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पित्ताशय की पथरी का इलाज

अवलोकन

हमारे शरीर में स्थित लिवर के ठीक नीचे पित्त की थैली अर्थात पित्ताशय अंग एक गुब्बारे की आकृति में उपस्थित होता है l यह पित्ताशय मुख्यतः तीन परतों से घिरा हुआ होता   है l पहली परत म्युकोजल कहलाती है l इस परत के ठीक ऊपर मस्कुलर परत होती है तथा सबसे ऊपर सिरोसा परत बनी होती है l पित्ताशय का प्रमुख कार्य लिवर में उत्पन्न होने वाले पित्त का संग्रह करना होता है l यह पित्त पाचन तरल पदार्थ होता है जिसे पित्ताशय भोजन करने के बाद उसे पचाने हेतु बाइल डक्ट की सहायता से हमारी छोटी आंत में प्रवाहित करता है और इस तरह से यह शरीर में भोजन को पचाने की क्रिया में सहायता करता है l 

जब पित्ताशय में क्रिस्टल बॉल जैसे ठोस पदार्थ बनने लगते है तो यह पित्ताशय की पथरी कहलाता है l पित्ताशय की पथरी को पित्त के पथरी भी कहा जाता है l यह पथरी ठोस पदार्थ के टुकड़े होते है जो पित्त की थैली में बनते है l यह आकार में छोटे दाने से लेकर बड़े कंचे जैसा हो सकते है l जब पित्त में कोलेस्ट्रॉल और बिलरूबिन की मात्रा ज्यादा हो जाती है तो पथरी का निर्माण होने लगता है l बिलरूबिन एक यौगिक होता है जो शरीर के अपशिष्ट उत्पादों की निकासी में आवश्यक होता है l पथरी की समस्या से पित्ताशय की दीवारें उत्तेजित होने लगती है तथा इससे पित्त की नलिकायें बाधित हो सकती है l पथरी होने पर व्यक्ति को भारी दर्द होता है जो उनके लिए असहनीय हो जाता है l

अनुसंधान

जैन के गोमूत्र चिकित्सा क्लिनिक का उद्देश्य प्राचीन आयुर्वेदिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक के साथ एकीकृत करके एक सुखी और स्वस्थ जीवन बनाना है। हमारी चिकित्सा का अर्थ है आयुर्वेद सहित गोमूत्र व्यक्ति के तीन दोषों पर काम करता है- वात, पित्त और कफ। ये त्रि-ऊर्जा हमारे स्वास्थ्य को बनाए रखती हैं, इन दोषों में कोई भी असंतुलन, मानव स्वास्थ्य और बीमारी के लिए जिम्मेदार है। हमें यह कहते हुए खुशी हो रही है कि हमारे उपचार के तहत हमने इतने सारे सकारात्मक परिणाम देखे हैं। हमारे इलाज के बाद हजारों लोगों को कई बीमारियों से छुटकारा मिला।

हमारे मरीज न केवल अपनी बीमारी को खत्म करते हैं बल्कि हमेशा के लिए एक रोग मुक्त स्वस्थ जीवन जीते हैं। यही कारण है कि लोग हमारी चिकित्सा की ओर ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। आयुर्वेदिक उपचारों में हमारे वर्षों के शोध ने हमें अपनी कार्यप्रणाली को आगे बढ़ाने में मदद की है। हम पूरी दुनिया में एक स्वस्थ और खुशहाल समाज का निर्माण करने के लिए अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य रखते हैं।

गोमूत्र चिकित्सा द्वारा प्रभावी उपचार

गोमूत्र चिकित्सीय दृष्टिकोण के अनुसार कुछ जड़ी-बूटियां शारीरिक दोषों (वात, पित्त और कफ) को फिर से जीवंत करने का काम करती हैं जो कि पित्ताशय की पथरी का कारण होती हैं अगर वे असम्बद्ध हैं। कुछ आयुर्वेदिक दवाओं में इनसे निपटने के लिए बहुत से सहायक तत्व शामिल होते हैं। यह काया के चयापचय में सुधार करता है।

