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ग्लियोब्लास्टोमा का इलाज

अवलोकन

ग्लियोब्लास्टोमा, जिसे ग्लियोब्लास्टोमा मल्टीफॉर्म, जीबीएम या ग्रेड IV एस्ट्रोसाइटोमा के रूप में भी जाना जाता है, एक तेजी से बढ़ने वाला, आक्रामक प्रकार का केंद्रीय तंत्रिका तंत्र का ट्यूमर है जो मस्तिष्क के सहायक ऊतक पर बनता है। यह ब्रेन कैंसर के ग्रेड IV कैंसर की केटेगरी में आता है I यह एक तरह का जानलेवा ब्रेन ट्यूमर है जो आमतौर पर वयस्क व्यक्तियों को प्रभावित करता है I ग्लियोब्लास्टोमा का विकास एस्ट्रोसाइट्स नामक कोशिकाओं से होता है I यह कोशिकाएं सितारे के आकार की होती है जो तंत्रिका कोशिकाओं का समर्थन करते हैं। वैसे तो यह आक्रामक कैंसर मस्तिष्क के किसी भी लोब या रीढ़ की हड्डी में हो सकता है लेकिन अधिकतर यह मस्तिष्क के सबसे बड़े हिस्से सेरेब्रम और ललाट में अधिक विकसित होते हैं। एक बार विकसित होने के बाद यह बहुत ही यह तेजी से बढ़ सकता है और तेजी से फैल सकता है। ग्लियोब्लास्टोमा ट्यूमर अपनी खुद की रक्त आपूर्ति करते हैं, जिससे उन्हें विकसित होने, बढ़ने और फैलने में मदद मिलती है। इनके लिए सामान्य मस्तिष्क ऊतक पर आक्रमण करना आसान होता है। विकसित हो जाने के बाद इनका इलाज करना बहुत मुश्किल हो सकता है I ग्लियोब्लास्टोमा का उपचार कैंसर की प्रगति को धीमा कर सकते हैं और लक्षणों और संकेतो को कम कर सकते हैं।

अनुसंधान

जैन के गोमूत्र चिकित्सा क्लिनिक का उद्देश्य प्राचीन आयुर्वेदिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक के साथ एकीकृत करके एक सुखी और स्वस्थ जीवन बनाना है। हमारी चिकित्सा का अर्थ है आयुर्वेद सहित गोमूत्र व्यक्ति के तीन दोषों पर काम करता है- वात, पित्त और कफ। ये त्रि-ऊर्जा हमारे स्वास्थ्य को बनाए रखती हैं, इन दोषों में कोई भी असंतुलन, मानव स्वास्थ्य और बीमारी के लिए जिम्मेदार है। हमें यह कहते हुए खुशी हो रही है कि हमारे उपचार के तहत हमने इतने सारे सकारात्मक परिणाम देखे हैं। हमारे इलाज के बाद हजारों लोगों को कई बीमारियों से छुटकारा मिला।

हमारे मरीज न केवल अपनी बीमारी को खत्म करते हैं बल्कि हमेशा के लिए एक रोग मुक्त स्वस्थ जीवन जीते हैं। यही कारण है कि लोग हमारी चिकित्सा की ओर ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। आयुर्वेदिक उपचारों में हमारे वर्षों के शोध ने हमें अपनी कार्यप्रणाली को आगे बढ़ाने में मदद की है। हम पूरी दुनिया में एक स्वस्थ और खुशहाल समाज का निर्माण करने के लिए अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य रखते हैं।

गोमूत्र चिकित्सा द्वारा प्रभावी उपचार

गोमूत्र चिकित्सा के दृष्टिकोण के अनुरूप कुछ जड़ी-बूटियां शारीरिक दोषों (वात, पित्त और कफ) को फिर से जीवंत करने का काम करती हैं जो कि अधिकांश ग्लियोब्लास्टोमा का कारण बन सकती हैं यदि वे असंतुष्ट हों। उनसे निपटने के लिए कुछ आयुर्वेदिक दवाओं में कई लाभकारी तत्व शामिल हैं। यह शरीर के चयापचय में सुधार करता है।

