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इरेक्टाइल डिस्फंक्शन (नपुंसकता) का इलाज

अवलोकन

इरेक्टाइल डिस्फंक्शन अथवा नपुंसकता पुरुषों में होने वाली यौन संबंधित बीमारी होती है जोकि एक बहुत ही आम स्थिति है l जब संभोग के दौरान पुरुष अपनी पुरुषत्वता खो देता है तो उसे इरेक्टाइल डिस्फंक्शन  अर्थात नपुंसकता कहा जाता है l ऐसे में पुरुष सम्भोग के समय अपने पेनिस में पर्याप्त इरेक्शन या स्तंभन लाने में या तो विफल रहते है या फ़िर उसे अधिक समय तक नहीं रख पाते है l नपुंसकता की स्थिति में पुरूष यौन संबंध बनाने के लिए लिंग में उत्तेजना पाने अथवा उसे बनाये रखने में अक्षम होते है जिससे उनके शरीर में वीर्य कम हो जाता है या खत्म हो जाता हैl 

पुरुषों में नपुंसकता आने पर वह संतोषजनक संभोग नहीं कर पाते हैं और ना ही अपने साथी को संतुष्ट कर पाने में समर्थ हो पाते है l इससे पुरुषों को कई तरह की समस्या आती है तथा इस स्थिति से दंपति के बीच दूरियाँ आने लगती है l कभी कभी नपुसंकता पुरुषों की असामान्य समस्याओं जैसे कि तनाव, थकान, शराब आदि के कारण भी हो सकती है l परंतु जब यह स्थिति एक से अधिक बार तथा लंबे समय के लिए होती है तो यह पुरुषों के लिए एक चिंताजनक समस्या बन सकती हैं l नपुंसकता के कारण विवाहित दंपति को सन्तान प्राप्ति के लिए भी कई तरह के संकट का सामना करना पड़ सकता है l

अनुसंधान

जैन के गोमूत्र चिकित्सा क्लिनिक का उद्देश्य प्राचीन आयुर्वेदिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक के साथ एकीकृत करके एक सुखी और स्वस्थ जीवन बनाना है। हमारी चिकित्सा का अर्थ है आयुर्वेद सहित गोमूत्र व्यक्ति के तीन दोषों पर काम करता है- वात, पित्त और कफ। ये त्रि-ऊर्जा हमारे स्वास्थ्य को बनाए रखती हैं, इन दोषों में कोई भी असंतुलन, मानव स्वास्थ्य और बीमारी के लिए जिम्मेदार है। हमें यह कहते हुए खुशी हो रही है कि हमारे उपचार के तहत हमने इतने सारे सकारात्मक परिणाम देखे हैं। हमारे इलाज के बाद हजारों लोगों को कई बीमारियों से छुटकारा मिला।

हमारे मरीज न केवल अपनी बीमारी को खत्म करते हैं बल्कि हमेशा के लिए एक रोग मुक्त स्वस्थ जीवन जीते हैं। यही कारण है कि लोग हमारी चिकित्सा की ओर ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। आयुर्वेदिक उपचारों में हमारे वर्षों के शोध ने हमें अपनी कार्यप्रणाली को आगे बढ़ाने में मदद की है। हम पूरी दुनिया में एक स्वस्थ और खुशहाल समाज का निर्माण करने के लिए अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य रखते हैं।

गोमूत्र चिकित्सा द्वारा प्रभावी उपचार

गोमूत्र चिकित्सा के दृष्टिकोण के अनुरूप कुछ जड़ी-बूटियाँ शारीरिक दोषों (वात, पित्त और कफ) को फिर से जीवंत करने का काम करती हैं जो कि अधिकांश इरेक्टाइल डिस्फंक्शन (नपुंसकता) का कारण बन सकती हैं यदि वे असंतुष्ट हों। उनसे निपटने के लिए कुछ आयुर्वेदिक दवाओं में कई लाभकारी तत्व शामिल हैं। यह शरीर के चयापचय में सुधार करता है।

