों तथा श्वसन प्रणाली की इस बीमारी का समूह इन्हें प्रभावित करने वाले कई विकारों को संदर्भित करता है l

अनुसंधान

जैन के गोमूत्र चिकित्सा क्लिनिक का उद्देश्य प्राचीन आयुर्वेदिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक के साथ एकीकृत करके एक सुखी और स्वस्थ जीवन बनाना है। हमारी चिकित्सा का अर्थ है आयुर्वेद सहित गोमूत्र व्यक्ति के तीन दोषों पर काम करता है- वात, पित्त और कफ। ये त्रि-ऊर्जा हमारे स्वास्थ्य को बनाए रखती हैं, इन दोषों में कोई भी असंतुलन, मानव स्वास्थ्य और बीमारी के लिए जिम्मेदार है। हमें यह कहते हुए खुशी हो रही है कि हमारे उपचार के तहत हमने इतने सारे सकारात्मक परिणाम देखे हैं। हमारे इलाज के बाद हजारों लोगों को कई बीमारियों से छुटकारा मिला।

हमारे मरीज न केवल अपनी बीमारी को खत्म करते हैं बल्कि हमेशा के लिए एक रोग मुक्त स्वस्थ जीवन जीते हैं। यही कारण है कि लोग हमारी चिकित्सा की ओर ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। आयुर्वेदिक उपचारों में हमारे वर्षों के शोध ने हमें अपनी कार्यप्रणाली को आगे बढ़ाने में मदद की है। हम पूरी दुनिया में एक स्वस्थ और खुशहाल समाज का निर्माण करने के लिए अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य रखते हैं।

गोमूत्र चिकित्सा द्वारा प्रभावी उपचार

गोमूत्र चिकित्सा दृष्टिकोण के अनुसार, कई जड़ी-बूटियां, शरीर के दोषों (वात, पित्त और कफ) को फिर से जीवंत करने का काम करती हैं, जो रेसपिरेटरी और पल्मोनरी डिजीज का कारण बनते हैं अगर वे अनुपातहीन हैं। कुछ आयुर्वेदिक दवाओं में, उनके उपचार के लिए कई लाभकारी तत्व होते हैं। यह शरीर के चयापचय को बढ़ाता है।

जीवन की गुणवत्ता

गोमूत्र उपचार अच्छा स्वास्थ्य लाता है और दोषों को संतुलित रखता है। आज हमारे उपचार के परिणामस्वरूप लोग अपने स्वास्थ्य में लगातार सुधार कर रहे हैं। यह उनके दैनिक जीवन की गुणवत्ता में सुधार करता है। गोमूत्र के साथ-साथ आयुर्वेदिक दवाएं विभिन्न दुष्प्रभावों को कम करने के लिए एक पूरक चिकित्सा के रूप में काम कर सकती हैं जिन रोगियों को भारी खुराक, मानसिक दबाव, विकिरण और कीमोथेरेपी के माध्यम से उपचार दिया जाता हैं। हम लोगों को मार्गदर्शन करते हैं कि यदि कोई रोग हो तो उस असाध्य बीमारी के साथ एक खुशहाल और तनाव मुक्त जीवन कैसे जियें। हजारों लोग हमारी थेरेपी लेने के बाद एक संतुलित जीवन जीते हैं और यह हमारे लिए एक बड़ी उपलब्धि है कि हम उन्हें एक ऐसा जीवन दें जिनके वे सपने देखते हैं।

जटिलता निवारण

आयुर्वेद में, गोमूत्र की एक विशेष स्थिति है जिसे अक्सर श्वसन और फुफ्फुसीय रोगों जैसी बीमारियों के लिए सहायक कहा जाता है। हमारे वर्षों के श्रमसाध्य कार्य यह साबित करते हैं कि हमारी जड़ी-बूटियों के उपयोग से श्वसन और फुफ्फुसीय रोगों की लगभग सभी जटिलताएँ समाप्त हो जाती हैं। पीड़ित हमें बताते हैं कि वे दर्द, सांस लेने में कठिनाई, खांसी, श्वसन पथ में फेफड़ों, ठंड, फ्लू और बुखार, शारीरिक कमजोरी, शरीर में हार्मोनल और रासायनिक परिवर्तनों में नियंत्रण और संतुलन महसूस करते हैं, साथ ही यह रोगी की प्रतिरक्षा प्रणाली में सुधार लाते हैं जो अन्य श्वसन और फुफ्फुसीय रोगों की जटिलताओं के लिए अनुकूल रूप से काम करता है।

