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किडनी का कैंसर का इलाज

अवलोकन

किडनी अर्थात गुर्दे मानव शरीर के बहुत ही महत्वपूर्ण अंग होते है I प्राय हर व्यक्ति के शरीर में दो गुर्दे होते है जो  पेट के अंदर की ओर, कमर वाले  हिस्से में, रीढ़ की हड्डी के दोनों तरफ (पीठ के भाग में) स्थित है I ये गुर्दे मानव शरीर के कई मुख्य कार्यो को पूरा करते है जैसे खून को शुद्ध करना, अपशिष्ट उत्पादों को मूत्र द्वारा शरीर से बाहर निकालना, शरीर में पानी, अम्ल तथा क्षार का संतुलन बनाये रखना, हड्डियों को मज़बूती प्रदान करना तथा रक्तचाप को संतुलित बनाये रखना इत्यादि I जब किन्ही कारणों की वजह से किडनी की कोशिकाएं ख़राब होने लगती है अथवा किडनी की कोशिकाओं में आसमान्य रूप से वृद्धि होने के कारण वहां टयुमर बनने लगता है तो इसे किडनी का कैंसर कहा जाता है I

यह कैंसर व्यक्ति के गुर्दे के आंतरिक हिस्सों में स्थित छोटी ट्यूब्स में विकसित होता है जो किडनी तथा आसपास के ऊत्तकों पर घातक आक्रमण कर किडनी को क्षतिग्रस्त करता है  तथा धीमी गति से बढ़ते हुए शरीर के दूसरे अंगों तक फैलने लगता है I बढ़ती हुई कोशिकाएँ ट्यूमर का विकास करती हैं तथा टूट कर शरीर के दूसरे हिस्से में भी फैल जाती हैं I यह कैंसर किडनी हमारे शरीर की कार्यप्रणाली को सुचारु रूप से कार्य करने में बाधा उत्पन्न करता है जिससे कई गंभीर समस्याएं हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित करती है जो की हमारे जीवन के लिए खतरनाक साबित हो सकती है I

अनुसंधान

जैन के गोमूत्र चिकित्सा क्लिनिक का उद्देश्य प्राचीन आयुर्वेदिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक के साथ एकीकृत करके एक सुखी और स्वस्थ जीवन बनाना है। हमारी चिकित्सा का अर्थ है आयुर्वेद सहित गोमूत्र व्यक्ति के तीन दोषों पर काम करता है- वात, पित्त और कफ। ये त्रि-ऊर्जा हमारे स्वास्थ्य को बनाए रखती हैं, इन दोषों में कोई भी असंतुलन, मानव स्वास्थ्य और बीमारी के लिए जिम्मेदार है। हमें यह कहते हुए खुशी हो रही है कि हमारे उपचार के तहत हमने इतने सारे सकारात्मक परिणाम देखे हैं। हमारे इलाज के बाद हजारों लोगों को कई बीमारियों से छुटकारा मिला।

हमारे मरीज न केवल अपनी बीमारी को खत्म करते हैं बल्कि हमेशा के लिए एक रोग मुक्त स्वस्थ जीवन जीते हैं। यही कारण है कि लोग हमारी चिकित्सा की ओर ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। आयुर्वेदिक उपचारों में हमारे वर्षों के शोध ने हमें अपनी कार्यप्रणाली को आगे बढ़ाने में मदद की है। हम पूरी दुनिया में एक स्वस्थ और खुशहाल समाज का निर्माण करने के लिए अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य रखते हैं।

गोमूत्र चिकित्सा द्वारा प्रभावी उपचार

गोमूत्र चिकित्सीय दृष्टिकोण के अनुसार, कई जड़ी-बूटियां, शरीर के दोषों (वात, पित्त और कफ) को फिर से जीवंत करने का काम करती हैं, जो किडनी में कैंसर का कारण बनते हैं अगर वे अनुपातहीन हैं। कुछ आयुर्वेदिक दवाओं में, उनके उपचार के लिए कई लाभकारी तत्व होते हैं। यह शरीर के चयापचय को बढ़ाता है।

