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टिनिटस का इलाज

अवलोकन

कान व्यक्ति के शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है जो किसी आवाज़ को सुनने तथा पहचानने के लिए ध्वनि के संग्राहक के रूप में कार्य करता है तथा मस्तिष्क तक ध्वनि के सिग्नलों को संप्रेषित करता है I कान का भीतरी हिस्सा शरीर का संतुलन बनाए रखने में भी मददगार होता है I असीमित शोर का स्तर कान के भीतरी हिस्से की ध्वनि के प्रति संवेदनशील कोशिकाओं नुकसान पंहुचा सकती है I व्यक्ति की श्रवण प्रणाली में कान, कान के अन्दर का भाग और दिमाग को जोड़ने वाली श्रवण तंत्रिका और आवाज़ को प्रोसेस करने वाला दिमाग का हिस्सा शामिल होता है। जब व्यक्ति के कान में कोई अतिरिक्त ध्वनि अथवा किसी तरह के गुंजन की अनुभूति होती है अथवा जब कान के अंदरूनी हिस्से में ध्वनि के संचालन और प्रसंस्करण व श्रवण तंत्रिका में किसी तरह की परेशानी होती तो यह टिनिटस अथवा कान बजने की समस्या कहलाती है I यह आवाजें घंटी बजने, भिनभिनाने या सीटी बजने, चहचहाने की या फ़ुफ़कारने के समान हो सकती हैं।

इन आवाज़ों का कोई बाहरी स्रोत नहीं होता है। इस तरह के गुंजन अथवा ध्वनियाँ की स्वर-मान और तीव्रता धीमे से लेकर बहुत तेज़ हो सकती हैं जो कानों में स्पंदित शोर, लयबद्ध, मध्यवर्ती होती है जो या तो एक समान सुनाई देती है या फिर बदलती रहती है I यह समस्या स्थाई व अस्थाई दोनों रूपों में हो सकती हैं जो वे एक कान बाएँ या दाएँ तरफ, या दोनों में होती हैं। यद्यपि टिनिटस की समस्या से व्यक्ति के कानों में किसी तरह का कोई नुकसान नहीं होता है पर वह कान बजने से वास्तविक आवाज़ पर अपना ध्यान केन्द्रित नहीं कर पाता है I

अनुसंधान

जैन के गोमूत्र चिकित्सा क्लिनिक का उद्देश्य प्राचीन आयुर्वेदिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक के साथ एकीकृत करके एक सुखी और स्वस्थ जीवन बनाना है। हमारी चिकित्सा का अर्थ है आयुर्वेद सहित गोमूत्र व्यक्ति के तीन दोषों पर काम करता है- वात, पित्त और कफ। ये त्रि-ऊर्जा हमारे स्वास्थ्य को बनाए रखती हैं, इन दोषों में कोई भी असंतुलन, मानव स्वास्थ्य और बीमारी के लिए जिम्मेदार है। हमें यह कहते हुए खुशी हो रही है कि हमारे उपचार के तहत हमने इतने सारे सकारात्मक परिणाम देखे हैं। हमारे इलाज के बाद हजारों लोगों को कई बीमारियों से छुटकारा मिला।

हमारे मरीज न केवल अपनी बीमारी को खत्म करते हैं बल्कि हमेशा के लिए एक रोग मुक्त स्वस्थ जीवन जीते हैं। यही कारण है कि लोग हमारी चिकित्सा की ओर ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। आयुर्वेदिक उपचारों में हमारे वर्षों के शोध ने हमें अपनी कार्यप्रणाली को आगे बढ़ाने में मदद की है। हम पूरी दुनिया में एक स्वस्थ और खुशहाल समाज का निर्माण करने के लिए अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य रखते हैं।

गोमूत्र चिकित्सा द्वारा प्रभावी उपचार

गोमूत्र के उपचार के अनुसार, कुछ जड़ी-बूटियां शरीर के दोषों (वात, पित्त और कफ) का कायाकल्प कर सकती हैं और यदि यह दोष शरीर में असमान रूप से वितरित किये जाए, तो यह टिनिटस का कारण बन सकता है। कुछ आयुर्वेदिक दवाओं में उनके उपचार के लिए कई लाभकारी तत्व होते हैं। यह शरीर के पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है।

ओटोविन ड्रॉप्स ( इयर ड्राप)