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प्रमुख जड़ी-बूटियाँ जो उपचार को अधिक प्रभावी बनाती हैं

मुलेठी

मुलेठी एक आदमी के यौन प्रदर्शन को बढ़ाती है, कामेच्छा में सुधार करती है और उसे बेहतर कार्य करने में मदद करती है। यह जड़ी बूटी रक्त प्रवाह में सुधार करके स्तंभन दोष के मुद्दों को दूर करने में मदद कर सकती है। यह प्रकृति में कामोद्दीपक है जिसकी गंध एक आदमी की कामेच्छा रेसिंग प्राप्त करने के लिए पर्याप्त है।

अकरकरा

यह विभिन्न पुरुष यौन समस्याओं जैसे शीघ्र पतन और स्तंभन दोष के प्रबंधन के लिए उपयोगी है। यह वाजिकारन (कामोद्दीपक) गुण के कारण पुरुष यौन समस्याओं के मामले में सबसे उपयोगी जड़ी बूटियों में से एक है।

पिप्पली

इस पौधे को विशेष रूप से इसके कामोत्तेजक गुणों के लिए, स्तंभन दोष और शीघ्र पतन के इलाज के लिए महत्व दिया जाता है।

बड़ी इलायची

यह एक शक्तिशाली टॉनिक और उत्तेजक के रूप में काम करता है। यह न केवल शरीर को मजबूत बनाने में मदद करता है बल्कि स्तंभन दोष और नपुंसकता जैसे यौन रोगों के इलाज में भी अद्भुत काम करता है। यह एक शक्तिशाली कामोद्दीपक के रूप में काम करता है जो यौन स्वास्थ्य, स्तंभन दोष का समर्थन करने में मदद कर सकता है।

काली मूसली

यह कामोत्तेजक गुणों के कारण स्तंभन दोष का प्रबंधन करने में मदद कर सकता है। यह यौन इच्छा को बढ़ाता है और संभोग के दौरान इरेक्शन को बनाए रखने में मदद करता है। यह पुरुष शक्ति को बढ़ाने में भी मदद करता है क्योंकि इसमें शुक्राणुजन्य गुण होता है। यह शुक्राणु की गुणवत्ता और साथ ही शुक्राणुओं की संख्या में सुधार करने में मदद करता है।

अश्वगंधा

अश्वगंधा ने कामेच्छा में सुधार, रक्त प्रवाह और तनाव के स्तर को कम करने में मदद करने के लिए अलग-अलग प्रभाव दिखाए हैं। यह बदले में स्तंभन प्राप्त करने में शामिल विभिन्न शरीर प्रणालियों में सुधार करके स्तंभन दोष में सुधार करने में मदद करता है।

गोखरू

गोखरू यौन इच्छा और ड्राइव में सुधार करता है जो बाद में यौन प्रदर्शन में सुधार करता है। यह जड़ी बूटी एक गैर-हार्मोनल जैव उत्तेजक के रूप में कार्य करके प्राकृतिक अंतर्जात टेस्टोस्टेरोन के स्तर को बढ़ाती है। गोखरु पेनाइल टिश्यू को मजबूत करके और पेनाइल इरेक्शन को बढ़ाकर इरेक्टाइल डिस्फ़ंक्शन को प्रबंधित करने में मदद करता है।

केवच बीज

केवच बीज़ एल-डोपा की उपस्थिति के कारण टेस्टोस्टेरोन के स्तर को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। एल-डोपा गोनाडोट्रोपिन-रिलीजिंग हार्मोन (GnRH) के स्राव को उत्तेजित करता है जो अंततः एफएसएच (कूप उत्तेजक हार्मोन) और एलएच (ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन) को स्रावित करने के लिए पिट्यूटरी ग्रंथि को सक्रिय करता है। एफएसएच और एलएच के स्तर में यह वृद्धि वृषण के लेडिग कोशिकाओं द्वारा टेस्टोस्टेरोन के संश्लेषण को बढ़ाती है।

