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गठिया रोग का इलाज

अवलोकन

व्यक्ति के शरीर में प्रायः कई तरह के जोड़ होते है l यह जोड़ दो या दो से अधिक हड्डियों के बीच अथवा हड्डी तथा एक उपास्थि (कार्टिलेज) के बीच अभिव्यक्ति का स्थान होता है l शरीर में यह जोड़ तीन प्रकार में मौजूद होते है l कुछ जोड़ अचल होते है, कुछ थोड़ा कम हिलने तथा मुड़ने वाले तथा कुछ हर जगह से हिलने व मुड़ने वाले जोड़ होते है l यह जोड़ व्यक्ति के कंधों, कुहनियों, कूल्हे तथा घुटनों सहित कई स्थानों पर होते है l जब व्यक्ति के इन जोड़ों में किसी वजह से सूजन आती है तो इसे गठिया रोग कहा जाता है l यह सूजन दर्द के साथ होने वाली सूजन होती है जो एक या एक से अधिक जोड़ों में भी हो सकती है l

इस रोग को संधिशोथ के नाम से भी जाना जाता है l यह रोग समय से साथ विकसित होने वाला रोग होता है जो आमतौर पर अधिक उम्र के व्यक्तियों में ज्यादा देखने को मिलता है l हालांकि बच्चों और युवा भी इस रोग का शिकार होते जा रहे हैं l गठिया रोग व्यक्ति के घुटनों तथा कूल्हे की हड्डियों को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है l इसी के साथ व्यक्ति को पूरे बदन में दर्द तथा अकड़न जैसी समस्या भी इस रोग के अंतर्गत होने लगती है l ऐसे रोग में व्यक्ति के जोड़ों की बहुत ज्यादा क्षति होती है l

अनुसंधान

जैन के गोमूत्र चिकित्सा क्लिनिक का उद्देश्य प्राचीन आयुर्वेदिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक के साथ एकीकृत करके एक सुखी और स्वस्थ जीवन बनाना है। हमारी चिकित्सा का अर्थ है आयुर्वेद सहित गोमूत्र व्यक्ति के तीन दोषों पर काम करता है- वात, पित्त और कफ। ये त्रि-ऊर्जा हमारे स्वास्थ्य को बनाए रखती हैं, इन दोषों में कोई भी असंतुलन, मानव स्वास्थ्य और बीमारी के लिए जिम्मेदार है। हमें यह कहते हुए खुशी हो रही है कि हमारे उपचार के तहत हमने इतने सारे सकारात्मक परिणाम देखे हैं। हमारे इलाज के बाद हजारों लोगों को कई बीमारियों से छुटकारा मिला।

हमारे मरीज न केवल अपनी बीमारी को खत्म करते हैं बल्कि हमेशा के लिए एक रोग मुक्त स्वस्थ जीवन जीते हैं। यही कारण है कि लोग हमारी चिकित्सा की ओर ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। आयुर्वेदिक उपचारों में हमारे वर्षों के शोध ने हमें अपनी कार्यप्रणाली को आगे बढ़ाने में मदद की है। हम पूरी दुनिया में एक स्वस्थ और खुशहाल समाज का निर्माण करने के लिए अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य रखते हैं।

गोमूत्र चिकित्सा द्वारा प्रभावी उपचार

गोमूत्र चिकित्सा के दृष्टिकोण के अनुरूप कुछ जड़ी-बूटियां शारीरिक दोषों (वात, पित्त और कफ) को फिर से जीवंत करने का काम करती हैं जो कि गठिया रोग का कारण बन सकती हैं यदि वे असंतुष्ट हों। उनसे निपटने के लिए कुछ आयुर्वेदिक दवाओं में कई लाभकारी तत्व शामिल हैं। यह शरीर के चयापचय में सुधार करता है।