हाइराइल + लिक्विड ओरल

हेपटोन बी+ कैप्सूल

फोर्टेक्स पाक

केमोट्रिम+ सिरप

प्रमुख जड़ी-बूटियाँ जो उपचार को अधिक प्रभावी बनाती हैं

आक पत्र

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गोजला

हम अपने गोमूत्र चिकित्सा में गोजला का उपयोग करते हैं, मूल रूप से इसका मतलब है कि हमारी दवा में मुख्य घटक गोमूत्र अर्क है। यह अर्क गाय की देसी नस्लों के मूत्र से बना है। गोजला के अपने फायदे हैं क्योंकि यह किसी भी प्रकार के संदूषण की संभावना से परे है। इसकी गुणवत्ता उच्च है एवं प्रचुर मात्रा में है। जब गोजला आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों के साथ मिलाया जाता है तो यह किसी भी बीमारी के इलाज के लिए अधिक प्रभावी हो जाता है और विशेष बीमारियों में अनुकूल परिणाम देता है। इस अर्क का अत्यधिक परीक्षण किया गया है और इसलिए यह अधिक विश्वसनीय और लाभदायक भी है।

जीवन की गुणवत्ता

गोमूत्र के उपचार से अच्छी सेहत प्राप्त होती है जो कि शरीर के दोषों को संतुलित रखती है। आज, व्यक्ति हमारी देखभाल और उपचार के परिणामस्वरूप अपने स्वास्थ्य में लगातार सुधार कर रहे हैं। इससे उनके दैनिक जीवन की स्थिरता बढ़ती है। गोमूत्र के साथ, आयुर्वेदिक औषधियां भारी खुराक, मानसिक तनाव, विकिरण और कीमोथेरेपी के उपयोग से विभिन्न दुष्प्रभावों को कम करने के लिए एक पूरक चिकित्सा के रूप में काम कर सकती हैं। हम लोगों को सिखाते हैं कि कैसे एक असाध्य बीमारी के साथ शांतिपूर्ण और तनावपूर्ण जीवन जीया जाये, यदि कोई रोग हो तो। हमारा परामर्श लेने के बाद से, हज़ारों लोग स्वस्थ जीवन जीते हैं और यह हमारे लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है कि हम उन्हें एक ऐसी ज़िंदगी दें जो उनका सपना हो।

जटिलता निवारण

आयुर्वेद में गोमूत्र का एक विशेष स्थान है जिसे पित्त की पथरी जैसी भयानक बीमारियों के लिए भी फायदेमंद बताया जाता है। हमारी वर्षों से कड़ी मेहनत द्वारा पता चलता है कि पित्त की कई जटिलताएं हमारे आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का उपयोग करके गायब हो जाती हैं। हमारे रोगियों को दर्द, त्वचा और आंखों का पीलापन, पेट फूलना, उल्टी और मतली, अपच, शारीरिक कमजोरी और थकावट, पेशाब का काला पड़ना, उनके शरीर में हार्मोनल और रासायनिक परिवर्तनों संतुलन एवं  नियंत्रण महसूस हुआ है, रोगियों की प्रतिरक्षा प्रणाली में भी सुधार हुआ है जो की अन्य पित्ताशय की जटिलताओं के लिए भी अनुकूल रूप से काम करता है।

जीवन प्रत्याशा

अगर हम जीवन प्रत्याशा के बारे में बात कर रहे हैं, तो गोमूत्र उपाय अपने आप में बहुत बड़ी आशा है। कोई भी विकार चाहे छोटे हो या गंभीर चरण में, मानव शरीर पर बुरे प्रभाव के साथ आते है और जीवनभर के लिए मौजूद रहते है। एक बार जब विकार को पहचान लिया जाता है, तो जीवन प्रत्याशा छोटी होने लगती है, लेकिन गोमूत्र चिकित्सा के साथ नहीं। हमारा ऐतिहासिक उपाय ना केवल पूरी तरह से विकार का इलाज करता है बल्कि शरीर में किसी भी विषाक्त पदार्थों को छोड़ने के बिना उस व्यक्ति के जीवन-काल में वृद्धि करता है और यही हमारा अंतिम उद्देश्य है।

दवा निर्भरता को कम करना

“सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद् दुःख भाग्भवेत्", अर्थात सभी को प्रसन्न होने दो, सबको बीमारी से मुक्त कर दो, सभी को सत्य देख लेने दो, किसी को कष्ट नहीं होने दो।" हम चाहेंगे कि इस आदर्श वाक्य को अपनाकर हमारी संस्कृति भी ऐसी ही हो। हमारी चिकित्सा कुशल देखभाल प्रदान करके, प्रभावित रोगियों की जीवन प्रत्याशा को बढ़ाने और दवा निर्भरता को कम करके इसे पूरा करती है। इस नई दुनिया में, हमारे उपचार में उपलब्ध किसी भी औषधीय समाधान की तुलना में अधिक लाभ और कम नकारात्मकता हैं।

