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ग्लियोमा का इलाज

अवलोकन

तंत्रिका तंत्र में पाई जाने वाली ग्लियल कोशिकाएं वे कोशिकाएं होती है जो तंत्रिका तंत्र में संतुलन बनाए रखने के साथ-साथ इनकी मरम्मत में अपनी विशेष भूमिका निभाती हैं I तंत्रिका तंत्र की सहायक कोशिकाओं के रूप में यह मस्तिष्क की उत्तेजनीय अरबों कोशिकाओं जिन्हें न्यूरॉन्स कहा जाता है, की रक्षा करती हैं, उन्हें इन्सुलेट करती है और न्यूरॉन्स के लिए चयापचय कार्य प्रदान करती है I जिनकी वजह से इन कोशिकाओं का मस्तिष्क से सूचना का आदान प्रदान और विश्लेषण करने से साथ कई दूसरे कार्य करना संभव हो पाता है। ये ग्लियल कोशिकाएं तीन तरह की होती है जिन्हें एपेंडिमल, ऑलिगोडेंड्रोसाइट्स, एस्ट्रोसाइट्स ग्लियल कोशिकाओं के नाम से जाना जाता है I जब किसी वजह से ये ग्लियल कोशिकाएं असामान्य रूप से विकसित होने लगती है तो इन कोशिकाओं में ट्यूमर बनने लगता है I ग्लियल कोशिकाओं पर बनने की वजह से इसे ग्लियोमा के नाम से जाना जाता है I मस्तिष्क में उत्पन्न होने वाला यह एक सामान्य प्रकार का ट्यूमर है। सभी ब्रेन ट्यूमर में से लगभग 33 प्रतिशत ग्लियोमा होते हैं, जो ग्लियाल कोशिकाओं में उत्पन्न होते हैं I यह ट्यूमर ज्यादातर ब्रेन और स्पाइनल कॉर्ड में पाया जाता है। कुछ ग्लिओमा जानलेवा साबित हो सकते है तथा कुछ मस्तिष्क की क्रियाविधि को प्रभावित करते है।

अनुसंधान

जैन के गोमूत्र चिकित्सा क्लिनिक का उद्देश्य प्राचीन आयुर्वेदिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक के साथ एकीकृत करके एक सुखी और स्वस्थ जीवन बनाना है। हमारी चिकित्सा का अर्थ है आयुर्वेद सहित गोमूत्र व्यक्ति के तीन दोषों पर काम करता है- वात, पित्त और कफ। ये त्रि-ऊर्जा हमारे स्वास्थ्य को बनाए रखती हैं, इन दोषों में कोई भी असंतुलन, मानव स्वास्थ्य और बीमारी के लिए जिम्मेदार है। हमें यह कहते हुए खुशी हो रही है कि हमारे उपचार के तहत हमने इतने सारे सकारात्मक परिणाम देखे हैं। हमारे इलाज के बाद हजारों लोगों को कई बीमारियों से छुटकारा मिला।

हमारे मरीज न केवल अपनी बीमारी को खत्म करते हैं बल्कि हमेशा के लिए एक रोग मुक्त स्वस्थ जीवन जीते हैं। यही कारण है कि लोग हमारी चिकित्सा की ओर ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। आयुर्वेदिक उपचारों में हमारे वर्षों के शोध ने हमें अपनी कार्यप्रणाली को आगे बढ़ाने में मदद की है। हम पूरी दुनिया में एक स्वस्थ और खुशहाल समाज का निर्माण करने के लिए अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य रखते हैं।

गोमूत्र चिकित्सा द्वारा प्रभावी उपचार

गोमूत्र चिकित्सा विधि के अनुसार कुछ जड़ी-बूटियां शरीर के दोषों (वात, पित्त और कफ) को फिर से जीवंत करने का काम करती हैं जो कि ग्लियोमा का कारण बनती हैं यदि वे असम्बद्ध हैं। कुछ आयुर्वेदिक दवाओं में उनके उपचार के लिए कई लाभकारी तत्व होते हैं। यह शरीर के चयापचय में सुधार करता है।