जीवन की गुणवत्ता

गोमूत्र का उपचार अच्छा स्वास्थ्य देता है और संतुलन बनाए रखता है। आज, हमारे उपचार के कारण, लोग अपने स्वास्थ्य में लगातार सुधार कर रहे हैं। यह उनके दैनिक जीवन की गुणवत्ता में सुधार करता है। भारी खुराक, मानसिक तनाव, विकिरण और कीमोथेरेपी के उपयोग से होने वाले विभिन्न दुष्प्रभावों को कम करने के लिए आयुर्वेदिक चिकित्सा और गोमूत्र को पूरक चिकित्सा के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। हम लोगों को असाध्य रोगों से खुश, तनाव मुक्त जीवन जीना सिखाते हैं। हमारे उपचार को प्राप्त करने के बाद हजारों लोग एक संतुलित जीवन जी रहे हैं। यह हमारे लिए एक बड़ी उपलब्धि है कि हम उन्हें उनके सपनों की जिंदगी दे सकते है।

जटिलता निवारण

आयुर्वेद में, गोमूत्र की एक विशेष स्थिति है जिसे अक्सर गठिया जैसी भयानक बीमारियों के लिए मददगार कहा जाता है। हमारे वर्षों के श्रमसाध्य काम यह साबित करते हैं कि हमारी जड़ी-बूटियों का उपयोग करने से गठिया की लगभग सभी जटिलताएँ गायब हो जाती हैं। पीड़ित हमें बताते हैं कि वे जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द, सूजन वाले घुटने, कठोरता, लालिमा और थकान को नियंत्रित करते हैं और शरीर में हार्मोनल और रासायनिक परिवर्तनों को संतुलित करते हैं, रोगी की प्रतिरक्षा प्रणाली में सुधार करते हैं जो अन्य शारीरिक जटिलताओं के लिए अनुकूल रूप से काम करता है।

जीवन प्रत्याशा

अगर हम जीवन प्रत्याशा के बारे में चिंतित हैं, तो गोमूत्र उपचार अपने आप में बहुत बड़ा वादा है। कोई भी विकार, चाहे वह मामूली हो या गंभीर, किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और जीवन में कई वर्षों तक रहता है। जीवन प्रत्याशा संक्षिप्त है जब तक कि स्थिति की पहचान नहीं की जाती है, लेकिन गोमूत्र उपचार के साथ नहीं। न केवल हमारी प्राचीन चिकित्सा बीमारी को कम करती है, बल्कि यह व्यक्ति की दीर्घायु को उसके शरीर में कोई भी दूषित तत्व नहीं छोड़ती है और यह हमारा अंतिम उद्देश्य है।

दवा निर्भरता को कम करना

"सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद् दुःख भाग्भवेत्", इसका अर्थ है कि सभी को खुश रहने दें, सभी को रोग मुक्त होने दें, सभी को सत्य देखने दें, कोई भी दुःख का अनुभव नहीं करे।  इस कहावत का पालन करते हुए, हम अपने समाज को इसी तरह बनाना चाहते हैं। हमारा उपाय विश्वसनीय उपचार देने, जीवन प्रत्याशा बढ़ाने और प्रभावित लोगों की दवा निर्भरता कम करने के माध्यम से इसे पूरा करता है। हमारे उपाय में इस वर्तमान दुनिया में उपलब्ध किसी भी वैज्ञानिक उपचारों की तुलना में अधिक लाभ और शून्य जोखिम हैं।

पुनरावृत्ति की संभावना को कम करना

व्यापक वैज्ञानिक अभ्यास के अलावा, हमारा केंद्र बिंदु रोग और उसके तत्वों के मूल उद्देश्य पर है जो केवल बीमारी के प्रशासन पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय विकार पुनरावृत्ति की संभावनाओं को बढ़ा सकता है। इस पद्धति के उपयोग से, हम पुनरावृत्ति दर को सफलतापूर्वक कम कर रहे हैं और लोगों की जीवन शैली को एक नया रास्ता दे रहे हैं ताकि वे अपने जीवन को भावनात्मक और शारीरिक रूप से उच्चतर तरीके से जी सकें।

गठिया रोग के कारण 

गठिया रोग किसी भी व्यक्ति को हो सकता है जिसके निम्नलिखित कारण हो सकते है - 

  • आनुवंशिक 

कुछ प्रकार के गठिया परिवारों में चलने वाले रोग होते है l यदि किसी व्यक्ति के माता-पिता अथवा भाई-बहनों में इस प्रकार का विकार है तो उन्हें भी गठिया रोग होने की संभावना अधिक हो सकती है l यह समस्या पीढ़ी दर पीढ़ी परिवार के सदस्य में फैलने वाली बीमारी होती है l 