जीवन प्रत्याशा

अगर हम जीवन प्रत्याशा के बारे में बात करते हैं, तो गोमूत्र चिकित्सा अपने आप में बहुत आशावाद है। कोई भी विकार, चाहे वो मामूली हो या गंभीर, मानव शरीर पर बुरा प्रभाव डालता है और जीवन में वर्षों तक बना रहता है। रोग की पहचान होने पर जीवन प्रत्याशा कम होने लगती है, लेकिन गोमूत्र उपचार के साथ नहीं। न केवल हमारी प्राचीन चिकित्सा बीमारी को दूर करती है, बल्कि यह मनुष्य के जीवन को उसके शरीर में किसी भी दूषित पदार्थों को छोड़े बिना बढ़ाती है और यही हमारा अंतिम उद्देश्य है।

दवा निर्भरता को कम करना

"सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद् दुःख भाग्भवेत्", इसका अर्थ है सभी को हर्षित होने दें, सभी को बीमारी से मुक्त होने दें, सभी को वास्तविकता देखने दें, कोई भी संघर्ष ना करे। इस आदर्श वाक्य के पालन के माध्यम से हमें अपने समाज को इसी तरह बनाना है। हमारा उपचार विश्वसनीय उपाय देने, जीवन प्रत्याशा में सुधार और प्रभावित लोगों की दवा निर्भरता कम करने के माध्यम से इसे पूरा करता है। इस समकालीन समाज में, हमारे उपाय में किसी भी मौजूदा औषधीय समाधानों की तुलना में अधिक लाभ और कमियां बहुत कम हैं।

पुनरावृत्ति की संभावना को कम करना

व्यापक वैज्ञानिक अभ्यास के अलावा, हमारा केंद्र बिंदु रोग और उसके तत्वों के मूल उद्देश्य पर है जो केवल बीमारी के प्रशासन पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय विकार पुनरावृत्ति की संभावनाओं को बढ़ा सकता है। इस पद्धति के उपयोग से, हम पुनरावृत्ति दर को सफलतापूर्वक कम कर रहे हैं और लोगों की जीवन शैली को एक नया रास्ता दे रहे हैं ताकि वे अपने जीवन को भावनात्मक और शारीरिक रूप से उच्चतर तरीके से जी सकें।

रेसपिरेटरी और पल्मोनरी डिजीज के कारण 

व्यक्ति के फेफड़े तथा श्वसन प्रणाली को बहुत से आंतरिक और बाहरी कारण प्रभावित करते हैं जिनके अलग अलग प्रभाव के परिणामस्वरूप व्यक्ति को कई तरह की बीमारियों से ग्रसित होना पड़ता है l इसी के साथ ही कुछ ऐसे जोखिम कारक भी है जो व्यक्ति के फेफड़े तथा श्वसन प्रणाली को क्षति पहुंचाने तथा इनमे बीमारी को उत्पन्न करने के लिए अपनी सक्रिय भूमिका निभाते हैं l बीमारियों को प्रभावित करने वाले कुछ विशेष तथा सामान्य कारण और कारक निम्नलिखित है -

  • धूम्रपान 
  • जीन उत्परिवर्तन 
  • रसायन तथा प्रदूषण संपर्क 
  • लिंग 
  • उम्र 
  • मोटापा 
  • परिवारिक इतिहास 
  • शराब और तंबाकू का अत्यधिक सेवन 
  • एलर्जी 
  • दवाइयाँ 
  • खराब जीवन-शैली 
  • प्रतिरक्षा प्रणाली 
  • वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण 
  • मौसम तथा जलवायु
  • अन्तर्निहित बीमारियां 
  • प्रदर्शित लक्षणों के प्रति लापरवाही तथा बीमारी को नजरअंदाज करना 


रेसपिरेटरी और पल्मोनरी डिजीज से निवारण 

एक व्यक्ति अपने शरीर के स्वास्थ्य के लिए जिम्मेदार होता है l अपने जीवन-शैली के आधार पर व्यक्ति कई तरह की आदतों को शामिल करता है जिनमे से कई उनके शरीर के लिए घातक सिद्ध होती है अतः व्यक्ति को अपने शरीर को स्वस्थ बनाए रखने के लिए कई तरह की स्वास्थ्यवर्धक आदतों का निर्वहन अपने जीवन में करना चाहिए जैसे - 