केमोट्रिम+ सिरप

एन्सोक्योर + कैप्सूल

प्रमुख जड़ी-बूटियाँ जो उपचार को अधिक प्रभावी बनाती हैं

कांचनार गुग्गुल

कोशिका (रोगाणुरोधी) विभाजन को रोकने और कोशिका प्रसार को कम करने के लिए कांचनार गुग्गुल द्वारा एक साइटोटोक्सिक प्रभाव होता है। ये प्रभाव मस्तिष्क ट्यूमर के उपचार के लिए इसकी प्रबंधन क्षमता को प्रमाणित करते हैं।

सहजन

सहजन अपने एंटीऑक्सीडेंट और न्यूरो-एनहांसर गतिविधियों के कारण मस्तिष्क स्वास्थ्य और संज्ञानात्मक कार्य का समर्थन करता है। कैंसर रोगों के इलाज के लिए सहजन विरोधी कैंसर एजेंट जैसे कैंप फेरोल और आइसो-क्वेरसेटिन का उपयोग आमतौर पर किया जाता है।

गिलोय

यह क्षतिग्रस्त मस्तिष्क कोशिकाओं की मरम्मत में मदद करता है। इसमें एंटी-नियोप्लास्टिक (एंटी-ट्यूमर) गुण होते हैं। ट्यूमर से जुड़े मैक्रोफेज (TAM) की ट्यूमर-विरोधी गतिविधि को नियंत्रित करता है। ग्लूकोसामाइन सहित गिलोय के गुण, ग्लूकोसिन, गिलो इन, गिलोइनिन, गिलोस्टेरल और बेर्बेरिन नामक अल्कलॉइड शरीर की कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करते हैं और रक्त को साफ करते हैं।

अश्वगंधा

अश्वगंधा कैंसर या ट्यूमर का इलाज करता है क्योंकि यह कैंसर में एक प्रकार के p53 (एक ट्यूमर सेल) ट्यूमर को दबाने वाली गतिविधि प्रदान करने की क्षमता रखता है। अश्वगंधा में मौजूद तत्व, जिसे विथ फेरिन ए के रूप में जाना जाता है, ट्यूमर पैदा करने वाली कोशिकाओं के विनाश में शामिल होता है जो कैंसर की रोकथाम के लिए महत्वपूर्ण है।

कंघी

कंघी में, पॉलीफेनोलिक यौगिकों का उपयोग विशिष्टता के साथ किया जाता है जो कि कोशिकाओं को खत्म करने वाले साधनों के रूप में होता है।

हल्दी

करक्यूमिन को शरीर से घातक कोशिकाओं को विघटित करने के लिए जाना जाता है। यह न केवल एक महान एंटीऑक्सीडेंट है बल्कि प्रतिरक्षा में भी सुधार करता है। जड़ी बूटी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर से मुक्त कणों को कम करते हैं जिससे स्वास्थ्य और प्रतिरक्षा में सुधार होता है। यह ब्रेन ट्यूमर के इलाज के रूप में लोकप्रिय औषधि है।

गूलर छाल

किसी भी साइटोटॉक्सिसिटी और एंटी कैंसर के रूप में मनुष्य को ट्यूमर और कैंसर से बचाने के लिए इस जड़ी बूटी में एक संभावित एंटी कैंसर यौगिक है। कोशिका वृद्धि से बचने के लिए फाइटोकेमिकल घटकों का एक या अतिरिक्त अर्क प्रभावी है।

सहदेवी

सिडा एक्यूटा, सिडा कॉर्डिफ़ोलिया, सिडा रंबिफोलिया, उरेना लोबट सहदेवी के तत्व हैं जो आमतौर पर अधिकांश कैंसर उपचारों में गुणकारी हैं।