ओटोविन सिरप

फोर्टेक्स पाक

प्रमुख जड़ी-बूटियाँ जो उपचार को अधिक प्रभावी बनाती हैं

त्रिफला

इसका भारतीय चिकित्सा पद्धति में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है और यह माना जाता है कि यह कान के विकारों से बचाव करता है। एंटीऑक्सिडेंट, इम्युनोमोडायलेटरी, एंटीपीयरेटिक, एनाल्जेसिक और गैस्ट्रोप्रोटेक्टिव के रूप में इस जड़ी बूटी का उपयोग प्रभावी ढंग से कान के विकारों को कम करने में किया जाता है।

लहसुन

लहसुन श्रवण हानि तथा टिनिटस के लक्षणों से राहत देता है, बेहतर रक्त प्रवाह को बढ़ावा देता है कानों में अधिक ऑक्सीजन युक्त रक्त पहुँचाने हेतु, जो निश्चित रूप से बेहतर सुनवाई और टिनिटस की संभावना कम करता है।

सोंठ

यह कान में दबाव के स्तर को राहत देने में मदद करने में सक्षम हो सकता है जो संभवतः टिनिटस को ट्रिगर करता है। यह शरीर के विभिन्न हिस्सों के माध्यम से सूजन को कम करने और रक्त परिसंचरण में मदद करता है I

काली मिर्च

इसमें एंटी इन्फ्लेमेटरी विशेषताएँ हैं। काली मिर्च को बड़े पैमाने पर इसके जैविक, रोगाणुरोधी गुणों और इसके बायोएक्टिव फाइटो-यौगिकों के लिए भी जाना गया है। इस प्रकार यह टिनिटस के इलाज के लिए एक प्रभावी जड़ी बूटी बनाता है।

आक पत्र

इसमें प्राकृतिक एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण होते हैं जो कान के दर्द को शांत करने में मदद कर सकते हैं। यह जड़ी बूटी सेंसरिनुरल बहरापन और टिनिटस के उपचार में प्रभावी है।

कपूर

इस जड़ी बूटी का उपयोग आंतरिक कान के विकारों के इलाज के लिए किया जाता है और रक्त परिसंचरण को बढ़ाने के लिए भी किया जाता है, जो टिनिटस और श्रवण हानि के साथ जुड़े अन्य शोर को स्थिर करने में मदद कर सकता है।

तिल का तेल

तिल का तेल मन और शरीर में एक त्वरित शीतलन और शांत सनसनी लाता है जो प्राण वायु को शांत करने में मदद करता है और इस तरह से टिनिटस का इलाज करता है।

गोखरू

गोखरू विशेष रूप से सहायक होता है यदि टिनिटस कान के बलगम से भरा होने के कारण होता है, जो सूजन से हो सकता है। यह श्लेष्म झिल्ली को सुखाने में विशेष रूप से अच्छा है तथा बलगम की अतिरिक्त मोटाई और तेज़ आवाज़ को कम करता है।

जायफल पाउडर

जायफल पाउडर कई चिकित्सीय गुणों वाली एक जड़ी बूटी है। यह एंटीऑक्सिडेंट में उच्च है और इसमें शक्तिशाली जीवाणु रोधी गुण भी हैं। इस प्रकार टिनिटस को रोकने में सहायक है।

जीवन्ती

यह एक जीवाणु रोधी, एंटी इन्फ्लेमेटरी और एक प्रतिरक्षा बूस्टर माना जाता है। यह सदियों से टिनिटस जैसी स्वास्थ्य स्थितियों के लिए उपयोग किया जाता है।

केवच बीज

यह एंटी इन्फ्लेमेटरी गुणों के साथ एक प्रभावी उपाय माना जाता है। यह जड़ी बूटी कान के सभी प्रकार के विकारों के इलाज के लिए बहुत शक्तिशाली रूप से काम करती है।

पुनर्नवा

सूजन से राहत देना पुनर्नवा के कई लाभों में से एक है। उपचारात्मक घटकों से भरा, पुनर्नवा कान के विकारों को गिराने में उच्च महत्व रखता है।

