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वैजाइनल इंफेक्‍शन का इलाज

अवलोकन

जब महिलाओं की योनि में तीव्र खुजली, सूजन और जलन होती है तो ये सभी स्थिति उनकी योनि में होने वाले संक्रमण की ओर इंगित करती है I ज्यादातर महिलाओं को अपने जीवन में योनि में संक्रमण की समस्या का सामना करना पड़ता है जो उन्हें कभी भी, किसी भी उम्र में अनुभव हो सकती है I अधिकतर, यह संक्रमण महिलाओं की योनि में यीस्ट नामक फंगस की संख्या में वृद्धि होने के कारण होता है जिस वजह से इसे यीस्ट इन्फेक्शन के नाम से भी जाना जाता है I वैसे तो यह फंगस बहुत ही कम मात्रा में वैजाइना में पाया जाता है जिससे किसी तरह का कोई नुकसान योनि को नहीं पहुँचता है पर किसी कारण से अगर योनि में यीस्ट की मात्रा में अत्यधिक वृद्धि हो जाए तो उससे योनि में संक्रमण हो सकता है। यह योनि संक्रमण बहुत आम है जो लगभग 75% महिलाओं के जीवन को प्रभावित करता है I योनि में इन्फेक्शन होने पर महिलाओं को वैजाइना में दर्द महसूस होने लगता है साथ ही इस संक्रमण से ग्रस्त महिलाओं को दूसरे कई सारे जटिल लक्षणों का सामना भी करना पड़ता है I

अनुसंधान

जैन के गोमूत्र चिकित्सा क्लिनिक का उद्देश्य प्राचीन आयुर्वेदिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक के साथ एकीकृत करके एक सुखी और स्वस्थ जीवन बनाना है। हमारी चिकित्सा का अर्थ है आयुर्वेद सहित गोमूत्र व्यक्ति के तीन दोषों पर काम करता है- वात, पित्त और कफ। ये त्रि-ऊर्जा हमारे स्वास्थ्य को बनाए रखती हैं, इन दोषों में कोई भी असंतुलन, मानव स्वास्थ्य और बीमारी के लिए जिम्मेदार है। हमें यह कहते हुए खुशी हो रही है कि हमारे उपचार के तहत हमने इतने सारे सकारात्मक परिणाम देखे हैं। हमारे इलाज के बाद हजारों लोगों को कई बीमारियों से छुटकारा मिला।

हमारे मरीज न केवल अपनी बीमारी को खत्म करते हैं बल्कि हमेशा के लिए एक रोग मुक्त स्वस्थ जीवन जीते हैं। यही कारण है कि लोग हमारी चिकित्सा की ओर ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। आयुर्वेदिक उपचारों में हमारे वर्षों के शोध ने हमें अपनी कार्यप्रणाली को आगे बढ़ाने में मदद की है। हम पूरी दुनिया में एक स्वस्थ और खुशहाल समाज का निर्माण करने के लिए अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य रखते हैं।

गोमूत्र चिकित्सा द्वारा प्रभावी उपचार

गोमूत्र के उपचार के अनुसार, कुछ जड़ी-बूटियां शरीर के दोषों (वात, पित्त और कफ) का कायाकल्प कर सकती हैं और यदि यह दोष शरीर में असमान रूप से वितरित किये जाए, तो यह वैजाइनल इंफेक्‍शन का कारण बन सकता है। कुछ आयुर्वेदिक दवाओं में उनके उपचार के लिए कई लाभकारी तत्व होते हैं। यह शरीर के पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है।

फीमेलटिन + लिक्विड ओरल

फिमोलेक्स + कैप्सूल

प्रमुख जड़ी-बूटियाँ जो उपचार को अधिक प्रभावी बनाती हैं

अशोका

यह एंटीऑक्सीडेंट और इम्यूनाइज़र के रूप में कार्य करता है। यह जड़ी बूटी एंटी-एलर्जी है और त्वचा की विभिन्न समस्याओं से निपटने में मदद करती है। यह योनि संक्रमण से संबंधित जटिलताओं को दूर करता है। यह बैक्टीरियल वेजिनोसिस में सूजन और अत्यधिक डिस्चार्ज से निपटने में भी मदद करता है।

