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एसोफेगस कैंसर का इलाज

अवलोकन

हमारे शरीर में एसोफेगस अर्थात भोजन की नली अथवा ग्रास नली एक ऐसी नली होती है जो शरीर के पाचन तंत्र में सहायता करती है तथा जो हमारे मुंह द्वारा सेवन किए जाने वाले भोजन तथा पानी को गले से सीधे हमारे पेट तक ले जाने का कार्य करती है l एसोफेगस गले में फेरिंग्स नामक एक जगह से शुरू होती हुई एक लंबी, खोखली पाइप नुमा संरचना होती है जो सीधे पेट तक जाती है l यह नली विंड पाइप के पीछे व रीढ़ के ठीक सामने की ओर स्थित होती है जो हमारे गले से लेकर पेट तक जुड़ी हुई होती है l जिसे मस्कुलर ट्यूब के नाम से भी जाना जाता है जो लगभग दस से बारह इंच लंबी होती है l 

एसोफेगस के अंदर की कोशिकाओं में जब किसी कारण वश अनियंत्रित वृद्धि अथवा विकास होने लगता है तो यह कोशिकाएं एसोफेगस के अंदर एकत्रित होने लगती है और  ट्यूमर का निर्माण करने लगती है l यह ट्यूमर कैंसर कहलाता है l एसोफेगस में होने वाले कैंसर को एसोफेगस कैंसर, भोजन की नली का कैंसर अथवा ग्रास नली का कैंसर आदि नामों से जाना जाता है l यह कैंसर नली में कहीं भी शुरू हो सकता है तथा बढ़ते हुए शरीर के अन्य अंगों में फैलने लगता है l

अनुसंधान

जैन के गोमूत्र चिकित्सा क्लिनिक का उद्देश्य प्राचीन आयुर्वेदिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक के साथ एकीकृत करके एक सुखी और स्वस्थ जीवन बनाना है। हमारी चिकित्सा का अर्थ है आयुर्वेद सहित गोमूत्र व्यक्ति के तीन दोषों पर काम करता है- वात, पित्त और कफ। ये त्रि-ऊर्जा हमारे स्वास्थ्य को बनाए रखती हैं, इन दोषों में कोई भी असंतुलन, मानव स्वास्थ्य और बीमारी के लिए जिम्मेदार है। हमें यह कहते हुए खुशी हो रही है कि हमारे उपचार के तहत हमने इतने सारे सकारात्मक परिणाम देखे हैं। हमारे इलाज के बाद हजारों लोगों को कई बीमारियों से छुटकारा मिला।

हमारे मरीज न केवल अपनी बीमारी को खत्म करते हैं बल्कि हमेशा के लिए एक रोग मुक्त स्वस्थ जीवन जीते हैं। यही कारण है कि लोग हमारी चिकित्सा की ओर ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। आयुर्वेदिक उपचारों में हमारे वर्षों के शोध ने हमें अपनी कार्यप्रणाली को आगे बढ़ाने में मदद की है। हम पूरी दुनिया में एक स्वस्थ और खुशहाल समाज का निर्माण करने के लिए अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य रखते हैं।

गोमूत्र चिकित्सा द्वारा प्रभावी उपचार

गोमूत्र चिकित्सीय दृष्टिकोण के अनुसार, कई जड़ी-बूटियां, शरीर के दोषों (वात, पित्त और कफ) को फिर से जीवंत करने का काम करती हैं, जो एसोफेगस कैंसर का कारण बनते हैं अगर वे अनुपातहीन हैं। कुछ आयुर्वेदिक दवाओं में, उनके उपचार के लिए कई लाभकारी तत्व होते हैं। यह शरीर के चयापचय को बढ़ाता है।

केमोट्रिम+ सिरप

हाइराइल + लिक्विड ओरल

टोक्सिनोल + लिक्विड ओरल

एन्सोक्योर + कैप्सूल

फोर्टेक्स पाक

प्रमुख जड़ी-बूटियाँ जो उपचार को अधिक प्रभावी बनाती हैं

कांचनार गुग्गुल

कोशिका (रोगाणुरोधी) विभाजन को बाधित करके और कोशिका प्रसार को कम करके, कांचनार गुग्गुल एक साइटोटॉक्सिक प्रभाव प्रदर्शित करता है। यह कैंसर के उपचार के लिए सक्षम है तथा इसके लिए यह अपने पारंपरिक उपयोग को प्रोत्साहित करते हैं।

