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हड्डियों का कैंसर का इलाज

अवलोकन

हड्डियां हमारे शरीर का मुख्य आधार होती है l हड्डियों में हुई किसी भी प्रकार की ख़राबी हमारे शरीर को अक्षम बना सकती है l हड्डियों के कैंसर से आशय है कि जब हमारे शरीर की हड्डियों में असामान्य कोशिकाएं अनियंत्रित होकर वृद्धि करने लगती है तो ये कैंसर का रूप ले लेती है l ये असामान्य कोशिकाएं हड्डियों की स्वस्थ ऊतकों को नष्ट करने लगती हैं l यद्यपि हड्डियों का कैंसर दुर्लभ होता है तथापि यह कैंसर शरीर को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचाता है l हड्डियों के कई ट्यूमर कैंसर सौम्य होते हैं क्योंकि ये कैंसर में तब्दील नहीं हो सकते ना ही शरीर के दूसरे किसी भाग में फैलते है l परन्तु फिर भी हड्डियों के ये ट्यूमर हड्डियों को बेहद कमजोर कर देते हैं l 

शरीर की हड्डियों में ही जब ट्यूमर बनने से कैंसर की शुरुआत होने लगती है तो इसे प्राथमिक बोन कैंसर अथवा बोन सार्कोमा कहा जाता है। ये ट्यूमर किसी भी हड्डी की मांसपेशियों, रक्त वाहिनी ऊतकों में हो सकता है और जब शरीर के किसी अन्य भाग में हुआ कैंसर हड्डियों तक फैल जाता है तो इसे सेकंडरी बोन कैंसर के नाम से जाना जाता है l सामान्यतः यह कैंसर फेफड़ों, स्तन और प्रोस्टेट में शुरू हुए कैंसर का हड्डियों तक फैलने की वजह से होते हैं l ज्यादातर बोन कैंसर हाथ, पैरों तथा कंधों की हड्डियों में होता है l

अनुसंधान

जैन के गोमूत्र चिकित्सा क्लिनिक का उद्देश्य प्राचीन आयुर्वेदिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक के साथ एकीकृत करके एक सुखी और स्वस्थ जीवन बनाना है। हमारी चिकित्सा का अर्थ है आयुर्वेद सहित गोमूत्र व्यक्ति के तीन दोषों पर काम करता है- वात, पित्त और कफ। ये त्रि-ऊर्जा हमारे स्वास्थ्य को बनाए रखती हैं, इन दोषों में कोई भी असंतुलन, मानव स्वास्थ्य और बीमारी के लिए जिम्मेदार है। हमें यह कहते हुए खुशी हो रही है कि हमारे उपचार के तहत हमने इतने सारे सकारात्मक परिणाम देखे हैं। हमारे इलाज के बाद हजारों लोगों को कई बीमारियों से छुटकारा मिला।

हमारे मरीज न केवल अपनी बीमारी को खत्म करते हैं बल्कि हमेशा के लिए एक रोग मुक्त स्वस्थ जीवन जीते हैं। यही कारण है कि लोग हमारी चिकित्सा की ओर ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। आयुर्वेदिक उपचारों में हमारे वर्षों के शोध ने हमें अपनी कार्यप्रणाली को आगे बढ़ाने में मदद की है। हम पूरी दुनिया में एक स्वस्थ और खुशहाल समाज का निर्माण करने के लिए अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य रखते हैं।

गोमूत्र चिकित्सा द्वारा प्रभावी उपचार

गोमूत्र चिकित्सा विधि के अनुसार कुछ जड़ी-बूटियां शरीर के दोषों (वात, पित्त और कफ) को फिर से जीवंत करने का काम करती हैं जो कि कैंसर का कारण बनती हैं यदि वे असम्बद्ध हैं। कुछ आयुर्वेदिक दवाओं में उनके उपचार के लिए कई लाभकारी तत्व होते हैं। यह शरीर के चयापचय में सुधार करता है।