केमोट्रिम+ सिरप

हाइराइल + लिक्विड ओरल

टोक्सिनोल + लिक्विड ओरल

एन्सोक्योर + कैप्सूल

फोर्टेक्स पाक

प्रमुख जड़ी-बूटियाँ जो उपचार को अधिक प्रभावी बनाती हैं

कांचनार गुग्गुल

कैंसर के उपचार में यह जड़ी बूटी प्रभावी होती हैं जो कैंसर के उपचार में अपने पारंपरिक उपयोग को बढ़ावा देते हैं। कांचनार गुग्गुल कोशिका (रोगाणुरोधी) विभाजन को बाधित कर और कोशिका प्रसार को कम करके एक साइटोटोक्सिक प्रभाव दिखाता है ।

सहजन

केम्पफेरोल और आइसो-क्वरसेटिन घटकों के साथ, कैंसर से राहत के लिए सबसे प्रभावी सहजन एंटी-कैंसर हर्ब का उपयोग किया जाता है।

गिलोय

ग्लूकोसामाइन के अलावा गिलोय के गुण, अल्कलॉइड जैसे कि गिलो इन, गिलोइनिन, गिलोस्टेराल और बेरबेरीन, शरीर में कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करते हैं और रक्त और कोशिकाओं को सुचारू करते हैं।

अश्वगंधा

कुछ प्रतिक्रियाशील ऑक्सीजन श्रेणियां अश्वगंधा के माध्यम से कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करके उत्पन्न होती हैं। विथफेरिन ए उन कोशिकाओं को नष्ट करने में प्रभावी है जो ट्यूमर के विकास को रोकने के लिए अश्वगंधा-स्थित यौगिक है।

कालमेघ

कालमेघ में कैंसर का इलाज करने के लिए एण्ड्रोग्राफ़ोलाइड नामक सबसे ज्वलंत विशाल घटक है।

पुनर्नवा

कैंसर रोधी दवा के रूप में पुनर्नवा में पुर्ननाविन एक अल्कलॉइड है जो कि कैंसर से बचने के लिए एक स्वस्थ और आसान तरीका, ज्यादातर कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकने के लिए जाना जाता है।

आमला

विटामिन सी, ई, बीटा-कैरोटीन और कैरोटीनॉयड के अलावा, आंवला में एंटीऑक्सीडेंट की एक शानदार मात्रा कार्सिनोजेनिक विकास से बचाती है।

पिप्पली

पिप्पली में पाया जाने वाला एक रासायनिक यौगिक पाइपरलोंग्युमाइन (PL) कैंसर कोशिकाओं को ट्यूमर एंजाइम तक पहुंचने से रोकता है और इसे विकसित होने से कम करने में मदद करता है।

भृंगराज

यह जड़ी बूटी काफी मजबूत होती है जो कैंसर कोशिकाओं को शरीर के अंदर फैलने से रोकती है। इसमें पाए जाने वाले प्राकृतिक अणु, अधिकांश कैंसर कोशिकाओं में डीएनए अणुओं के सुधार को रोकते हैं।

तुलसी

तुलसी के पत्तों में यूजेनॉल के रूप में जाना जाने वाला एक तत्व कैंसर के खिलाफ कोशिकाओं से रक्षा करती है।

नीम

एक विशाल नीम कारक जैसे नीम घन सत नीम की पत्ती के एंटीऑक्सीडेंट और एंटी कार्सिनोजेनिक गुण के रूप में कार्य करता है, जो व्यक्ति की कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने में सहायता करता है।

सोंठ

शोगोल एक एंटीऑक्सीडेंट के रूप में सोंठ के हर्बल भोजन का एक हिस्सा है जो कई फेनोलिक यौगिकों के साथ जिंजरोल को वहन करता है जो कैंसर पर असरदार प्रभाव दिखाते हैं।

बहेड़ा

Cytotoxicity factor that can prompt cytotoxicity (cellular-dying) in tumor cells is gallic acid which has the most important and high polyphenol placed in Baheda.