सहजन

सहजन के पत्तों से पाया जाने वाले घटक केम्पफेरोल और आइसो-क्वरसेटिन कैंसर सेल के विकास को रोकने और पदोन्नत कोशिका मृत्यु में सहायक है I विभिन्न कैंसर कोशिका लाइनों पर सहजन का अर्क प्रभावी रूप से कार्य करता है तथा यह सभी प्रकार के कैंसर कोशिकाओ को मारता है I

गिलोय

ग्लूकोसामाइन के साथ-साथ, गिलोइन, गिलोइनिनल और बेरबेरीन के रूप में जाना जाने वाला अल्कलॉइड, गिलोय के अवशेष शरीर में सबसे अधिक कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करते हैं और रक्त और कोशिकाओं को सुचारू करते हैं।

अश्वगंधा

प्रतिक्रियाशील ऑक्सीजन श्रेणियां अश्वगंधा के माध्यम से अधिकतम कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करती हैं। विथफेरिन ए ट्यूमर पैदा करने वाली कोशिकाओं को मारने में प्रभावी है जो अश्वगंधा-स्थित यौगिक हैं।

कालमेघ

कालमेघ में कैंसर का इलाज करने के लिए एण्ड्रोग्राफोलाइड नाम का सबसे महत्वपूर्ण जीवंत तत्व है।

पुनर्नवा

अधिकांश कैंसर से बचने का एक स्वस्थ और आसान तरीका, कैंसर-रोधी तत्व, पुर्ननाविन एक ऐसा क्षार है, जिसे कैंसर कोशिकाओं को रोकने के लिए जाना जाता है।

आमला

विटामिन सी, ई, बीटा-कैरोटीन और कैरोटीनॉयड के अलावा, आंवला में एंटीऑक्सीडेंट की एक शानदार मात्रा कार्सिनोजेनिक विकास को रोकती है।

पिप्पली

पिप्पली में खोजा गया पाइपरलोंग्युमाइन (पीएल), एक रासायनिक यौगिक कैंसर कोशिकाओं को रोकता है और एक ट्यूमर एंजाइम की सीमा से बचने में मदद करता है।

भृंगराज

यह शक्तिशाली जड़ी बूटी है जो कैंसर कोशिकाओं को शरीर में फैलने से रोकती है। इसमें पाए जाने वाले प्राकृतिक अणु अधिकांश कैंसर कोशिकाओं में डीएनए अणुओं को रोकते हैं।

तुलसी

तुलसी के पत्तों में एक तत्व होता है जिसे यूजेनॉल कहा जाता है, जो कि कैंसर के खिलाफ अधिकांश कोशिकाओं से रक्षा करती है।

नीम

एक विशाल नीम कारक, नीम घन सत, नीम के पत्ते के एंटीऑक्सीडेंट और एंटी कार्सिनोजेनिक गुण के रूप में कार्य करता है जो किसी व्यक्ति के अधिकांश कैंसर कोशिकाओं को समाप्त करने का काम करता है।

सोंठ

सोंठ हर्बल भोजन का एक हिस्सा है, जिसमें शोगोल शामिल होता है जो कई फेनोलिक यौगिकों के साथ जिंजरोल को वहन करता है जो कि कैंसर विरोधी और एंटीऑक्सीडेंट प्रभाव दिखाता है।

बहेड़ा

साइटोटॉक्सिसिटी का सबसे महत्वपूर्ण कारक जो ट्यूमर कोशिकाओं में साइटोटॉक्सिसिटी (कोशिका-मृत्यु) को सक्रिय करता है I बहेड़ा में पाया जाने वाला एक उच्च पॉलीफेनोल गैलिक एसिड है।