केमोट्रिम+ सिरप

हाइराइल + लिक्विड ओरल

टोक्सिनोल + लिक्विड ओरल

एन्सोक्योर + कैप्सूल

फोर्टेक्स पाक

प्रमुख जड़ी-बूटियाँ जो उपचार को अधिक प्रभावी बनाती हैं

कांचनार गुग्गुल

कांचनार गुग्गुल कोशिका विभाजन (रोगाणुरोधी) को रोककर और कोशिका प्रसार को कम करके साइटोटोक्सिक प्रभाव प्रदर्शित करता है। कांचनार गुग्गुल में हड्डी के कैंसर की रोकथाम की क्षमता होती हैं और यह क्षमता कैंसर के उपचार में इसके पारंपरिक उपयोग का भी समर्थन करती हैं।

सहजन

आमतौर पर हड्डी के कैंसर के उपचार के लिए सहजन के कैंसर रोधी यौगिकों जैसे केम्पफेरोल और आइसोक्वेरसेटिन को उपयोग में लिया जाता है।

गिलोय

गिलोय में मौजूद गुण जैसे ग्लूकोसामाइन, ग्लूकोसिन, गिलोय इन, गिलोइनिन, गिलोस्टेराल और बेरबेरीन नामक एल्केलाइड शरीर में हड्डी के कैंसर की कोशिकाओं को खत्म करते हैं और रक्त और कैंसर कोशिकाओं को साफ करते हैं।

अश्वगंधा

अश्वगंधा में ऑक्सीजन की प्रतिक्रियाशील श्रेणी होती है जो अधिकांश कैंसर कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा कर उन्हें नष्ट करते हैं। अश्वगंधा में पाया जाने वाला विथफेरिन ए नामक घटक ट्यूमर को विकसित करने वाली कोशिकाओं को नष्ट करने में महत्वपूर्ण है।

कालमेघ

कालमेघ के एक प्रमुख सक्रिय घटक एण्ड्रोग्राफ़ोलाइड में एंटीट्यूमर की एक विस्तृत श्रृंखला है जो कैंसर के जीवाणुओं को रोकता है।

पुनर्नवा

पुनर्नवा कैंसर के इलाज के लिए एक अच्छी जड़ी बूटी है। पुर्ननाविन, एक अल्कलॉइड एक एंटी-कैंसर एजेंट है जो कैंसर कोशिकाओं को रोकने में मदद करता है।

आमला

इसमें विटामिन सी, ई, बीटा-कैरोटीन और कैरोटिनॉइड जैसे एंटीऑक्सीडेंट की अच्छी मात्रा होती है जो कार्सिनोजेनिक कोशिकाओं को बढ़ने से रोकते हैं।

पिप्पली

पाइपरलोंग्युमाइन (PL) पिप्पली में पाया जाने वाला एक रसायन है जो ट्यूमर के एंजाइम को रोकने के लिए उपयोग होता है।

भृंगराज

यह कैंसर की कोशिकाओं को शरीर के अंदर फैलने से रोकने में प्रभावी है। इसमें पाए जाने वाले प्राकृतिक अणु, अधिकांश कैंसर कोशिकाओं के अंतर्गत डीएनए अणुओं को फैलने से रोकने में सहायक माना जाता हैं।

तुलसी

तुलसी के पत्तों में एक तत्व होता है जिसे यूजेनॉल कहा जाता है जो ज्यादातर कैंसर कोशिकाओं को रोकने में बहुत प्रभावशाली हो सकता है।

नीम

नीम का पत्ता और इसके घटकों को एंटीऑक्सीडेंट और एंटी कार्सिनोजेनिक गुणों के लिए जाना जाता है। नीम घन सत नामक प्रमुख घटक किसी व्यक्ति को अधिकांश कैंसर कोशिकाओं से बचाने के लिए कार्य करता है।

सोंठ

यह एक प्राकृतिक खाद्य घटक है जिसमें कई सक्रिय फेनोलिक यौगिक होते हैं जैसे शोगोल, जिंजरोल और इसमें एंटी कैंसर और एंटीऑक्सीडेंट प्रभाव होते हैं।