चित्रक

इस जड़ी-बूटी के कैंसर-रोधी प्रतिनिधि, प्लंबगिन की एक विशाल मात्रा का उपयोग कैंसर-कोशिकाओं को बढ़ाने वाले कैंसर को रोकने के लिए किया जाता है।

कुटकी

पिक्रोसाइड्स कुटकी का एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है जो कैंसर के लिए एक थेरेपी के रूप में और कैंसर ट्यूमर दमन के लिए एक प्राथमिक तंत्र के रूप में उपयोग किया जाता है।

कंघी

कंघी में, पॉलीफेनोलिक यौगिकों का उपयोग संवेदनशीलता के रूप में किया जाता है जो अधिकतम कैंसर कोशिकाओं को प्रभावित करने का प्रभावी तरीका है।

हल्दी

हल्दी एक रासायनिक यौगिक का उत्पादन करता है जिसे करक्यूमिन कहा जाता है जो हल्दी में कुशलता से निहित होता है। यह अधिकांश कैंसर कोशिकाओं से लड़ सकता है और कैंसर कोशिकाओं की अधिकतम वृद्धि को रोकने में मदद करता है।

गूलर छाल

गूलर छाल के फाइटोकेमिकल तत्वों के एकमात्र या अधिक अर्क में कोशिका वृद्धि को रोकने के लिए एक संभावित एंटी कैंसर यौगिक होता है क्योंकि इसमें कैंसर के अवरोधन के लिए साइटोटॉक्सिसिटी और कैंसर विरोधी दोनों गतिविधियां होती हैं।

सहदेवी

सहदेवी गुणों जैसे कि सिडा एक्यूटा, सिडा कॉर्डिफ़ोलिया, सिडा रंबिफोलिया, उरेना लोबाटा का कैंसर उपचारों में दृढ़ता से उपयोग किया जाता है।

शिलाजीत

न्यूरोप्रोटेक्टिव एक विशेष प्रकार का शिलाजीत है जो शरीर की कैंसर कोशिकाओं की संपूर्ण तीक्ष्णता को कम करने के लिए सूक्ष्मता से इसे रोकता है।

आंवला हरा

आंवला हरा के फाइटोकेमिकल्स के बड़े हिस्से साइटोटोक्सिक से नियोप्लास्टिक कोशिकाओं (गैलिक एसिड, पेंटाग्लॉइलग्लुकोकस, इलैजिक एसिड, पायरोगॉल, क्वेरसेटिन और केम्पफेरोल) में पाए जाते हैं। सभी संभावना में, आंवला के कैंसर की रोकथाम के लिए ये सभी जिम्मेदार तत्व हैं।

शतावरी

शतावरी के घटक रेसमोफ्यूरन ट्यूमर की आवृत्ति को रोकता है और कैंसर कोशिकाओं को इसके एंटी कैंसर घटक के कारण कम करता है।

घी

घी में रखा एक एंटीऑक्सीडेंट गुण एक मजबूत यौगिक है जिसे संयुग्मित लिनोलिक एसिड (सीएलए) के रूप में जाना जाता है। इस लाभप्रद एंटी कैंसर तत्व कोशिकाओं को आत्म-विनाश (एक दृष्टिकोण एपोप्टोसिस के रूप में स्वीकार किया) तक ले जाता है।

गोखरू

इसमें स्टेरॉइडल सैपोनिन होते हैं, जिन्हें टेरेस्ट्रोन्स ए -1 ई, फ्लेवोनोइड ग्लाइकोसाइड्स और फ़्यूरोस्टोनॉल के रूप में एंटी-कैंसर तत्वों के रूप में जाना जाता है। अल्कलॉइड के रूप में पहचाने जाने वाले गोखरू में नोहरमैन व हरमन में ऐसे तत्व होते हैं जो सर्वोत्कृष्ट हैं।

मुलेठी

लाइसोक्लेकोन-ए, अधिकांश सेल उपभेदों में एंटीट्यूमर होता है, जो एक दवा प्रतिरोधी प्रोटीन, मुलेठी जड़ से प्राप्त पदार्थ, बीसीएल -2 की सीमा को कम करता है।

गोजला

हम अपने गोमूत्र चिकित्सा में गोजला का उपयोग करते हैं, मूल रूप से इसका मतलब है कि हमारी दवा में मुख्य घटक गोमूत्र अर्क है। यह अर्क गाय की देसी नस्लों के मूत्र से बना है। गोजला के अपने फायदे हैं क्योंकि यह किसी भी प्रकार के संदूषण की संभावना से परे है। इसकी गुणवत्ता उच्च है एवं प्रचुर मात्रा में है। जब गोजला आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों के साथ मिलाया जाता है तो यह किसी भी बीमारी के इलाज के लिए अधिक प्रभावी हो जाता है और विशेष बीमारियों में अनुकूल परिणाम देता है। इस अर्क का अत्यधिक परीक्षण किया गया है और इसलिए यह अधिक विश्वसनीय और लाभदायक भी है।