लोध्रा

यह ल्यूकोरिया, डिफंक्शनल यूटेराइन ब्लीडिंग, प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम और ओवेरियन सिस्ट के इलाज में मदद करता है। यह योनि से अत्यधिक सफेद निर्वहन का इलाज करने में मदद करता है। यह स्थानीय खुजली, सूजन और दर्द से लड़ता है। यह अद्भुत जड़ी बूटी स्थानीय क्षेत्र में बैक्टीरिया के विकास को कम करती है जिससे संक्रमण विकसित होता है।

लाजवंती

रजोनिवृत्ति, मासिक धर्म की कठिनाइयों और मेनोरिया जैसी सामान्य प्रजनन समस्याओं की देखभाल के लिए यह एक उत्कृष्ट जड़ी बूटी है। यह जड़ी बूटी एंटीऑक्सिडेंट और एंटी इन्फ्लेमेटरी गुणों से भरी हुई है इसलिए एक ही कंडीशन में सूजन और दर्द को कम करने में मदद करती है।

अश्वगंधा

यह अपने रोगाणुरोधी गुणों के कारण योनि संक्रमण में मदद कर सकता है। आयुर्वेदिक चिकित्सक खमीर संक्रमण के लिए जड़ी बूटी के उपयोग का सुझाव देते हैं। महिलाओं के लिए अश्वगंधा के कई लाभ हैं जिनमें सौम्य हार्मोन संतुलन, और प्रजनन समर्थन शामिल हैं। यह मूड में सुधार और संज्ञानात्मक कार्य का समर्थन करने में भी सहायता करता है।

शतावरी

यह महिलाओं के जीवन के सभी चरणों में उनके प्रजनन स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद हो सकता है। शतावरी की जड़ें स्तनपान कराने वाली महिलाओं में स्तन के दूध के उत्पादन को बढ़ावा देने और समग्र प्रतिरक्षा का समर्थन करने में मदद कर सकती हैं। यह एक महिला को योनि संक्रमण के लक्षणों के साथ खड़े होने के लिए सहनशक्ति प्रदान करता है और उन्हें सफलतापूर्वक खत्म करने का भी ख्याल रखता है।

दशमूल

यह मासिक धर्म संबंधी विकारों, प्रसवोत्तर विकारों और प्रजनन अंगों में सूजन को कम करने में उपयोगी है। यह त्रिदोषों के शमन में लाभकारी होता है। यह महिला प्रजनन प्रणाली को मजबूत करता है और सामान्य दुर्बलता में प्रभावी है। यह हार्मोनल संतुलन प्रदान करता है, प्रजनन स्वास्थ्य में सुधार करता है। यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने के लिए जाना जाता है और इसलिए शरीर को डिटॉक्सीफाई करने के लिए अच्छा है।

घृतकुमारी

घृत कुमारी जेल जननांगों की त्वचा के लिए काफी कोमल हो सकता है। यह दाद सिंप्लेक्स वायरस से हुए जननांग घावों को ठीक करने में मदद कर सकता है। जेल का शुद्ध रूप फाइटोएस्ट्रोजेन में उच्च होता है जो हार्मोनल असंतुलन को ठीक करने में मदद करता है। इसके जेल में शरीर को फिर से हाइड्रेट करने की प्रवृत्ति होती है जो योनि संक्रमण के लक्षणों को उलट सकती है।

आमला

आंवला एक प्राकृतिक रक्त शोधक और जैविक क्लीन्ज़र के रूप में कार्य करता है, जिससे योनि यीस्ट संक्रमण पर नियंत्रण रखने में मदद मिलती है। विटामिन सी और कई अन्य पोषक तत्वों से भरपूर, आंवला प्रतिरक्षा को बढ़ावा देने में मदद करता है और महिलाओं को स्वस्थ रखता है। यह जड़ी बूटी सफेद स्राव की समस्या का भी इलाज करती है।

पुत्रजीवक पाउडर

यह रोगग्रस्त अवस्था को फिर से जीवंत करने में मदद करता है। यह शरीर और योनि में नमी जोड़ने में मदद करता है। यह शरीर की विभिन्न सूजन का इलाज करने में मदद करता है और योनि संक्रमण में प्रभावी परिणाम देता है। इसका प्रभाव प्रजनन प्रणाली पर पड़ता है, खासकर महिलाओं में गर्भाशय और अंडाशय पर। यह गर्भाशय की मांसपेशियों को भी मजबूत करता है।