शतावरी

स्तंभन दोष के इलाज के लिए शतावरी एक उपयुक्त जड़ी बूटी है। यह पुरुषों और महिलाओं दोनों में प्रजनन को स्थिर करता है; रक्त परिसंचरण में सुधार, तंत्रिका तंत्र को शांत करता है और पाचन में सुधार करता है। इसका अर्क विभिन्न रूपों में पाया जाता है - यह एक मिलावट के रूप में हो सकता है या यह एक पाउडर के रूप में।

शिलाजीत

शिलाजीत एंटीऑक्सीडेंट में समृद्ध है जो प्रतिरक्षा और स्मृति में सुधार करता है। यह एंटी इन्फ्लेमेटरी और ऊर्जा बढ़ाने वाला है। ये सभी लाभ शिलाजीत के द्वारा स्तंभन दोष से जुड़े कई लक्षणों को दूर करने के लिए मदद करते हैं।

आंवला हरा

यह अपने वैश्य (कामोद्दीपक) गुण के कारण स्तंभन समस्याओं का प्रबंधन करने में मदद करता है। यह ताक़त बढ़ाने और यौन व्यवहार में सुधार करने में मदद करता है। यौन क्षमता बढ़ाने में योगदान देने के लिए आंवला हरे में एंटीऑक्सीडेंट और फैटी एसिड भी पाए जाते हैं। यह अंडकोष में इष्टतम तापमान बनाए रखने में भी मदद करता है।

दालचीनी पाउडर

इसका अर्क प्रजनन स्वास्थ्य को बढ़ावा दे सकता है और शुक्राणु और टेस्टोस्टेरोन के उत्पादन को उत्तेजित कर सकता है और यौन क्रियाओं में सुधार करने में मदद करता है जो इरेक्शन में मदद कर सकता है। यह रक्त शर्करा और हानिकारक एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को कम करता है जो शिश्न की धमनियों (विशेष रूप से मधुमेह वाले लोगों में) को संरक्षित करने में मदद करता है जो इरेक्शन को उत्पन्न करने के लिए आवश्यक हैं।

इलायची पाउडर

यह एक शक्तिशाली कामोद्दीपक के रूप में कार्य करता है जो स्तंभन दोष और नपुंसकता के साथ मदद कर सकता है। यह टेस्टोस्टेरोन के स्तर को बेहतर बनाने में मदद करता है। इसका अर्क ग्लूटाथियोन नामक एक एंटीऑक्सीडेंट की गतिविधि को बढ़ाता है। ग्लूटाथियोन के स्तर में वृद्धि, गोनाडोट्रोपिन-रिलीजिंग हार्मोन के स्तर को बढ़ाती है।

जायफल पाउडर

इसे गुणकारी कामोत्तेजक के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि यह तंत्रिका उत्तेजक गुणों के कारण होता है जो कामेच्छा को बढ़ाता है, लिंग निर्माण में सुधार करता है, स्खलन विलंबता/समय को बढ़ाता है और निरंतर तरीके से यौन गतिविधि को तेज करता है। यह रक्त परिसंचरण को बढ़ाने के लिए प्रभावी है जो स्तंभन दोष के साथ मदद कर सकता है।

लवंग पाउडर

इसका उपयोग वैकल्पिक चिकित्सा में शीघ्र पतन के इलाज में संभवतः प्रभावी सहायता के रूप में किया जाता है। यह वृषण कार्यो को बढ़ा सकता है जिससे टेस्टोस्टेरोन का स्तर बढ़ सकता है। लवंग पाउडर का उपयोग यौन मांसपेशियों को टोन करने और संकुचन को तेज करने के लिए किया गया है।

