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माइग्रेन का इलाज

अवलोकन

जब किसी व्यक्ति के सिर के आधे हिस्से में दर्द होता है तो यह माइग्रेन की स्थिति होती है l मस्तिष्क की एक्साइटेबल ब्रेन कोशिकाओं के समूहों द्वारा गतिविधि की तरंगों के कारण माइग्रेन का दर्द शुरू हो जाता है l जब मस्तिष्क की असामान्य गतिविधि के फलस्वरूप तंत्रिका संकेत, रक्त और रसायन अस्थायी रूप से प्रभावित होते है तो व्यक्ति को माइग्रेन की समस्या होने लगती है l माइग्रेन एक विशेष तरह का सिरदर्द होता है जो सामान्य सिरदर्द से बिल्कुल अलग होता है l यह सिरदर्द सिर के सिर्फ आधे भाग में शुरू होता है तथा उस हिस्से में व्यक्ति को भारीपन महसूस होता है l आम तौर पर माइग्रेन मध्यम से लेकर गंभीर सिरदर्द की अवस्था होती है l 

माइग्रेन की स्थिति किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है l माइग्रेन में होने वाला दर्द व्यक्ति को कुछ घंटों से लेकर कई दिनों तक परेशान कर सकता है l यह एक आवर्ती प्रकार का सिरदर्द होता है l सिर के प्रभावित हिस्से में माइग्रेन होने पर व्यक्ति को उस हिस्से में एक तरह की छनछनाहट महसूस होती है l माइग्रेन एक सामान्य स्वास्थ्य समस्या है जो व्यक्तियों में बहुत ही आम है l माइग्रेन में होने वाला सिरदर्द बहुत अक्षम होता है l

अनुसंधान

जैन के गोमूत्र चिकित्सा क्लिनिक का उद्देश्य प्राचीन आयुर्वेदिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक के साथ एकीकृत करके एक सुखी और स्वस्थ जीवन बनाना है। हमारी चिकित्सा का अर्थ है आयुर्वेद सहित गोमूत्र व्यक्ति के तीन दोषों पर काम करता है- वात, पित्त और कफ। ये त्रि-ऊर्जा हमारे स्वास्थ्य को बनाए रखती हैं, इन दोषों में कोई भी असंतुलन, मानव स्वास्थ्य और बीमारी के लिए जिम्मेदार है। हमें यह कहते हुए खुशी हो रही है कि हमारे उपचार के तहत हमने इतने सारे सकारात्मक परिणाम देखे हैं। हमारे इलाज के बाद हजारों लोगों को कई बीमारियों से छुटकारा मिला।

हमारे मरीज न केवल अपनी बीमारी को खत्म करते हैं बल्कि हमेशा के लिए एक रोग मुक्त स्वस्थ जीवन जीते हैं। यही कारण है कि लोग हमारी चिकित्सा की ओर ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। आयुर्वेदिक उपचारों में हमारे वर्षों के शोध ने हमें अपनी कार्यप्रणाली को आगे बढ़ाने में मदद की है। हम पूरी दुनिया में एक स्वस्थ और खुशहाल समाज का निर्माण करने के लिए अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य रखते हैं।

गोमूत्र चिकित्सा द्वारा प्रभावी उपचार

गोमूत्र चिकित्सा दृष्टिकोण के अनुसार, कई जड़ी-बूटियां, शरीर के दोषों (वात, पित्त और कफ) को फिर से जीवंत करने का काम करती हैं, जो माइग्रेन का कारण बनते हैं अगर वे अनुपातहीन हैं। कुछ आयुर्वेदिक दवाओं में, उनके उपचार के लिए कई लाभकारी तत्व होते हैं। यह शरीर के चयापचय को बढ़ाता है।

ब्रेनटोन + लिक्विड ओरल

ब्रेंटोन + कैप्सूल

टोनर ( नेसल ड्राप)

