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अवसाद का इलाज

अवलोकन

अवसाद हमारे मन की एक ऐसी अवस्था है जिसमें व्यक्ति को अपने जीवन के प्रति अरुचि होने लगती है l कई बाहरी परिस्थितियों के कारण व्यक्ति को एक लंबे समय तक तनाव रहने लगता है जिससे उसकी मानसिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने लगता है l यह मानसिक स्थिति यदि दीर्घकालीन रहती है तो यह एक व्यक्ति के लिए बहुत ही गंभीर और चिंताजनक बात होती है l यह समस्या व्यक्ति के भावनात्मक और शारीरिक जीवन का हिस्सा बन जाती है जो उनके लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है l तनाव ग्रस्त व्यक्ति का मस्तिष्क विचारों के प्रति अनियंत्रित हो जाता है तथा उसे अपने आप पर एक तरह का दबाव महसूस होने लगता है l व्यक्ति इन्हीं परिस्थितियों में अपना जीवन जीने लगता है l 

अवसाद को मानसिक रोग की श्रेणी के अंतर्गत शामिल किया जाता है l आज के जीवन में अवसाद एक बहुत ही आम स्थिति बन गई है जो हर दूसरे व्यक्ति को प्रभावित कर रही है l अवसाद से पीड़ित व्यक्ति में पूरे समय ऊर्जा तथा उत्साह की कमी होने लगती है l व्यक्ति की मनोदशा में कई तरह के उतार चढ़ाव होने लगते है l उदासी, क्रोध, दुःख, हीन भावना आदि कई मनोदशा से व्यक्ति घिरा हुआ रहने लगता है l व्यक्ति अपनी मानसिक स्थिति और बाहरी परिस्थितियों में संतुलन और सामंजस्य नहीं बना पाता है l जिससे बहुत से बदलाव के साथ साथ कई परेशानियां उनके जीवन में बढ़ने लगती है l

अनुसंधान

जैन के गोमूत्र चिकित्सा क्लिनिक का उद्देश्य प्राचीन आयुर्वेदिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक के साथ एकीकृत करके एक सुखी और स्वस्थ जीवन बनाना है। हमारी चिकित्सा का अर्थ है आयुर्वेद सहित गोमूत्र व्यक्ति के तीन दोषों पर काम करता है- वात, पित्त और कफ। ये त्रि-ऊर्जा हमारे स्वास्थ्य को बनाए रखती हैं, इन दोषों में कोई भी असंतुलन, मानव स्वास्थ्य और बीमारी के लिए जिम्मेदार है। हमें यह कहते हुए खुशी हो रही है कि हमारे उपचार के तहत हमने इतने सारे सकारात्मक परिणाम देखे हैं। हमारे इलाज के बाद हजारों लोगों को कई बीमारियों से छुटकारा मिला।

हमारे मरीज न केवल अपनी बीमारी को खत्म करते हैं बल्कि हमेशा के लिए एक रोग मुक्त स्वस्थ जीवन जीते हैं। यही कारण है कि लोग हमारी चिकित्सा की ओर ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। आयुर्वेदिक उपचारों में हमारे वर्षों के शोध ने हमें अपनी कार्यप्रणाली को आगे बढ़ाने में मदद की है। हम पूरी दुनिया में एक स्वस्थ और खुशहाल समाज का निर्माण करने के लिए अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य रखते हैं।

गोमूत्र चिकित्सा द्वारा प्रभावी उपचार

गोमूत्र चिकित्सा के दृष्टिकोण के अनुरूप कुछ जड़ी-बूटियां शारीरिक दोषों (वात, पित्त और कफ) को फिर से जीवंत करने का काम करती हैं जो कि अवसाद का कारण बन सकती हैं यदि वे असंतुष्ट हों। उनसे निपटने के लिए कुछ आयुर्वेदिक दवाओं में कई लाभकारी तत्व शामिल हैं। यह शरीर के चयापचय में सुधार करता है।

ब्रेनटोन + लिक्विड ओरल

ब्रेंटोन + कैप्सूल

टोनर ( नेसल ड्राप)