केमोट्रिम+ सिरप

एन्सोक्योर + कैप्सूल

प्रमुख जड़ी-बूटियाँ जो उपचार को अधिक प्रभावी बनाती हैं

कांचनार गुग्गुल

कोशिका (रोगाणुरोधी) विभाजन को रोकने और कोशिका प्रसार को कम करने के लिए कांचनार गुग्गुल द्वारा एक साइटोटोक्सिक प्रभाव होता है। ये प्रभाव मस्तिष्क ट्यूमर के उपचार के लिए इसकी प्रबंधन क्षमता को प्रमाणित करते हैं।

सहजन

सहजन अपने एंटीऑक्सीडेंट और न्यूरो-एनहांसर गतिविधियों के कारण मस्तिष्क स्वास्थ्य और संज्ञानात्मक कार्य का समर्थन करता है। कैंसर रोगों के इलाज के लिए सहजन विरोधी कैंसर एजेंट जैसे कैंप फेरोल और आइसो-क्वेरसेटिन का उपयोग आमतौर पर किया जाता है।

गिलोय

यह क्षतिग्रस्त मस्तिष्क कोशिकाओं की मरम्मत में मदद करता है। इसमें एंटी-नियोप्लास्टिक (एंटी-ट्यूमर) गुण होते हैं। ट्यूमर से जुड़े मैक्रोफेज (TAM) की ट्यूमर-विरोधी गतिविधि को नियंत्रित करता है। ग्लूकोसामाइन सहित गिलोय के गुण, ग्लूकोसिन, गिलो इन, गिलोइनिन, गिलोस्टेरल और बेर्बेरिन नामक अल्कलॉइड शरीर की कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करते हैं और रक्त को साफ करते हैं।

अश्वगंधा

अश्वगंधा कैंसर या ट्यूमर का इलाज करता है क्योंकि यह कैंसर में एक प्रकार के p53 (एक ट्यूमर सेल) ट्यूमर को दबाने वाली गतिविधि प्रदान करने की क्षमता रखता है। अश्वगंधा में मौजूद तत्व, जिसे विथ फेरिन ए के रूप में जाना जाता है, ट्यूमर पैदा करने वाली कोशिकाओं के विनाश में शामिल होता है जो कैंसर की रोकथाम के लिए महत्वपूर्ण है।

कालमेघ

एंड्रोग्राफोलाइड विभिन्न प्रकार के एंटीट्यूमर का प्रदर्शन करता है जो कैंसर के जीवाणुओं को सबसे आवश्यक सक्रिय घटक के रूप में रोकता और मारता है।

कंघी

कंघी में, पॉलीफेनोलिक यौगिकों का उपयोग विशिष्टता के साथ किया जाता है जो कि कोशिकाओं को खत्म करने वाले साधनों के रूप में होता है।

हल्दी

करक्यूमिन को शरीर से घातक कोशिकाओं को विघटित करने के लिए जाना जाता है। यह न केवल एक महान एंटीऑक्सीडेंट है बल्कि प्रतिरक्षा में भी सुधार करता है। जड़ी बूटी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर से मुक्त कणों को कम करते हैं जिससे स्वास्थ्य और प्रतिरक्षा में सुधार होता है। यह ब्रेन ट्यूमर के इलाज के रूप में लोकप्रिय औषधि है।

गूलर छाल

किसी भी साइटोटॉक्सिसिटी और एंटी कैंसर के रूप में मनुष्य को ट्यूमर और कैंसर से बचाने के लिए इस जड़ी बूटी में एक संभावित एंटी कैंसर यौगिक है। कोशिका वृद्धि से बचने के लिए फाइटोकेमिकल घटकों का एक या अतिरिक्त अर्क प्रभावी है।

सहदेवी

सिडा एक्यूटा, सिडा कॉर्डिफ़ोलिया, सिडा रंबिफोलिया, उरेना लोबट सहदेवी के तत्व हैं जो आमतौर पर अधिकांश कैंसर उपचारों में गुणकारी हैं।

शिलाजीत

ब्रेन ट्यूमर सहित कुछ प्रकार के कैंसर के लिए शिलाजीत को विषाक्त माना जाता है क्योंकि इस जड़ी बूटी में फुल्विक एसिड और ह्यूमिक एसिड की उच्च मात्रा होती है जो कैंसर कोशिकाओं के विकास और प्रसार को रोकते हैं।