प्रमुख जड़ी-बूटियाँ जो उपचार को अधिक प्रभावी बनाती हैं

बहेड़ा

बहेड़ा में एंटीऑक्सीडेंट गतिविधि होती है जो मुक्त कणों से लड़ाई करती है और मस्तिष्क कोशिकाओं को नुकसान से रोकती है। बहेड़ा न्यूरोट्रांसमीटर (मध्यस्थों जो सिग्नल ट्रांसमिशन में सहायता करते हैं) के मस्तिष्क में एकाग्रता को बढ़ाता है और इस तरह से माइग्रेन को नियंत्रित करने में मदद करता है।

शतावरी

माइग्रेन को राहत देने के लिए, शतावरी का उपयोग एक एंटीऑक्सीडेंट के रूप में किया जाता है जिसमें प्रभावी अवसाद रोधी क्षमता होती है। यह मस्तिष्क में न्यूरोट्रांसमीटर को प्रभावित करता है जो दर्द और तनाव को दूर करने में मदद करता है।

मुलेठी

मुलेठी की जड़ें अधिवृक्क ग्रंथि पर सहायक प्रभाव डालती हैं और इस प्रकार अप्रत्यक्ष रूप से मस्तिष्क को सक्रिय करती हैं। यह न केवल माइग्रेन के लक्षणों को कम करता है और समझ को बढ़ाता है बल्कि इसकी एंटीऑक्सीडेंट संपत्ति (मुलेठी में फ्लेवोनोइड्स शामिल हैं) मस्तिष्क की कोशिकाओं को एक परिरक्षण प्रभाव देता है।

ब्राह्मी

ब्राह्मी सेरोटोनिन के स्तर को बढ़ाने में मदद करता है जो वयस्क चिंता और माइग्रेन को काफी कम करता है। कोशिकाओं को परिरक्षण करके, यह कोर्टेक्स को तेज करता है। थकान को दूर करने और याददाश्त को मजबूत करने के साथ-साथ इसका उपयोग माइग्रेन के इलाज के लिए भी किया जाता है।

शंखपुष्पी

पुराने माइग्रेन से राहत प्रदान करने में इसका उच्च महत्व है। यह मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है। आयुर्वेद के अनुसार शंखपुष्पी मस्तिष्क को शांत करने और तनाव को कम करने के साथ-साथ चिंता को कम करने में मदद करता है। अपने मेध्या (बुद्धिमत्ता में सुधार) गुण के कारण, यह मस्तिष्क टॉनिक के रूप में काम करके स्मृति को बढ़ाता है।

अश्वगंधा

माइग्रेन में मस्तिष्क के घावों और स्मृति समस्याओं को कम करने के लिए अश्वगंधा एक संभावित उपचार है। यह एक एडेपोजेन के रूप में जाना जाता है जिसका अर्थ है कि यह शरीर को तनाव से निपटने में सहायता कर सकता है। अश्वगंधा मस्तिष्क की गतिविधि में सुधार कर सकता है, रक्त शर्करा और कोर्टिसोल के स्तर को कम कर सकता है और चिंता और माइग्रेन के लक्षणों से निपटने में मदद कर सकता है।

जटामांसी

जटामांसी को एंटीडिपेंटेंट्स और एंटी-स्ट्रेस के गुणों के लिए जाना जाता है। यह मस्तिष्क में सेरोटोनिन की मात्रा को बढ़ाता है जिससे मन शांत रहता है और डर और घबराहट से राहत मिलती है। जटामांसी का उद्देश्य माइग्रेन का इलाज करना है।

विडंग

अवसाद के उपचार के लिए विडंग का उपयोग किया जाता है क्योंकि इसमें एक अणु होता है जिसमें एक एंटीडिप्रेसेंट गतिविधि होती है जिसे एम्बेलिन कहा जाता है। न्यूरोट्रांसमीटर जैसे कि सेरोटोनिन और नॉरपेनेफ्रिन के फटने से एम्बेलिन अवरुद्ध हो जाता है, जिससे पीड़ित का मूड बढ़ जाता है जो माइग्रेन में मदद करता है।

केवच बीज

केवच बीज में न्यूरोप्रोटेक्टिव और एंटीऑक्सीडेंट प्रभाव होता है। इन बीजों में एल-डोपा शामिल है जो डोपामाइन में बदल जाता है और मस्तिष्क में अपने स्तर को ठीक करता है और माइग्रेन को कम करने में मदद करता है।