बहेड़ा

बहेड़ा ट्यूमर कोशिकाओं में साइटोटॉक्सिसिटी(कोशिका-मृत्यु) को बंद कर सकता है। गैलिक एसिड, बहेड़ा में पाया जाने वाला एक प्रमुख पॉलीफेनोल, उन कोशिकाओं में साइट टॉक्सिसिटी का मुख्य कारक है।

चित्रक

प्लंबेगिन चित्रक का एक कैंसर-रोधी यौगिक होता है जिसका उपयोग कैंसर-कोशिकाओं की वृद्धि को रोकने में किया जाता है।

कुटकी

कुटकी से ली गई "पिक्रोसाइड्स" का उपयोग कैंसर के उपचार के लिए शक्तिशाली रूप से किया जाता है। कैंसर के ट्यूमर को कम करने में प्रमुख तंत्र के रूप में इस्तेमाल किए जाने वाले पिक्रोसाइड के एंटीऑक्सीडेंट गुण अपनी प्रभावी भूमिका निभाते है I

कंघी

इसमें पॉलीफेनोलिक यौगिकों का उपयोग कैंसर कोशिकाओं को रोकने के लिए किया जाता है।

हल्दी

करक्यूमिन (cur-coumin) एक रासायनिक तत्व है जो निश्चित रूप से हल्दी में स्थित है। यह तत्व कैंसर से लड़ सकता है और अधिकांश कैंसर कोशिकाओं को विकसित होने से रोकने में सहायता करता है।

गूलर छाल

इसमें साइटोटॉक्सिसिटी के साथ-साथ कैंसर से रोगी को बचाने के लिए एंटी कैंसर गुण होते है I गूलर छाल में एक या कुछ फाइटोकेमिकल घटक अर्क, कोशिकाओं को बढ़ने से रोकने के लिए एक संभावित एंटी कैंसर यौगिक माने जाते है।

सहदेवी

इस जड़ी बूटी के सिडा एक्यूटा, सिडा कॉर्डिफोलिया, सिडा रंबिफोलिया, यूरेना लोबाटा तत्व बड़े पैमाने पर कैंसर के उपचार में उपयोग किए जाते हैं।

शिलाजीत

शिलाजीत में एक विशिष्ट प्रकार का न्यूरोप्रोटेक्टिव गुण होता है जो शरीर के अंदर कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकता है और इसके खिलाफ मुकाबला करने की शक्ति देता है।

आंवला हरा

आंवला और इसके कुछ फाइटोकेमिकल्स (गैलिक एसिड, पेंटाग्लॉइगल ग्लूकोज, एलाजिक एसिड, पायरोगॉलॉल क्वेरसेटिन और कैम्पफेरोल) को नियोप्लास्टिक कोशिकाओं के लिए साइटोटॉक्सिक के रूप में जाता है। आंवला के कैंसर निवारक प्रभावों के लिए कई तंत्र जिम्मेदार हैं।

शतावरी

रेसमोफ्यूरन, शतावरी का एक महत्वपूर्ण घटक है जो अपने एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों के कारण ट्यूमर की आवृत्ति और कैंसर को रोकता है।

घी

घी कैंसर से लड़ने वाले सुरक्षात्मक तत्वों के साथ एक शक्तिशाली प्रतिनिधि है। एक शक्तिशाली यौगिक, जिसे संयुग्मित लिनोलिक एसिड कहा जाता है, (सीएलए) घी में पाया जाने वाला एक एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करता है। यह भड़काऊ यौगिकों को नष्ट करता है और कैंसर कोशिकाओं को आत्म-विनाशक (एपोप्टोसिस नामक एक प्रक्रिया) बनाता है।

गोखरू

गोखरू में सक्रिय घटक होते हैं जिनमें से मुख्य अल्कलॉइड होते हैं जिन्हें नोहरमैन और हरमन कहा जाता है। इसमें स्टेरॉइडल सैपोनिन भी शामिल हैं जिनमें टेरेस्ट्रोसिन ए-ई, फ्लेवोनोइड ग्लाइकोसाइड और फ़्यूरोस्टोनॉल एंटी-कैंसर गुण होते हैं।