शिलाजीत

शिलाजीत योनि को सूजन और ऑक्सीडेटिव तनाव जैसी समस्याओं से बचा सकता है। इसमें बेंजोइक एसिड होता है, जो एंटीबैक्टीरियल होता है। यह योनि संक्रमण और अन्य समस्याओं को रोकने में मदद कर सकता है। शिलाजीत मासिक धर्म चक्र को विनियमित करने में मदद करता है और इस प्रकार महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। यह प्रजनन अंगों को ऑक्सीजन और पोषक तत्वों के प्रवाह में सुधार करता है। शिलाजीत सक्रिय रूप से विषाक्त पदार्थों और रसायनों को हटाने में मदद करता है।

गोजला

हम अपने गोमूत्र चिकित्सा में गोजला का उपयोग करते हैं, मूल रूप से इसका मतलब है कि हमारी दवा में मुख्य घटक गोमूत्र अर्क है। यह अर्क गाय की देसी नस्लों के मूत्र से बना है। गोजला के अपने फायदे हैं क्योंकि यह किसी भी प्रकार के संदूषण की संभावना से परे है। इसकी गुणवत्ता उच्च है एवं प्रचुर मात्रा में है। जब गोजला आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों के साथ मिलाया जाता है तो यह किसी भी बीमारी के इलाज के लिए अधिक प्रभावी हो जाता है और विशेष बीमारियों में अनुकूल परिणाम देता है। इस अर्क का अत्यधिक परीक्षण किया गया है और इसलिए यह अधिक विश्वसनीय और लाभदायक भी है।

जीवन की गुणवत्ता

गोमूत्र के उपचार से स्वास्थ्य अच्छा रहता है और शरीर के दोष संतुलित होते है। आज, व्यक्ति हमारी देखभाल के परिणामस्वरूप अपने स्वास्थ्य में तेजी से सुधार कर रहे हैं। यह उनके रोजमर्रा के जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाता है। गोमूत्र के साथ-साथ आयुर्वेदिक दवाएं भारी खुराक, मानसिक तनाव, विकिरण और कीमोथेरेपी के उपयोग से विभिन्न दुष्प्रभावों को कम करने के लिए एक पूरक चिकित्सा के रूप में काम कर सकती हैं। हम लोगों को बीमारी के साथ, यदि कोई हो तो, शांतिपूर्ण और तनाव मुक्त जीवन जीने के लिए निर्देशित करते हैं। हमारे उपचार को लेने के बाद से, हजारों लोग एक स्वस्थ जीवन जीते हैं और यह हमारे लिए एक बड़ी सफलता है कि हम उन्हें एक ऐसा जीवन दें जो वे सपने में देखते हैं।

जटिलता निवारण

आयुर्वेद में गोमूत्र का एक विशेष स्थान है जिसे वैजाइनल इंफेक्‍शन के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। हमारी वर्षों की कड़ी मेहनत से पता चलता है कि आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों के उपयोग से वैजाइनल इंफेक्‍शन की लगभग कई जटिलताएँ गायब हो जाती हैं। हमारे रोगियों को योनि में तथा उसके आसपास खुजली, जलन और दर्द, योनि के आसपास की जगह पर रैशेज, दाने या फिर लाल चकत्ते, संभोग के दौरान योनि में दर्द या जलन, वैजाइना से अत्यधिक बदबूदार सफेद और गाढ़ा डिस्चार्ज, योनि में लाली और सूजन, पेशाब करते समय तीव्र चुभन, योनि से पानी जैसा स्राव, योनि में सुखापन, हर समय असहज महसूस करने आदि में एक बड़ी राहत महसूस होती है साथ ही रोगी की प्रतिरक्षा प्रणाली में भी सुधार होता है जो वैजाइनल इंफेक्‍शन की अन्य जटिलताओं से संबंधित समस्याओं के लिए अनुकूल रूप से काम करता है I 

जीवन प्रत्याशा

अगर हम जीवन प्रत्याशा के बारे में चिंतित हैं, तो गोमूत्र उपचार अपने आप में बहुत बड़ा वादा है। कोई भी विकार, चाहे वह मामूली हो या गंभीर, किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और जीवन में कई वर्षों तक रहता है। जीवन प्रत्याशा संक्षिप्त है जब तक कि स्थिति की पहचान नहीं की जाती है, लेकिन गोमूत्र उपचार के साथ नहीं। न केवल हमारी प्राचीन चिकित्सा बीमारी को कम करती है, बल्कि यह व्यक्ति की दीर्घायु को उसके शरीर में कोई भी दूषित तत्व नहीं छोड़ती है और यह हमारा अंतिम उद्देश्य है।