गाय का दूध

गाय का दूध सिरदर्द को कम करने में मदद करता है जिसमें माइग्रेन भी शामिल है क्योंकि इसमें इलेक्ट्रोलाइट्स और प्रोटीन होते हैं जो इन समस्याओं को कम करने के लिए फायदेमंद होते हैं। गाय का दूध विटामिन बी का एक अच्छा स्रोत है जो मस्तिष्क, तंत्रिका तंत्र के स्वस्थ कामकाज को सुनिश्चित करता है और माइग्रेन से लड़ने में मदद करता है।

गोमय रस

गोमय रस मस्तिष्क में माइग्रेन को कम करने वाले सेरोटोनिन और नॉरपेनेफ्रिन के स्तर को बढ़ाने में मदद करता है।

गाय दूध का दही

यह राइबोफ्लेविन के उच्च स्तर, विटामिन बी कॉम्प्लेक्स का एक हिस्सा प्रदान करता है जो कि उन लोगों में माइग्रेन के हमलों की संख्या को कम करने में मदद करता है जो आमतौर पर इससे पीड़ित होते हैं। यह बीटा-ब्लॉकर्स, माइग्रेन को रोकने के लिए उपयोग की जाने वाली दवाओं की प्रभावशीलता को बढ़ाने में भी मदद कर सकता है।

गाय का घी

यह भी माइग्रेन के इलाज के लिए एक प्रभावी उपाय है। यह मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र को बेहतर बनाता है। यह विषहरण के लिए एक प्रभावी एजेंट भी है। घी में संतृप्त वसा पोषक तत्वों से भरपूर होती है और मस्तिष्क और प्रतिरक्षा प्रणाली के स्वस्थ विकास में एक शक्तिशाली भूमिका निभाती है।

गोजला

हम अपने गोमूत्र चिकित्सा में गोजला का उपयोग करते हैं, मूल रूप से इसका मतलब है कि हमारी दवा में मुख्य घटक गोमूत्र अर्क है। यह अर्क गाय की देसी नस्लों के मूत्र से बना है। गोजला के अपने फायदे हैं क्योंकि यह किसी भी प्रकार के संदूषण की संभावना से परे है। इसकी गुणवत्ता उच्च है एवं प्रचुर मात्रा में है। जब गोजला आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों के साथ मिलाया जाता है तो यह किसी भी बीमारी के इलाज के लिए अधिक प्रभावी हो जाता है और विशेष बीमारियों में अनुकूल परिणाम देता है। इस अर्क का अत्यधिक परीक्षण किया गया है और इसलिए यह अधिक विश्वसनीय और लाभदायक भी है।

जीवन की गुणवत्ता

गोमूत्र के उपचार से उपयुक्त स्वास्थ्य मिलता है और एक क्रम में शरीर के दोषों में संतुलन बनाए रखता है। इन दिनों हमारे उपचार के परिणामस्वरूप लोग अपने स्वास्थ्य को लगातार सुधार रहे हैं। यह उनके रोजमर्रा के जीवन-गुणवत्ता में सुधार करता है। गोमूत्र के साथ-साथ आयुर्वेदिक दवा का उपचार विभिन्न उपचारों के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए पूरक थेरेपी के रूप में कार्य कर सकते हैं जो भारी खुराक, बौद्धिक तनाव, विकिरण और कीमोथेरपी के उपयोग से आते हैं। हम लोगों का मार्गदर्शन करते हैं, एक सुखी और तनाव मुक्त जीवन जीने का एक तरीका सिखाते है, यदि उन्हें कोई असाध्य बीमारी है तो। हमारे उपाय करने के बाद हजारों मनुष्य एक संतुलित जीवन जीते हैं और यह हमारे लिए एक बड़ी उपलब्धि है कि हम उन्हें एक जीवनशैली दें जो वे अपने  सपने में देखते हैं।