शिलाजीत

ब्रेन ट्यूमर सहित कुछ प्रकार के कैंसर के लिए शिलाजीत को विषाक्त माना जाता है क्योंकि इस जड़ी बूटी में फुल्विक एसिड और ह्यूमिक एसिड की उच्च मात्रा होती है जो कैंसर कोशिकाओं के विकास और प्रसार को रोकते हैं।

गोजला

हम अपने गोमूत्र चिकित्सा में गोजला का उपयोग करते हैं, मूल रूप से इसका मतलब है कि हमारी दवा में मुख्य घटक गोमूत्र अर्क है। यह अर्क गाय की देसी नस्लों के मूत्र से बना है। गोजला के अपने फायदे हैं क्योंकि यह किसी भी प्रकार के संदूषण की संभावना से परे है। इसकी गुणवत्ता उच्च है एवं प्रचुर मात्रा में है। जब गोजला आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों के साथ मिलाया जाता है तो यह किसी भी बीमारी के इलाज के लिए अधिक प्रभावी हो जाता है और विशेष बीमारियों में अनुकूल परिणाम देता है। इस अर्क का अत्यधिक परीक्षण किया गया है और इसलिए यह अधिक विश्वसनीय और लाभदायक भी है।

जीवन की गुणवत्ता

गोमूत्र के उपचार से स्वास्थ्य अच्छा रहता है और शरीर के दोष संतुलित होते है। आज, व्यक्ति हमारी देखभाल के परिणामस्वरूप अपने स्वास्थ्य में तेजी से सुधार कर रहे हैं। यह उनके रोजमर्रा के जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाता है। गोमूत्र के साथ-साथ आयुर्वेदिक दवाएं भारी खुराक, मानसिक तनाव, विकिरण और कीमोथेरेपी के उपयोग से विभिन्न दुष्प्रभावों को कम करने के लिए एक पूरक चिकित्सा के रूप में काम कर सकती हैं। हम लोगों को बीमारी के साथ, यदि कोई हो तो, शांतिपूर्ण और तनाव मुक्त जीवन जीने के लिए निर्देशित करते हैं। हमारे उपचार को लेने के बाद से, हजारों लोग एक स्वस्थ जीवन जीते हैं और यह हमारे लिए एक बड़ी सफलता है कि हम उन्हें एक ऐसा जीवन दें जो वे सपने में देखते हैं।

जटिलता निवारण

आयुर्वेद में गोमूत्र का उच्च स्थान है जो ग्लियोमा जैसी बीमारियों के लिए उचित रूप से सहायक है। हमारे वर्षों के कठिन परिश्रम से पता चलता है कि हमारे हर्बल उपचार के उपयोग से ग्लियोमा की कई जटिलताये लगभग गायब हो जाती हैं। हमारे मरीज सिरदर्द, कमजोर याद्दाश्त, मतली या उलटी, धुंधली दृष्टि, स्पष्ट बोलने में समस्या, रीढ़ की हड्डी में दर्द, हाथ पैर में सुन्नता, अत्यधिक थकान व कमज़ोरी, शारीरिक असंतुलन, दोहरी दृष्टि, दौरे पड़ना, व्यक्तित्व परिवर्तन, चिड़चिड़ापन, मूत्रीय असंयम आदि में एक बड़ी राहत महसूस करते हैं I हमारा आयुर्वेदिक उपचार रोगी की प्रतिरक्षा प्रणाली में सुधार करता हैं जो ग्लियोमा की अन्य जटिलताओं के लिए अनुकूल रूप से काम करता है, मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र से संबंधित समस्याओं को नियंत्रित करता हैं।