प्रमुख जड़ी-बूटियाँ जो उपचार को अधिक प्रभावी बनाती हैं

बहेड़ा

बहेड़ा में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट मुक्त कणों से लड़ते हैं और मस्तिष्क की कोशिका क्षति को रोकते हैं। बहेड़ा मस्तिष्क में न्यूरोट्रांसमीटर (मध्यस्थों जो सिग्नल ट्रांसमिशन में मदद करता है) की एकाग्रता में सुधार करता है और इस प्रकार अवसाद और चिंता को प्रबंधित करने में मदद करता है।

शतावरी

शतावरी का उपयोग डिप्रेशन के इलाज के लिए आयुर्वेद में किया जाता है। शतावरी में एंटीऑक्सीडेंट में मजबूत अवसाद रोधी क्षमता होती है। यह मस्तिष्क में न्यूरोट्रांसमीटर को भी प्रभावित करता है।

मुलेठी

मुलेठी की जड़ें अधिवृक्क ग्रंथि पर सहायक प्रभाव डालती हैं और इस प्रकार मस्तिष्क को उत्तेजित करने में अप्रत्यक्ष रूप से सहायता करती हैं। यह न केवल अवसाद के प्रभावों को कम करता है और बल्कि इसकी एंटीऑक्सीडेंट संपत्ति (मुलेठी में फ्लेवोनोइड्स होते हैं) मस्तिष्क की कोशिकाओं पर एक परिरक्षण प्रभाव प्रदान करता है।

ब्राह्मी

ब्राह्मी को सेरोटोनिन के स्तर को बढ़ाने के लिए जाना जाता है जो वयस्कों में चिंता और अवसाद को कम करता है। यह कोशिकाओं की रक्षा करके मस्तिष्क को तेज करता है। इसका उपयोग तनाव से लड़ने और याददाश्त में सुधार के साथ अवसाद के इलाज के लिए किया जाता है।

शंखपुष्पी

यह मानसिक स्वास्थ्य में सुधार करता है और अवसाद रोधी गतिविधि के कारण अवसाद के प्रबंधन में मदद कर सकता है। आयुर्वेद के अनुसार, शंखपुष्पी मस्तिष्क को शांत करने और तनाव के साथ-साथ चिंता को दूर करने में मदद करता है। यह अपने मेध्या (बुद्धि में सुधार) गुण के कारण मस्तिष्क टॉनिक के रूप में कार्य करके स्मृति में सुधार करता है।

अश्वगंधा

इसे एक एडाप्टोजेन के रूप में वर्गीकृत किया गया है, यह शरीर को तनाव का प्रबंधन करने में मदद कर सकता है। अश्वगंधा मस्तिष्क के लिए कई अन्य लाभ भी प्रदान करता है क्योंकि यह मस्तिष्क के कार्य, निम्न रक्त शर्करा और कोर्टिसोल के स्तर को बढ़ा सकता है और चिंता व अवसाद के लक्षणों से लड़ने में मदद करता है।

जटामांसी

यह अपने अवसाद-रोधी और तनाव-विरोधी गुणों के लिए जाना जाता है। जटामांसी मस्तिष्क में सेरोटोनिन के स्तर को बढ़ाती है जो मन को शांत रखने में मदद करती है और चिंता और घबराहट से राहत देती है। जटामांसी अनिद्रा और अन्य नींद संबंधी विकारों के इलाज में मदद करती है।

विडंग

विडंग का उपयोग अवसाद को प्रबंधित करने के लिए किया जा सकता है। इसमें एम्बेलिन नामक एक यौगिक होता है जो अवसाद रोधी गतिविधि रखता है। एम्बेलिन सेरोटोनिन और नॉरपेनेफ्रिन जैसे न्यूरोट्रांसमीटर के फटने को रोकता है और इस तरह अच्छे मूड को बढ़ाता है।