जीवन की गुणवत्ता

गोमूत्र के साथ किया गया उपचार अच्छा स्वास्थ्य लाता है और एक क्रम में शरीर के दोषों में संतुलन बनाए रखता है। आज हमारी दवा के अंतिम परिणाम के रूप में मनुष्य लगातार अपने स्वास्थ्य को सुधार रहे हैं। यह उनके दिन-प्रतिदिन के जीवन की स्थिति में सुधार करता है। गोमूत्र के साथ-साथ आयुर्वेदिक दवाएं कई प्रकार की प्रतिक्रियाओं को सीमित करने के लिए एक पूरक उपाय के रूप में काम कर सकती हैं, जो भारी खुराक, मानसिक दबाव, विकिरण और कीमोथेरपी के उपयोग से आती हैं। हम मनुष्यों को सूचित करते हैं कि यदि कोई रोगी है तो उस विकार के साथ एक आनंदमय और चिंता मुक्त जीवन कैसे जिया जाए। हमारे उपाय करने के बाद हजारों मनुष्य एक संतुलित जीवन शैली जीते हैं और यह हमारे लिए एक बड़ी उपलब्धि है कि हम उन्हें एक जीवन प्रदान करें जो वे अपने सपने में देखते हैं।

 जटिलता निवारण

आयुर्वेद में, गोमूत्र का एक विशेष स्थान है जो किडनी का किडनी का कैंसर जैसी भयानक बीमारियों के लिए भी सहायक है। हमारे वर्षों के प्रतिबद्ध कार्य यह साबित करते हैं कि हमारी हर्बल दवाओं के साथ, किडनी का किडनी का कैंसर के कुछ लक्षण लगभग गायब हो जाते हैं। पीड़ित हमें बताते हैं कि वे कैंसर के दर्द में एक बड़ी राहत महसूस करते हैं, शरीर में हार्मोनल और रासायनिक परिवर्तनों को नियंत्रित करते हैं, शरीर के अन्य अंगों या आस-पास फैलने के लिए कैंसर कोशिकाओं के बढ़ने की गति को धीमा करते हैं, रोगी की प्रतिरक्षा प्रणाली में सुधार करते हैं जो इसके अनुकूल काम करता है अन्य कैंसर जटिलताओं, मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र से संबंधित समस्याओं को नियंत्रित करते हैं।

जीवन प्रत्याशा

अगर हम जीवन प्रत्याशा के बारे में बात करते हैं, तो गोमूत्र चिकित्सा अपने आप में बहुत आशावाद है। कोई भी विकार, चाहे वो मामूली हो या गंभीर, मानव शरीर पर बुरा प्रभाव डालता है और जीवन में वर्षों तक बना रहता है। रोग की पहचान होने पर जीवन प्रत्याशा कम होने लगती है, लेकिन गोमूत्र उपचार के साथ नहीं। न केवल हमारी प्राचीन चिकित्सा बीमारी को दूर करती है, बल्कि यह मनुष्य के जीवन को उसके शरीर में किसी भी दूषित पदार्थों को छोड़े बिना बढ़ाती है और यही हमारा अंतिम उद्देश्य है।

दवा निर्भरता को कम करना

"सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद् दुःख भाग्भवेत्", जिसका अर्थ है सबको सुखी बनाना, बीमारी से छुटकारा दिलाना, सबको सत्य देखने देना, किसी को भी पीड़ा का अनुभव न होने देना। इस वाक्य के बाद, हम चाहते हैं कि हमारा समाज ऐसा ही हो। हमारी चिकित्सा विश्वसनीय उपचार प्रदान करके, जीवन प्रत्याशा में सुधार और प्रभावित आबादी में दवा की निर्भरता को कम करके इस लक्ष्य को प्राप्त करती है। आज की दुनिया में, हमारी चिकित्सा में अन्य उपलब्ध चिकित्सा विकल्पों की तुलना में अधिक फायदे और शून्य नुकसान हैं।

पुनरावृत्ति की संभावना को कम करना

व्यापक चिकित्सा अभ्यास के विपरीत, हम रोग और तत्वों के मूल उद्देश्य पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो इस पद्धति का उपयोग करके केवल बीमारी के प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय बीमारी की पुनरावृत्ति की संभावनाओं में सुधार कर सकते हैं, हम कुशलता से पुनरावृत्ति दर को कम रहे हैं और मानव जीवन के लिए एक नया रास्ता दे रहे हैं , जो कि उन्हें भावनात्मक और शारीरिक रूप से उनके जीवन को बेहतर तरीके से जीने का एक तरीका बताते है।