दवा निर्भरता को कम करना

"सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद् दुःख भाग्भवेत्", इसका अर्थ है सभी को हर्षित होने दें, सभी को बीमारी से मुक्त होने दें, सभी को वास्तविकता देखने दें, कोई भी संघर्ष ना करे। इस आदर्श वाक्य के पालन के माध्यम से हमें अपने समाज को इसी तरह बनाना है। हमारा उपचार विश्वसनीय उपाय देने, जीवन प्रत्याशा में सुधार और प्रभावित लोगों की दवा निर्भरता कम करने के माध्यम से इसे पूरा करता है। इस समकालीन समाज में, हमारे उपाय में किसी भी मौजूदा औषधीय समाधानों की तुलना में अधिक लाभ और कमियां बहुत कम हैं।

पुनरावृत्ति की संभावना को कम करना

चिकित्सा पद्धतियों की एक विस्तृत श्रृंखला की तुलना में, हम रोग के मूल कारण और उन कारकों पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो बीमारी के पुनरावृत्ति की संभावना को बढ़ा सकते हैं, न कि केवल रोग के प्रबंधन पर। इस पद्धति का उपयोग करके, हमने पुनरावृत्ति दर को सफलतापूर्वक कम कर दिया है और लोगों के जीवन के लिए एक नई दिशा बताई है ताकि लोग भावनात्मक और शारीरिक रूप से बेहतर जीवन जी सकें।

वैजाइनल इंफेक्‍शन के कारण

महिलाओं की योनि में होने वाले संक्रमण के लिए कई कारण ज़िम्मेदार हो सकते है जिनमें शामिल है -

  • कैण्डिडा एल्‍बीकैंस

सामान्य रूप से महिलाओं की योनि में बैक्टीरिया और यीस्ट का स्वस्थ संतुलन होता है। महिलाओं के शरीर में उत्पादित एस्ट्रोजन नाम का हार्मोन लैक्टोबैसिली नामक बैक्टीरिया को बढ़ने में मदद करता है। ये बैक्टीरिया योनि में हानिकारक जीवों को मारते हैं और उनके शरीर को स्वस्थ बनाये रखने में मदद करते है I शरीर में होने वाला असंतुलन योनि में बैक्टीरिया और यीस्ट के स्वस्थ संतुलन को बिगाड़ देते है जिस वजह से लैक्टोबैसिली बैक्टीरिया काम करना बंद कर देते है और कैण्डिडा एल्‍बीकैंस नामक फंगस की संख्या बढ़ने लगती है जो योनि में संक्रमण का कारण बनती है I 

  • एंटीबायोटिक्स का अत्यधिक सेवन

यदि कोई महिला अपने जीवन में एंटीबायोटिक्स का जरूरत से ज्यादा सेवन करती है तो उन्हें योनि में संक्रमण होने का ख़तरा बढ़ जाता है I ये एंटीबायोटिक्स योनि में मौजूद स्वस्थ  बैक्टीरिया को नष्ट करते है जिस वजह से यीस्ट की संख्या में बढ़ोतरी होने लगती है जो योनि में संक्रमण पैदा करते है I 

  • एस्ट्रोजन हार्मोन का उच्च स्तर

जिन महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन नामक हार्मोन की मात्रा अधिक रहती है उन्हें योनि में संक्रमण होने का ख़तरा अधिक रहता है I सामान्यतः एस्ट्रोजन हार्मोन उन महिलाओं के शरीर में अधिक होता है जो गर्भवती होती है, गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करती है या जो एस्ट्रोजन हार्मोन थेरेपी लेती है I

  • कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता

महिलाएं, जिनकी प्रतिरक्षा प्रणाली बेहद कमज़ोर होती है उन्हें योनि में संक्रमण होने की आशंका अधिक रहती है I कमज़ोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाली महिलाओं के शरीर में यीस्ट अनियंत्रित रूप में बढ़ने लगते है जो उनकी योनि में संक्रमण को प्रेरित करते है I

  • अनियंत्रित डायबिटीज

वे महिलाएं जो डायबिटीज से ग्रसित है तथा जिनके रक्त में शर्करा की स्तर अत्यधिक रहता है उन्हें योनि में संक्रमण होने का जोखिम प्रायः अधिक रहता है I अनियंत्रित डायबिटीज उनके शरीर की संक्रमण से लड़ने की क्षमता को धीमा कर देता है जिसके कारण यीस्ट बढ़ते और योनि में संक्रमण अधिक तेज़ी से विकसित हो सकता हैं।