चित्रक

प्लंबगिन की एक विशाल मात्रा, इस जड़ी बूटी के कैंसर-रोधी एजेंट, का उपयोग कैंसर-कोशिकाओं के विकास को रोकने के लिए किया जाता है।

कुटकी

पिक्रोसाइड्स एक ठोस कुटकी एंटीऑक्सीडेंट क्रिया है जिसका उपयोग कैंसर के उपचार और कैंसर ट्यूमर को दबाने के लिए एक प्रमुख तंत्र के रूप में किया जाता है।

कंघी

पॉलीफेनोलिक यौगिकों का उपयोग कंघी में अधिक संवेदनशीलता के साथ प्रभावी तरीके से किया जाता है जो अधिकतर कैंसर कोशिकाओं को प्रभावित करता है।

हल्दी

हल्दी करक्यूमिन नामक एक रासायनिक यौगिक को शामिल करता है जो हल्दी में कुशलता से पाया जाता है। यह कैंसर की अधिकांश कोशिकाओं से लड़ सकता है और अधिक से अधिक कैंसर कोशिकाओं को रोकने में सहायता कर सकता है।

गूलर छाल

इसमें दोनों साइटोटॉक्सिसिटी और एंटी कैंसर गुण है। मानव में कैंसर के अवरोधन के लिए, फाइटोकेमिकल तत्वों के एकमात्र या अधिक अर्क में कोशिकाओं के विकास को रोकने के लिए एक संभावित एंटी कैंसर यौगिक होता है।

सहदेवी

सिडा एक्यूटा, सिडा कॉर्डिफोलिया, सिडा रंबिफोलिया और यूरेना लोबाटा का अधिक से अधिक कैंसर के उपचार में उपयोग किया जाता है।

शिलाजीत

एक विशेषता लिए शिलाजीत, अधिकतम कैंसर सेल एक्यूटनेस से निपटता है और सूक्ष्मता से रोकता है।

आंवला हरा

इसके फाइटोकेमिकल्स (गैलिक एसिड, पेंटाग्लॉइलग्लूकोज, एलाजिक एसिड, पाइरोगॉल, क्वेरसेटिन और केम्पफेरोल) की एक विशाल शैली को नियोप्लास्टिक कोशिकाओं के लिए साइटोक्सॉक्सिक माना जाता है। आंवले के कई तंत्र अधिकतम कैंसर से बचाव के लिए संभवतया उत्तरदायी होते हैं।

शतावरी

इसका एंटी कैंसर घटक, रेसमोफ्यूरन ट्यूमर की आवृत्ति को रोकता है और कैंसर से बचाव करता है।

घी

घी में शामिल एंटीऑक्सीडेंट एक मजबूत यौगिक है जिसे संयुग्मित लिनोलिक एसिड (सीएलए) कहा जाता है। इससे एंटी कैंसर यौगिकों से कोशिकाओं को आत्म-विनाश (एक तकनीक जिसे एपोप्टोसिस के रूप में जाना जाता है) तक ले जाया जाता है।

गोखरू

अल्कलॉइड्स नोहरमैन और हरमन गोखरू के रूप में पहचाने जाने वाले तत्व हैं, जो कैंसर से बचाव में आवश्यक हो सकते हैं। इसके अलावा, इसमें स्टेरॉइडल सैपोनिन शामिल हैं जिन्हें टेरेस्ट्रोसिन ए-ई, फ्लेवोनोइड ग्लाइकोसाइड्स और फ़्यूरोस्टोनॉल के रूप में एंटी-कैंसर तत्वों के रूप में जाना जाता है।

मुलेठी

By way of reducing the quantity of BCL-2, a drug-resistant protein, the substance derived from the mulethi root, Licochalcone-A, has been proven to have antitumor interest in most cancer cell strains.