मुलेठी

मुलेठी जड़ से निकाले गए पदार्थ, लाइसोक्लेकोन-ए, में एंटीट्यूमर गतिविधि होती है जो एक दवा प्रतिरोधी प्रोटीन, बीसीएल -2 की मात्रा कम करके कैंसर सेल लाइनों को कम करता है।

गोजला

हम अपने गोमूत्र चिकित्सा में गोजला का उपयोग करते हैं, मूल रूप से इसका मतलब है कि हमारी दवा में मुख्य घटक गोमूत्र अर्क है। यह अर्क गाय की देसी नस्लों के मूत्र से बना है। गोजला के अपने फायदे हैं क्योंकि यह किसी भी प्रकार के संदूषण की संभावना से परे है। इसकी गुणवत्ता उच्च है एवं प्रचुर मात्रा में है। जब गोजला आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों के साथ मिलाया जाता है तो यह किसी भी बीमारी के इलाज के लिए अधिक प्रभावी हो जाता है और विशेष बीमारियों में अनुकूल परिणाम देता है। इस अर्क का अत्यधिक परीक्षण किया गया है और इसलिए यह अधिक विश्वसनीय और लाभदायक भी है।

जीवन की गुणवत्ता

गोमूत्र के उपचार से स्वास्थ्य अच्छा रहता है और शरीर के दोष संतुलित होते है। आज, व्यक्ति हमारी देखभाल के परिणामस्वरूप अपने स्वास्थ्य में तेजी से सुधार कर रहे हैं। यह उनके रोजमर्रा के जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाता है। गोमूत्र के साथ-साथ आयुर्वेदिक दवाएं भारी खुराक, मानसिक तनाव, विकिरण और कीमोथेरेपी के उपयोग से विभिन्न दुष्प्रभावों को कम करने के लिए एक पूरक चिकित्सा के रूप में काम कर सकती हैं। हम लोगों को बीमारी के साथ, यदि कोई हो तो, शांतिपूर्ण और तनाव मुक्त जीवन जीने के लिए निर्देशित करते हैं। हमारे उपचार को लेने के बाद से, हजारों लोग एक स्वस्थ जीवन जीते हैं और यह हमारे लिए एक बड़ी सफलता है कि हम उन्हें एक ऐसा जीवन दें जो वे सपने में देखते हैं।

जटिलता निवारण

आयुर्वेद में गोमूत्र का एक विशेष स्थान है जिसे हड्डियों का कैंसर जैसी भयानक बीमारियों के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। हमारी वर्षों की कड़ी मेहनत से पता चलता है कि आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों के उपयोग से हड्डियों का कैंसर की लगभग कई जटिलताएँ गायब हो जाती हैं। हमारे रोगियों को उनके शरीर में दर्द, नियंत्रण और हार्मोनल और रासायनिक परिवर्तनों में एक बड़ी राहत महसूस होती है, शरीर के अन्य अंगों या आस-पास में कैंसर कोशिकाओं के बढ़ने की गति धीमी हो जाती है, रोगी की प्रतिरक्षा प्रणाली में सुधार होता है जो अन्य हड्डियों  कैंसर जटिलताओं तथा मस्तिष्क नियंत्रण और तंत्रिका तंत्र से संबंधित समस्याओं के लिए अनुकूल रूप से काम करता है I 

जीवन प्रत्याशा

अगर हम जीवन प्रत्याशा की बात करें तो गोमूत्र चिकित्सा अपने आप में एक बहुत बड़ी आशा है। कोई भी बीमारी, चाहे वह छोटे पैमाने पर हो या एक गंभीर चरण में, मानव शरीर पर नकारात्मक प्रभाव डालेगी और यह कई वर्षों तक मौजूद रहेगी, कभी-कभी जीवन भर भी। एक बार बीमारी की पहचान हो जाने के बाद, जीवन प्रत्याशा बहुत कम होने लगती है, लेकिन गोमूत्र चिकित्सा के साथ नहीं। हमारी प्राचीन चिकित्सा न केवल बीमारी से छुटकारा दिलाती है, बल्कि शरीर में किसी भी विषाक्त पदार्थों को छोड़े बिना व्यक्ति के जीवनकाल को बढ़ाती है और यह हमारा अंतिम लक्ष्य है।