गोजला

हम अपने गोमूत्र चिकित्सा में गोजला का उपयोग करते हैं, मूल रूप से इसका मतलब है कि हमारी दवा में मुख्य घटक गोमूत्र अर्क है। यह अर्क गाय की देसी नस्लों के मूत्र से बना है। गोजला के अपने फायदे हैं क्योंकि यह किसी भी प्रकार के संदूषण की संभावना से परे है। इसकी गुणवत्ता उच्च है एवं प्रचुर मात्रा में है। जब गोजला आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों के साथ मिलाया जाता है तो यह किसी भी बीमारी के इलाज के लिए अधिक प्रभावी हो जाता है और विशेष बीमारियों में अनुकूल परिणाम देता है। इस अर्क का अत्यधिक परीक्षण किया गया है और इसलिए यह अधिक विश्वसनीय और लाभदायक भी है।

जीवन की गुणवत्ता

गोमूत्र के उपचार से अच्छी सेहत प्राप्त होती है जो कि शरीर के दोषों को संतुलित रखती है। आज, व्यक्ति हमारी देखभाल और उपचार के परिणामस्वरूप अपने स्वास्थ्य में लगातार सुधार कर रहे हैं। इससे उनके दैनिक जीवन की स्थिरता बढ़ती है। गोमूत्र के साथ, आयुर्वेदिक औषधियां भारी खुराक, मानसिक तनाव, विकिरण और कीमोथेरेपी के उपयोग से विभिन्न दुष्प्रभावों को कम करने के लिए एक पूरक चिकित्सा के रूप में काम कर सकती हैं। हम लोगों को सिखाते हैं कि कैसे एक असाध्य बीमारी के साथ शांतिपूर्ण और तनावपूर्ण जीवन जीया जाये, यदि कोई रोग हो तो। हमारा परामर्श लेने के बाद से, हज़ारों लोग स्वस्थ जीवन जीते हैं और यह हमारे लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है कि हम उन्हें एक ऐसी ज़िंदगी दें जो उनका सपना हो।

जटिलता निवारण

आयुर्वेद में गोमूत्र का एक अनोखा महत्व है जो टिनिटस के लिए भी उपयोगी बताया गया है। हमारे वर्षों के कठिन परिश्रम से पता चलता है कि हमारी हर्बल दवाओं के उपयोग से टिनिटस की कई जटिलताएँ गायब हो जाती हैं। पीड़ित हमें बताते हैं कि वे कानों में अप्रिय शोर, दर्द , दबाव, कानों में सीटी, सुनने की क्षमता में कमी, चक्कर, बैचेनी आदि में एक बड़ी राहत देखते हैं I हमारा उपचार रोगी की प्रतिरक्षा प्रणाली में सुधार करते हैं जो टिनिटस की अन्य जटिलताओं के अनुकूल काम करता है I 

जीवन प्रत्याशा

यदि हम किसी व्यक्ति की अस्तित्व प्रत्याशा के बारे में बात कर रहे हैं तो गोमूत्र उपाय स्वयं में एक बड़ी आशा हैं। कोई भी बीमारी या तो छोटी या गंभीर स्थिति में होती है, जो मानव शरीर पर बुरा प्रभाव डालती है और कुछ वर्षों तक मौजूद रहती है, कभी-कभी जीवन भर के लिए। एक बार विकार की पहचान हो जाने के बाद, अस्तित्व प्रत्याशा कम होने लगती  है, लेकिन गोमूत्र चिकित्सा के साथ नहीं। हमारा ऐतिहासिक उपाय अब इस बीमारी से सबसे प्रभावी रूप से ही छुटकारा नहीं दिलाता है, बल्कि उस व्यक्ति की जीवनशैली-अवधि में भी वृद्धि करता है और उसके रक्त प्रवाह में कोई विष भी नहीं छोड़ता है और यही हमारा अंतिम उद्देश्य है।

दवा निर्भरता को कम करना

"सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद् दुःख भाग्भवेत्", जिसका अर्थ है सबको सुखी बनाना, बीमारी से छुटकारा दिलाना, सबको सत्य देखने देना, किसी को भी पीड़ा का अनुभव न होने देना। इस वाक्य के बाद, हम चाहते हैं कि हमारा समाज ऐसा ही हो। हमारी चिकित्सा विश्वसनीय उपचार प्रदान करके, जीवन प्रत्याशा में सुधार और प्रभावित आबादी में दवा की निर्भरता को कम करके इस लक्ष्य को प्राप्त करती है। आज की दुनिया में, हमारी चिकित्सा में अन्य उपलब्ध चिकित्सा विकल्पों की तुलना में अधिक फायदे और शून्य नुकसान हैं।