किडनी के कैंसर के कारण

किडनी के कैंसर को प्रभावित करने वाले कुछ जोखिम कारक और कारण इस प्रकार से है -

  • मोटापा 

मोटापा शरीर में अत्यधिक वसा का कारण बनता है, जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कम करता है और हार्मोन और कोशिकाओं के कामकाज को भी प्रभावित करता है, जिससे किडनी में असामान्य कोशिकाएं बढ़ती हैं और इस तरह के  कैंसर के जोखिम को बढाती हैं।

  • मधुमेह 

रक्त में बहुत अधिक शर्करा की स्थिति  को मधुमेह के नाम से जाना जाता है जिससे छोटी रक्त वाहिकाओं में क्षति के कारण मधुमेह से पीड़ित व्यक्ति के गुर्दे को नुकसान होने का जोखिम रहता है जो गुर्दे के कैंसर के खतरे को भी अत्यधिक कर सकते है I 

  • आनुवंशिक असमानताएं 

ख़राब जीन्स के कारण परिवार के सदस्यों में किडनी के कैंसर का खतरा कई अधिक होता है I ये ख़राब जीन्स उस समय असामान्य तरीके से काम करना शुरु हो जाती है जब डीएनए में किसी तरह का कोई परिवर्तन होता है I अतः परिवार के किसी भी सदस्य के किडनी कैंसर से ग्रसित होने पर यह संभव है की दूसरे सदस्य के गुर्दे में होने वाले कैंसर का कारण आनुवांशिक हो I

  • धूम्रपान 

इस तरह की गंभीर बीमारी के होने का एक कारण लोगों के द्वारा असीमित मात्रा में धूम्रपान करना हो सकता है l सिगरेट उन हानिकारक रसायनों से मिलकर बना होता है जिसमे कई कैंसर जनित तत्वों का मिश्रण होता है l इंसान जब धूम्रपान करता है तो उससे निकलने वाले धुएं में उपस्थित ये रसायन उनके शरीर के अंदर तक पहुंचता है जिससे शरीर की न सिर्फ रोग प्रतिरोधक क्षमता धीरे धीरे घटने लगती है बल्कि शरीर में स्थित कोशिकाएँ भी इन रसायनों के संपर्क में आने के बाद ओर अधिक सक्रिय होने लगती हैं l

  • पुरानी गुर्दे की बीमारी  

वे व्यक्ति जो गुर्दे की पुरानी बीमारी से ग्रसित हैं अथवा जो व्यक्ति गुर्दे की विफलता के चलते लम्बे समय से अपना डायलासिस करवा रहे हो अर्थात बाहरी उपकरणों के द्वारा जिन्हें अपना रक्त बार बार फ़िल्टर करवाना पड़ रहा हो ऐसे व्यक्ति को किडनी कैंसर होने का खतरा ज्यादा रहता है I

  • उम्र 

अक्सर अधिक उम्र के लोगों को छोटी उम्र के लोगों की तुलना में किडनी का कैंसर होने का जोखिम अधिक रहता है I प्रायः वे व्यक्ति जिनकी उम्र साठ साल या उससे अधिक होती है ऐसे व्यक्तियों को किडनी का कैंसर होने का खतरा बना रहता है I

  • उच्च रक्तचाप 

जिन व्यक्तियों को उच्च रक्तचाप की समस्या रहती है उनकी किडनी अपना कार्य ठीक प्रकार से नहीं कर पाती है I व्यक्ति के उच्च रक्तचाप की वजह से उसकी किडनी की रक्त वाहिकाएं या तो बहुत अधिक संकरी या फिर बहुत अधिक मोटी हो जाती है जिस कारण से किडनी खून में से अपशिष्ट उत्पादों को बाहर निकालने में असमर्थ होने लगती है I प्रायः उनकी गुर्दे की कोशिकाओं में गाँठ बनने लग जाती है जो वहां कैंसर को जन्म दे सकती है I