गोजला

हम अपने गोमूत्र चिकित्सा में गोजला का उपयोग करते हैं, मूल रूप से इसका मतलब है कि हमारी दवा में मुख्य घटक गोमूत्र अर्क है। यह अर्क गाय की देसी नस्लों के मूत्र से बना है। गोजला के अपने फायदे हैं क्योंकि यह किसी भी प्रकार के संदूषण की संभावना से परे है। इसकी गुणवत्ता उच्च है एवं प्रचुर मात्रा में है। जब गोजला आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों के साथ मिलाया जाता है तो यह किसी भी बीमारी के इलाज के लिए अधिक प्रभावी हो जाता है और विशेष बीमारियों में अनुकूल परिणाम देता है। इस अर्क का अत्यधिक परीक्षण किया गया है और इसलिए यह अधिक विश्वसनीय और लाभदायक भी है।

जीवन की गुणवत्ता

गोमूत्र उपचार अच्छा स्वास्थ्य लाता है और दोषों को संतुलित रखता है। आज हमारे उपचार के परिणामस्वरूप लोग अपने स्वास्थ्य में लगातार सुधार कर रहे हैं। यह उनके दैनिक जीवन की गुणवत्ता में सुधार करता है। गोमूत्र के साथ-साथ आयुर्वेदिक दवाएं विभिन्न दुष्प्रभावों को कम करने के लिए एक पूरक चिकित्सा के रूप में काम कर सकती हैं जिन रोगियों को भारी खुराक, मानसिक दबाव, विकिरण और कीमोथेरपी के माध्यम से उपचार दिया जाता हैं। हम लोगों को मार्गदर्शन करते हैं कि यदि कोई रोग हो तो उस असाध्य बीमारी के साथ एक खुशहाल और तनाव मुक्त जीवन कैसे जिएं। हजारों लोग हमारी थेरेपी लेने के बाद एक संतुलित जीवन जीते हैं और यह हमारे लिए एक बड़ी उपलब्धि है कि हम उन्हें एक ऐसा जीवन दें जिनके वे सपने देखते हैं।

जटिलता निवारण

आयुर्वेद में, गोमूत्र की एक विशेष स्थिति है जिसे अक्सर इरेक्टाइल डिस्फंक्शन (नपुंसकता) जैसी बीमारियों के लिए मददगार कहा जाता है। हमारे वर्षों के श्रमसाध्य कार्य यह साबित करते हैं कि हमारी जड़ी-बूटियों का उपयोग करने से इरेक्टाइल डिस्फंक्शन (नपुंसकता) की लगभग सभी जटिलताएं गायब हो जाती हैं। पीड़ित हमें बताते हैं कि वे शिश्न उत्तेजना, शीघ्रपतन, सेक्स करने की इच्छा, शरीर में वीर्य की कमी, हार्मोनल और रासायनिक परिवर्तनों के नियंत्रण और संतुलन में एक बड़ी राहत महसूस करते हैं, इससे रोगी की प्रतिरक्षा प्रणाली में सुधार होता हैं जो अन्य इरेक्टाइल डिस्फंक्शन (नपुंसकता) जटिलताओं के अनुकूल काम करता है।

जीवन प्रत्याशा

यदि हम किसी व्यक्ति की अस्तित्व प्रत्याशा के बारे में बात कर रहे हैं तो गोमूत्र उपाय स्वयं में एक बड़ी आशा हैं। कोई भी बीमारी या तो छोटी या गंभीर स्थिति में होती है, जो मानव शरीर पर बुरा प्रभाव डालती है और कुछ वर्षों तक मौजूद रहती है, कभी-कभी जीवन भर के लिए। एक बार विकार की पहचान हो जाने के बाद, अस्तित्व प्रत्याशा कम होने लगती  है, लेकिन गोमूत्र चिकित्सा के साथ नहीं। हमारा ऐतिहासिक उपाय अब इस बीमारी से सबसे प्रभावी रूप से ही छुटकारा नहीं दिलाता है, बल्कि उस व्यक्ति की जीवनशैली-अवधि में भी वृद्धि करता है और उसके रक्तप्रवाह में कोई विष भी नहीं छोड़ता है और यही हमारा अंतिम उद्देश्य है।

