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तनाव सिरदर्द का इलाज

अवलोकन

जब व्यक्ति की गर्दन और स्कैल्प की मांसपेशियों में तनाव अथवा अनुबंध उत्पन्न होने की वजह से माथे के आसपास, सिर के चारों ओर तथा गर्दन के पीछे दबाव और दर्द होता है तो यह तनाव सिरदर्द कहलाता है l यह तनाव सिरदर्द व्यक्तियों को होने वाला एक बहुत ही आम प्रकार का सिरदर्द है जो किसी बीमारी के कारण उत्पन्न नहीं होता   है l यह सिरदर्द अक्सर तनाव, अवसाद या चिंता से संबंधित होते हैं l तनाव सिरदर्द आमतौर पर सामान्य सिरदर्द माने जाते है जिनका स्तर हल्के से लेकर मध्यम तक हो सकता है l 

तनाव सिरदर्द किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है l हालांकि महिलाओं तथा वयस्कों में तनाव सिरदर्द अधिक देखने को मिलता है l यह समय समय पर उभरने वाली स्थिति होती है जो कि कुछ मिनटों से लेकर कई दिनों तक रह सकती है l यह अक्सर दिन के मध्य में आरम्भ होता है जिसकी गति शुरुआती दौर में धीमी रहती है l व्यक्ति को तनाव सिरदर्द एक सुस्त जकड़न अथवा दबाव की तरह महसूस हो सकता है l कई बार यह दर्द एक ही दिन में व्यक्ति को एक से अधिक बार भी महसूस हो सकता है l

अनुसंधान

जैन के गोमूत्र चिकित्सा क्लिनिक का उद्देश्य प्राचीन आयुर्वेदिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक के साथ एकीकृत करके एक सुखी और स्वस्थ जीवन बनाना है। हमारी चिकित्सा का अर्थ है आयुर्वेद सहित गोमूत्र व्यक्ति के तीन दोषों पर काम करता है- वात, पित्त और कफ। ये त्रि-ऊर्जा हमारे स्वास्थ्य को बनाए रखती हैं, इन दोषों में कोई भी असंतुलन, मानव स्वास्थ्य और बीमारी के लिए जिम्मेदार है। हमें यह कहते हुए खुशी हो रही है कि हमारे उपचार के तहत हमने इतने सारे सकारात्मक परिणाम देखे हैं। हमारे इलाज के बाद हजारों लोगों को कई बीमारियों से छुटकारा मिला।

हमारे मरीज न केवल अपनी बीमारी को खत्म करते हैं बल्कि हमेशा के लिए एक रोग मुक्त स्वस्थ जीवन जीते हैं। यही कारण है कि लोग हमारी चिकित्सा की ओर ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। आयुर्वेदिक उपचारों में हमारे वर्षों के शोध ने हमें अपनी कार्यप्रणाली को आगे बढ़ाने में मदद की है। हम पूरी दुनिया में एक स्वस्थ और खुशहाल समाज का निर्माण करने के लिए अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य रखते हैं।

गोमूत्र चिकित्सा द्वारा प्रभावी उपचार

गोमूत्र के उपचार के अनुसार, कुछ जड़ी-बूटियां शरीर के दोषों (वात, पित्त और कफ) का कायाकल्प कर सकती हैं और यदि यह दोष शरीर में असमान रूप से वितरित किये जाए, तो यह तनाव सिरदर्द का कारण बन सकता है। कुछ आयुर्वेदिक दवाओं में उनके उपचार के लिए कई लाभकारी तत्व होते हैं। यह शरीर के पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है।

ब्रेनटोन + लिक्विड ओरल

ब्रेंटोन + कैप्सूल

टोनर ( नेसल ड्राप)

प्रमुख जड़ी-बूटियाँ जो उपचार को अधिक प्रभावी बनाती हैं

बहेड़ा

बहेड़ा मस्तिष्क में न्यूरोट्रांसमीटर (मध्यस्थों में सिग्नल ट्रांसमिशन में सहायता) की एकाग्रता को बढ़ाता है जिससे तनाव सिरदर्द को रोकने में मदद मिलती है क्योंकि इसमें एंटीऑक्सीडेंट गतिविधि होती है जो मुक्त कणों का मुकाबला करती है और मस्तिष्क कोशिकाओं के नुकसान कम करती है।