जटिलता निवारण

आयुर्वेद में, गोमूत्र की एक विशेष स्थिति है जिसे अक्सर माइग्रेन जैसी बीमारियों के लिए मददगार माना जाता है। हमारे वर्षों के श्रमसाध्य कार्य यह साबित करते हैं कि हमारी जड़ी-बूटियों का उपयोग करने से माइग्रेन की लगभग सभी जटिलताएँ गायब हो जाती हैं। पीड़ित हमें बताते हैं कि वे गंभीर दर्द, ध्वनि के प्रति संवेदनशील, हल्की और तेज गंध, मतली और उल्टी, अत्यधिक पसीना, थकान, एकाग्रता, शरीर में हार्मोनल और रासायनिक परिवर्तनों को नियंत्रित और संतुलित करने में बड़ी राहत महसूस होती है, रोगी की प्रतिरक्षा प्रणाली में सुधार होता है जो अन्य अवसाद जटिलताओं के लिए अनुकूल रूप से काम करता है।

जीवन प्रत्याशा

अगर हम जीवन प्रत्याशा के बारे में बात करते हैं, तो गोमूत्र चिकित्सा अपने आप में बहुत आशावाद है। कोई भी विकार, चाहे वो मामूली हो या गंभीर, मानव शरीर पर बुरा प्रभाव डालता है और जीवन में वर्षों तक बना रहता है। रोग की पहचान होने पर जीवन प्रत्याशा कम होने लगती है, लेकिन गोमूत्र उपचार के साथ नहीं। न केवल हमारी प्राचीन चिकित्सा बीमारी को दूर करती है, बल्कि यह मनुष्य के जीवन को उसके शरीर में किसी भी दूषित पदार्थों को छोड़े बिना बढ़ाती है और यही हमारा अंतिम उद्देश्य है।

दवा निर्भरता को कम करना

"सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद् दुःख भाग्भवेत्", इसका अर्थ है कि सभी को खुश रहने दें, सभी को रोग मुक्त होने दें, सभी को सत्य देखने दें, कोई भी दुःख का अनुभव नहीं करे।  इस कहावत का पालन करते हुए, हम अपने समाज को इसी तरह बनाना चाहते हैं। हमारा उपाय विश्वसनीय उपचार देने, जीवन प्रत्याशा बढ़ाने और प्रभावित लोगों की दवा निर्भरता कम करने के माध्यम से इसे पूरा करता है। हमारे उपाय में इस वर्तमान दुनिया में उपलब्ध किसी भी वैज्ञानिक उपचारों की तुलना में अधिक लाभ और शून्य जोखिम हैं।

पुनरावृत्ति की संभावना को कम करना

चिकित्सा पद्धतियों की एक विस्तृत श्रृंखला की तुलना में, हम रोग के मूल कारण और उन कारकों पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो बीमारी के पुनरावृत्ति की संभावना को बढ़ा सकते हैं, न कि केवल रोग के प्रबंधन पर। इस पद्धति का उपयोग करके, हमने पुनरावृत्ति दर को सफलतापूर्वक कम कर दिया है और लोगों के जीवन के लिए एक नई दिशा बताई है ताकि लोग भावनात्मक और शारीरिक रूप से बेहतर जीवन जी सकें।

माइग्रेन के कारण 

व्यक्ति को माइग्रेन की समस्या निम्नलिखित कारणों की वजह से हो सकती है - 

  • अत्यधिक तनाव 

वे व्यक्ति जो अपने जीवन में जीवन में अत्यधिक तनाव लेते है उन्हें माइग्रेन की समस्या हो सकती है l अत्यधिक तनाव व्यक्ति के मस्तिष्क को प्रभावित करता है l काम की अधिकता, रिश्तों में तकरार, पैसों की कमी, व्यवसाय में नुकसान जैसी कई ऐसी समस्याएँ है जिसके कारण व्यक्ति तनाव लेने लगता है l जब यह तनाव अधिक बढ़ जाता है तो व्यक्ति को माइग्रेन होने लगता है l 