गोजला

हम अपने गोमूत्र चिकित्सा में गोजला का उपयोग करते हैं, मूल रूप से इसका मतलब है कि हमारी दवा में मुख्य घटक गोमूत्र अर्क है। यह अर्क गाय की देसी नस्लों के मूत्र से बना है। गोजला के अपने फायदे हैं क्योंकि यह किसी भी प्रकार के संदूषण की संभावना से परे है। इसकी गुणवत्ता उच्च है एवं प्रचुर मात्रा में है। जब गोजला आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों के साथ मिलाया जाता है तो यह किसी भी बीमारी के इलाज के लिए अधिक प्रभावी हो जाता है और विशेष बीमारियों में अनुकूल परिणाम देता है। इस अर्क का अत्यधिक परीक्षण किया गया है और इसलिए यह अधिक विश्वसनीय और लाभदायक भी है।

जीवन की गुणवत्ता

गोमूत्र उपचार अच्छा स्वास्थ्य लाता है और दोषों को संतुलित रखता है। आज हमारे उपचार के परिणामस्वरूप लोग अपने स्वास्थ्य में लगातार सुधार कर रहे हैं। यह उनके दैनिक जीवन की गुणवत्ता में सुधार करता है। गोमूत्र के साथ-साथ आयुर्वेदिक दवाएं विभिन्न दुष्प्रभावों को कम करने के लिए एक पूरक चिकित्सा के रूप में काम कर सकती हैं जिन रोगियों को भारी खुराक, मानसिक दबाव, विकिरण और कीमोथेरेपी के माध्यम से उपचार दिया जाता है। हम लोगों को मार्गदर्शन करते हैं कि यदि कोई रोग हो तो उस असाध्य बीमारी के साथ एक खुशहाल और तनाव मुक्त जीवन कैसे जियें। हजारों लोग हमारी थेरेपी लेने के बाद एक संतुलित जीवन जीते हैं और यह हमारे लिए एक बड़ी उपलब्धि है कि हम उन्हें एक ऐसा जीवन दें जिनके वे सपने देखते हैं।

जटिलता निवारण

आयुर्वेद में गोमूत्र का एक अनोखा महत्व है जो ग्लियोब्लास्टोमा जैसी भयानक बीमारियों के लिए भी उपयोगी बताया गया है। हमारे वर्षों के कठिन परिश्रम से पता चलता है कि हमारी हर्बल दवाओं के उपयोग से ग्लियोब्लास्टोमा की कई जटिलताएँ गायब हो जाती हैं। पीड़ित हमें बताते हैं कि वे लगातार सिरदर्द, दोहरी या धुंधली दृष्टि, भूख में कमी, उल्टी तथा मितली, थकान व कमज़ोरी, सोचने में परेशानी, मनोदशा या व्यक्तित्व में परिवर्तन, दौरे पड़ना, बोलने में परेशानी, सीखने की क्षमता में बदलाव जैसे ग्लियोब्लास्टोमा के लक्षणों में एक बड़ी राहत देखते हैं साथ ही रोगी अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली में सुधार महसूस करते हैं जो इसके अनुकूल काम करते हुए ग्लियोब्लास्टोमा की अन्य जटिलताओं, मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र से संबंधित समस्याओं को नियंत्रित करते हैं।

जीवन प्रत्याशा

अगर हम जीवन प्रत्याशा की बात करें तो गोमूत्र चिकित्सा अपने आप में एक बहुत बड़ी आशा है। कोई भी बीमारी, चाहे वह छोटे पैमाने पर हो या एक गंभीर चरण में, मानव शरीर पर नकारात्मक प्रभाव डालेगी और यह कई वर्षों तक मौजूद रहेगी, कभी-कभी जीवन भर भी। एक बार बीमारी की पहचान हो जाने के बाद, जीवन प्रत्याशा बहुत कम होने लगती है, लेकिन गोमूत्र चिकित्सा के साथ नहीं। हमारी प्राचीन चिकित्सा न केवल बीमारी से छुटकारा दिलाती है, बल्कि शरीर में किसी भी विषाक्त पदार्थों को छोड़े बिना व्यक्ति के जीवनकाल को बढ़ाती है और यह हमारा अंतिम लक्ष्य है।

दवा निर्भरता को कम करना

"सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद् दुःख भाग्भवेत्", जिसका अर्थ है सबको सुखी बनाना, बीमारी से छुटकारा दिलाना, सबको सत्य देखने देना, किसी को भी पीड़ा का अनुभव न होने देना। इस वाक्य के बाद, हम चाहते हैं कि हमारा समाज ऐसा ही हो। हमारी चिकित्सा विश्वसनीय उपचार प्रदान करके, जीवन प्रत्याशा में सुधार और प्रभावित आबादी में दवा की निर्भरता को कम करके इस लक्ष्य को प्राप्त करती है। आज की दुनिया में, हमारी चिकित्सा में अन्य उपलब्ध चिकित्सा विकल्पों की तुलना में अधिक फायदे और शून्य नुकसान हैं।