शतावरी

शतावरी का उपयोग एक एंटीऑक्सीडेंट के रूप में किया जाता है जिससे तनाव सिरदर्द को कम करने के लिए शक्तिशाली अवसाद रोधी प्रभाव होता है। यह मस्तिष्क के न्यूरोट्रांसमीटर को भी कंट्रोल करता है जो असुविधा और तनाव को कम करने में मदद करते हैं।

मुलेठी

अधिवृक्क ग्रंथि पर मुलेठी जड़ों का प्रभाव बहुत सहायक होता है और इसलिए मस्तिष्क को उत्तेजित करने के लिए प्रकट होता है। यह न केवल तनाव सिरदर्द के प्रभावों को कम करता है बल्कि इसके एंटीऑक्सीडेंट गुण (मुलेठी में फ्लेवोनोइड शामिल हैं) मस्तिष्क कोशिकाओं को एक परिरक्षण प्रभाव प्रदान करता है।

ब्राह्मी

ब्राह्मी सेरोटोनिन के स्तर में सुधार करता है जो चिंता और तनाव सिरदर्द को प्रभावी ढंग से कम करता है। कमजोरी का मुकाबला करने और स्मृति में सुधार के अलावा यह कोशिकाओं की रक्षा करके कॉर्टेक्स को तेज करता है जो तनाव के सिरदर्द के इलाज के लिए उपयोग किया जाता है I

शंखपुष्पी

पुरानी माइग्रेन से राहत देने में इसका उच्च महत्व है। इससे मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा मिलता है। आयुर्वेद के अनुसार, शंखपुष्पी मस्तिष्क को शांत करने और तनाव के साथ-साथ चिंता को कम करने में मदद करता है। यह अपने मेध्या (बुद्धि में सुधार) संपत्ति के कारण एक मस्तिष्क टॉनिक के रूप में कार्य करके स्मृति को बढ़ाता है।

अश्वगंधा

अश्वगंधा मस्तिष्क को ऑक्सीडेटिव तनाव और ग्लूटामेट विषाक्तता से बचाता है। यह एक एडाप्टोजेन के रूप में फायदेमंद है जो तनाव से निपटने में मस्तिष्क की मदद कर सकता है। अश्वगंधा मस्तिष्क के कार्य को बढ़ा सकता है, रक्त शर्करा और कोर्टिसोल के स्तर को कम कर सकता है और तनाव के सिरदर्द के प्रभावों का मुकाबला करने में भी मदद करता है।

जटामांसी

इसके अवसाद रोधी और तनाव-विरोधी गुणों के कारण जटामांसी मस्तिष्क में सेरोटोनिन की मात्रा को बढ़ाता है जिससे मन को शांत रहना आसान होता है और चिंता और घबराहट से राहत मिलती है जो तनाव के सिरदर्द का इलाज करने में मदद करता है।

विडंग

विडंग का इस्तेमाल तनाव से निपटने के लिए किया जा सकता है क्योंकि इसमें एक एंबेलिन नाम का अणु होता है जिसमें एक एंटीडिप्रेसेंट क्रिया होती है। एम्बेलिन, सेरोटोनिन और नॉरपेनेफ्रिन के जरिये न्यूरोट्रांसमीटर का टूटना तापमान में वृद्धि से बाधित होता है जो तनाव और सिरदर्द में सहायता करता है।

केवच बीज

केवच बीज के न्यूरोप्रोटेक्टिव और एंटीऑक्सीडेंट प्रभाव तनाव सिरदर्द को दूर करने में मदद करते हैं। ये बीज एल-डोपा को घेरते हैं जो डोपामाइन में बदल जाता है और मस्तिष्क में अपने चरण को ठीक करता है जिससे तनाव और सिरदर्द को कम किया जा सकता है।

गाय का दूध

गाय का दूध तनाव सिरदर्द के लक्षणों को कम करता है और इसमें इलेक्ट्रोलाइट्स और प्रोटीन होते हैं जो इन मुद्दों को रोकने में उपयोगी होते हैं। गाय का दूध विटामिन बी का एक सभ्य स्रोत है जो तनाव और चिंता का मुकाबला करता है और स्थिर मस्तिष्क, तंत्रिका तंत्र के काम को बनाए रखता है।