पुनरावृत्ति की संभावना को कम करना

व्यापक चिकित्सा पद्धति के विपरीत, हम रोग और कारकों के मूल कारण पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो केवल रोग के प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय रोग पुनरावृत्ति की संभावना में सुधार कर सकती हैं। इस पद्धति का उपयोग करके, हम पुनरावृत्ति दरों को सफलतापूर्वक कम कर रहे हैं और लोगों के जीवन को एक नई दिशा दे रहे हैं ताकि वे भावनात्मक और शारीरिक रूप से बेहतर तरीके से अपना जीवन जी सकें।

टिनिटस के कारण

टिनिटस के निम्नलिखित कारण हो सकते है -

  • कान में संक्रमण

कई बार कान में फंगल, बैक्टीरिया व अतिरिक्त श्लेष्म के जमाव के कारण संक्रमण हो जाता है जिसके कारण अंदरूनी हिस्से में सूजन हो जाती है I यह संक्रमण मध्य और आंतरिक कान को नुकसान पहुँचाते है जिसकी वजह से व्यक्ति को टिनिटस की समस्या हो सकती है I

  • कान में चोट  

कान में अचानक व गंभीर चोट लगने, दुर्घटना, गिरने, कान साफ करते समय लापरवाही, या अन्य कारण से कान के भीतरी हिस्से में दबाव पड़ता है व कान के पर्दे क्षतिग्रस्त होते है तथा कान के आंतरिक भाग में स्थित महत्वपूर्ण संरचनाएं भी असामान्य हो जाती है जिससे व्यक्ति को कान में भारीपन व सीटी सुनाई देने जैसी आवाज़ वाले लक्षण महसूस होने लगते है I

  • तीव्र व असीमित स्तर का शोर

अत्यधिक तेज ध्वनि से टिनिटस की संभावना भी बढ़ जाती है। यह अवांछित ध्वनि व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को हानि पहुंचा सकती है। सीमा से अधिक ध्वनि व्यक्ति की श्रंवण संवेदनशीलता को गंभीर नुकसान पहुँचाती है जिससे व्यक्ति के कान बजने लगते है I

  • कुछ रोग

मैनीएरेज़ रोग, ब्रेन ट्यूमर, माइग्रेन, ऑटोस्क्लैरौसिस, हाइपोथाइरॉएडिज़्म, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, ऐनीमिया, हृदय रोग, ऑटोइम्यून विकार, जोड़ों का टैंपोरोमैंडिब्युलर विकार और रक्त-वह तंत्र के विकारों जैसी चिकित्सीय समस्याएं टिनिटस के ख़तरे को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार हो सकती है I 

  • दवाइयों के दुष्प्रभाव

कुछ दवाइयों का सेवन करने से उनका दुष्प्रभाव सीधे व्यक्ति के कान के भीतरी परत को क्षतिग्रस्त करते है जिससे उन्हें कान बजने जैसी समस्या होने लगती है I इन दवाइयों में शामिल है : ऐस्पिरिन, क्विनाइन, क्लोरोक्वाइन,एंटीडिप्रेसेंट, एंटीबायोटिक, कुछ शामक दवाओं, डायूरेटिक, दर्द निवारक आदि दवाओं के दुष्प्रभाव के परिणामस्वरूप व्यक्ति को टिनिटस की समस्या होने का जोखिम बना रहता है I 

  • सिर अथवा गर्दन की चोट

कई बार सिर की चोट के कारण भी व्यक्ति को कान बजने की समस्या हो जाती है। सिर अथवा गर्दन में लगी चोट कान के भीतर की नसों को प्रभावित करती है तथा जो व्यक्ति के टिनिटस की बीमारी का कारण बनती है I   

  • एलर्जी

कई बार किसी पदार्थ के प्रति कोशिकाओं की संवेदनशीलता से व्यक्ति के कान की कोशिकाएं व उत्तक प्रतिक्रियाएँ करने लगती है जिससे व्यक्ति के कान बजने लगते है I जुकाम, फ़्लू, खाद्य पदार्थ, धूल- मिट्टी या किसी भी प्रकार की एलर्जी व्यक्ति के कान को प्रभावित कर टिनिटस की समस्या का कारण बन सकती है I 