  • हार्मोनल बदलाव 

यदि व्यक्ति के शरीर में कई असामान्य हार्मोनल बदलाव होते है तो यह उनके माइग्रेन का कारण बन सकते है l विशेषकर महिलाओं के शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव उनके माइग्रेन को पैदा कर सकते है l गर्भावस्था, मासिक धर्म, रजोनिवृत्ति के दौरान महिलाओं में तीव्र माइग्रेन विकसित हो सकता है जब उनके एस्ट्रोजन नामक हार्मोन में कई उतार चढ़ाव होने लगते है l

  • आनुवंशिक 

किसी व्यक्ति को माइग्रेन उनकी आनुवांशिकता के परिणामस्वरूप हो सकता है l किसी परिवार में यदि कोई व्यक्ति माइग्रेन से ग्रसित हो तो दूसरे व्यक्ति को भी यह समस्या उनके पारिवारिक इतिहास के चलते परेशान कर सकती है l 

  • अपौष्टिक आहार

अपौष्टिक आहार व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम करता है l जो व्यक्ति अपने जीवन में पौष्टिक आहार का सेवन नहीं करते है उन्हें माइग्रेन की समस्या हो सकती है l कैफीन तथा शराब का अत्यधिक सेवन करने वाले लोगों में भी माइग्रेन का जोखिम हो सकता है l 

  • वातावरण में बदलाव

तापमान में होने वाले परिवर्तन भी माइग्रेन की समस्या को उत्पन्न कर सकते है l अत्यधिक धूप और गर्मी तथा अत्यधिक सर्दी जैसे बदलते मौसम में व्यक्ति को माइग्रेन हो सकता है l बादल छाने की स्थिति में भी किसी व्यक्ति के सिर में माइग्रेन का दर्द उठ सकता है l

  • नींद की कमी व अधिकता 

अत्यधिक नींद लेना और नींद ना आना दोनों ही माइग्रेन के जोखिम को बढ़ा सकते है l आम तौर पर नींद की कमी कुछ लोगों में माइग्रेन को ट्रिगर कर सकती है l कम नींद लेने वाले औसतन व्यक्तियों को गंभीर माइग्रेन की समस्या हो सकती है l बहुत अधिक सोने वाले व्यक्ति भी माइग्रेन जैसे असहाय दर्द से पीड़ित रह सकते है l 

  • दवाइयों का सेवन 

कुछ दवाइयों का सेवन व्यक्ति की मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है जिससे वह माइग्रेन का शिकार हो सकते है l किसी बीमारी के इलाज हेतु अधिक मात्रा में तथा लंबे समय से दवाई लेना, दर्द निवारक दवाइयों का अधिक सेवन करना, नींद की दवाइयां खाना, महिलाओं द्वारा गर्भनिरोधक दवाइयों का सेवन करना ये सभी माइग्रेन के खतरे को बढ़ाने में सहायक होते है l 

  • संवेदी उत्तेजना 

लगातार उस माहौल के सम्पर्क में बने रहना जो व्यक्ति की संवेदी उत्तेजना को प्रभावित करती है उनके माइग्रेन की समस्या को उत्पन्न कर सकती है l तेज रोशनी और सूरज की चकाचौंध, अत्यधिक शोर तथा आवाज, मजबूत और तेज खुशबू अथवा बदबू ये सभी व्यक्ति के माइग्रेन का कारण बन सकते है l 

  • अवसाद और चिंता 

यदि कोई व्यक्ति अवसाद तथा चिंता से अधिक समय तक घिरा होता है तो उसे माइग्रेन होने की संभावना अधिक हो सकती है l चिंता विकारों और अवसाद से ग्रस्त व्यक्तियों में माइग्रेन का सिरदर्द उनके मानसिक विकार की स्थिति के फलस्वरूप उभर सकता है l चिंता और अवसाद का बढ़ा हुआ स्तर माइग्रेन को उत्पन्न करने में मदद कर सकते है l 

  • थकावट

अत्यधिक शारीरिक और मानसिक थकावट व्यक्ति में अवसाद, नींद की कमी जैसी स्थितियों की शुरुआत होती है l लगातार रहने वाली थकान व्यक्ति की ऊर्जा में कमी लाती है जिससे व्यक्ति कई दूसरी समस्याओं के साथ साथ माइग्रेन की समस्या से भी पीड़ित हो सकता है l 