गोमय रस

गोमय रस मस्तिष्क के भीतर तनाव को कम करने वाले सेरोटोनिन और नॉरपेनेफ्रिन के स्तर को बढ़ाने में मदद करता है।

गाय दूध का दही

यह तनाव और चिंता के लक्षणों को दूर करने में मदद करता है। गाय का दूध दही लैक्टोबैसिलस में समृद्ध है- एक प्रोबायोटिक बैक्टीरिया जो तनाव सिरदर्द और चिंता के लक्षणों को दूर करने में मदद कर सकता है।

गाय का घी

यह सिर दर्द की दवा के रूप में अच्छी तरह से एक उत्कृष्ट मारक है। यह मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र को उत्तेजित करता है और एक महत्वपूर्ण विषहरण एजेंट है। घी में पोषक तत्वों से भरपूर संतृप्त वसा मस्तिष्क और प्रतिरक्षा प्रणाली के संतुलित विकास में एक शक्तिशाली भूमिका निभाते हैं।

गोजला

हम अपने गोमूत्र चिकित्सा में गोजला का उपयोग करते हैं, मूल रूप से इसका मतलब है कि हमारी दवा में मुख्य घटक गोमूत्र अर्क है। यह अर्क गाय की देसी नस्लों के मूत्र से बना है। गोजला के अपने फायदे हैं क्योंकि यह किसी भी प्रकार के संदूषण की संभावना से परे है। इसकी गुणवत्ता उच्च है एवं प्रचुर मात्रा में है। जब गोजला आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों के साथ मिलाया जाता है तो यह किसी भी बीमारी के इलाज के लिए अधिक प्रभावी हो जाता है और विशेष बीमारियों में अनुकूल परिणाम देता है। इस अर्क का अत्यधिक परीक्षण किया गया है और इसलिए यह अधिक विश्वसनीय और लाभदायक भी है।

जीवन की गुणवत्ता

गोमूत्र के साथ किया गया उपचार अच्छा स्वास्थ्य लाता है और एक क्रम में शरीर के दोषों में संतुलन बनाए रखता है। आज हमारी दवा के अंतिम परिणाम के रूप में मनुष्य लगातार अपने स्वास्थ्य को सुधार रहे हैं। यह उनके दिन-प्रतिदिन के जीवन की स्थिति में सुधार करता है। गोमूत्र के साथ-साथ आयुर्वेदिक दवाएं कई प्रकार की प्रतिक्रियाओं को सीमित करने के लिए एक पूरक उपाय के रूप में काम कर सकती हैं, जो भारी खुराक, मानसिक दबाव, विकिरण और कीमोथेरेपी के उपयोग से आती हैं। हम मनुष्यों को सूचित करते हैं कि यदि कोई रोगी है तो उस विकार के साथ एक आनंदमय और चिंता मुक्त जीवन कैसे जिया जाए। हमारे उपाय करने के बाद हजारों मनुष्य एक संतुलित जीवन शैली जीते हैं और यह हमारे लिए एक बड़ी उपलब्धि है कि हम उन्हें एक जीवन प्रदान करें जो वे अपने सपने में देखते हैं।

जटिलता निवारण

आयुर्वेद में गोमूत्र का एक विशेष स्थान है जिसे तनाव सिरदर्द जैसी बीमारियों के लिए भी फायदेमंद कहा जाता है। हमारी वर्षों की कड़ी मेहनत से पता चलता है कि हमारे आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों के उपयोग से तनाव सिरदर्द की लगभग कई जटिलताएं गायब हो जाती हैं। हमारे रोगियों को दर्द, थकान, प्रकाश और शोर के प्रति संवेदनशीलता, उनके शरीर में हार्मोनल और रासायनिक परिवर्तनों को नियंत्रित और संतुलित बनाने में बड़ी राहत महसूस होती है, रोगी की प्रतिरक्षा प्रणाली में सुधार होता है जो अन्य तनाव सिरदर्द जटिलताओं के लिए अनुकूल रूप से काम करता है।