  • गुर्दे की पथरी 

गुर्दे की पथरी जिसे किडनी स्टोन भी कहा जाता है, गुर्दे की एक ऐसी बीमारी होती है जिसमे व्यक्ति की किडनी के अंदर छोटे और बड़े पत्थर समान पदार्थ बनने लग जाते   है I छोटी पथरिया मूत्र मार्ग से बाहर निकल जाती है परन्तु जब पथरी का आकर बड़ा होता है तो यह मूत्र वाहिनी में अवरोध उत्पन्न कर सकती है जिससे किडनी में कैंसर होने का खतरा हो सकता है I

 

किडनी के कैंसर के निवारण 

किडनी में होने वाले कैंसर से बचने के लिए एक व्यक्ति को निम्नलिखित उपाय करने  चाहिए -

  • व्यक्ति को अपनी धूम्रपान की आदत को छोड़ना चाहिए I
  • व्यक्ति को नियमित रूप से स्वस्थ, संतुलित तथा पौष्टिक आहार लेना चाहिए तथा इसी के साथ फल तथा सब्जियों का भरपूर मात्रा में सेवन करना चाहिए I
  • व्यक्ति को अपना वजन संतुलित रखना चाहिए तथा मोटापे को बढ़ने से रोका जाना चाहिए I
  • व्यक्ति को अपने दैनिक जीवन में व्यायाम, योग, कसरत आदि जैसी स्वास्थवर्धक गतिविधियों को अपनाना चाहिए I 
  • व्यक्ति को अपने रक्तचाप को सामान्य रखने का प्रयास करना चाहिए तथा उच्च रक्तचाप होने की स्थिति में उचित रूप से इसका इलाज कराया जाना चाहिए I
  • यदि कोई व्यक्ति मधुमेह की बीमारी से ग्रसित है तो उसे अपने शरीर हेतु शर्करा के स्तर को सामान्य रखने का ध्यान रखना चाहिए तथा स्तर को अत्यधिक बढ़ने से रोकना चाहिए I
  • बढ़ती उम्र में व्यक्ति को अपने शरीर का खास ख्याल रखना चाहिए तथा पौष्टिक व समृद्ध भोजन का सेवन करना चाहिए I

किडनी कैंसर के लक्षण 

इस कैंसर के शुरुआती दौर में प्रायः व्यक्ति को किसी तरह के लक्षणों का पता नहीं चलता है परन्तु जैसे जैसे कैंसर फैलता जाता है कई लक्षण उभर के आने लगते है I ये लक्षण है -

  • व्यक्ति के पेट में असामान्य गाँठ अथवा सूजन होने लगती है तथा पेट में दर्द रहने लगता है I
  • व्यक्ति के मूत्र से रक्त आने लगता है I
  • व्यक्ति की भूख में कमी होने लगती है I
  • व्यक्ति को शारीरिक कमज़ोरी व थकान महसूस होने लगती है I
  • बिना किसी कारण के व्यक्ति का वजन लगातार गिरने लगता है I  
  • व्यक्ति के रक्तचाप का स्तर उच्च रहने लगता है I  
  • व्यक्ति को सांस लेने में तकलीफ होने लगती है तथा उसकी सांस फूलने लगती  है I
  • व्यक्ति को अत्यधिक पसीना आने लगता है तथा शरीर का तापमान अधिक होने लगता है I
  • कमर अथवा पेट के निचले हिस्से में व्यक्ति को दर्द रहने लगता है I
  • व्यक्ति के पैरों की एडियो तथा पंजो में सूजन होने लगती है I
  • व्यक्ति के शरीर में रक्त की कमी अर्थात एनीमिया की बीमारी उत्पन्न होने लगती है I

 

किडनी के कैंसर के प्रकार 

किडनी कैंसर के प्रकारों में शामिल है -

  • रीनल सेल कार्सिनोमा (आरसीसी)

रीनल सेल कार्सिनोमा 90 प्रतिशत घातक किडनी ट्यूमर का कारण है I रीनल सेल कार्सिनोमा गुर्दे की नलियों के एक अस्तर में विकसित होता है जहां रक्त को फ़िल्टर करने का काम किया जाता है I किडनी के इस प्रकार के कैंसर में एक ही ट्यूमर द्रव्यमान के रूप में विकसित होता है I यह वयस्कों में सबसे आम प्रकार का किडनी कैंसर है I आरसीसी को हाइपरनेफ्रोमा, रीनल एडेनोकार्सिनोमा या रीनल या किडनी कैंसर भी कहा जाता है। 