  • कैल्शियम की कमी 

कैल्शियम का मुख्य काम हड्डियों को मजबूत करना है l कैल्शियम से युक्त सभी तरह के पौष्टिक पदार्थों की आवश्यकता होती है जो शरीर को सेहतमंद बनाए रखने में सहायता करते है l जब व्यक्ति कैल्शियम युक्त आहार का बहुत कम सेवन करते है तो उनके शरीर में होने वाली कैल्शियम की कमी गठिया रोग की संभावना को बढ़ाते हैं l

  • मोटापा 

व्यक्ति के शरीर का अधिक वजन जोड़ों में दर्द के साथ गठिया रोग की समस्या को उत्पन्न करने का कारण बन सकते है l आम तौर पर मोटापा नरम उतकों में क्षति पहुँचाता है l शरीर के बढ़े हुए वजन से जोड़ों पर सामान्य से अधिक दबाव पड़ता है l मोटापा ज्यादातर घुटने तथा कूल्हे के जोड़ों पर गठिया रोग को उत्पन्न करता है l

  • पुरानी जोड़ों की चोट 

गठिया रोग होने का जोखिम उन लोगों को अधिक हो सकता है जिसे किसी भी तरह के जोड़ों की शारीरिक चोट लगी हो l यह चोट व्यक्ति को किसी तरह की दुर्घटना, गिरावट, शारीरिक आघात आदि के कारण हो सकती है l काफी समय तक नज़रअंदाज़ होने वाली यह चोट व्यक्ति को गठिया रोग से पीड़ित कर सकती है l

  • कमज़ोर रोग प्रतिरोधक क्षमता

जब व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है तो उन्हें गठिया रोग हो सकता है l ऐसे में व्यक्ति की प्रतिरक्षा प्रणाली जोड़ों के अस्तर पर हमला कर उन्हें क्षतिग्रस्त करने का काम करती है l साथ ही शरीर के अन्य अंगों को भी प्रभावित करती है l इस स्थिति के कारण क्षतिग्रस्त हुई जोड़ों में सूजन और दर्द होता है जो गठिया रोग के खतरे को बढ़ाते है l

  • कुछ दवाइयाँ 

कई बार कुछ दवाइयों के दुष्प्रभाव के कारण व्यक्ति को गठिया होने की संभावना रहती है l स्टेटिन नामक दवा जो शरीर में कोलेस्ट्रोल के स्तर को कम करने का काम करती है जोड़ों के दर्द और सूजन का कारण बनती है l इसके अलावा फ्लेक्टेसोन, लेट्रोजोल, रायिसड्रॉनेट जैसी कुछ अन्य दवाइयों से भी व्यक्ति को गठिया होने का खतरा हो सकता है l 

  • संक्रमण 

किसी तरह से वायरस, बैक्टीरिया अथवा फंगस की वजह से जोड़ों में हुए संक्रमण भी गठिया रोग के लिए जिम्मेदार हो सकते है l जब बैक्टीरिया अथवा वायरस जोड़ों में प्रवेश कर अपनी संख्या को दोगुना करता है तो जोड़ों में तथा आसपास के उतकों में क्षति पहुँचती है l यह क्षति जोड़ों में दर्द भरे लक्षण के साथ गठिया रोग को पैदा करती है l 

  • कार्टिलेज की मात्रा में कमी 

कार्टिलेज शरीर के जोड़ों के नरम और लचीले ऊतक होते है l यह जोड़ों पर पड़ने वाले दबाव को अवशोषित करने का कार्य करते है जिससे जोड़ों में मजबूती बनी रहती है l परंतु जब इन कार्टिलेज उतकों की मात्रा में कमी हो जाती है तो व्यक्ति के जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है जिससे उसे गठिया रोग होता है l 

  • कुछ खाद्य पदार्थ 

कुछ खाद्य पदार्थों का अत्यधिक सेवन व्यक्ति के गठिया रोग को उत्पन्न करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है l आहार जिनमें शर्करा की मात्रा अधिक हो, फ्राइड और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ, नमक का अत्यधिक सेवन, मक्के के तेल का अधिक उपयोग आदि कई ऐसे खाद्य पदार्थ है जो गठिया रोग के जोखिम को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार समझे जाते है l 