जीवन प्रत्याशा

यदि हम किसी व्यक्ति की अस्तित्व प्रत्याशा के बारे में बात कर रहे हैं तो गोमूत्र उपाय स्वयं में एक बड़ी आशा हैं। कोई भी बीमारी या तो छोटी या गंभीर स्थिति में होती है, जो मानव शरीर पर बुरा प्रभाव डालती है और कुछ वर्षों तक मौजूद रहती है, कभी-कभी जीवन भर के लिए। एक बार विकार की पहचान हो जाने के बाद, अस्तित्व प्रत्याशा कम होने लगती  है, लेकिन गोमूत्र चिकित्सा के साथ नहीं। हमारा ऐतिहासिक उपाय अब इस बीमारी से सबसे प्रभावी रूप से ही छुटकारा नहीं दिलाता है, बल्कि उस व्यक्ति की जीवनशैली-अवधि में भी वृद्धि करता है और उसके रक्त प्रवाह में कोई विष भी नहीं छोड़ता है और यही हमारा अंतिम उद्देश्य है।

दवा निर्भरता को कम करना

"सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद् दुःख भाग्भवेत्", जिसका अर्थ है सबको सुखी बनाना, बीमारी से छुटकारा दिलाना, सबको सत्य देखने देना, किसी को भी पीड़ा का अनुभव न होने देना। इस वाक्य के बाद, हम चाहते हैं कि हमारा समाज ऐसा ही हो। हमारी चिकित्सा विश्वसनीय उपचार प्रदान करके, जीवन प्रत्याशा में सुधार और प्रभावित आबादी में दवा की निर्भरता को कम करके इस लक्ष्य को प्राप्त करती है। आज की दुनिया में, हमारी चिकित्सा में अन्य उपलब्ध चिकित्सा विकल्पों की तुलना में अधिक फायदे और शून्य नुकसान हैं।

पुनरावृत्ति की संभावना को कम करना

व्यापक अभ्यास की तुलना में, हम रोग के अंतर्निहित कारण और कारणों पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो विशेष रूप से रोग के नियंत्रण पर निर्भर होने के बजाय रोग की पुनरावृत्ति की संभावना को बढ़ा सकते हैं। हम इस दृष्टिकोण को लागू करके और लोगों के जीवन को एक अलग रास्ता प्रदान करके प्रभावी रूप से पुनरावृत्ति की दर कम कर रहे हैं ताकि वे अपने जीवन को मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ तरीके से जी सकें।

तनाव सिरदर्द के कारण 

तनाव सिरदर्द के कई कारण हो सकते है - 

  • तनाव और चिंता 

व्यक्ति की खराब और अस्त व्यस्त जीवनशैली की वजह से उसका तनाव और चिंता से ग्रसित होना एक आम बात है l जब व्यक्ति के जीवन में तनाव और चिंता बहुत ज्यादा बढ़ने लगती है तब वह तनाव सिरदर्द से पीड़ित रहने लगता है l स्वास्थ्य विकार, कई व्यक्तिगत समस्याएं, ड्रग्स तथा एल्कोहल का उपयोग व्यक्ति के तनाव और चिंता को बढ़ाने का काम करते है जिससे व्यक्ति को तनाव सिरदर्द होता है l 

  • थकान 

कई बार अधिक काम और तनाव के कारण व्यक्ति को शारीरिक थकान महसूस होने लगती है l जिससे व्यक्ति को तनाव सिरदर्द होने लगता है l व्यक्ति की नींद पूरी ना हो पाना, चिड़चिड़ापन, दुःख तथा नशीली दवाओं का उपयोग करना आदि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते व्यक्ति को तनाव सिरदर्द की समस्या का सामना करना पड़ता है l 

  • खराब शारीरिक मुद्रा 

व्यक्ति की खराब शारीरिक मुद्रा उसकी ऊपरी पीठ, गर्दन तथा कंधों में तनाव उत्पन्न करती है जिससे व्यक्ति को सिर दर्द होने लगता है l एक लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहने, लेटने अथवा खड़े रहने के कारण व्यक्ति के स्कैल्प में संकुचन होता है तथा व्यक्ति तनाव सिरदर्द से ग्रसित होने लगा लगता है l 