दवा निर्भरता को कम करना

"सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद् दुःख भाग्भवेत्", इसका अर्थ है कि सभी को खुश रहने दें, सभी को रोग मुक्त होने दें, सभी को सत्य देखने दें, कोई भी दुःख का अनुभव नहीं करे । इस कहावत का पालन करते हुए, हम चाहते हैं कि हमारा समाज ऐसा ही हो। हमारी चिकित्सा विश्वसनीय उपचार देकर, जीवन प्रत्याशा में सुधार और प्रभावित लोगों की दवा निर्भरता को कम करके इस कहावत को पूरा करती है। इस आधुनिक दुनिया में अन्य उपलब्ध चिकित्सा विकल्पों की तुलना में हमारी चिकित्सा में अधिक फायदे और नुकसान शून्य हैं।

 पुनरावृत्ति की संभावना को कम करना

व्यापक अभ्यास की तुलना में, हम रोग के अंतर्निहित कारण और कारणों पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो विशेष रूप से रोग के नियंत्रण पर निर्भर होने के बजाय रोग की पुनरावृत्ति की संभावना को बढ़ा सकते हैं। हम इस दृष्टिकोण को लागू करके और लोगों के जीवन को एक अलग रास्ता प्रदान करके प्रभावी रूप से पुनरावृत्ति की दर कम कर रहे हैं ताकि वे अपने जीवन को मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ तरीके से जी सकें।

हड्डियों के कैंसर के कारण 

कुछ ऐसे जोखिम कारक निम्नलिखित है जो हड्डियों के कैंसर को प्रभावित कर उनकी उत्पत्ति का कारण बन सकते हैं -

  • ली-फ्रामुनी सिंड्रोम

दमन जीव अर्थात टीपी 53 में उत्परिवर्तन के कारण ली-फ्रामुनी सिंड्रोम प्रायः विरासत में मिली एक ऐसी पारिवारिक गड़बड़ी है जो कैंसर की एक विस्तृत श्रृंखला के लिए जिम्मेदार होने के साथ साथ हड्डियों के कैंसर के जोखिमों को बढ़ाने में भी सहायक की भूमिका निभाता है l

  • पेजेट डिजीज

शरीर की हड्डियों में होने वाला पेजेट रोग शरीर की सामान्य रूप से चलने वाली रीसाइक्लिंग प्रक्रिया को प्रभावित करता है l पेजेट रोग के विकसित होने के कारण ये हड्डियों को बेहद कमजोर बना देता है तथा इस रोग के कारण हड्डियों में कैंसर होने जैसी जटिलताएं भी हो सकती है l

  • अनुवांशिक बीमारियाँ

रेटिनोब्लास्टोमा जो कि आँखों का कैंसर होता है तथा ली-फ्रामुनी सिंड्रोम जैसी बीमारियां जो परिवार के एक सदस्य से दूसरे सदस्य में आनुवांशिक रूप से जीन द्वारा पहुंचती है, हड्डियों के कैंसर के खतरे को ज्यादा बढ़ा सकती है l

  • पुराने कैंसर का इलाज

यदि व्यक्ति अपने किसी पुराने कैंसर से ग्रसित रहा हो तथा इसके इलाज के लिए उसने रेडिएशन थेरेपी, कीमोथेरेपी तथा स्टेम सेल ट्रांसप्लांट जैसे उपचार को अपनाया हो तो ये कारण भी उनके हड्डियों के कैंसर होने के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं l

  • कार्टिलेज ट्यूमर

यह ट्यूमर हड्डियों में होता है जो उसके अंदरूनी रेखाओं अर्थात्‌ कार्टिलेज को प्रभावित करता है l प्रायः यह ट्यूमर कैंसर जनित नहीं होते हैं परंतु यदि ठीक समय पर इसका इलाज ना किया जाए तो यह हड्डियों के कैंसर में विकसित होने लगते हैं l

 