 

गठिया रोग से निवारण 

व्यक्ति अपने शरीर में कुछ अच्छे बदलाव लाकर गठिया रोग को उभरने अथवा बढ़ने से रोक सकते है l यह बदलाव निम्नलिखित है - 

  • व्यक्ति को अपना बढ़ा हुआ वजन कम करना चाहिए तथा वजन बढ़ने से रोकना चाहिए जिससे उनके जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव को कम किया जा सके l
  • कसरत, व्यायाम आदि से जोड़ों में मजबूती तथा सक्रियता बनी रहती है l अतः व्यक्ति को नियमित सैर, कसरत तथा व्यायाम आदि करना चाहिए l
  • व्यक्ति को संतुलित आहार का सेवन करना चाहिए तथा गठिया रोग को विकसित करने वाले अनुचित खाद्य पदार्थों का सेवन करने से बचना चाहिए l
  • व्यक्ति को अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने के लिए प्रभावी प्रयास करने चाहिए l 
  • व्यक्ति को शरीर में कैल्शियम की पर्याप्त मात्रा का ध्यान रखना चाहिए l 
  • व्यक्ति को शारीरिक गतिविधियों में लगने वाली जोड़ों की चोट से बचने की कोशिश करनी चाहिए l

गठिया रोग के लक्षण 

यदि किसी व्यक्ति को गठिया रोग होता है तो उन्हें निम्नलिखित लक्षणों तथा संकेतों द्वारा इसका पता चलता है l ये लक्षण है -

  • जोड़ों तथा मांसपेशियों में लगातार दर्द रहना 
  • घुटनों में सूजन होना 
  • जोड़ों में अकड़न आ जाना 
  • चलने-फिरने में तकलीफ़ होना 
  • दर्द वाले जोड़ों की त्वचा का लाल हो जाना 
  • थकान और कमज़ोरी महसूस होना 
  • जोड़ों के आस-पास ठोस गोलाकार गांठ जैसे उभार आना 
  • शारीरिक गतिविधियों में कमी आना 
  • जोड़ों में दर्द की वजह से बार बार बुखार आना 
  • पूरे शरीर में जकड़न जैसा अनुभव होना 

 

गठिया रोग के प्रकार 

गठिया रोग मुख्य रूप से निम्न प्रकार होते है - 

  • ऑस्टियोआर्थराइटिस
  • रूमेटाइड आर्थराइटिस
  • एंकिलाॅजिंग स्पोंडिलाइटिस
  • गाउट 
  • सर्वाइकल  स्पोंडिलोसिस 
  • सोरियाटिक आर्थराइटिस
  • जुवेनाइल इडियोपैथिक आर्थराइटिस
  • सेप्टिक गठिया
  • प्रतिक्रियाशील गठिया

गठिया रोग की जटिलताएँ 

गठिया रोग से पीड़ित व्यक्ति को निम्नलिखित जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है -

  • इस रोग से पीड़ित व्यक्ति के घुटने के जोड़ खराब हो सकते है l
  • व्यक्ति की हड्डियाँ कमजोर हो सकती है जिस वजह से बार बार हड्डी टूटने का जोखिम हो सकता है l
  • व्यक्ति को हृदय संबंधी समस्याएं हो सकती है l
  • व्यक्ति के गर्दन और सीने में दर्द बढ़ सकता है l
  • व्यक्ति को कार्पल टनल सिंड्रोम हो सकता है जो दर्द के साथ हाथ, पैरों उंगलियों तथा अंगूठे में झुनझुनी को बढ़ाता है l 
  • जोड़ों में होने वाली सूजन शरीर के अन्य हिस्सों में भी सूजन पैदा कर सकती है l 
  • गठिया रोग से व्यक्ति को फेफड़ों की बीमारी हो सकती है l

मान्यताएं

क्या कह रहे हैं मरीज

"विभिन्न अध्ययन किए गए हैं जहां जैन गाय मूत्र चिकित्सा ने रोगियों में महत्वपूर्ण सुधार दिखाया है।"