गोजला

हम अपने गोमूत्र चिकित्सा में गोजला का उपयोग करते हैं, मूल रूप से इसका मतलब है कि हमारी दवा में मुख्य घटक गोमूत्र अर्क है। यह अर्क गाय की देसी नस्लों के मूत्र से बना है। गोजला के अपने फायदे हैं क्योंकि यह किसी भी प्रकार के संदूषण की संभावना से परे है। इसकी गुणवत्ता उच्च है एवं प्रचुर मात्रा में है। जब गोजला आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों के साथ मिलाया जाता है तो यह किसी भी बीमारी के इलाज के लिए अधिक प्रभावी हो जाता है और विशेष बीमारियों में अनुकूल परिणाम देता है। इस अर्क का अत्यधिक परीक्षण किया गया है और इसलिए यह अधिक विश्वसनीय और लाभदायक भी है।

जीवन की गुणवत्ता

गोमूत्र के उपचार से उपयुक्त स्वास्थ्य मिलता है और एक क्रम में शरीर के दोषों में संतुलन बनाए रखता है। इन दिनों हमारे उपचार के परिणामस्वरूप लोग अपने स्वास्थ्य को लगातार सुधार रहे हैं। यह उनके रोजमर्रा के जीवन-गुणवत्ता में सुधार करता है। गोमूत्र के साथ-साथ आयुर्वेदिक दवा का उपचार विभिन्न उपचारों के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए पूरक थेरेपी के रूप में कार्य कर सकते हैं जो भारी खुराक, बौद्धिक तनाव, विकिरण और कीमोथेरेपी के उपयोग से आते हैं। हम लोगों का मार्गदर्शन करते हैं, एक सुखी और तनाव मुक्त जीवन जीने का एक तरीका सिखाते है, यदि उन्हें कोई असाध्य बीमारी है तो। हमारे उपाय करने के बाद हजारों मनुष्य एक संतुलित जीवन जीते हैं और यह हमारे लिए एक बड़ी उपलब्धि है कि हम उन्हें एक जीवनशैली दें जो वे अपने  सपने में देखते हैं।

जटिलता निवारण

गोमूत्र, जिसे अक्सर भोजन की नली का कैंसर जैसी भयानक बीमारियों के लिए अच्छा माना जाता है, का आयुर्वेद में विशेष स्थान है। हमारे वर्षों के काम से साबित होता है कि हमारी आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों के साथ भोजन की नली का कैंसर के कुछ लक्षण लगभग गायब हो जाते हैं। हमारे मरीज शरीर में दर्द, नियंत्रण और हार्मोनल और रासायनिक परिवर्तनों में एक बड़ी राहत महसूस करते हैं, शरीर के अन्य अंगों या आस-पास फैलने वाली कैंसर कोशिकाओं की गति को धीमा करते हैं, रोगी की प्रतिरक्षा प्रणाली में सुधार करते हैं जो अन्य कैंसर जटिलताओं के लिए अनुकूल रूप से काम करता है तथा मस्तिष्क नियंत्रण और तंत्रिका तंत्र से संबंधित समस्याओं को भी दूर करता है I

जीवन प्रत्याशा

यदि हम किसी व्यक्ति की अस्तित्व प्रत्याशा के बारे में बात कर रहे हैं तो गोमूत्र उपाय स्वयं में एक बड़ी आशा हैं। कोई भी बीमारी या तो छोटी या गंभीर स्थिति में होती है, जो मानव शरीर पर बुरा प्रभाव डालती है और कुछ वर्षों तक मौजूद रहती है, कभी-कभी जीवन भर के लिए। एक बार विकार की पहचान हो जाने के बाद, अस्तित्व प्रत्याशा कम होने लगती  है, लेकिन गोमूत्र चिकित्सा के साथ नहीं। हमारा ऐतिहासिक उपाय अब इस बीमारी से सबसे प्रभावी रूप से ही छुटकारा नहीं दिलाता है, बल्कि उस व्यक्ति की जीवनशैली-अवधि में भी वृद्धि करता है और उसके रक्तप्रवाह में कोई विष भी नहीं छोड़ता है और यही हमारा अंतिम उद्देश्य है।