हड्डियों के कैंसर से बचाव

हड्डी का कैंसर प्राथमिक और माध्यमिक हड्डी के कैंसर में स्वाभाविक रूप से होता है जिनके सही कारणों व उनके निवारण का पता लगाया जाना मुश्किल है तथापि कुछ स्वस्थ आहार लेकर और अच्छी आदतों को दैनिक जीवन में अपना कर हम हड्डियों के कैंसर के जोखिमों को काम करने की कोशिश कर सकते हैं - 

  • हड्डियों को मजबूत बनाए रखने के लिए शरीर में विटामिन डी की कमी होने से बचना चाहिए। 
  • दूध व दूध से बनी चीज जैसे दही, छाछ एवं पनीर का पर्याप्त मात्रा में सेवन करना चाहिए। 
  • कैल्शियम और आयरन युक्त भोजन का सेवन करना चाहिए।
  • धूम्रपान, शराब, और तंबाकू के सेवन जैसी बुरी आदतों को छोड़ना चाहिए। 
  • व्यक्ति को फल, सब्जियों और सूखे मेवों का सेवन कर अपने आहार को संतुलित रखना चाहिए। 
  • शरीर को स्वस्थ बनाए रखने के लिए नित्य योग, व्यायाम तथा कसरत आदि किया जाना चाहिए।

हड्डियों के कैंसर के लक्षण 

हड्डियों के कैंसर के लक्षणों को आम व्यक्ति तब तक नहीं पहचान सकता है जब तक कि यह कैंसर अपनी गंभीर अवस्था में नहीं आ जाता l हड्डियों से जुड़ी कोई समस्या जब लंबे समय तक बनी रहती है तो यह इसके कैंसर का लक्षण हो सकती है l जैसे कि - 

  • हड्डी के जिस भाग में कैंसर का ट्यूमर होता है, वहां उसे दर्द रहता है जो ट्यूमर के बढ़ने के साथ साथ असहनीय हो जाता है। 
  • हड्डियों की गतिविधियों में दर्द भी बढ़ने लगता है व उनसे संबंधित कार्यों में रुकावट आने लगती है 
  • ट्यूमर की वृद्धि के कारण हड्डी के प्रभावित क्षेत्र में सूजन आने लगती है 
  • व्यक्ति को अपने शरीर में कमजोरी महसूस होने लगती हैं।
  • हड्डियों में होने वाला दर्द अक्सर रात के समय में तेज होने लगता है।
  • व्यक्ति का वजन कम होने लगता है। 
  • व्यक्ति को चलने फिरने में तकलीफ होने लगती है व काम करने में जल्दी थकावट होने लगती है।

 

हड्डियों के कैंसर के प्रकार

हड्डियों के कई ट्यूमर ऐसे है जो कैंसर जनित नहीं होते हैं तथा शरीर के दूसरे किसी भाग में फैलते नहीं है l कई कैंसर ऐसे है जो कि दुर्लभ होते हैं, कई ऐसे है जो हड्डियों में शुरू होकर शरीर के दूसरे भागों में फैलने लगते हैं l इन सबके आधार पर कैंसर को कुल छह भागों में विभक्त किया गया है जो कि प्राथमिक बोन कैंसर के मुख्य प्रकार माने जाते हैं - 

  • ऑस्टियोसार्कोमा

हड्डियों के कैंसर का यह सबसे आम प्रकार हैं जो ज्यादा उन बच्चों और वयस्कों को होता है जिसकी उम्र लगभग दस से तीस साल की होती है l महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में यह कैंसर अधिक देखने को मिलता है l ज्यादातर यह कैंसर घुटनों, पैरों और श्रोणि की हड्डियों में विकसित होते हैं l

  • कोंड्रोसारकोमा

हड्डियों के कैंसर का यह वो दूसरा आम प्रकार माना गया है जो सामान्यतः उन लोगों को होने की संभावना ज्यादा रहती है जिनकी उम्र चालीस साल से ऊपर की होती है l यह कैंसर कार्टिलेज सेल्स में शुरू होता है l यह ज्यादातर पैरों, बाहों, कंधों तथा पेल्वीस अर्थात् श्रोणि की हड्डियों में विकसित होने वाला कैंसर होता है। 