पुनरावृत्ति की संभावना को कम करना

व्यापक चिकित्सा पद्धति के विपरीत, हम रोग और कारकों के मूल कारण पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो केवल रोग के प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय रोग पुनरावृत्ति की संभावना में सुधार कर सकती हैं। इस पद्धति का उपयोग करके, हम पुनरावृत्ति दरों को सफलतापूर्वक कम कर रहे हैं और लोगों के जीवन को एक नई दिशा दे रहे हैं ताकि वे भावनात्मक और शारीरिक रूप से बेहतर तरीके से अपना जीवन जी सकें।

पित्ताशय की पथरी के कारण 

पित्ताशय की पथरी कई कारणों से हो सकती है जिनमे शामिल है - 

  • मोटापा

व्यक्ति का अधिक वजन होने से पित्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ जाती है जिससे पथरी का खतरा बढ़ जाता है l ऐसे लोग जिनके पेट के आसपास अधिक चर्बी होती है उन्हें पित्ताशय की पथरी का जोखिम अधिक रहता है l यह माना जाता है कि जो व्यक्ति 40 से अधिक बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) वाले होते है उनके पित्त में पथरी के मामले अधिक देखने को मिलते है l 

  • पारिवारिक इतिहास 

पित्ताशय की पथरी परिवार में चलने वाला एक विकार है जिनका सम्बन्ध आनुवांशिकता से हो सकता है l यदि किसी व्यक्ति के परिवार में किसी अन्य सदस्य को पित्त की पथरी की समस्या है तो दूसरे व्यक्तियों को भी अनुवांशिकता के कारण यह समस्या होने की संभावना अधिक रहती है l 

  • उम्र 

पित्ताशय की पथरी होने में उम्र का भी काफी फर्क पड़ता है l वे व्यक्ति जिसकी उम्र पचास साल से अधिक होती है उन्हें पित्ताशय की पथरी होने का जोखिम प्रायः अधिक रहता है l 

  • मधुमेह 

मधुमेह से ग्रसित व्यक्तियों में पित्त एसिड और लिपिड रचना का स्तर आमतौर पर बढ़ जाता है, यह बढ़ा हुआ स्तर उनके पित्ताशय में पथरी का कारण बनते है l 

  • असंतुलित आहार 

पित्ताशय की पथरी होने की संभावना उन व्यक्तियों में अधिक रहती है जो अधिक वसा, तेल-मसाले वाले आहार का सेवन करते है अथवा जो जंक फूड का सेवन अधिक करते है l साथ ही भोजन करने की अनियमितता भी पित्ताशय की पथरी का कारण बन सकती है l

  • गर्भावस्था 

जो महिलाएं गर्भवती होती है उन्हें पित्ताशय की पथरी होने का खतरा कई अधिक हो सकता है l गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर उच्च हो जाता है, एस्ट्रोजन का यह बढ़ा हुआ स्तर उनके पित्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को अधिक करता  है l जिसके कारण उनके पित्ताशय में पथरी होने लगती है l यह पथरी महिलाओं की गर्भावस्था के ठीक बाद भी बन सकती है l 

  • गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन 

जब महिलाओं द्वारा अवांछित गर्भधारण से बचने के लिए जन्म नियंत्रण गोलियों का सेवन किया जाता है इन गोलियों में उपस्थित तत्व उनके शरीर में हार्मोनल असंतुलन का कारण बनते है l उनके पित्त में कोलेस्ट्रोल के स्तर में वृद्धि होने लगती है और यह स्थिति उनके पित्ताशय की पथरी के जोखिमों को बढाने का कार्य करती है l

  • शारीरिक असक्रियता 

वे व्यक्ति जो एक सुस्त जीवन-शैली को अपनाते है तथा जो अपने जीवन में शारीरिक रूप से असक्रिय रहते है, जिनके जीवन में व्यायाम, कसरत आदि की कमी रहती है अथवा जो बहुत कम शारीरिक गतिविधियां करते है उन्हें पित्ताशय की पथरी का जोखिम अधिक रहता है l 

  • कुछ रोग 

लिवर सिरोसिस, पित्ताशय पथ के संक्रमण, आंतों की बीमारी, हेमोलिटिक एनीमिया आदि कई ऐसे रोगों है जिससे ग्रस्त व्यक्तियों को पित्ताशय की पथरी होने का खतरा बढ़ जाता है l 


पित्ताशय की पथरी से निवारण 

कुछ तरीकों को अपनाकर व्यक्ति पित्ताशय में पथरी को बनने से रोक सकते है l ये तरीके है - 