जीवन प्रत्याशा

यदि हम किसी व्यक्ति की अस्तित्व प्रत्याशा के बारे में बात कर रहे हैं तो गोमूत्र उपाय स्वयं में एक बड़ी आशा हैं। कोई भी बीमारी या तो छोटी या गंभीर स्थिति में होती है, जो मानव शरीर पर बुरा प्रभाव डालती है और कुछ वर्षों तक मौजूद रहती है, कभी-कभी जीवन भर के लिए। एक बार विकार की पहचान हो जाने के बाद, अस्तित्व प्रत्याशा कम होने लगती  है, लेकिन गोमूत्र चिकित्सा के साथ नहीं। हमारा ऐतिहासिक उपाय अब इस बीमारी से सबसे प्रभावी रूप से ही छुटकारा नहीं दिलाता है, बल्कि उस व्यक्ति की जीवनशैली-अवधि में भी वृद्धि करता है और उसके रक्त प्रवाह में कोई विष भी नहीं छोड़ता है और यही हमारा अंतिम उद्देश्य है।

दवा निर्भरता को कम करना

"सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद् दुःख भाग्भवेत्", इसका अर्थ है सभी को हर्षित होने दें, सभी को बीमारी से मुक्त होने दें, सभी को वास्तविकता देखने दें, कोई भी संघर्ष ना करे। इस आदर्श वाक्य के पालन के माध्यम से हमें अपने समाज को इसी तरह बनाना है। हमारा उपचार विश्वसनीय उपाय देने, जीवन प्रत्याशा में सुधार और प्रभावित लोगों की दवा निर्भरता कम करने के माध्यम से इसे पूरा करता है। इस समकालीन समाज में, हमारे उपाय में किसी भी मौजूदा औषधीय समाधानों की तुलना में अधिक लाभ और कमियां बहुत कम हैं।

पुनरावृत्ति की संभावना को कम करना

व्यापक वैज्ञानिक अभ्यास के अलावा, हमारा केंद्र बिंदु रोग और उसके तत्वों के मूल उद्देश्य पर है जो केवल बीमारी के प्रशासन पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय विकार पुनरावृत्ति की संभावनाओं को बढ़ा सकता है। इस पद्धति के उपयोग से, हम पुनरावृत्ति दर को सफलतापूर्वक कम कर रहे हैं और लोगों की जीवन शैली को एक नया रास्ता दे रहे हैं ताकि वे अपने जीवन को भावनात्मक और शारीरिक रूप से उच्चतर तरीके से जी सकें।

ग्लियोमा के कारण

ग्लियोमा किन कारणों से होता है, इसका पता लगाना मुश्किल है पर कुछ जोखिम कारक ग्लियोमा के खतरें को बढ़ाने में जिम्मेदार माने जा सकते हैें जिनमें शामिल है -

  • उम्र

व्यक्ति की उम्र जैसे-जैसे बढ़ती है उन्हें ब्रेन ट्यूमर का ख़तरा भी बढ़ता जाता है। व्यक्ति जिनकी उम्र 45 से 65 वर्ष के बीच की है उन्हें ग्लियोमा होने का ख़तरा अधिक रहता है । ग्लिओमा होने का ख़तरा बढ़ती उम्र के साथ ज्यादा हो जाता है। हालांकि ब्रेन ट्यूमर किसी भी उम्र में हो सकता है। कुछ प्रकार के ग्लियोमा, जैसे एपेंडिमोमा और पाइलोसाइटिक एस्ट्रोसाइटोमा, बच्चों और युवा वयस्कों में अधिक देखने को मिल सकते हैं। 

  • विकिरण सम्पर्क

विकिरण के संपर्क में आने वाले लोगों में ग्लिओमा होने का जोख़िम काफी बढ़ जाता है। जो लोग आयनकारी विकिरण नामक एक प्रकार के विकिरण के संपर्क में आते हैं, उनमें ब्रेन ट्यूमर का ख़तरा बढ़ जाता है। इनमें कैंसर के इलाज के लिए प्रयुक्त विकिरण चिकित्सा और परमाणु बमों के कारण होने वाले विकिरण जोखिम शामिल हैं।