  • अस्वस्थ आहार 

कुछ खाद्य पदार्थ तनाव सिरदर्द को ट्रिगर कर सकते है l पनीर, चॉकलेट, मोनोसोडियम ग्लूटामेट नमक जो कि चायनीज खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल किया जाता है ये सभी व्यक्ति के तनाव सिरदर्द के जोखिम कारक बनते है l इसी के साथ ऐसे खाद्य पदार्थ जिससे व्यक्ति को एलर्जी होती है अथवा जिनमें शर्करा का स्तर अधिक रहता है ऐसे खाद्य पदार्थ से व्यक्ति को तनाव सिरदर्द होने की संभावना अधिक रहती है l

  • निर्जलीकरण

जब व्यक्ति के शरीर में पानी की कमी होती है तो उसका मस्तिष्क द्रव हानि होने की वजह से सिकुड़ने लगता है l निर्जलीकरण मस्तिष्क को खोपड़ी से दूर खींचता है जिससे व्यक्ति को सिर दर्द होने लगता है l व्यक्ति को होने वाली थकान निर्जलीकरण का दुष्प्रभाव होता है जो उनके तनाव सिरदर्द का कारण बनता है l

  • शारीरिक गतिविधियों में कमी 

व्यक्ति की शारीरिक निष्क्रियता तनाव सिरदर्द की समस्या से दृढ़ता से जुड़ी हुई होती  है l जो व्यक्ति दीर्घकाल से बहुत कम शारीरिक गतिविधियां करते है उन्हें मानसिक तनाव, आलस और थकान अधिक रहती है I व्यक्ति की शारीरिक निष्क्रियता उसके शरीर के साथ साथ मानसिक प्रदर्शन को बिगाड़ता है तथा तनाव सिरदर्द का कारण बनता है l

  • कम और अधिक रोशनी 

सूर्य से आती चमकदार रोशनी व्यक्ति के तनाव सिरदर्द को सक्रिय करती है l इसी के साथ लंबे समय तक कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बैठकर कार्य करना अथवा कम रोशनी वाली जगहों पर बैठकर लगातार काम, पढ़ाई आदि करने से भी व्यक्ति को तनाव सिरदर्द होने की संभावना अधिक रहती है l 

  • भेंगापन

यदि किसी व्यक्ति की आँखों में भेंगापन होता है तो उसे तनाव सिरदर्द की समस्या अधिक परेशान कर सकती है l नेत्रों का यह एक ऐसा विकार होता है जिसमें व्यक्ति की आँखे एक साथ एक दिशा में नहीं दिखती है l जिन व्यक्तियों को यह विकार होता है उनकी आँखों और माथे के आसपास तनाव रहता है जिससे उन्हें सिरदर्द होता है l

  • खराब दृष्टि 

व्यक्ति की खराब दृष्टि के कारण उसे कार्य से जुड़ी गतिविधियों पर अपना ध्यान केंद्रित करने से तनाव होता है l आँखों की तकलीफ व्यक्ति को सिरदर्द देती है l जब व्यक्ति की दोनों आँखे लगातार ठीक तरह से देखने के लिए तनावपूर्ण होती है तो यह समस्या उसके सिरदर्द का कारण बनतीं है l 

  • पर्यावरणीय असुविधायें

कुछ गर्मी, ठंड, चमक अथवा हवा जैसी पर्यावरणीय असुविधाओं से तनाव सिरदर्द उत्पन्न हो सकता है l इसी के साथ परिवार, रिश्ते, कामकाज, दोस्ती आदि व्यक्ति के तनाव सिरदर्द के आम स्रोतों के अंतर्गत शामिल किए जाते है l 

  • रीढ़ की हड्डी में दर्द 

व्यक्ति की रीढ़ की हड्डी में दर्द जिसे स्पाइनल मिसलिग्न्मेंट कहा जाता है तनाव सिरदर्द का एक मुख्य कारण बनता है l रीढ़ के हड्डी में होने वाला दर्द खोपड़ी के शीर्ष की छोटी मांसपेशियों में तनाव उत्पन्न करती है जिससे व्यक्ति को सिरदर्द की परेशानी शुरू हो जाती है l गलत स्थिति में सोना,अल्प खुराक तथा भावनात्मक तनाव आदि स्थिति व्यक्ति की रीढ़ की हड्डी में दर्द पैदा करती है और तनाव सिरदर्द का कारण बनतीं है l 