  • अन्य कारण

योनि में संक्रमण के अन्य कारणों में महिलाओं के शरीर में होने वाला हार्मोनल असंतुलन, तनाव और नींद की कमी जैसे कई कारक ज़िम्मेदार हो सकते है जो उनके शरीर में बैक्टीरिया और यीस्ट में असंतुलन करते है I


वैजाइनल इंफेक्‍शन से निवारण

कुछ सावधानियों के तहत महिलाएं योनि में होने वाले संक्रमण को रोक सकती है जिनमें शामिल है -

  • महिलाओं को तंग और गीले अंडरवियर पहनने से बचना चाहिए तथा सूती कपडे पहनने की आदत डालनी चाहिए I
  • महिलाओं को अपने निजी अंगों की साफ सफाई का उचित ध्यान रखना चाहिए I
  • महिलाओं को योनि क्षेत्र के लिए सुगन्धित सैनिटरी पैड, फेमिनिन डिओडोरेंट, टैम्पोन, कठोर साबुन का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए I
  • महिलाओं को अच्छी तरह से संतुलित आहार का सेवन करना चाहिए तथा अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए I
  • मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को अपनी योनि की स्वछता का खास ख्याल रखना चाहिए I
  • डायबिटीक महिलाओं को अपने शरीर में शर्करा की मात्रा को संतुलित बनाये रखने का प्रयास करना चाहिए I
  • महिलाओं को एंटीबायोटिक्स का अत्यधिक सेवन करने से बचना चाहिए I
  • महिलाओं को अपने शरीर का वजन स्वस्थ बनाये रखने पर ध्यान देना चाहिए I

वैजाइनल इंफेक्‍शन के लक्षण

योनि में होने वाले संक्रमण की वजह से महिलाओं को कई लक्षण परेशान करते है जिनमें शामिल है -

  • योनि में तथा उसके आसपास खुजली, जलन और दर्द होना
  • योनि के आसपास की जगह पर रैशेज, दाने या फिर लाल चकत्ते पड़ना
  • संभोग के दौरान योनि में दर्द या जलन होना
  • वैजाइना से अत्यधिक बदबूदार सफेद और गाढ़ा डिस्चार्ज होना
  • योनि में लाली और सूजन आना
  • पेशाब करते समय तीव्र चुभन होना
  • योनि से पानी जैसा स्राव होना
  • योनि में सुखापन होना
  • हर समय असहज महसूस करना

 

वैजाइनल इंफेक्‍शन के प्रकार

योनि में इन्फेक्शन आम तौर पर निम्नलिखित प्रकार के हो सकते है -

  • बैक्टीरियल वैजाइनॉसिस

इस तरह का इन्फेक्शन बैक्टीरिया से होता है। योनि में यीस्ट के साथ लैक्टोबैसिलस नामक बैक्टीरिया मौजूद रहते है जो योनि को नुकसान पहुँचाने वाले जीवों को नष्ट करने का काम करते है पर जब इन बैक्टीरिया की संख्या कम हो जाती है तो इन हानिकारक जीवों की संख्या बढ़ने लगती है जो योनि को संक्रमित करते है I इस तरह के संक्रमण के कई मामलों में योनि से धूसर रंग का स्राव होना जिससे बदबू आती है।

  • कैंडिडियासिस अथवा यीस्ट संक्रमण

वैजाइनल इंफेक्‍शन का यह सबसे आम प्रकार है जो कैंडिडा नाम के फंगस के कारण होता है I लैक्टोबैसिलस बैक्टीरिया की तरह ही ये फंगस भी योनि में कुदरती रूप से कम संख्या में उपस्थित रहते है जिनसे किसी तरह का कोई नुकसान योनि को नहीं होता है परन्तु जब इनकी संख्या बढ़ने लगती है तो ये योनि को संक्रमित करने लगते है I इस तरह के संक्रमण में प्रायः योनि से गाढ़ा सफेद स्राव होता है तथा वैजाइना के आसपास दर्द का अहसास होता है I