पुनरावृत्ति की संभावना को कम करना

व्यापक चिकित्सा अभ्यास के विपरीत, हम रोग और तत्वों के मूल उद्देश्य पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो इस पद्धति का उपयोग करके केवल बीमारी के प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय बीमारी की पुनरावृत्ति की संभावनाओं में सुधार कर सकते हैं, हम कुशलता से पुनरावृत्ति दर को कम रहे हैं और मानव जीवन के लिए एक नया रास्ता दे रहे हैं, जो कि उन्हें भावनात्मक और शारीरिक रूप से उनके जीवन को बेहतर तरीके से जीने का एक तरीका बताते है।

ग्लियोब्लास्टोमा के कारण

ग्लियोब्लास्टोमा होने के मुख्य कारण क्या है ये जान पाना मुश्किल है पर फिर भी कुछ ऐसे जोखिम कारक है जो ग्लियोब्लास्टोमा की संभावनाओ के लिए जिम्मेदार हो सकते है जिनमें शामिल है -

  • जेनेटिक म्यूटेशन

जब किसी जीन के डीएनए में कोई स्थाई परिवर्तन होता है तो यह जेनेटिक ​म्यूटेशन कहलाता है I ग्लियोब्लास्टोमा के जोखिमों को बढ़ाने में जेनेटिक म्यूटेशन और असमानताएं जिम्मेदार मानी जा सकती है I यह ज्यादातर उन लोगो में अधिक देखा जाता है जो दुर्लभ आनुवंशिक स्थितियों जैसे टरकोट सिंड्रोम, न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस टाइप 1 और ली फ्राउमेनी सिंड्रोम - एक विशिष्ट जीन में उत्परिवर्तन का शिकार होते है I यह जेनेटिक म्यूटेशन ग्लियोब्लास्टोमा की कई विशिष्ट विशेषताओं का कारण बनता है।

  • रेडिएशन एक्सपोजर

रेडिएशन एक्सपोजर ग्लियोब्लास्टोमा के जोखिम कारकों में से एक माना जा सकता है I जो लोग ल्यूकेमिया, खोपड़ी के फंगल संक्रमण या मस्तिष्क के पिछले कैंसर के उपचार के रूप में विकिरण चिकित्सा से गुजरे हैं, उनमें ग्लियोब्लास्टोमा विकसित होने का ख़तरा अधिक होता है। साथ ही व्यक्ति जिनका विशेष रूप से सिर या गर्दन पर विकिरण चिकित्सा प्राप्त करने का इतिहास रहा हो उन्हें ग्लियोब्लास्टोमा होने का जोखिम अधिक रहता है I 

  • अत्यधिक शराब का सेवन 

अत्यधिक शराब का सेवन किसी व्यक्ति के लिए ग्लियोब्लास्टोमा के जोखिम को भी बढ़ा सकता है I एक लंबे समय से शराब का बहुत अधिक सेवन ग्लियोब्लास्टोमा के विकास के साथ दृढ़ता से जुड़ा हुआ माना जा सकता है।

  • पर्यावरणीय कारक

कुछ पर्यावरणीय कारक ग्लियोब्लास्टोमा के ख़तरे को बढ़ा सकते है जिनमें कुछ विशेष औद्योगिक रसायनों या सॉल्वैंट्स का संपर्क, अल्ट्रावायलेट किरणें, एक्स रे में उपयोग होने वाले आइअनाइजिंग रेडिएशन आदि शामिल है I

  •  अन्य जोखिम कारक

ग्लियोब्लास्टोमा के अन्य जोखिम कारकों में पुरुष होना, 50 वर्ष या उससे अधिक उम्र का होना और गुणसूत्र 10 या 17 पर गुणसूत्र संबंधी असामान्यताएं, अत्यधिक तनाव, प्रतिरक्षा तंत्र की असमान्यताएं आदि शामिल हैं जो इसकी संभावनाओ को अधिक करने के जिम्मेदार माने जा सकते है I 

 