केवच बीज

केवच बीज में एंटीऑक्सीडेंट और न्यूरोप्रोटेक्टिव प्रभाव होते हैं। इन बीजों में एल-डोपा होता है जो डोपामाइन में परिवर्तित हो जाता है और मस्तिष्क में इसके स्तर को बहाल करता है जो अवसाद से राहत पाने में मदद करता है।

गाय का दूध

गाय का दूध विटामिन बी का एक अच्छा स्रोत है जो मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र के स्वस्थ कामकाज को सुनिश्चित करता है। गाय का दूध एक कम वसा वाला डेयरी है और दो पावरहाउस पोषक तत्वों, कैल्शियम और विटामिन डी के साथ-साथ विशिष्ट पेप्टाइड्स (प्रोटीन) का सबसे समृद्ध आहार स्रोत है जो अच्छी तरह से रहने और विश्राम की भावना को प्रेरित करता है जो अवसाद से लड़ने में मदद करता है।

गोमय रस

गोमय रस मस्तिष्क में सेरोटोनिन और नॉरपेनेफ्रिन के स्तर को बढ़ाने में मदद करता है जो अवसाद को कम करने से जुड़े हैं।

गाय दूध का दही

यह अवसाद और चिंता के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकता है। लैक्टोबैसिलस से समृद्ध गाय के दूध का दही-एक प्रोबायोटिक बैक्टीरिया- अवसाद और चिंता के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकता है।

गाय का घी

गाय का घी याददाश्त में सुधार करता है और मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र को मजबूत करता है और एक महत्वपूर्ण विषहरण एजेंट है। पोषक तत्वों से भरपूर घी में संतृप्त वसा मस्तिष्क और प्रतिरक्षा प्रणाली के स्वस्थ कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

गोजला

हम अपने गोमूत्र चिकित्सा में गोजला का उपयोग करते हैं, मूल रूप से इसका मतलब है कि हमारी दवा में मुख्य घटक गोमूत्र अर्क है। यह अर्क गाय की देसी नस्लों के मूत्र से बना है। गोजला के अपने फायदे हैं क्योंकि यह किसी भी प्रकार के संदूषण की संभावना से परे है। इसकी गुणवत्ता उच्च है एवं प्रचुर मात्रा में है। जब गोजला आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों के साथ मिलाया जाता है तो यह किसी भी बीमारी के इलाज के लिए अधिक प्रभावी हो जाता है और विशेष बीमारियों में अनुकूल परिणाम देता है। इस अर्क का अत्यधिक परीक्षण किया गया है और इसलिए यह अधिक विश्वसनीय और लाभदायक भी है।

जीवन की गुणवत्ता

गोमूत्र उपचार अच्छा स्वास्थ्य लाता है और दोषों को संतुलित रखता है। आज हमारे उपचार के परिणामस्वरूप लोग अपने स्वास्थ्य में लगातार सुधार कर रहे हैं। यह उनके दैनिक जीवन की गुणवत्ता में सुधार करता है। गोमूत्र के साथ-साथ आयुर्वेदिक दवाएं विभिन्न दुष्प्रभावों को कम करने के लिए एक पूरक चिकित्सा के रूप में काम कर सकती हैं जिन रोगियों को भारी खुराक, मानसिक दबाव, विकिरण और कीमोथेरपी के माध्यम से उपचार दिया जाता हैं। हम लोगों को मार्गदर्शन करते हैं कि यदि कोई रोग हो तो उस असाध्य बीमारी के साथ एक खुशहाल और तनाव मुक्त जीवन कैसे जियें। हजारों लोग हमारी थेरेपी लेने के बाद एक संतुलित जीवन जीते हैं और यह हमारे लिए एक बड़ी उपलब्धि है कि हम उन्हें एक ऐसा जीवन दें जिनके वे सपने देखते हैं।