दवा निर्भरता को कम करना

"सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चित् दुःख भाग्भवेत्", इसका अर्थ है कि सभी को खुश रहने दें, सभी को रोग मुक्त होने दें, सभी को सत्य देखने दें, कोई भी दुःख का अनुभव नहीं करे।  इस कहावत का पालन करते हुए, हम अपने समाज को इसी तरह बनाना चाहते हैं। हमारा उपाय विश्वसनीय उपचार देने, जीवन प्रत्याशा बढ़ाने और प्रभावित लोगों की दवा निर्भरता कम करने के माध्यम से इसे पूरा करता है। हमारे उपाय में इस वर्तमान दुनिया में उपलब्ध किसी भी वैज्ञानिक उपचारों की तुलना में अधिक लाभ और शून्य जोखिम हैं।

पुनरावृत्ति की संभावना को कम करना

व्यापक चिकित्सा अभ्यास के विपरीत, हम रोग और तत्वों के मूल उद्देश्य पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो इस पद्धति का उपयोग करके केवल बीमारी के प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय बीमारी की पुनरावृत्ति की संभावनाओं में सुधार कर सकते हैं, हम कुशलता से पुनरावृत्ति दर को कम रहे हैं और मानव जीवन के लिए एक नया रास्ता दे रहे हैं , जोकी उन्हें भावनात्मक और शारीरिक रूप से उनके जीवन को बेहतर तरीके से जीने का एक तरीका बताते है।

इरेक्टाइल डिस्फंक्शन (नपुंसकता) के कारण 

नपुंसकता के कई निम्नलिखित कारण और जोखिम कारक हो सकते है - 

  • मनोवैज्ञानिक कारण 

मनोवैज्ञानिक समस्याओं के परिणामस्वरूप इरेक्टाइल डिस्फंक्शन का एक प्रमुख कारण माना जाता है l कई मानसिक समस्यायें व्यक्ति की कामेच्छा को प्रभावित करता है जिस वजह से पुरुषों में नपुंसकता आती है l ख़राब जीवन-शैली, आदतों, अत्यधिक व्यस्त जीवन के कारण पुरुष कई तरह की मानसिक समस्या से गुजरता है जिस वजह से उनके जीवन में इस की संकट उत्पन्न होते है l पुरुषों में यह मानसिक समस्या निम्न रूपों में होती है -

  • तनाव : जब पुरुष अत्यधिक तनाव लेते है तो उनके शरीर में टेस्टोस्टेरोन नामक मेल हार्मोन में कमी आने लगती है जिससे पुरुष का शीघ्र पतन हो जाता है और वे नपुंसकता का शिकार हो जाते है l 
  • अवसाद : किसी वजह से पुरुषों का अवसाद ग्रस्त होना उनकी कामेच्छा को नष्ट कर देता है जिससे उन्हें इरेक्टाइल डिस्फंक्शन  की स्थिति का सामना करना पड़ता है l
  • चिंता : सम्भोग के समय अच्छा प्रदर्शन करने व साथी को खुश तथा उन्हें संतुष्ट करने की चिंता उनके इस यौन रोग का कारण बन सकती है l 
  • मनस्ताप या मनोविक्षिप्त : नपुंसकता की स्थिति उन पुरुषों को भी हो सकती है जो मन की असामान्य दशा से गुजर रहे होते है l

 

  • शारीरिक कारण 

सम्भोग हेतु पुरुषों को उत्तेजित होने के लिए रक्त-वाहिकायें, तंत्रिकायें, इच्छाशक्ति तथा हार्मोंस की आवश्यकता होती है l पुरुष के शरीर से संबंधित कई स्थितियाँ यदि उनकी इन आवश्यकताओ में समस्याएं उत्पन्न करती है तो यह उनके इरेक्टाइल डिस्फंक्शन  का कारण बन सकती है l इन स्थितियों में निम्न को शामिल किया जाता है - 