 

माइग्रेन से निवारण 

कुछ जरूरी बातों का ध्यान रख कर व्यक्ति माइग्रेन की समस्या होने से अपना बचाव कर सकते है जिनमे शामिल है - 

  • व्यक्ति को निश्चित समय पर संतुलित आहार का सेवन करना चाहिए l 
  • व्यक्ति को पर्याप्त नींद लेनी चाहिए तथा अधिक सोने से बचना चाहिए l
  • नियमित योग, व्यायाम तथा कसरत आदि करने से व्यक्ति के मस्तिष्क की मांसपेशियां खुलती है l 
  • व्यक्ति को अत्यधिक तनाव लेने से बचना चाहिए l
  • उन दवाइयों का अधिक सेवन करना व्यक्ति को बंद कर देना चाहिए जो उनके माइग्रेन को उत्पन्न करते है l
  • शारीरिक थकान होने की स्थिति में व्यक्ति को अपने शरीर को पर्याप्त आराम देना चाहिए l 
  • व्यक्ति को संवेदी उत्तेजना को बढ़ाने वाली चीजों से बचना चाहिए l 
  • व्यक्ति को अपने अवसाद और चिंता को कम करने के प्रयास करने चाहिए l

माइग्रेन के लक्षण 

व्यक्ति को माइग्रेन के लक्षण और संकेत निम्नलिखित हो सकते है - 

  • सिर के एक हिस्से में मध्यम से लेकर तीव्र दर्द होना 
  • ध्वनि, प्रकाश तथा तेज गंध के प्रति संवेदनशील होना 
  • आँखों में दर्द होना एवं पलके झपकाते वक्त जलन महसूस होना 
  • मतली और उल्टी की समस्या होना 
  • अधिक पसीना आना
  • गर्दन में अकड़न होना
  • बार बार पेशाब लगना
  • थकान होना तथा नींद की कमी होना
  • मनोदशा में कई तरह के बदलाव आना
  • एकाग्रता में कमी आना
  • गर्दन तथा आसपास के हिस्सों में दर्द रहना
  • चक्कर आना अथवा असन्तुलित महसूस होना

 

माइग्रेन के प्रकार 

  • आभा (ऑरा) के साथ माइग्रेन 

आभा के साथ होने वाले माइग्रेन को इस श्रेणी के अंतर्गत रखा जाता है l आमतौर पर किसी तरह की रेखाएँ, चमक अथवा आकार संबंधी दृश्य लक्षण आभा में आते है l इस तरह के माइग्रेन को क्लासिक माइग्रेन के नाम से भी जाना जाता है l इस स्थिति की वजह से लोगों को कई नेत्र संबंधी परेशानियां जैसे रोशनी में काले धब्बे, रोशनी में चकाचौंध नजर आना आदि होती है l 

  • आभा (ऑरा) रहित माइग्रेन

आभा रहित माइग्रेन सबसे आम प्रकार के माइग्रेन होते है जिसमें होने वाला सिरदर्द बिना किसी विशिष्ट चेतावनी संकेतों के होता है l इसे कॉमन माइग्रेन के नाम से भी जाना जाता है l अधिकतर मामलों में आभा रहित माइग्रेन चिंता, अवसाद, तनाव तथा थकान के साथ हो सकते है l अधिक प्यास और नींद आने जैसे कुछ सामान्य लक्षण व्यक्ति महसूस करता है l वही कुछ लोगों को उल्टी, मूड स्विंग जैसी परेशानियां होती है l 

  • क्रोनिक माइग्रेन 

क्रोनिक माइग्रेन एक महीने में पंद्रह दिनों तक अथवा लगातार तीन महीनों तक व्यक्ति को परेशान करते है l मस्तिष्क की चोट, रक्त वाहिकाओं में सूजन अथवा स्ट्रोक जैसी स्थितियां क्रोनिक माइग्रेन का कारण बनते है l 