  • धूम्रपान तथा तम्बाकू की बुरी लत को त्यागना l
  • एल्कोहल का अत्यधिक सेवन करना छोड़ना l
  • पौष्टिकता से भरपूर संतुलित आहार तथा अधिक से अधिक फल सब्जियों का सेवन करना l
  • रसायन और प्रदूषण के सम्पर्क में आने से ख़ुद को बचाना l
  • अपने वजन को संतुलित रखना तथा अपने मोटापे को कम करने की हरसंभव कोशिश करना l
  • बीमारी से संबंधित अपने पारिवारिक इतिहास की पूरी जानकारी रखना l
  • नित्य सुबह की शुद्ध हवा का शरीर में संचरण हेतु सैर करना, स्वस्थ श्वसन प्रणाली व स्वस्थ फेफड़ों के लिए तरह तरह के योग, व्यायाम, कसरत, प्राणायाम आदि करना l 
  • अपनी कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करना l
  • वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण से बार बार प्रभावित होने से बचना l
  • अपनी बीमारी तथा उनके लक्षणों के प्रति सतर्क रहना व समय पर इसका उचित इलाज लेना l

रेसपिरेटरी और पल्मोनरी डिजीज के लक्षण 

जब कोई व्यक्ति फेफड़ों तथा श्वसन प्रणाली संबंधी किसी बीमारी से जूझ रहा होता है तो उसे इन अंगों की असामान्यता के कई लक्षण एक लंबे समय तक परेशान कर सकते हैं l यह असामान्य लक्षण निम्नलिखित हैं - 

  • साँस लेने में कठिनाई, साँस फूलना, दम घुटना, साँसों में कमी और साँसों की घरघराहट 
  • सूखी और बलगम वाली पुरानी और तीव्र खांसी जो लंबे समय तक रहती है
  • श्वास नलियों से लेकर फेफड़ों तक के किसी भी हिस्से में जकड़न, सूजन, दर्द, गांठ, खिंचाव तथा सिकुड़न 
  • सीने में दर्द, गले में खराश, निगलने और बोलने में कठिनाई 
  • सर्दी, जुकाम, फ्लू, बुखार, नाक बहना तथा नाक में जमाव
  • बलगम का जमाव, गाढ़ापन और बलगम में रक्त 
  • शारीरिक कमजोरी और थकान 
  • भूख की कमी और वजन गिरना 
  • हाथ पैरों की मांसपेशियों में दर्द 

 

रेसपिरेटरी और पल्मोनरी डिजीज की बीमारियाँ 

फेफड़े तथा श्वसन प्रणाली से होने वाले रोगों के समूह में इससे संबंधित कई निम्नलिखित बीमारियों को शामिल किया जाता है - 

  • अस्थमा 
  • एलर्जी 
  • ब्रोंकाइटिस 
  • सारकॉइडोसिस
  • सीओपीडी 
  • अंतरालीय फेफड़े की बीमारी 
  • इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस
  • क्षय रोग
  • कोरोना 
  • वातस्फीति
  • न्यूमोनिया
  • प्ल्यूरल इफ्यूजन

रेसपिरेटरी और पल्मोनरी डिजीज की जटिलताएं 

फेफड़े तथा श्वसन प्रणाली से जुड़ी बीमारियां साधारण से लेकर गंभीरता लिए हुए होती है जिससे ग्रस्त व्यक्ति को इन बीमारियों से जूझते हुए कई गंभीर जटिलताओं का भी सामना करना पड़ता है l ये जटिलताएं है -

  • ऑक्सीजन की कमी 
  • सांस सम्बन्धी कठिनाई या श्वसन की विफलता
  • हृदय की विफलता 
  • धड़कनों की असमानता 
  • गुर्दे की विफलता 
  • उच्च रक्तचाप 
  • गंभीर खांसी 
  • नींद की कमी 
  • निमोनिया 
  • शारीरिक गतिविधियों में रुकावट 
  • तनाव 
  • उर्जा की कमी व थकान

मान्यताएं