  • हृदय रोग : दिल की बीमारी व्यक्ति की नपुंसकता का कारण बन सकती है l हृदय रोग से पीड़ित पुरुषों की रक्त वाहिकाएं प्रभावित होती है जिस वज़ह से उनके पूरे शरीर के साथ लिंग पर भी प्रभाव पड़ता है जिससे उनके लिंग में तनाव नहीं आ पाने की वजह से उनमे नपुंसकता रोग बढ़ते है l
  • मधुमेह : मधुमेह से ग्रसित पुरुषों की शारीरिक गतिविधियों में शिथिलता आने लगती है जिसके फलस्वरूप उनकी उत्तेजना में भी शिथिलता आती है और उन्हें नपुंसकता का सामना करना पड़ सकता है l 
  • उच्च रक्तचाप : व्यक्ति का उच्च रक्तचाप उनके लिंग में रक्त प्रवाह को प्रभावित करता है | उच्च रक्तचाप से परेशान व्यक्ति उनकी यौन संबंधों में अरुचि को दर्शाता है जिस कारण उन्हें नपुंसकता की समस्या हो सकती है l
  • धुम्रपान और एल्कोहल : एल्कोहल तथा सिगरेट का अत्यधिक सेवन पुरुषों के वीर्य को नुकसान पहुँचाता है l एल्कोहल और धूम्रपान करने वाले व्यक्ति की रक्त वाहिकाओं में संकुचन होने लगता है जिससे उनके लिंग में खून का प्रवाह कम हो जाता है l ऐसी स्थिति में पुरुषों के स्पर्म (शुक्राणु) की गुणवत्ता धीरे धीरे कम होने लगती है, उनकी स्पर्म काउंटिग घट जाती है तथा उनकी पौरुष क्षमता कम हो जाने से नपुसंकता का ख़तरा बढ़ जाता है l
  • संक्रमण : यदि कोई पुरुष हेपेटाइटिस संक्रमण से ग्रसित होता है तो इस संक्रमण से उनके स्पर्मेटोजेनेसिस पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है जिससे उनके टेस्टोस्टेरोन हार्मोन, शुक्राणुओं आदि में कमी के साथ उनकी प्रजनन क्षमता पर भी दुष्प्रभाव होता है जिससे उनमे नपुसंकता आती है l 
  • मोटापा : व्यक्ति का अत्यधिक वज़न उनकी रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुँचाता है तथा टेस्टोस्टेरॉन हार्मोन के स्तर को कम करता है जो उनकी नपुसंकता का कारण बन सकता है l
  • कुछ दवाइयाँ : कुछ ड्रग्स का सेवन करना व्यक्ति की नपुसंकता का कारण बन सकती है l हेरोइन, कोकिन, गांजा जैसे नशीले पदार्थ, एंटी कैंसर, एंटी डिप्रेसेंट्स जैसी दवाइयों का सेवन व्यक्ति की नपुसंकता को बढ़ाते हैं l 


 

इरेक्टाइल डिस्फंक्शन (नपुंसकता) से निवारण 

पुरुष अपनी जीवन शैली में कुछ अच्छे बदलाव लाकर इरेक्टाइल डिस्फंक्शन  (नपुंसकता) के ख़तरे को कम कर सकते है l व्यक्ति को अपने जीवन में निम्नलिखित बदलाव लाने चाहिए - 

  • स्वस्थ और संतुलित आहार का सेवन कर पुरुष नपुंसकता की संभावना को कम कर सकते है l 
  • व्यक्ति को धुम्रपान व एल्कोहल के अत्यधिक सेवन जैसी आदतों को त्यागना चाहिए l
  • अधिक वज़न वाले पुरुषों को अपना वज़न कम तथा संतुलित करने के प्रयास करने चाहिए तथा वज़न को बढ़ने से रोकना चाहिए l
  • व्यक्ति को नियमित व्यायाम, योग, कसरत आदि द्वारा अपने शरीर को स्वस्थ बनाना चाहिए l
  • व्यक्ति को अपने शरीर में शर्करा के स्तर को बढ़ने से रोकना चाहिए l
  • व्यक्ति को हेरोइन, कोकिन, गांजा जैसे नशीले पदार्थ के सेवन की आदतों को छोड़ना चाहिए l
  • अपनी जीवनशैली को उत्तम बनाने के साथ साथ व्यक्ति को अत्यधिक मानसिक तनाव लेने से बचना चाहिए व चिंता मुक्त रहना चाहिए l
  • हेपेटाइटिस संक्रमण आदि से अपना बचाव करने हेतु व्यक्ति को समय पर वैक्सीनेशन करवाना चाहिए l