दवा निर्भरता को कम करना

"सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद् दुःख भाग्भवेत्", इसका अर्थ है सभी को हर्षित होने दें, सभी को बीमारी से मुक्त होने दें, सभी को वास्तविकता देखने दें, कोई भी संघर्ष ना करे। इस आदर्श वाक्य के पालन के माध्यम से हमें अपने समाज को इसी तरह बनाना है। हमारा उपचार विश्वसनीय उपाय देने, जीवन प्रत्याशा में सुधार और प्रभावित लोगों की दवा निर्भरता कम करने के माध्यम से इसे पूरा करता है। इस समकालीन समाज में, हमारे उपाय में किसी भी मौजूदा औषधीय समाधानों की तुलना में अधिक लाभ और कमियां बहुत कम हैं।

पुनरावृत्ति की संभावना को कम करना

चिकित्सा पद्धतियों की एक विस्तृत श्रृंखला की तुलना में, हम रोग के मूल कारण और उन कारकों पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो बीमारी के पुनरावृत्ति की संभावना को बढ़ा सकते हैं, न कि केवल रोग के प्रबंधन पर। इस पद्धति का उपयोग करके, हमने पुनरावृत्ति दर को सफलतापूर्वक कम कर दिया है और लोगों के जीवन के लिए एक नई दिशा बताई है ताकि लोग भावनात्मक और शारीरिक रूप से बेहतर जीवन जी सकें।

एसोफेगस कैंसर के कारण 

एसोफेगस कैंसर को प्रभावित करने वाले कई निम्नलिखित कारण तथा जोखिम कारक जिम्मेदार होते हैं - 

  •  गैस्ट्रोसोफेजियल रिफ्लक्स डिजीज 

व्यक्ति की भोजन नली में पेट से ऊपर की ओर खाना पहुंचने लगता है तो व्यक्ति को यह गैस्ट्रोसोफेजियल रिफ्लक्स नाम की बीमारी होती है l पेट जब भोजन को पचाने के लिए एसिड और एंजाइम बनाता है तो कुछ लोगों में यह एसिड और एंजाइम एसोफेगस के निचले हिस्से में बच जाता है l जिससे व्यक्ति को सीने में जलन, दर्द आदि होने लगता है l लंबे समय से व्यक्ति के इस बीमारी से पीड़ित होने पर व्यक्ति में एसोफेगस कैंसर का खतरा बढ़ने लगता है l

  • मोटापा 

व्यक्ति जिनका वज़न बहुत अधिक होता है उन्हें गैस्ट्रोसोफेजियल रिफ्लक्स की बीमारी की शिकायत अधिक रहती है जो इस कैंसर को जन्म देने के लिए जिम्मेदार हो सकती  हैं l मोटापा शरीर में अत्यधिक वसा का कारण बनता है, जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कम करता है और हार्मोन और कोशिकाओं के कामकाज को भी प्रभावित करता   है l 

  • अन्य कैंसर का इतिहास 

जो लोग फेफड़े, मुहँ अथवा गले आदि के कैंसर से अपने जीवन काल में पहले ग्रसित रह चुके है उनमें एसोफेगस कैंसर होने का जोखिम भी उच्च रहता है l 

  • धूम्रपान, तंबाकू तथा शराब 

एसोफेगस कैंसर होने का जोखिम उन लोगों को ज्यादा रहता है जो लंबे समय से सिगरेट, सिगार, पाइप तथा तंबाकू उत्पादों का सेवन करने के आदी रहे हो l धूम्रपान के उत्पाद उन हानिकारक रसायनों से मिलकर बने होते है जिसमे कई कैंसर जनित तत्वों का मिश्रण होता है l इंसान जब इनका सेवन करता है तो उसमे उपस्थित ये रसायन उनके शरीर के अंदर तक पहुंच जाता है जिससे शरीर की न सिर्फ रोग प्रतिरोधक क्षमता धीरे धीरे घटने लगती है बल्कि एसोफेगस में स्थित कोशिकाएँ भी इन रसायनों के संपर्क में आने के बाद और अधिक सक्रिय होने लगती हैं l

वे व्यक्ति जो शराब और धूम्रपान का संयुक्त सेवन अत्यधिक मात्रा में करते हैं उन्हें यह कैंसर होने का खतरा कई गुना अधिक रहता है l