  • ट्राइकॉमनियासिस

इस तरह का संक्रमण यौन संचारित संक्रमण होता है जो एककोशिकीय परजीवी ट्राइकॉमोनास वैजिनैलिस के कारण होता है I यह संक्रमण संभोग के दौरान एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में पहुचंता है I जो महिलाएं एक से अधिक व्यक्ति के साथ शारीरिक संबंध रखती है उन्हें इस तरह का संक्रमण अधिक होता है I इस तरह के संक्रमण में उनकी योनि से पीला हरा, बदबूदार, झागदार पानी आने लगता है तथा योनि में जलन व सूजन होने लगती है I

  • गोनोरिया

यह संक्रमण भी यौन प्रक्रिया के दौरान एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है I यह यौन संचारित संक्रमण नेइसेरिया गोनोरिया नाम के बैक्टीरिया की वजह से योनि में फैलता है I यह संक्रमण महिला के गर्भाशय ग्रीवा को भी प्रभावित कर सकता है जो कई दूसरी बीमारियों के साथ बाँझपन का कारण भी बन सकता है I इस तरह के संक्रमण में महिला की योनि से मवादयुक्त पीला पानी आने लगता है और पेशाब करते हुए उन्हें दर्द होता है तथा पीरियड्स के बाद भी रक्त आना जारी रहता है I

  • जेनाइटल हरपीस

जेनाइटल हरपीस सिंप्लेक्स वायरस के कारण होने वाला एक सामान्य यौन संचारित संक्रमण है। यौन संपर्क इस संक्रमण का प्राथमिक तरीका है जिससे वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। यह संक्रमण योनि में घावों का कारण बनता है I इस संक्रमण के कारण महिला की योनि में तथा उसके आसपास बेहद दर्द वाले अल्सर हो जाते है जो द्रव से भरे होते है I यह संक्रमण उनके शरीर में एक बार निष्क्रिय हो जाने के बाद कई सालों बाद फिर से सक्रिय हो सकते है I

  • जेनाइटल वार्ट्स

यह एक यौन संचारित संक्रमण है जिसके लिए ह्यूमन पेपिलोमावायरस को जिम्मेदार माना जाता है I यह संक्रमण जननांग क्षेत्र के नम ऊतकों को प्रभावित करते हैं। योनि पर यह छोटे, मांस के रंग के धक्कों की तरह दिखते हैं I यह वैजाइना पर छोटे आकार की गांठें होती है जो योनि में दर्द, बेचैनी और खुजली पैदा करते है I महिला के जननांगों या गुदा के आसपास यह छोटे मस्से या गुच्छों के रूप में विकसित होते है लेकिन कुछ मामलों में यह बड़े पैमाने पर विकसित होने लगते हैं I 

वैजाइनल इंफेक्‍शन की जटिलताएं

वैजाइनल इंफेक्‍शन की वजह से महिलाओं को कई जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है जिनमें शामिल है -

  • अनुपचारित योनि संक्रमण कभी-कभी रक्तप्रवाह में मिल सकता है जिसके कारण महिला के रक्त में संक्रमण हो सकता है I
  • आक्रामक कैंडिडिआसिस संक्रमण महिला के मस्तिष्क और हृदय सहित शरीर के अन्य भागों को प्रभावित कर सकता है।
  • कुछ महिलाओं को बार-बार  यीस्ट इन्फेक्शन का सामना करना पड़ता है जो उन्हें एक साल में कई बार परेशान करता है I
  • गर्भावस्था के दौरान होने वाला संक्रमण कभी कभी महिला तथा बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकता है I
  • महिला की योनि के आस-पास के क्षेत्र में सूजन, दर्द या दरार होने के कारण संक्रमण उनके  त्वचा में फ़ैल सकता है I
  • एक लम्बे समय तक होने वाले संक्रमण के कारण महिला के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहद कमज़ोर हो सकती है जिससे यह संक्रमण शरीर के अन्य भागों में फैल सकता है।
  • यीस्ट संक्रमण महिला की योनि में पीएच स्तर को बदल सकता है, जिससे उन्हें गर्भधारण करने में कठिनाई हो सकती है।
  • बार-बार होने वाले या गंभीर यीस्ट संक्रमण महिला के मासिक चक्र में बाधा डाल सकते हैं।

मान्यताएं

क्या कह रहे हैं मरीज

"विभिन्न अध्ययन किए गए हैं जहां जैन गाय मूत्र चिकित्सा ने रोगियों में महत्वपूर्ण सुधार दिखाया है।"