  • मेंस्ट्रुअल माइग्रेन 

महिलाओं के मासिक धर्म की अवधि के दौरान होने वाला माइग्रेन मेंस्ट्रुअल माइग्रेन कहलाता है l मासिक धर्म के समय महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन के स्तर में गिरावट आती है l ऐसी स्थिति में महिलाओं को माइग्रेन दो दिन में होने की संभावना होती है जो एक अवधि तक हो सकती है l

  • हेमीप्लेज़िक माइग्रेन 

हेमीप्लेज़िक माइग्रेन एक ऐसी स्थिति होती है जिसमें व्यक्ति के शरीर के एक तरफ अस्थायी कमजोरी आती है l यह माइग्रेन दुर्लभ होते है l इन्हें "माइग्रेन वेरिएंट" के नाम से भी जाना जाता है जिससे शरीर के एक तरफ पक्षाघात होता है l हेमीप्लेज़िक माइग्रेन के लक्षण प्रायः स्ट्रोक की भांति जान पड़ते है l इसके अंतर्गत व्यक्ति के एक ओर के चेहरे, हाथ तथा पैर में कमजोरी अनुभव होती है l 

  • ब्रेन स्टेम ऑरा 

ब्रेन स्टेम ऑरा माइग्रेन का एक असाधारण और दुर्लभ प्रकार है जिसे बेसिलर माइग्रेन भी कहा जाता है l ब्रेन स्टेम ऑरा माइग्रेन का वह सिरदर्द है जो आभा के साथ उत्पन्न होता है l ब्रेन स्टेम ऑरा में व्यक्ति के सिर के दोनों तरफ पीछे की ओर दर्द रहता है l इस प्रकार का माइग्रेन मस्तिष्क और गर्दन की धमनियों में सिकुड़न के कारण होता है l इस तरह के माइग्रेन से पीड़ित व्यक्ति में दृश्य गड़बड़ी, बोलने और सुनने में परेशानी, हाथ-पैरों में झनझनाहट जैसे लक्षण दिखाई देते है l

  • वेस्टीब्युलर माइग्रेन 

वेस्टीब्युलर माइग्रेन को माइग्रेन वर्टिगो भी कहा जाता है l वेस्टीब्युलर माइग्रेन व्यक्ति को चक्कर आने से संबंधित है l इस तरह के माइग्रेन में व्यक्ति चक्कर के साथ संतुलन की समस्याओं के संयोजन का अनुभव करते है l सिरदर्द के साथ चक्कर आना, मतली अथवा उल्टी होना, प्रकाश और ध्वनि के प्रति संवेदनशीलता आदि कई लक्षण व्यक्तियों में वेस्टीब्युलर माइग्रेन के साथ उभरते है l

  • ऐब्डॉमिनल माइग्रेन 

ऐब्डॉमिनल माइग्रेन अधिकतर बच्चों में देखने को मिलता है l पेट में दर्द के साथ होने वाला माइग्रेन ऐब्डॉमिनल माइग्रेन के अंतर्गत शामिल किए जाते है l यह माइग्रेन नौ से सोलह साल की उम्र के बच्चों में सबसे आम है l बच्चों को मुख्य रूप से पेट में दर्द के साथ सिरदर्द, मतली और उल्टी जैसी समस्यायें होती है l ऐब्डॉमिनल माइग्रेन एक एपीसोडिक सिंड्रोम होता है l

माइग्रेन की जटिलताएँ 

माइग्रेन से ग्रस्त व्यक्तियों को निम्नलिखित जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है - 

  • लंबे समय तक माइग्रेन से पीड़ित व्यक्ति को ब्रेन स्ट्रोक हो सकता है l
  • व्यक्ति को अवसाद, दुविधा, भ्रम जैसी कई मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से गुजरना पड़ सकता है l 
  • व्यक्ति को माइग्रेन में होने वाले दर्द के कारण नींद की अत्यधिक कमी हो सकती है l
  • माइग्रेन की गंभीर स्थिति होने पर व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती है l 
  • माइग्रेन के साथ व्यक्ति को दौरे पड़ सकते है l
  • मध्यम से गंभीर होने वाला माइग्रेन का दर्द बहुत लंबे समय तक तथा दैनिक भी हो सकता है l

मान्यताएं