  • पारिवारिक इतिहास

हालांकि परिवारों में एक सदस्य से दूसरे सदस्य में ग्लियोमा का चलना दुर्लभ है लेकिन ग्लियोमा का पारिवारिक इतिहास होने से इसके विकसित होने का जोखिम दोगुना हो सकता है।

  • वंशानुगत विकार

कुछ जीन्स  को ग्लियोमा से कमजोर रूप से जोड़ा जा सकता है I कुछ वंशानुगत विकार जैसे कि न्यूरोफाइब्रोमैटोस टाइप 1 और टाइप 2 और टूबेरौस स्क्लेरोसिस ग्लियोमा को विकसित करने में मदद कसर सकते है इसी के साथ ही ग्लिओमास के विकास में विभिन्न ऑन्कोजेन्स भी मदद कर सकते हैं जो कैंसर को उत्पन्न करने की क्षमता रखते है I

  • अन्य कारक

ग्लियोमा को विकसित करने के अन्य जोखिम कारको में साइटोमेगालोवायरस के साथ संक्रमण, एन नाइट्रोसो यौगिक वाले कुछ आहार, कीटनाशक एक्सपोज़र आदि शामिल है जो इस तरह के ट्यूमर को विकसित होने में अपनी भूमिका निभा सकते है I

 

ग्लियोमा से निवारण

जीवनशैली में कुछ जरुरी बदलाव करके व्यक्ति ग्लियोमा के जोखिम को कम कर सकते है I इनमे शामिल है -

  • हमे रेडिएशन से होने वाले दुष्प्रभावों की जानकारी रखनी चाहिए व जितना हो सके इनके संपर्क में आने से स्वयं को बचाना चाहिए l
  • तम्बाकू, धूम्रपान तथा शराब का अत्यधिक सेवन करने जैसी आदतों का हमे पूरी तरह से त्याग कर देना चाहिए I
  • वे व्यक्ति जो कि ऐसे कार्यों में संलग्न है जहां कैंसर जनित रासायनिक तत्वों का स्त्राव होता है वहां उन्हें स्वयं को पूरी तरह से अपनी सुरक्षा करनी चाहिए तथा अपने आप को कवर करके इन रसायनों को शरीर में जाने से रोकने के हरसंभव प्रयास किए जाने चाहिए l 
  • नियमित व्यायाम, कसरत, योग, सैर आदि स्वस्थ  आदतें हमारे शरीर और हमारे मस्तिष्क को स्वस्थ बनाये रखती है I 
  • फल तथा सब्जियों का भरपूर सेवन हमारे दिमाग को मजबूती प्रदान करता है I
  • हमे ओवर-द-काउंटर दवाओं का अत्यधिक सेवन करने से बचना चाहिए I 
  • शरीर का स्वस्थ वजन मस्तिष्क को स्वस्थ बनाये रखने में मदद करता है तथा दूसरी कई बीमारियों से शरीर की रक्षा करता है I
  • व्यक्ति को अत्यधिक मानसिक तनाव लेने से बचना चाहिए तथा तनावमुक्त वातावरण में निवास करना चाहिए I 
  • पर्याप्त आराम तथा नींद व्यक्ति के शरीर तथा दिमाग को सुकून देते है I
  • बढती उम्र में व्यक्ति को अपनी सेहत का खास ख्याल रखना चाहिए I

ग्लियोमा के लक्षण

ग्लियोमा के लक्षणों में शामिल है -

  • सिरदर्द
  • कमजोर याद्दाश्त
  • मांसपेशियों पर नियंत्रण न होना
  • मतली या उलटी
  • धुंधली दृष्टि
  • स्पष्ट बोलने में समस्या
  • रीढ़ की हड्डी में दर्द
  • हाथ पैर में सुन्नता
  • अत्यधिक थकान व कमज़ोरी
  • शारीरिक असंतुलन
  • दोहरी दृष्टि
  • दौरे पड़ना
  • व्यक्तित्व परिवर्तन
  • चिड़चिड़ापन
  • मूत्रीय असंयम