जटिलता निवारण

गोमूत्र, जिसे अक्सर अवसाद जैसे रोगों के लिए अच्छा माना जाता है, का आयुर्वेद में विशेष स्थान है। हमारे वर्षों के काम में साबित होता है कि हमारे आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों के साथ अवसाद के कुछ लक्षण लगभग गायब हो जाते हैं। हमारे रोगियों को उदासी, उनके क्रोध, थकान, एकाग्रता, हताशा, आत्मसम्मान, आलस्य, शरीर में हार्मोनल और रासायनिक परिवर्तनों को नियंत्रित और संतुलित करने में बड़ी राहत महसूस होती है, साथ ही रोगी की प्रतिरक्षा प्रणाली में सुधार होता है जो अन्य अवसाद जटिलताओं के लिए भी अनुकूल रूप से काम करता है।

जीवन प्रत्याशा

अगर हम जीवन प्रत्याशा के बारे में चिंतित हैं, तो गोमूत्र उपचार अपने आप में बहुत बड़ा वादा है। कोई भी विकार, चाहे वह मामूली हो या गंभीर, किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और जीवन में कई वर्षों तक रहता है। जीवन प्रत्याशा संक्षिप्त है जब तक कि स्थिति की पहचान नहीं की जाती है, लेकिन गोमूत्र उपचार के साथ नहीं। न केवल हमारी प्राचीन चिकित्सा बीमारी को कम करती है, बल्कि यह व्यक्ति की दीर्घायु को उसके शरीर में कोई भी दूषित तत्व नहीं छोड़ती है और यह हमारा अंतिम उद्देश्य है।

दवा निर्भरता को कम करना

"सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद् दुःख भाग्भवेत्", इसका अर्थ है सभी को हर्षित होने दें, सभी को बीमारी से मुक्त होने दें, सभी को वास्तविकता देखने दें, कोई भी संघर्ष ना करे। इस आदर्श वाक्य के पालन के माध्यम से हमें अपने समाज को इसी तरह बनाना है। हमारा उपचार विश्वसनीय उपाय देने, जीवन प्रत्याशा में सुधार और प्रभावित लोगों की दवा निर्भरता कम करने के माध्यम से इसे पूरा करता है। इस समकालीन समाज में, हमारे उपाय में किसी भी मौजूदा औषधीय समाधानों की तुलना में अधिक लाभ और कमियां बहुत कम हैं।

पुनरावृत्ति की संभावना को कम करना

व्यापक चिकित्सा पद्धति के विपरीत, हम रोग और कारकों के मूल कारण पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो केवल रोग के प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय रोग पुनरावृत्ति की संभावना में सुधार कर सकती हैं। इस पद्धति का उपयोग करके, हम पुनरावृत्ति दरों को सफलतापूर्वक कम कर रहे हैं और लोगों के जीवन को एक नई दिशा दे रहे हैं ताकि वे भावनात्मक और शारीरिक रूप से बेहतर तरीके से अपना जीवन जी सकें।

अवसाद के कारण 

अवसाद से ग्रस्त व्यक्तियों में यह स्थिति होने के ऐसे कई कारण हो सकते है जो सीधे उनकी मनोस्थिति को प्रभावित करते है l यह कारण निम्नलिखित हो सकते है - 

  • हार्मोन बदलाव 

हार्मोंस में आए परिवर्तन के कारण व्यक्ति को अवसाद हो सकता है l महिलाओं को यह समस्या उस समय अधिक हो सकती है जब रजोनिवृत्ति तथा प्रसव के समय उनके हार्मोन्स में कई तरह के बदलाव होना शुरू होते है l इसी तरह व्यक्ति के हार्मोन के उत्पादन तथा इनके कार्यो में यदि किसी तरह का कोई बदलाव या असंतुलन होता है तो व्यक्ति में अवसादग्रस्तता की शुरुआत होने लगती है तथा यह स्थिति गंभीर में पहुंच जाती है l

  • आनुवांशिकी 

वंशानुगत, अवसाद का एक मुख्य कारण हो सकता है l जिन व्यक्तियों के परिवार के किसी भी सदस्य को यदि यह समस्या होती है तो उस व्यक्ति को भी अवसाद होने की समस्या कई गुना बढ़ जाती है l 