टिनिटस से निवारण

व्यक्ति टिनिटस की समस्या से बचने हेतु निन्मलिखित उपाय तथा प्रयास कर सकता है -

  • कानों की नियमित साफ़ सफाई व स्वच्छता करने से व्यक्ति के कानों में अत्यधिक श्लेष्म का जमाव होने से बचाव होता है I
  • व्यक्ति को श्रवण शक्ति को क्षति पहुँचाने वाले ड्रग्स का सेवन कम करना चाहिए I 
  • व्यक्ति को अत्यधिक शोर वाले स्थान से उचित दूरी बनाएं रखनी चाहिए I
  • तेज ध्वनि वाले व्यवसायों में कार्य करने वाले व्यक्तियों को अपनी कानो की सुरक्षा करने हेतु उपकरणों का उपयोग करना चाहिए I
  • नियमित व्यायाम तथा योग रक्त वाहिकाएं और दिमाग की कार्य-क्षमता मजबूत करती है जो टिनिटस के जोखिम को कम करने में सहायता करती है I
  • व्यक्ति को धीमी आवाज़ पर रेडियो, संगीत आदि सुनना चाहिए ।
  • कान की सफाई करते समय व्यक्ति को सतर्कता के साथ कानो की सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए I
  • व्यक्ति को एलर्जी पैदा करने वाले पदार्थो से स्वयं का बचाव करना चाहिए I
  • व्यक्ति को शराब, धूम्रपान तथा धुएँ रहित तम्बाकू उत्पादों का सेवन करने जैसी आदतों को त्यागना चाहिए।

टिनिटस के लक्षण

टिनिटस के संकेतों व लक्षणों में शामिल है -

  • कानो में अप्रिय शोर गूंजना
  • कान में दर्द होना 
  • कान के अंदर दबाव महसूस होना
  • कानो में सीटी बजना 
  • सुनने की क्षमता में कमी आना 
  • पस की तरह कान से तरल बहना
  • वास्तविक आवाज पर ध्यान न लगा पाना
  • नींद की कमी होना
  • चक्कर आना
  • बैचेनी महसूस होना

 

टिनिटस के प्रकार

टिनिटस दो प्रकार के होते हैं जिनमें शामिल है -

  • सब्जेक्टिव टिनिटस

टिनिटस का यह सबसे आम प्रकार होता है। इस प्रकार की समस्या में व्यक्ति अवास्तविक आवाज़ों को सुन सकते हैं। सब्जेक्टिव टिनिटस कान के बाहरी, मध्य या भीतरी कान में होने वाली समस्याओं के कारण हो सकता है जिसमें मस्तिष्क द्वारा पहचानी जाने वाली ध्वनि की नसों को नुकसान होता है I 

  • ऑब्जेक्टिव टिनिटस

ऑब्जेक्टिव टिन्निटस में व्यक्ति को कथित ध्वनि सुनाई देती है जो बिना किसी बाहरी ध्वनि उत्तेजना व स्रोत की उपस्थिति के कानों में पहुँचती है I ऑब्जेक्टिव टिनिटस मध्य कान की हड्डी अथवा रक्तवाहिका में उत्पन्न हुई समस्या के कारण हो सकता है I

टिनिटस की जटिलताएँ

टिनिटस की समस्या से ग्रसित व्यक्ति निन्मलिखित जटिलताओं का सामना कर सकता है - 

  • इस समस्या से व्यक्ति के सुनने की क्षमता कमज़ोर हो सकती है I
  • अनुपचारित टिनिटस से व्यक्ति में कई मनोवैज्ञानिक समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं।
  • व्यक्ति को हाइपरऐक्यूसिस की समस्या हो सकती है जिसमें वह ध्वनि के प्रति अतिसंवेदनशील बन जाते हैं I
  • लगातार आने वाली तीव्र व उच्च आवाज व्यक्ति को बहरा कर सकती है I
  • व्यक्ति को दिल या रक्त वाहिकाओं की बीमारी हो सकती है I
  • व्यक्ति अवसाद से घिर सकता है I
  • व्यक्ति को मस्तिष्कावरण शोथ की समस्या हो सकती है जिसके अंतर्गत उनके रीढ़ की हड्डी और मस्तिष्क के आस-पास झिल्ली सूज जाती है I

मान्यताएं