तनाव सिरदर्द से निवारण 

व्यक्ति कई स्वस्थ तरीके अपनाकर तनाव सिरदर्द से बच सकते है तथा इनके जोखिम को कम कर सकते है - 

  • व्यक्ति को अधिक तनाव लेने से बचना चाहिये l
  • तनाव से निपटने के लिए व्यक्ति को पर्याप्त नींद लेनी चाहिए l
  • व्यक्ति को अपनी शारीरिक मुद्रा में सुधार करना चाहिए l लंबे समय तक किसी एक मुद्रा में रहने से बचना चाहिए l
  • व्यक्ति को अधिक से अधिक मात्रा में पानी पीना चाहिए l 
  • व्यक्ति को स्वस्थ आहार का प्रतिदिन सेवन करना चाहिए l 
  • कसरत, योग, व्यायाम आदि गतिविधियों को व्यक्तियों को अपने दैनिक जीवन में नित्य करना चाहिए l
  • व्यक्ति को अपने शरीर को पर्याप्त आराम देना चाहिए तथा बहुत अधिक थकान होने से बचना चाहिये l 
  • लगातार लंबे समय तक कंप्यूटर के सामने बैठकर काम करने से बचना चाहिए l
  • व्यक्ति को कम रोशनी में नजर गढ़ाकर अधिक समय तक काम करने तथा पढ़ाई करने से बचना चाहिए l 
  • जिन व्यक्तियों की नज़रें कमजोर है उन्हें चश्में का प्रयोग करना चाहिए l

तनाव सिरदर्द के लक्षण

तनाव सिरदर्द के लक्षणों में शामिल किए जाते है - 

  • सिर में हल्का अथवा मध्यम सा दर्द होना 
  • चेहरे और गर्दन में हल्के दर्द की अनुभूति होना 
  • माथे में दबाव तथा जकड़न महसूस होना 
  • मांसपेशियों में दर्द होना 
  • सिर के पीछे, पीठ में तथा गर्दन के नीचे की ओर दर्द होना 
  • बहुत अधिक थकान व कमजोरी महसूस होना 
  • ध्यान केंद्रित करने में परेशानी होना
  • चिड़चिड़ापन आना
  • नींद की कमी होना
  • दिन में अधिक बार सिरदर्द होना
  • प्रकाश और शोर के प्रति संवेदनशील होना 

 

तनाव सिरदर्द के प्रकार 

तनाव सिरदर्द को दो मुख्य भागों में बांटा जाता है - 

  • एपिसोडिक तनाव सिरदर्द 

एपिसोडिक तनाव सिरदर्द तीस मिनट से लेकर कुछ दिनों तक रहने वाले सिरदर्द की स्थिति होती है l यह सिरदर्द हल्के से लेकर मध्यम तक हो सकते है l इस प्रकार का सिरदर्द निरंतर होने वाला होता है जिसमें एक दबाव सा सिर पर महसूस होता है l व्यक्ति के तनाव लेने की वजह से यह स्थिति उत्पन्न होती है l यह सिरदर्द गम्भीर रूप नहीं लेते है l 

  • क्रोनिक तनाव सिरदर्द 

क्रोनिक तनाव सिरदर्द की स्थिति वह होती है जिसमें व्यक्ति को तकरीबन तीन महीनों तक लगातार दर्द होता है l व्यक्ति को हर महीने यह दर्द करीब पंद्रह दिनों तक निरंतर होता है l अधिक तनाव, जीवन शैली, मौसमी बदलाव तथा नींद की अत्यधिक कमी ये सभी क्रोनिक सिरदर्द को उत्पन्न करने के जोखिम कारक हो सकते है l

तनाव सिरदर्द की जटिलताएँ 

तनाव सिरदर्द से ग्रसित व्यक्तियों को निम्नलिखित जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है - 

  • व्यक्ति के जीवन को गुणवत्ता प्रभावित होती है l 
  • दैनिक कार्यों की रफ्तार धीमी हो जाती है l
  • स्वभाव में कई तरह के बदलाव आने लगते है l
  • शारीरिक असक्रियता बढ़ जाती है l
  • थकान और आलस की स्थिति अधिक हो जाती है l
  • पर्याप्त नींद की कमी हो जाती है l 
  • परेशान रहना तथा मनोदशा में परिवर्तन आने लगते है l

मान्यताएं