  • बैरेट एसोफेगस

पेट द्वारा निर्मित किया जाने वाला एसिड तथा एंजाइम एसोफेगस के निचले हिस्से में जब लंबे समय तक रहता है तो यह इसकी आंतरिक अस्तर को अत्यधिक नुकसान पहुंचाने लगता है जिससे अस्तर की श्लेम नाम की कोशिकाओं में परिवर्तन होने लगता है यह बैरेट एसोफेगस की स्थिति होती है l कोशिकाओं में यह परिवर्तन एसोफेगस के संक्रमण का कारण बनता है तथा कैंसर के जोखिम उत्पन्न करने में सक्रिय भूमिका निभाता है l

  • आहार 

व्यक्ति द्वारा अत्यधिक सेवन किया जाने वाले कुछ आहार में ऐसे पदार्थ होते हैं जो एसोफेगस कैंसर को विकसित करने का कारण बन सकते हैं l जो व्यक्ति अधिक मिर्च मसाले वाला भोजन करने के आदी होते हैं तथा जिन्हें बहुत अधिक गर्म खाना खाने तथा गर्म तरल पदार्थ पीने की निरंतर आदत होती है उनकी यह आदत उनके एसोफेगस को अस्तर करने वाली कोशिकाओं को दीर्घकाल से क्षतिग्रस्त करती रहती है जिसके कारण एसोफेगस कैंसर का जोखिम काफी हद तक बढ सकता है l

  • एक्लेशिया

जब किसी व्यक्ति द्वारा भोजन को ठीक से चबाएं बिना ही निगल लिया जाता है अथवा किसी तरल को तीव्रता के साथ निगल लिया जाता है तो खाने की नली उन खाद्य पदार्थों को पेट तक पहुंचाने में असमर्थ होने लगती है तथा यह पदार्थ नली के निचले हिस्से में ही इकट्ठा होने लगता है l व्यक्ति के एसोफेगस में होने वाली इस स्थिति को एकैलेसिया कहा जाता है l इन खाद्य पदार्थों के लंबे समय से संपर्क में रहने की वजह से खाने की नली को अस्तर करने वाली कोशिकाएं प्रभावित होने लगती है जिसके कारण खाने की नली के कैंसर का खतरा बढ़ने लगता है l

 

एसोफेगस कैंसर से निवारण 

खाने की नली में होने वाले कैंसर से बचने के लिए हमें निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए- 

  • व्यक्ति को धूम्रपान, तम्बाकू तथा शराब पीने जैसी अपनी बुरी आदतों को छोड़ना चाहिए l
  • वह लोग जो धूम्रपान तथा शराब का संयुक्त रूप में अत्यधिक सेवन करते हैं उन्हें इस तरह की आदतों को त्यागना चाहिए l
  • व्यक्ति को पौष्टिकता से भरपूर आहार का सेवन करना चाहिए तथा अधिक मिर्ची मसाले युक्त खाने का नियमित सेवन करने से बचना चाहिए l
  • व्यक्ति को अधिक से अधिक फल तथा सब्जियों का सेवन करना चाहिए l
  • व्यक्ति को अपना वजन संतुलित करना चाहिए व मोटापे को बढ़ने से रोका जाना चाहिए l
  • व्यक्ति को नियमित व्यायाम, योग तथा कसरत आदि जैसी स्वास्थ्य के लिए लाभदायक गतिविधियों को प्रतिदिन करना चाहिए l
  • यदि किसी व्यक्ति को एसिड रिफ्लक्स अथवा बैरेट एसोफेगस जैसी समस्याएं रहती है तो बिना देरी के इसका सही उपचार कराया जाना चाहिए l
  • व्यक्ति को अपना भोजन धीरे-धीरे अच्छे से चबाकर करना चाहिए l 
  • व्यक्ति को लगातार बहुत अधिक गरम खाद्य पदार्थ तथा पेय पदार्थ का सेवन नहीं करना चाहिए  I