 

ग्लियोमा के प्रकार

ग्लिआल कोशिकाएं कई तरह की होती है जो ट्यूमर को बनाती है। इन कोशिकाओ के आधार पर ग्लिओमा के प्रकार निम्न हैं -

  • एपेंडिमोमास

एपेंडिमोमास, एपेंडिमल कोशिकाओं में विकसित होने वाला ट्यूमर होता है I यह मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के उस जगह पर शुरू होता है जहाँ यह  उन मार्गों को रेखाबद्ध करते है जहां व्यक्ति के मस्तिष्क को पोषण देने वाला द्रव जिसे मस्तिष्कमेरु द्रव कहते है, प्रवाहित होता है। व्यक्ति को यह किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन ज्यादातर छोटे बच्चों में देखा जा सकता है। इससे पीड़ित बच्चों को सिरदर्द और दौरे का अनुभव हो सकता है। वयस्कों में होने वाला एपेंडिमोमास उनकी रीढ़ की हड्डी में बनने की अधिक संभावना रहती है और शरीर के उस हिस्से में कमजोरी पैदा कर सकता है जो ट्यूमर से प्रभावित नसों द्वारा नियंत्रित होता है।

  • एस्ट्रोसाइटोमास

एस्ट्रोसाइटोमा, एस्ट्रोसाइट्स नामक कोशिकाओं में शुरू होता है जो तंत्रिका कोशिकाओं का समर्थन करते हैं। एस्ट्रोसाइटोमा मस्तिष्क या रीढ़ की हड्डी में बन सकता है। मस्तिष्क में होने वाले एस्ट्रोसाइटोमा से व्यक्ति को दौरे, सिरदर्द और मतली हो सकती है। रीढ़ की हड्डी में होने वाले एस्ट्रोसाइटोमा प्रभावित क्षेत्र में कमजोरी और विकलांगता का कारण बन सकते हैं। एस्ट्रोसाइटोमा एक धीमी गति से बढ़ने वाला ट्यूमर या फिर एक आक्रामक कैंसर दोनों में कोई सा भी हो सकता है I

  • ओलिगोडेंड्रोग्लिओमास

ओलिगोडेंड्रोग्लिओमास, ओलिगोडेंड्रोसाइट्स नाम की ग्लियल कोशिकाओं के असामान्य होकर बनने वाले ट्यूमर होते है जो मस्तिष्क तथा रीढ़ की हड्डी को प्रभावित करते है I ओलिगोडेंड्रोग्लियोमास किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन ज्यादातर वयस्कों को प्रभावित करता है। इसके संकेतो और लक्षणों में दौरे और सिरदर्द शामिल होते हैं। इसके कारण शरीर के उस हिस्से में कमजोरी या अक्षमता हो सकती है जो ट्यूमर से प्रभावित तंत्रिका कोशिकाओं द्वारा नियंत्रित होता है।

ग्लियोमा की जटिलताएं

ग्लियोमा से पीड़ित एक व्यक्ति कई जटिलताओं का सामना कर सकता है -

  • ट्यूमर का बढ़ता आकार मस्तिष्क में सूजन का कारण बन सकता है।
  • ग्लियोमा मस्तिष्क के कुछ हिस्सों पर दबाव डाल सकते हैं जिससे व्यक्ति को गंभीर सिरदर्द, मतली और उल्टी हो सकती है। 
  • यह व्यक्ति के दैनिक जीवन की गतिविधियों को प्रभावित करता है I 
  • इसके कारण व्यक्ति अवसाद से ग्रसित हो सकता है l
  • ग्लियोमा की वजह से मस्तिष्क की कुछ क्षमता क्षीण हो जाती है l 
  • व्यक्ति के मानसिक कार्यो को नुकसान पहुंचता है l
  • व्यक्ति को अनिद्रा की समस्या का सामना करना पड़ सकता है l

मान्यताएं