  • मौसमी परिवर्तन 

मौसम में होने वाले कई तरह के परिवर्तन भी व्यक्ति के अवसाद को पैदा करने के लिए काफी हद तक जिम्मेदार हो सकते है l बदलते मौसम के अनुसार व्यक्ति की मनोदशा में बदलाव आते है l बारिश के मौसम में अधिकतर व्यक्ति को उदासीनता का अनुभव होता है l सर्दियों में व्यक्तियों में शारीरिक गतिविधियों के प्रति अरुचि बनी रहती है l यद्यपि यह सभी मौसमी परिवर्तन अवसाद के लिए एक अल्पकालिक वजह होते है जो कम समय में समाप्त हो जाती है l 

  • गंभीर बीमारियां 

कुछ परिस्थितियों में अवसाद गंभीर बीमारियों के साथ स्वतः ही उत्पन्न हो जाता है l यदि व्यक्ति एक लंबे समय से किसी गंभीर बीमारी से तथा उसके दर्द से जूझ रहा हो तो उसे अवसाद हो सकता है l थायराइड, कैंसर, दिमागी चोट, ट्यूमर, साँस की तकलीफ, हृदय रोग, त्वचा रोग, पीठ में तकलीफ़ आदि कई बीमारियों से ग्रसित व्यक्ति में उनकी बीमारियों के साथ अवसाद भी सह मौजूद रहता है l 

  • जीवन में बड़ा परिवर्तन 

यदि व्यक्ति के जीवन में कोई असामान्य बदलाव आता है तो यह उनके अवसाद का कारण बन सकता है l किसी अपने की मृत्यु देखना, गंभीर दुर्घटना हो जाना, नौकरी न मिलना, पढ़ाई में असफ़ल होना, सामाजिक अलगाव, अकेलापन आदि कई ऐसी परिस्थितियाँ है जो व्यक्ति के जीवन में बहुत बड़े बदलाव लाती है जिसका असर उनकी मनोदशा पर होता है और वह अवसाद का शिकार हो जाता है l

  • कुछ दवाइयां 

कुछ दवाइयों का सेवन व्यक्ति के अवसाद के जोखिम को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार हो सकते है l आइसोट्रेनोइन नामक जिनका सेवन मुहांसों के इलाज के लिए किया जाता है अथवा कुछ एंटी वायरल इंटरफेरॉन-अल्फा व कार्टीकोस्टेरोईड्स जैसी दवाइयों का उपयोग करने से व्यक्ति अवसाद से ग्रस्त होने लगता है l 

  • नशीले पदार्थों का सेवन 

नशीले पदार्थों का सेवन व्यक्ति को अवसाद से ग्रस्त करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते है l शराब का नशा व्यक्ति की अवसादग्रस्तता के लिए जोखिम कारक हो सकता है l हेरोइन, कोकीन, चरस जैसे ड्रग्स अंततः व्यक्ति के अवसाद को बढ़ाने का कार्य करते है l 

  • व्यक्तिगत समस्याएं  

कुछ व्यक्तिगत समस्याएं व्यक्ति को अवसाद में ले जाने के लिए जोखिम कारक बन सकते है l प्यार अथवा शादी में विफलता, शारीरिक विकार, आर्थिक समस्या, पारिवारिक क्लेश, करियर में असफ़लता आदि कई ऐसी समस्या है जो व्यक्ति को तनाव से ग्रस्त करती है l यह सभी स्थितियां उनके अवसाद को बढ़ाने में मददगार साबित हो सकते है l 

  • भावनात्मक शोषण 

किसी तरह का भावनात्मक दुर्व्यवहार, शारीरिक प्रताड़ना, यौन शोषण, आत्मसम्मान को ठेस, अस्वीकृति, आरोप, शक, मौखिक दुरुपयोग आदि व्यक्ति के अवसाद को उत्पन्न कर सकते है तथा उनके जीवन में नैदानिक अवसाद के प्रति भेद्यता को बढ़ा सकते है l 

 

अवसाद से निवारण 

यदि व्यक्ति को अवसाद होने लगता है तो वह अपनी जीवनशैली में कई खुशनुमा बदलाव कर के इस स्थिति से उबर सकता है l व्यक्ति निम्नलिखित तरीकों से अपने अवसाद को दूर कर सकते है - 