एसोफेगस कैंसर के लक्षण 

एसोफेगस कैंसर के कुछ लक्षण निम्नप्रकार हैं - 

  • व्यक्ति को कुछ भी निगलने में दर्द तथा परेशानी होती है l 
  • व्यक्ति को सीने में भारीपन, जलन तथा दर्द महसूस होने लगता है l
  • व्यक्ति का वज़न कम होने लगता है l
  • व्यक्ति का गला बैठ जाता है तथा आवाज़ में खराश तथा खांसी होने लगती है l 
  • व्यक्ति को शारीरिक कमज़ोरी व थकान होने लगती है l 
  • व्यक्ति के मल का रंग काला होने लगता है l
  • व्यक्ति को उल्टियां होने लगती है l
  • कैंसर के हड्डियों तक पहुंचने पर व्यक्ति की हड्डियां कमजोर होने लगती है तथा हड्डियों में दर्द रहने लगता है l
  • व्यक्ति को खून की कमी होने लगती है l

 

एसोफेगस कैंसर के प्रकार 

भोजन नली की कोशिकाओं में परिवर्तन के आधार पर इन्हें निम्नलिखित प्रकारों में विभाजित किया गया है - 

  • एडेनोकार्सिनोमा

एडेनोकार्सिनोमा एसोफेगस के नीचे के हिस्से में होने वाले एसोफेगस कैंसर का एक प्रकार है जो उस हिस्से में मौजूद ग्रंथियों की कोशिकाओं में शुरू होता है l यह कैंसर बैरेट एसोफेगस की स्थिति के परिणामस्वरूप होता है l

  • स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा 

एसोफेगस कैंसर का यह सबसे आम प्रकार हैं जो एक लम्बे समय तक एसोफेगस अस्तर में होने वाली जलन के फलस्वरूप उत्पन्न होता है l यह कैंसर एसोफेगस की स्क्वैमस कोशिकाओं में परिवर्तन के कारण होता है जो एसोफेगस की सतह को रेखांकित करने वाली चपटी तथा पतली कोशिकाएं होती है l

एसोफेगस कैंसर के चरण 

एसोफेगस कैंसर के चरण कुछ इस प्रकार से है - 

  • पहला चरण 

पहले चरण में यह कैंसर भोजन नली की अस्तर कोशिकाओं की ऊपरी परतो तक ही सीमित होता है l

  • दूसरा चरण 

एसोफेगस कैंसर अपने दूसरे चरण में एसोफेगस की अंदरूनी परतों में फैल जाता है तथा लिम्फ नोड्स में फैलने लगता है l 

  • तीसरा चरण 

तीसरे चरण में यह कैंसर लिम्फ नोड्स तथा आसपास के ऊतकों में पूरी तरह से फैल जाते हैं l

  • चौथा चरण 

कैंसर अपने अंतिम चरण में एसोफेगस में पूरी तरह से फैलने के बाद शरीर के अन्य हिस्सों जैसे पेट, गले आदि में फैल चुका होता है l

 

एसोफेगस कैंसर की जटिलताएं 

एसोफेगस कैंसर से पीड़ित व्यक्ति को विभिन्न जटिलताओं का सामना करना पड़ता है जो है - 

  • व्यक्ति की भोजन नली में रक्तस्त्राव होने लगता है l
  • व्यक्ति इस कैंसर से पीड़ित होने पर खाद्य पदार्थों तथा पेय पदार्थों को निगलने व पीने में असमर्थ होने लगता है l
  • भोजन नली में रक्तस्त्राव कभी कभी अचानक तथा तीव्र गति से होने लगता है l
  • व्यक्ति को गले, सीने तथा पेट में असामान्य दर्द रहने लगता है l
  • व्यक्ति के विंड पाइप तथा भोजन नली के बीच के हिस्सों में छेद होने लगते हैं जिससे भोजन व्यक्ति के फेफड़ों में पहुंचने लग जाता है और व्यक्ति को फेफड़ों में संक्रमण, खांसी तथा घुट आदि की समस्या होने लगती है l
  • कभी कभी इस कैंसर के कारण व्यक्ति को निमोनिया की शिकायत होने लगती है l

मान्यताएं