  • व्यक्ति को अपने वजन को बढ़ने से रोकना चाहिए तथा बढ़े हुए वजन को संतुलित रखने का प्रयास करना चाहिए l
  • व्यक्ति को नियमित रूप से व्यायाम, कसरत, सैर आदि करनी चाहिए l
  • अपने जीवन में व्यक्ति को अधिक से अधिक शारीरिक गतिविधियों को अपनाना चाहिए l
  • मधुमेह से ग्रसित व्यक्तियों को अपने शरीर में शर्करा के स्तर को संतुलित बनाए रखना चाहिए l
  • बढ़ती उम्र में व्यक्ति को अपनी सेहत, खानपान आदि का खास ख्याल रखना चाहिए l
  • व्यक्ति को स्वस्थ तथा संतुलित आहार, फल व सब्जियों का भरपूर सेवन करना चाहिए l
  • व्यक्ति को अधिक कार्बोहाइड्रेट, आयरन, अधिक भारी तथा तैलीय खाद्य पदार्थों का सेवन करने से बचना चाहिए l
  • महिलाओं को लंबे समय तक गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करने से बचना चाहिए l
  • व्यक्ति को अधिक से अधिक मात्रा में पानी पीना चाहिये l
  • बढ़ती उम्र में व्यक्तियों को अपनी सेहत, खानपान आदि का खास ख्याल रखना चाहिए l

पित्ताशय की पथरी के लक्षण 

जैसे जैसे व्यक्ति के पित्ताशय में पथरी की स्थिति गंभीर होने लगती है उनके शरीर में निम्नलिखित लक्षण और संकेत नजर आने लगते हैं - 

  • पेट के दाहिनी ओर के ऊपरी भाग में असहनीय दर्द होना 
  • रह रह कर दर्द उठना तथा एक लंबे तक दर्द बने रहना 
  • शरीर की त्वचा तथा आँखों का पीला हो जाना 
  • पेट फूलने की समस्या होना 
  • उल्टी, मतली आना और जी मिचलाना 
  • अपच अथवा बदहजमी होना
  • शारीरिक कमजोरी और थकावट होना
  • पेट पर दबाव महसूस होना
  • भूख की कमी हो जाना
  • बुखार आना तथा ठंड लगना
  • मूत्र का रंग गहरा हो जाना

 

पित्ताशय की पथरी के प्रकार 

पित्ताशय की पथरी दो प्रकार हो होती है - 

  • कोलेस्ट्रॉल गॉल स्टोन 

कोलेस्ट्रोल गैलस्टोन पित्ताशय की पथरी का सबसे आम प्रकार होता है l कोलेस्ट्रॉल गैल स्टोन दिखने में पीले रंग के होते है l इस प्रकार की पथरी पित्ताशय में मुख्य रूप से अपच कोलेस्ट्रोल के कारण बनती है l यह कोलेस्ट्रॉल प्रायः अघुलनशील होता है जिसका उच्च स्तर पित्ताशय में पथरी का निर्माण करता है l इसके अलावा कई अन्य घटक भी कोलेस्ट्रॉल गैलस्टोन का कारण बन सकते है l 

  • पिगमेंट गॉल स्टोन

पिगमेंट गाॅलस्टोन उस समय बनते है जब पित्त रस में बिलरूबिन की अत्यधिक मात्रा हो जाती है l पिगमेंट गाॅलस्टोन आकार में छोटे तथा काले अथवा गहरे भूरे रंग में होते है l बिलरूबिन द्रव को लिवर द्वारा निर्मित किया जाता है और पित्ताशय द्वारा उन्हें संग्रहित किया जाता है l

पित्ताशय की पथरी की जटिलताएं 

व्यक्ति को अधिक समय से होने वाली पित्ताशय की पथरी एक घातक रूप ले सकती है जिससे ग्रस्त व्यक्तियों को निम्नलिखित जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है - 

  • व्यक्ति के पित्ताशय में संक्रमण हो सकता है l
  • व्यक्ति को रक्त संक्रमण की समस्या हो सकती है l
  • व्यक्ति पीलिया की बीमारी से पीड़ित हो सकता है 
  • व्यक्ति को पित्ताशय का कैंसर जैसी गंभीर समस्या का सामना करना पड़ सकता है l
  • पीड़ित व्यक्ति को असहनीय दर्द झेलना पड़ता है l
  • व्यक्ति को नींद की कमी हो जाती है l
  • व्यक्ति के पित्ताशय की थैली में सूजन आ जाती है 
  • व्यक्ति के आंत्र में रुकावट होने सकती है l

मान्यताएं