  • युरोथेलियल सेल कार्सिनोमा 

किडनी कैंसर का यह प्रकार ट्रेडिशनल सेल कार्सिनोमा टीसीसी के नाम से भी जाना जाता है I यह एक प्रकार का कैंसर है जो आमतौर पर मूत्र प्रणाली में होता है I युरोथेलियल सेल कार्सिनोमा संक्रमणकालीन उपकला से उत्पन्न होता है I यह एक ऊतक है जो इन खोखले अंगों की आंतरिक सतह को अस्तर अर्थात लाइनिंग करता है। किडनी कैंसर के इस प्रकार की शुरुआत गुर्दे के पेल्विक क्षेत्र में होती है जहाँ मूत्र, मूत्र वाहिनी में प्रवेश करने से पहले जाता है I 

  • नेफ्रोबलास्टोमा

नेफ्रोबलास्टोमा जिसे विल्म्स का ट्यूमर भी कहा जाता है, गुर्दे के कैंसर वह प्रकार है जो आमतौर पर बच्चों में होता है और वयस्कों में बहुत कम देखने को मिलता है I इस कैंसर से पीड़ित ज्यादातर बच्चों की उम्र तीन से चार साल के बीच होती है। इस प्रकार के कैंसर में बच्चों को आमतौर पर केवल एक गुर्दे में ट्यूमर होता है और बहुत ही कम मामलों में दोनों किडनी में ट्यूमर बढ़ता है। नेफ्रोबलास्टोमा के सामान्य लक्षण में बच्चे के पेट में दर्द और पेट में एक गांठ की उपस्थिति रहती है। कई बच्चों को बुखार, एनीमिया या मूत्र में रक्त भी आता है I

  • रीनल सारकोमा

रीनल सारकोमा गुर्दे के दुर्लभ घातक ट्यूमर हैं, जो मेसेंकाईमल कोशिकाओं में शुरू होते हैं I यह ट्यूमर बच्चों और युवा वयस्कों में अधिक होता है तथा महिलाओं में पुरुषों की तुलना में अधिक होता है। किडनी कैंसर के सिर्फ एक प्रतिशत मामले में इस प्रकार के कैंसर देखने को मिलते है I

किडनी कैंसर के चरण 

कैंसर ट्यूमर विकसित होने के आधार पर किडनी कैंसर को चार चरणों में रखा गया है -

  • पहला चरण : कैंसर के पहले चरण में गुर्दे में उत्पन्न हुई गाँठ अधिक बढ़ती नहीं  है तथा सिर्फ गुर्दे तक ही सीमित रहती है I
  • दूसरा चरण : दूसरे चरण से अभिप्राय है की गुर्दे की ट्युमर बढ़ने लगी है तथा यह आसपास के ऊत्तकों में फैलना शुरु हो जाती है। 
  • तीसरा चरण : तीसरे चरण में इस कैंसर के ट्युमर का आकार अत्यधिक बढ़ चुका होता है तथा यह लिम्फ नोड्स में फ़ैल जाता है। 
  • चौथा चरण : कैंसर के इस अंतिम चरण में यह शरीर के अन्य हिस्सों जैसे लीवर,फेफड़ों, मस्तिष्क तथा हड्डियों में फैल जाता है। 

 

किडनी कैंसर की जटिलताये 

यदि व्यक्ति किडनी के कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से ग्रसित होता है तो उसे कई जटिल्ताओ का सामना कर पड़ सकता है -

 

  • इस कैंसर से पीड़ित व्यक्ति के गुर्दे क्षतिग्रस्त होने के कारण गुर्दे की विफलता का भय रहता है I
  • व्यक्ति को अन्य कैंसर जैसे फेफड़ों का कैंसर, हड्डियों का कैंसर आदि होने की भी संभावनाएं बनी रहती है I
  • व्यक्ति को शरीर में रक्त के थक्के जमने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है I
  • व्यक्ति शारीरिक रूप से बेहद कमजोर हो जाता है I
  • व्यक्ति की किडनी ख़राब हो सकती है जिससे व्यक्ति को डायलासिस तथा किडनी प्रत्यारोपण की जरूरत हो सकती है I
  • इस कैंसर के प्रभाव से व्यक्ति के दिल की विफलता का जोखिम अधिक बढ़ जाता है I

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