  • अवसाद से ग्रस्त व्यक्तियों को अपने आहार पर ध्यान देने की जरूरत होती है l स्वस्थ, समृद्ध तथा पौष्टिक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन तथा फल, सब्जियों का अत्यधिक सेवन उन्हें रोज करना चाहिए l
  • व्यक्ति को नियमित रूप से सैर, व्यायाम, कसरत तथा योग जैसी गतिविधियों को करना चाहिए l
  • व्यक्ति को अपने परिवार, रिश्तेदारों, दोस्तों आदि के साथ अधिक से अधिक समय बिताना चाहिए l
  • अवसादग्रस्त व्यक्तियों को ध्यान अथवा मेडिटेशन करना चाहिए l
  • व्यक्ति को नशीले पदार्थों के सेवन जैसी आदतों को त्यागना चाहिए l
  • व्यक्ति को प्राकृतिक जगहों पर अपना दिन व्यतित करना चाहिए l
  • व्यक्ति को पर्याप्त नींद लेनी चाहिए l
  • व्यक्ति को सामाजिक उत्सवों, त्योहारों, आयोजनों में अधिक से अधिक भाग लेना चाहिए l
  • ऐसे कार्य तथा गतिविधियां व्यक्ति को करनी चाहिए जिससे उन्हें खुशी मिलती है जैसे संगीत सुनना, किताब पढ़ना, घूमना-फिरना या अपने शौक पूरे करना l 
  • व्यक्ति को अपनी नकारात्मक सोच को सकारात्मक सोच में बदलने की कोशिश करनी चाहिए l

अवसाद के लक्षण 

हर व्यक्ति में अवसाद के अलग अलग लक्षण उभर के आते है l यह निर्भर करता है कि अवसादग्रस्त व्यक्ति किस तरह से तथा क्या महसूस करते है l इस आधार पर अवसाद के कई सामान्य लक्षण निम्नलिखित हो सकते है - 

  • एक लंबे समय तक उदास और चिंतित रहना 
  • गुस्सा और चिड़चिड़ापन रहना 
  • दैनिक कार्यों के प्रति अरुचि होना 
  • बहुत अधिक या फिर बहुत कम सोना 
  • अकेले रहना
  • सामाजिक गतिविधियों के प्रति उदासीनता होना 
  • मन में नकारात्मक विचार लाना 
  • सिर में दर्द बने रहना 
  • थकान और कमजोरी महसूस करना 
  • ठीक प्रकार से भोजन न करना 
  • नशीले पदार्थों की लत लगना 
  • नींद की गोली व अन्य दवाइयों का सेवन करना 
  • जीवन समाप्त करने जैसे विचार आना 
  • किसी चीज में ध्यान केंद्रित न कर पाना 
  • हर समय हताशा, नाकामयाबी महसूस होना 
  • आत्म सम्मान में कमी आना, आत्म ग्लानि में रहना 
  • आलस्य, निष्क्रिय तथा निरसभरी जिंदगी जीना 

 

अवसाद के प्रकार 

व्यक्ति को निम्नलिखित तरह के अवसाद हो सकते है -

  • मेजर डिप्रेसिव डिसऑर्डर 

यदि कोई व्यक्ति एक लंबे समय से उदास और गहरी निराशा में रहता है तो यह मेजर डिप्रेसिव डिसऑर्डर होता है l व्यक्ति बहुत समय तक काम में अपना मन नहीं लगा पाता है l मेजर डिप्रेसिव डिसऑर्डर से पीड़ित व्यक्ति की मनोदशा तथा व्यवहार में कई बदलाव आते है जिससे उनका जीवन प्रभावित होने लगता है l

  • परसिसटेंट डिप्रेसिव डिसऑर्डर

परसिसटेंट डिप्रेसिव डिसऑर्डर को डिस्टीमिया के नाम से भी जाना जाता है l ये वह बीमारी होती है जब व्यक्ति को अपना जीवन जीने के प्रति अरुचि होने लगती है l व्यक्ति बहुत अधिक उदास रहने लगता है l इस समस्या की अवधि सालों तक रह सकती है जिसमें व्यक्ति को कम भूख, अनिद्रा, ऊर्जा में कमी, एकाग्रता में परेशानी आदि होती   है l 