  • ईविंग सरकोमा

इसे ईविंग ट्यूमर के नाम से भी जाना जाता है l हड्डियों के कैंसर का यह प्रकार तीसरे स्थान पर है जो कि पाँच से बीस साल की उम्र के बच्चों व किशोरों को होता है l यह कैंसर पसलियों, श्रोणि, ऊपरी बांह और पैरों की हड्डियों में शुरू होता है l हालांकि हड्डियों के आसपास के ऊतकों में भी इस प्रकार के कैंसर की शुरुआत हो सकती है l

  • फ़िब्रोसारकोमा और मलिग्नेंट फिब्रोस हिस्टियोसिटामा

कैंसर के यह प्रकार हड्डियों में विकसित न होकर उनके आसपास के नरम ऊतकों में विकसित होने लगते हैं l ज्यादातर यह कैंसर पैरों, हाथ, भुजाओं, घुटनों तथा जबड़े की हड्डियों को प्रभावित करते हैं l वयस्कों में इस तरह का कैंसर ज्यादा आम होता है l 

  • जायंट सेल ट्यूमर

यह कैंसर भुजाओं और पैरों की हड्डियों में शुरू होता है l युवा और मध्यम आयु वर्ग के व्यस्क लोगों के यह कैंसर ज्यादा प्रभावित करता है l हालांकि यह ट्यूमर सौम्य होते हैं परंतु इनका इलाज उचित समय पर न कराए जाने के कारण यह कैंसर का रूप भी धारण कर सकते हैं l

  • कोरडोमा

प्राथमिक बोन कैंसर का यह प्रकार खोपड़ी के आधार व रीढ़ में शुरू होकर इन्हें प्रभावित करता है l इसकी शुरुआत धीमी रहती है तथा यह तीस साल से अधिक के लोगों को प्रभावित करता है l पुरुषों में प्रायः इस कैंसर की अधिकता महिलाओं की तुलना में ज्यादा देखी जा सकती है l

हड्डियों के कैंसर के चरण 

कैंसर के विकसित होने तथा इससे होने वाली वृद्धि और फैलाव के आधार पर इसे चार चरणों में रखा गया है - 

  • पहला चरण : पहले चरण में यह कैंसर ज्यादा घातक नहीं होते हैं तथा इनका प्रसार हड्डियों तक ही सीमित रहता है वहां से बाहर नहीं होता है। 
  • दूसरा चरण : कैंसर के दूसरे चरण में यह ट्यूमर घातक होने लगते हैं तथा इनका हड्डियों के दूसरे भाग में फैलना शुरू होने लगता है। 
  • तीसरा चरण : हड्डियों के कुछ भागों में यह ट्यूमर अपने तीसरे चरण में पूरी तरह से फैल जाते हैं। 
  • चौथा चरण : यह ट्यूमर का अंतिम चरण होता है जिसमें कैंसर बढ़कर शरीर के अन्य भागों में फैल जाते हैं।

 

हड्डियों के कैंसर की जटिलताएं 

हर बीमारी के साथ कुछ जटिलताएं होती है जो पीड़ित व्यक्ति को उम्र भर या फिर एक लंबे समय तक झेलनी पड़ती है l इसी तरह हड्डियों के कैंसर की भी कुछ जटिलताएं होती है जिसका सामना प्रायः उससे ग्रसित व्यक्तियों को करना पड़ सकता है -

  • इस कैंसर के कारण हड्डियां बहुत ही कमजोर हो जाती है जिस वजह से पीड़ित को चलने फिरने मे बेहद परेशानी होने लगती है। 
  • हाथ व भुजाओं की हड्डियों के कैंसर से प्रभावित होने के कारण व्यक्ति के दैनिक कार्यों की गति बहुत ही मंद हो जाती है l 
  • हाथ व पैरों की गतिविधियों से व्यक्तियों को हड्डियों में तीव्र दर्द शुरू हो जाता है। 
  • व्यक्ति के वजन में बहुत कमी आ जाती है। 
  • इस कैंसर के कारण व्यक्ति को दिन भर थकान और कमजोरी होने लगती है तथा अपने कार्यों को करने के लिए शारीरिक रूप से अक्षम होने लगते हैं।

मान्यताएं