ग्लियोब्लास्टोमा से निवारण

ग्लियोब्लास्टोमा रोक पाना असंभव है लेकिन फिर भी कुछ उपायों की मदद से तथा जीवन शैली में कुछ अच्छे बदलाव के जरिये हम उन जोखिम कारकों से अपना बचाव कर सकते हैं जो इसकी संभावनाओं को बढ़ाने में मदद करते हैं जैसे कि - 

  • जितना हो सके हमें रसायनों के संपर्क में आने से बचना चाहिए l
  • व्यक्ति को पौष्टिकता और विटामिन से भरपूर संतुलित आहार का सेवन करना चाहिए l
  • वे व्यक्ति जो कि ऐसे कार्यों में संलग्न है जहां कैंसर जनित रासायनिक तत्वों का स्त्राव होता है उन्हें स्वयं को पूरी तरह से अपनी सुरक्षा करनी चाहिए तथा अपने आप को कवर करके इन रसायनों को शरीर में जाने से रोकने के हरसंभव प्रयास किए जाने चाहिए l
  • शराब तथा धूमपान का अत्यधिक सेवन करने जैसी आदतों का हमे पूरी तरह से त्याग करना चाहिए I 
  • हमे रेडिएशन से होने वाले दुष्प्रभावों की जानकारी रखनी चाहिए व जितना हो सके इनके संपर्क में आने से स्वयं को बचाना चाहिए l 
  • व्यक्ति को नर्वस सिस्टम को स्वस्थ बनाए रखने के लिए तनावमुक्त जीवन जीना चाहिए I
  • नियमित सैर, योग, कसरत तथा व्यायाम आदि शरीर के साथ साथ व्यक्ति के दिमाग को भी स्वस्थ व तंदरुस्त बनाये रखने में मदद करते है I 
  • बढती उम्र में व्यक्ति को अपनी सेहत का खास ख्याल रखना चाहिए I

ग्लियोब्लास्टोमा के लक्षण

ग्लियोब्लास्टोमा व्यक्ति के मस्तिष्क को प्रभावित करता है और उस पर दबाव डालता है जिससे मस्तिष्क से जुड़े कई तरह के लक्षण देखने को मिल सकते है -

  • लगातार सिरदर्द
  • दोहरी या धुंधली दृष्टि
  • भूख में कमी
  • उल्टी तथा मितली
  • थकान व कमज़ोरी
  • सोचने में परेशानी
  • मनोदशा या व्यक्तित्व में परिवर्तन
  • दौरे पड़ना
  • बोलने में परेशानी
  • सीखने की क्षमता में बदलाव

 

ग्लियोब्लास्टोमा के प्रकार

ग्लियोब्लास्टोमा दो प्रकार के होते हैं -

  • प्राथमिक ग्लियोब्लास्टोमा: यह ग्लियोब्लास्टोमा का सबसे आम प्रकार है जोकि इसका सबसे आक्रामक रूप भी है। यह पूर्ण विकसित ट्यूमर के रूप में मौजूद होते हैं I
  • माध्यमिक ग्लियोब्लास्टोमा: ग्लियोब्लास्टोमा का यह कम आम प्रकार है जो विकसित होने के बाद धीमी गति से बढ़ता है। यह आमतौर पर निम्न-श्रेणी, कम आक्रामक एस्ट्रोसाइटोमा से शुरू होता है।

ग्लियोब्लास्टोमा की जटिलताएं

ग्लियोब्लास्टोमा से पीड़ित व्यक्ति को कई जटिलताओं का सामना करना पड़ता है जिनमें शामिल है -

  • ग्लियोब्लास्टोमा की स्थिति की वजह से व्यक्ति अवसाद से घिरने लगता है I
  • ग्लियोब्लास्टोमा के उपचार के बाद ट्यूमर के वापस आने की संभावना रहती है I
  • व्यक्ति की नींद में कमी आती है तथा उसे सोने में परेशानी होने लगती है I 
  • व्यक्ति के व्यक्तित्व में बदलाव होने लगता है l
  • स्टेरोइड उपचार के कारण मस्तिष्क में संक्रमण का ख़तरा बढ़ने का डर रहता है I 
  • ट्यूमर की जटिल स्थिति से मस्तिष्काघात की संभावनाएं बढ़ जाती है I 
  • दिमागी स्थिति नियंत्रण में न रहने की वजह से व्यक्ति अपनी याददाश्त खोने लगता है I

मान्यताएं