  • मैनिक डिप्रेशन 

मैनिक डिप्रेशन को बाइपोलर डिप्रेशन भी कहा जाता है l यह स्थिति व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर डालती है l व्यक्ति को उदासी में कई नकारात्मक विचार आने लगते है l व्यक्ति के व्यवहार में सहसा बदलाव आते है l व्यक्ति को कभी बहुत अधिक खुशी होती है तो कभी बहुत ज्यादा दुःख का अनुभव होता है l ज्यादा समय तक इस अवसाद से घिरे रहने वाले व्यक्ति को आत्महत्या जैसे नकारात्मक विचार आने लगते है l 

  • पोस्टपार्टम डिप्रेशन 

ज्यादातर उन महिलाओं को यह समस्या होती है जो गर्भवती होती है l ऐसी महिलाओं को उनके बाद के जीवन में प्रमुख अवसाद से ग्रस्त होने का खतरा बहुत अधिक हो जाता है l यह स्थिति कई महीनों तक रह सकती है l जिसमें उन्हें बच्चों के साथ कठिनाई, अत्यधिक चिड़चिड़ापन, नींद की कमी तथा भूख की कमी जैसी समस्याएं होने लगती  है l गर्भवती महिलाओं के होने वाले बच्चे में भी इस तरह के लक्षण पाए जा सकते हैं l

  • सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर 

मौसम में बदलाव के दौरान होने वाले परिवर्तनों के परिणामस्वरूप व्यक्तियों को सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर होता है l प्रत्येक वर्ष मौसम में होने वाले परिवर्तन उन्हें इस तरह की स्थिति से ग्रसित करते है l निराशा, थकान, चिड़चिड़ापन, कार्यों के प्रति रुचि न होना आदि इसके लक्षण होते है l कई लोग सर्दी के मौसम में तो कई लोग बारिश तथा गर्मी के मौसम में इस तरह के अवसाद से पीड़ित रहने लगते है l 

  • एटिपिकल डिप्रेशन 

एटिपिकल डिप्रेशन प्रमुख अवसाद का ही एक उपप्रकार है जिसके कई असामान्य लक्षण होते है l एटिपिकल डिप्रेशन से पीड़ित व्यक्ति बहुत अधिक भोजन करता है, वजन बढ़ना, अधिक समय तक सोता है अथवा पूरी रात जागता है तथा व्यक्ति को अधिक थकान व कमजोरी रहती है l ऐसे व्यक्ति बेहद संवेदनशील हो जाते है तथा पर्यावरणीय परिस्थितियों के प्रति व्यक्ति की मनोदशाएं प्रतिक्रियाशील होने लगती है l इस समस्या से पीड़ित व्यक्ति को यह महसूस नहीं हो पाता है कि वह इससे ग्रसित है l

अवसाद की जटिलताएँ 

अवसाद से ग्रसित व्यक्तियों को निम्नलिखित जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है - 

  • व्यक्ति एल्कोहल अथवा नशीले पदार्थों का आदि हो जाता है l
  • व्यक्ति आत्महत्या करने की कोशिश कर सकता है l
  • व्यक्ति अज्ञात भय और चिंता में डूबा रहता है l
  • व्यक्ति के आपसी रिश्तों में तकरार, पारिवारिक संघर्ष, तनाव आदि होने लगता है l
  • व्यक्ति में सामाजिक अलगाव की भावना उत्पन्न होने लगती है l
  • व्यक्ति अपने आप को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है l 
  • व्यक्ति को दूसरी कई शारीरिक बीमारियाँ होने लगती है l
  • एटिपिकल डिप्रेशन से पीड़ित व्यक्ति का वजन बढ़ जाता है जिससे उसे हृदय रोग अथवा शुगर की समस्या हो सकती है l

मान्यताएं