इरेक्टाइल डिस्फंक्शन (नपुंसकता) के लक्षण 

व्यक्ति में नपुंसकता के निम्नलिखित लक्षण और संकेत दिखाई देते हैं - 

  • सम्भोग करने की इच्छा में कमी होना 
  • लिंग में उत्तेजना ना आना 
  • शीघ्रपतन होना
  • यौन क्रियाओं के वक़्त उत्तेजना बनाए रखने में असमर्थ होना 
  • सम्भोग सुख की प्राप्ति न होना 
  • वीर्य में कमी होना 
  • असंतुष्टि के कारण अवसाद का बढ़ना 
  • पेनिस का पतला, टेढ़ा और छोटा हो जाना 

 

इरेक्टाइल डिस्फंक्शन (नपुंसकता) के प्रकार 

इरेक्टाइल डिस्फंक्शन  (नपुंसकता) के मुख्य रूप से दो प्रकार होते हैं - 

  • इस्केमिक प्रायपिस्म अथवा निम्न प्रवाह प्रायपिस्म

इस्केमिक प्रायपिस्म जिसे निम्न प्रवाह प्रायपिस्म भी कहा जाता है, नपुसंकता का वह प्रकार होता है जिसमें रक्त लिंग को छोड़ने में सक्षम नहीं हो पाता है अर्थात जब रक्त पेनिस के स्पंजी उत्तक कक्ष में फँस जाता है तो इस स्थिति को इस्केमिक प्रायपिस्म या निम्न प्रवाह प्रायपिस्म कहते है l यौन रुचि में कमी, कठोर पेनिस आदि लक्षण इसके अंतर्गत शामिल किए जाते है l 

  • गैर - इस्केमिक प्रायपिस्म अथवा उच्च प्रवाह प्रायपिस्म

आमतौर पर लिंग अथवा पेरिनेम जोकि अंडकोष और गुदा के बीच का क्षेत्र होता है, में चोट लगने के कारण गैर - इस्केमिक प्रायपिस्म अथवा उच्च प्रवाह प्रायपिस्म की स्थिति उत्पन्न होती है l जब चोट लिंग की धमनियों को क्षतिग्रस्त करती है तो लिंग में रक्त का अत्यधिक प्रवाह होने लगता है l हालाँकि गैर - इस्केमिक प्रायपिस्म, इस्केमिक प्रायपिस्म की तुलना में दुर्लभ तथा कम दर्द वाले होते हैं l

इरेक्टाइल डिस्फंक्शन (नपुंसकता) की जटिलताएँ 

इरेक्टाइल डिस्फंक्शन (नपुंसकता) से पीड़ित व्यक्ति को निम्नलिखित जटिलताओं का सामना करना पड़ता है - 

  • व्यक्ति के आत्मसम्मान में कमी आने लगती है l
  • व्यक्ति की नपुसंकता विवाहित दंपति की निःसंतानता का कारण बनतीं है l
  • व्यक्ति अवसाद तथा तनाव से ग्रसित रहने लगता है l
  • पति व पत्नी के रिश्तों में दूरियां आने लगती है l
  • व्यक्ति के यौन जीवन में असंतोष आने लगता है l

मान्यताएं

क्या कह रहे हैं मरीज

"विभिन्न अध्ययन किए गए हैं जहां जैन गाय मूत्र चिकित्सा ने रोगियों में महत्वपूर्ण सुधार दिखाया है।"